Jatia Bal Vihar inter college - Khurja

Jatia Bal Vihar inter college - Khurja school information

नासा ने मंगल ग्रह की दो अलग अलग तस्वीरें जारी की हैंस्कवेयर का कहना है कि इस पत्थर का नाम "पिनेकल रॉक" रखा गया है और हो ...
11/10/2014

नासा ने मंगल ग्रह की दो अलग अलग तस्वीरें जारी की हैं

स्कवेयर का कहना है कि इस पत्थर का नाम "पिनेकल रॉक" रखा गया है और हो सकता है कि जब रोवर वहां चहलकदमी कर रहा था, तो कहीं मुड़ते वक्त इसने वहां बिछी विशाल पत्थर की परत को तोड़ दिया और उससे छिटक कर यह सामने आ गया. हालांकि वैज्ञानिकों को वह गड्ढा नहीं मिल रहा है, जहां से यह पत्थर निकला होगा. अनुमानों का दौर चल रहा है, "हो सकता है कि यह रोवर के किसी हिस्से से छिपा हो." अब रोवर को हिला डुला कर उस गड्ढे की तलाश की कोशिश हो रही है. लेकिन इसका रंग ऐसा क्यों है, स्कवेयर कहते हैं कि मानव आंखें ऐसी सतह को देख रही हैं, जो पहले कभी नहीं देखी गई, "ऐसा लगता है कि सामने आने से पहले यह पलट गया है. अगर ऐसा हुआ है, तो हम सिर्फ सतह देख रहे हैं. यानी पत्थर के अंदर का हिस्सा. ऐसा हिस्सा, जिसने करोड़ों साल से बाहरी वातावरण को नहीं देखा होगा." इस पत्थर में सल्फर, मैगनीशियम और मैगनीज दिख रहा है. अब इसे नापने का काम चल रहा है.

मंगल ग्रह की हर छोटी बड़ी चीज कौतूहल पैदा करती है. हाल के दिनों में मनुष्य इस लाल ग्रह के काफी पास पहुंचा है और इस वजह से भी कौतूहल बढ़ता है. भारत ने पिछले साल एक मंगलयान इस ग्रह की तरफ भेजा है, जो इस साल सितंबर तक वहां पहुंच जाएगा.

मंगल का अनजाना पत्थरलाल ग्रह पर अचानक एक पत्थर आ गया है, जिसने वैज्ञानिकों को परेशान कर   दिया है. लग रहा है कि दो ब्रेड...
11/10/2014

मंगल का अनजाना पत्थर

लाल ग्रह पर अचानक एक पत्थर आ गया है, जिसने वैज्ञानिकों को परेशान कर दिया है. लग रहा है कि दो ब्रेड के बीच किसी ने जेली लगा रखी हो. यह पत्थर पहले मंगल ग्रह पर नहीं था. अब पता लगाने की कोशिश हो रही है कि यह आया कैसे. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने 12 दिनों के अंतर पर एक ही जगह की दो तस्वीरें लीं. पहली तस्वीर में यह पत्थर नहीं दिख रहा था. दूसरी में यह साफ साफ दिख रहा है. तस्वीरें नासा के रोवर ने ली, जो करीब एक दशक से काम कर रहा है.

26 दिसंबर, 2013 की तस्वीर में इसका अता पता नहीं, जबकि आठ जनवरी, 2014 को यह दिख रहा है. मंगल ग्रह के रोवरों की जांच करने वाले स्टीव स्कवेयर का कहना है, "यह जेली लगे ब्रेडों की तरह दिख रहा है. बाहर से सफेद, अंदर से लाल." उन्होंने साफ किया कि यह कोई नर्म चीज नहीं है, "हमने अपने माइक्रोस्कोप से देखा है. यह पत्थर ही है." लेकिन यह ऐसा पत्थर है, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया था.

