23/08/2026
मैं सोच रहा था JSSC CGL मुद्दे पर कुछ न बोलूँ क्योंकि बहुत सारे चयनित और अचयनित हमारे ही अपने ही हैं..पर ये jssc cgl के ताम झाम देख कर रहा नहीं गया आइए थोड़ा समझने की कोशिश करते हैं
JSSC CGL: बात चयनित और अनसलेक्टेड की नहीं, न्याय और व्यवस्था की है
नोलेज हब के शिक्षक होने के नाते मैं कोशिश करूँगा कि JSSC CGL के इस पूरे मुद्दे पर संतुलित और साफ-साफ बात आपके सामने रखूँ, ताकि चयनित और अनसलेक्टेड—दोनों पक्ष अपनी बात को समझ सकें।
सबसे पहले एक बात बिल्कुल साफ है—हर चयनित अभ्यर्थी गलत नहीं है और हर अनसलेक्टेड अभ्यर्थी कमजोर नहीं है।
अब तक सरकार की तरफ से यही कहा जाता रहा कि पेपर लीक नहीं हुआ, सब अफवाह है और मामला धन उगाही व धोखाधड़ी का है। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जुड़े लोगों और कथित सिंडिकेट को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। TDPL एजेंसी के मैनेजर अभय तिवारी को लेकर भी कई गंभीर आरोप और जांच की बातें सामने आई हैं। यह जांच का विषय है, इसलिए अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
सवाल यह भी है कि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यार्थी पैसे देकर उतर रटने के लिए नेपाल जैसे अन्य जगहों पर गए थे, बहुतों को FREE में WhatsApp, Telegram या Call या दूसरे माध्यमों से उत्तर परीक्षा से पहले ही पहुँचे थे? अगर ऐसा हुआ है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए।
लेकिन इसी बीच सबसे दुखद बात क्या हो रही है?
विद्यार्थी ही विद्यार्थी के दुश्मन बन गए हैं।
जो चयनित है, उसके बारे में कहा जा रहा है—
“30-40 लाख देकर नौकरी लिया है।”
और जो चयनित नहीं हुआ, उसे कहा जा रहा है—
“तुम Paper-1 में ही फेल हो, तुम्हारी तैयारी ही कमजोर थी।”
दोनों तरह की बातें गलत हैं।
बहुत सारे चयनित अभ्यर्थियों ने दिन-रात मेहनत की है, अपनी काबिलियत और लगन से परीक्षा पास की है। उनका यह कहना बिल्कुल जायज है कि हमने मेहनत से नौकरी हासिल की है, हमारे साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच्चाई है कि हर अनसलेक्टेड अभ्यर्थी कमजोर या कम पढ़ने वाला नहीं होता। बहुत से अभ्यर्थियों ने अच्छे अंक हासिल किए, पूरी मेहनत की, फिर भी अगर परीक्षा व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी हुई और उसका असर उनके परिणाम पर पड़ा, तो उनके साथ भी न्याय होना चाहिए।
और एक बात चयनित साथियों से भी कहना चाहता हूँ—
Paper-1 में फेल होने वाला हर व्यक्ति आपसे कम बुद्धिमान नहीं है और चयन हो जाने का मतलब यह भी नहीं कि आप सबसे तेज और सबसे काबिल हैं।
नौकरी मिलना आपकी मेहनत की सफलता है, लेकिन उस सफलता से घमंड करने का लाइसेंस नहीं मिलता।
आज आप चयनित हैं, कल किसी दूसरी परीक्षा में कोई दूसरा विद्यार्थी आपसे आगे हो सकता है। इसलिए थोड़ा जमीन पर रहिए, थोड़ा विनम्र रहिए। अभी जिंदगी में बहुत कुछ सीखना बाकी है।
इसी तरह अनसलेक्टेड साथियों से भी कहना है—
हर चयनित व्यक्ति को भ्रष्ट, बिकाऊ या पैसे देकर नौकरी लेने वाला समझना भी गलत है।
किसी के खिलाफ ठोस सबूत है तो जांच हो, दोषी मिले तो कड़ी कार्रवाई हो। लेकिन बिना प्रमाण के हजारों मेहनती और ईमानदार चयनित अभ्यर्थियों को बदनाम करना भी न्याय नहीं है।
असली लड़ाई किससे होनी चाहिए?
एक विद्यार्थी की दूसरे विद्यार्थी से नहीं।
अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है, अगर सिस्टम में खामी रही है, अगर किसी एजेंसी या अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है, तो सवाल सिस्टम से पूछिए, जिम्मेदार लोगों से पूछिए, सरकार से पूछिए।
क्योंकि आज चयनित और अनसलेक्टेड आपस में लड़ रहे हैं, गाली दे रहे हैं, एक-दूसरे पर शक कर रहे हैं और इसी लड़ाई में असली मुद्दा पीछे छूटता जा रहा है।
याद रखिए—चयनित भी हमारा बच्चा है और अनसलेक्टेड भी हमारा बच्चा है।
किसी निर्दोष चयनित की नौकरी नहीं जानी चाहिए और किसी मेहनती अनसलेक्टेड के साथ अन्याय भी नहीं होना चाहिए।
दोषी है तो दोषी पकड़ा जाए।
निर्दोष है तो निर्दोष बचाया जाए।
जिसे मेहनत से नौकरी मिली है, उसकी मेहनत का सम्मान हो।
जिसके साथ गड़बड़ी हुई है, उसे न्याय मिले।
बस यही तो एक शिक्षक की मांग है।
इसलिए भावनाओं में आकर नहीं, सोच-समझकर बात रखिए।
एक-दूसरे से मत लड़िए—अन्याय और गलत व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाइए।
JSSC CGL की लड़ाई चयनित बनाम अनसलेक्टेड की नहीं है।
यह लड़ाई है—मेहनत, ईमानदारी और न्याय की।