28/01/2026
आज के ज़माने में भी… क्या महिलाएँ सच में आज़ाद हैं?
आज की महिलाएँ पढ़ी-लिखी हैं,
काम कर रही हैं,
अपने सपने पूरे करना चाहती हैं।
लेकिन फिर भी उनसे पूछा जाता है—
“शादी कब करोगी?”
“बच्चे कब होंगे?”
“इतनी देर क्यों हो गई?”
ऑफिस में आगे बढ़ें तो सवाल,
घर संभालें तो भी सवाल।
मजबूत बनें तो कहा जाता है—
“ज़्यादा बोलती है।”
चुप रहें तो—
“कमज़ोर है।”
आज भी एक महिला को
हर रिश्ते में खुद को साबित करना पड़ता है—
बेटी के रूप में,
पत्नी के रूप में,
माँ के रूप में,
और इंसान के रूप में।
सच ये है कि
महिलाओं को दया नहीं, सम्मान चाहिए।
इजाज़त नहीं, अपना चुनाव चाहिए।
महिला सशक्तिकरण सिर्फ़ शब्द नहीं,
बल्कि सोच और व्यवहार में बदलाव है।