सौर तूफान की खबरों के बीच देखिए सूरज की एक से एक तस्वीरें, सिर्फ पीले ही नहीं नीले और हरे रंग में भी.  सोहो से ली गई सूर...
10/10/2014

सौर तूफान की खबरों के बीच देखिए सूरज की एक से एक तस्वीरें, सिर्फ पीले ही नहीं नीले और हरे रंग में भी. सोहो से ली गई सूरज की इस तस्वीर में भी देखा जा सकता है कि कैसी चमकदार रोशनी सूरज से फूट रही है.

विश्व धरोहर: हाजिया सोफियाआधुनिक तुर्की की नींव रखने वाले मुस्तफा केमाल अतातुर्क ने 1934 में इस्तांबुल की इस मशहूर इमारत...
08/10/2014

विश्व धरोहर: हाजिया सोफिया
आधुनिक तुर्की की नींव रखने वाले मुस्तफा केमाल अतातुर्क ने 1934 में इस्तांबुल की इस मशहूर इमारत को संग्रहालय बना दिया. 1985 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया.

सुपर काम का कंप्यूटरजुक्वीन यूरोप का सबसे तेज सुपर कंप्यूटर है. एक सेकेंड में पांच हजार अरब गणना इसको बेशुमार तेजी देती ...
08/10/2014

सुपर काम का कंप्यूटर

जुक्वीन यूरोप का सबसे तेज सुपर कंप्यूटर है. एक सेकेंड में पांच हजार अरब गणना इसको बेशुमार तेजी देती है और विशालकाय परियोजनाओं के लिए इसके जरिए गणना की जा सकती है.

हवा से बनाएं पीने का पानी                                                                                               ...
01/10/2014

हवा से बनाएं पीने का पानी पुणे की कंपनी टैप इन एयर ने इस तकनीक से उन रसोइघरों में भी पेयजल उपलब्ध कराने की मशीन बनाने में काम शुरू कर दिया है जहां घरों में पीने का पानी ही उपलब्ध नहीं है. भारत के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा आयोजित सृजन भारत कार्यक्रम और प्रदर्शनी में भाग लेने आई इस कंपनी के प्रबंधक आनंद दाते ने समाचार एजेंसी यूनीवार्ता को बताया, "भारत में अमेरिकी तकनीक से दो तीन सालों से हवा से पानी बनाने का काम बड़े पैमाने पर चल रहा है पर रसोई घर में हवा से पानी बनाने की स्वदेशी तकनीक हमने देश में विकसित की है. इसके जरिए कोई भी शख्स अपने किचन में हवा से पेयजल बना सकता है."

कंपनी का कहना है कि वह दिसंबर के अंत तक इसकी छोटी मशीन बाजार में उतारने वाली है. दाते के मुताबिक अभी भारत में जिस अमेरिकी मशीन से हवा से पानी बनाया जा रहा है उसकी कीमत 15 लाख रुपये हैं. इसलिए यह मशीन दफतरों या कारपोरेट हाऊस में तो लगाई जा सकती है पर निजी इस्तेमाल के लिए महंगी है.

दाते का कहना है कि घरों में निजी इस्तेमाल के लिए कंपनी ने एक छोटी मशीन तैयार की है, जिसकी कीमत 55 हजार रुपये हैं. कंपनी के मुताबिक 15 लाख की मशीन से छह यूनिट बिजली खर्च कर प्रति घंटे 48 लीटर पानी हवा से बनाया जाता है जबकि छोटी मशीन से एक यूनिट बिजली खर्च कर प्रतिदिन 30 लीटर पानी हवा से बनाया जा सकता है.

रिसर्चरों के मुताबिक इस रिसर्च का लक्ष्य यह देखना था कि अन्य प्रजातियों में मानव दिमाग का कुछ हिस्सा लगाने पर उनकी प्रक्...
30/09/2014

रिसर्चरों के मुताबिक इस रिसर्च का लक्ष्य यह देखना था कि अन्य प्रजातियों में मानव दिमाग का कुछ हिस्सा लगाने पर उनकी प्रक्रिया पर कैसा असर पड़ता है. उन्होंने बताया कि इस तरह के प्रत्यारोपण के बाद चूहा अन्य चूहों के मुकाबले अपना खाना ढूंढने में ज्यादा चालाक पाया गया. उसके पास नए तरीकों की समझ देखी गई.

एक जीन के प्रभाव को अलग करके देखने पर क्रमिक विकास के बारे में भी काफी कुछ पता चलता है कि इंसान में कुछ बेहद अनूठी खूबियां कैसे आईं. जिस जीन को प्रत्यारोपित किया गया वह बोलचाल और भाषा से संबंधित है, इसे फॉक्सपी2 कहते हैं. जिस चूहे में ये जीन डाला गया उसमें जटिल न्यूरॉन पैदा हुए और ज्यादा क्षमतावान दिमाग पाया गया. इसके बाद मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट के रिसर्चरों ने चूहे को एक भूलभुलैया वाले रास्ते से चॉकलेट ढूंढने की ट्रेनिंग दी. इंसानी जीन वाले चूहे ने इस काम को 8 दिनों में सीख लिया जबकि आम चूहे को इसमें 11 दिन लग गए.

इसके बाद वैज्ञानिकों ने कमरे से उन तमाम चीजों को निकाल दिया जिनसे रास्ते की पहचान होती हो. अब चूहे रास्ता समझने के लिए सिर्फ फर्श की संरचना पर ही निर्भर थे. इसके विपरीत एक टेस्ट यूं भी किया गया कि कमरे की चीजें वहीं रहीं लेकिन टाइल्स निकाल दी गई. इन दोनों प्रयोगों में आम चूहों को मानव जीन वाले चूहों जितना ही सक्षम पाया गया. यानि नतीजा यह निकला कि उनको सिखाने में जो तकनीक इस्तेमाल की गई है वे सिर्फ उसी के इस्तेमाल होने पर ज्यादा सक्षम दिखाई देते हैं.

मानव दिमाग का यह जीन ज्ञान संबंधी क्षमता को बढ़ाता है. यह जीन सीखी हुई चीजों को याद दिलाने में मदद करता है. जबकि बगैर टाइल या बगैर सामान के फर्श पर खाना ढूंढना उसे नहीं सिखाया गया था इसलिए उसे वह याद भी नहीं था. लेकिन दिमाग सीखी हुई चीजों को याददाश्त से दोबारा करने और बेख्याली में कोई काम करने के बीच अदला बदली करता रहता है. जैसे कोई छोटा बच्चा जब कोई नए शब्द सुनता है तो उन्हें दोहराता है लेकिन इसी बीच वह बेख्याली में अन्य पहले से याद शब्द भी बोलने लगता है. इस रिसर्च का यह भी अहम हिस्सा है कि दिमाग में ऐसा कैसे होता है.

एसएफ/एएम (रॉयटर्स)

50 रुपए से शुरू किया था बिजनस और आज है करोड़ के मालिक, जानिए कैसे?                                                      ...
24/09/2014

50 रुपए से शुरू किया था बिजनस और आज है करोड़ के मालिक, जानिए कैसे? कोलकाता: एक शख्स ने मात्र 50 रुपए से शुरू किए गए बिजनस से करीब 40 करोड़ रुपए कमाए। दरअसल अभिषेक रुंगटा कोलकाता की बिजनस फैमिली से संबंध रखते हैं। बिजनस शुरू करने के लिए उन्होंने अपनी फैमिली से 46,000 रुपए का लोन लिया। इसमें से 30,000 उन्होंने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को दिए। बाकी पैसे से मॉडम खरीदा।

दुर्भाग्यवश सर्विस प्रोवाइडर बिजनस बंद कर वह उनके पैसे लेकर फरार हो गया। हालांकि इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। और फिर उन्होंने एक नए बिजनस की शुरुआत की। उन्होंने टेक एक्सपो में जाना शुरू कर दिया, जिससे वह लोगों के साथ संपर्क बना सकें। इसलिए उन्होंने ऐसे ही एक एक्सपो में किराए पर स्टॉल लेने का फैसला लिया।

एक स्टॉल को तीन दिन किराए पर लेने का खर्च 6000 रुपए था। उनके पास उतने पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने फैसला किया कि वह इस स्टॉल का छोटा सा हिस्सा लेंगे और बाकी का एरिया किसी दूसरे व्यक्ति को देंगे, जो उसमें मॉडम बेचेगा। उन्होंने वेबसाइट डिजाइनिंग की डवरटाइजिंग हैंडबिल्स से करने का फैसला किया। इसकी कॉस्ट 50 रुपए पड़ी। कंपनी का नाम भी वहीं पर ही तय हुआ। इस तरह इंडस नेट टेक्नॉलजी की शुरुआत हुई।

एक्सपो में उनके अलावा एक और कंपनी वेबसाइट डिजाइनिंग के लिए आई थी, लेकिन उसकी सर्विसेज काफी महंगी थी। इसलिए ज्यादा लोग उनके स्टॉल पर आ रहे थे। तीन दिन के एक्सपो में मुझे 20,000 रुपए के 2 प्रोजेक्ट मिल चुके थे। दोनों क्लाइंट ने 50 पर्सेंट अडवांस पेमेंट किया। उन्होंने उस कंपनी को इस बात पर भी राजी कर लिया कि वह तीन महीने के क्रेडिट पर उन्हें भारत में सर्विस प्रोवाइड करने का मौका दे। नई सर्विस ने उनका बिजनस बढ़ा दिया। 1997-98 के अंत तक फर्म का टर्नओवर 1 लाख रुपये तक पहुंच गया था। इसके बाद उन्होंने एंप्लॉयीज को हायर करना शुरू किया।

कोलकाता के डलहौजी स्क्वेयर में उन्होंने ऑफिस के लिए छोटी सी जगह किराए पर ली। इसके बाद उन्होंने अमेरिका से एक साल का मल्टीमीडिया प्रोग्राम करने का प्लान किया। जब वह 2000 में वापस लौटे तो देखा कि एयरपोर्ट के बाहर काफी संख्या में डॉटकॉम कंपनियों के होर्डिंग्स लगे थे। उनके आने के बाद कई महीने तक उनकी फर्म ने कोई नया बिजनस जेनरेट नहीं किया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया साइट्स के जरिये बिजनस को दुनिया भर में बढ़ाने की कोशिश शुरू की। साल 2000 के अंत तक फिर से उनके पास काम आना शुरू हो गया। 2002 तक कंपनी का टर्नओवर 15 लाख से ज्यादा हो गया था।

2007 में यह बढ़कर लगभग 6 करोड़ हो गया। इसी साल उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग डिवीजन शुरू की। आज वह डिजिटिल मार्केटिंग, वेब एप्लिकेशन सहित कई सर्विसेज दे रहे हैं। पिछले साल कंपनी का टर्नओवर 40 करोड़ तक पहुंच गया। इस समय कंपनी के सर्विस स्पेक्ट्रम में 200 से ज्यादा क्लाइंट्स हैं और 500 लोग कंपनी के लिए काम कर रहे हैं।

गिनीज बुक के नए रिकॉर्डअजीबो गरीब खेल के रिकॉर्ड, कुत्तों का नाच, बिल्लियों की कूद, म्यूजिक सुपर स्टार. गिनीज बुक ऑफ वर्...
21/09/2014

गिनीज बुक के नए रिकॉर्ड

अजीबो गरीब खेल के रिकॉर्ड, कुत्तों का नाच, बिल्लियों की कूद, म्यूजिक सुपर स्टार. गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड 2015 की सूची आ चुकी है. गिनीज बुक का यह 60वां साल है.

नेपाल भारत में पनबिजली बनाने का समझौताभारत और नेपाल ने बिजली की किल्लत दूर करने की दिशा में अहम पहल की है. दोनों देशों न...
20/09/2014

नेपाल भारत में पनबिजली बनाने का समझौता

भारत और नेपाल ने बिजली की किल्लत दूर करने की दिशा में अहम पहल की है. दोनों देशों ने भारतीय कंपनी जीएमआर द्वारा नेपाल में सबसे बड़ा पनबिजली घर बनाने के एक समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं. .....

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