NST Institute

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13/01/2023

स्तब्ध।आदरणीय चाचा जी को प्रभु श्रीचरणों में स्थान दे😭😭😭😭😭

15/08/2021

Happy independence day.

Photos from NST Institute's post 05/09/2020

Happy Teachers Day.

20/08/2020

आधुनिक सोच एवं निर्णय लेने की दृढ़ इच्छाशक्ति से इक्कीसवीं सदी के सशक्त भारत की नींव रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव गांधी जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि।

16/08/2020

*अटल बिहारी वाजपेयी जी के व्यक्तित्व से जुड़ी दिलचस्प कहानियां*
चमत्कारिक व्यक्तित्व

बात 1957 की है जब अटल ब‍िहारी वाजपेयी बलरामपुर लोकसभा सीट से 10 हजार वोटों से जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे. पिछली हार से सबक लेते हुए 1962 के आम चुनाव में कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी को हराने के लिए गांधीवादी शुभद्रा जोशी को उनके ख‍िलाफ मैदान में उतारा था. दोनों ही भारत छोड़ो आंदोलन का हिस्सा रहे थे, लेकिन विचारधारा के स्तर पर अलग थे.

पहली बार संसद पहुंचे युवा अटल का भाषण सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बेहद प्रभावित हुए. वे उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री मानते थे. वाजपेयी को बलरामपुर सीट से कांग्रेस की जीत के लि‍ए उन्होंने बड़ा खतरा माना. मतदाताओं पर अपना प्रभाव जमाने के लिए उन्होंने शुभद्रा जोशी के पक्ष में लोक्रप्रिय फिल्म अभ‍िनेता बलराज साहनी से चुनाव प्रचार कराया. नतीजतन, वाजपेयी चुनाव हार गए.

अटल बिहारी वाजपेयी अपनी हाजिर जवाबी से हमेशा सुर्खियों में रहते थे. एक बार जब संसद में इंदिरा गांधी ने चर्चा के दौरान वाजपेयी के बारे में कहा कि वो हिटलर की तरह भाषण देते हैं और हाथ लहरा-लहरा कर अपनी बात रखते हैं. इसका जवाब देते हुए बाद में अटल ने कहा कि 'इंदिरा जी, हाथ हिलाकर तो सभी भाषण देते हैं, क्या कभी आपने किसी को पैर हिलाकर भाषण देते हुए भी सुना है?' इंदिरा गांधी जैसी शख्सियत को ऐसा जवाब देने का साहस सिर्फ अटल ही दिखा सकते थे.

*1998 में पोखरण II*

यह बात हैं सन्न 1998 की जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे, पहली बार परमाणु परिक्षण सन्न 1995 में फेल होने के बाद वो अटल जी ही थे जिनके शासनकाल के दौरान भारत ने एक बार फिर से परमाणु परिक्षण किया और सन्न 1998 में भारत एक परमाणु संपन्न राष्ट्र बना.यह सम्पन्नता भारत को विश्व के सभी विकसित देशों की क़तर में लाकर खड़ा कर दिया. पोखरण में सफलतापूर्वक हुए इस टेस्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति का गुरुड़ भी चकनाचूर कर दिया था जो कभी नहीं चाहते थे की भारत एक परमाणु शक्ति बने.

खासकर ठंडई से तो उनका लगाव जगजाहिर है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर याद करते हैं कि जब वो नेता प्रतिपक्ष थे तो इंदौर से उज्जैन कार से आए. उज्जैन में अटलजी कहने लगे कि गोपाल मंदिर ले चलो.

गौर ने इस घटना का जिक्र करते हुए बताया, "अटल जी ने कहा तांगे में ले चलो कार में नहीं. कोई देख ना पाए. बंद तांगे होते हैं. कहने लगे भांग का घोंटा तीन गिलास ले आओ. दो गिलास मैं पीयूंगा और बादाम-किशमिश डाल दो. एक ग्लास तुम पीना. मस्त आदमी, बहुत बड़े दिल के आदमी. उनसे हंसी-मजाक कुछ भी कर सकते थे आप. इतना बड़ा आदमी आज हिन्दुस्तान में कोई नहीं है."
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15/08/2020

Happy independence day

12/08/2020

*सब औजार होने के बावजूद भी हमारे बुजुर्ग प्याज को फोड़ कर ही क्यों खाते थे?*
प्याज पिछले 5000 साल से भारत भर में व आजकल सारे विश्व में उगाया व खाया जाता है। दोस्तो प्याज के काटने पर जितनी तेजी से उस में पाये जाने वाले पदार्थ रासायनिक क्रिया करते हैं उतणी किसी अन्य खाद्य पदार्थ के नहीं करते। प्याज में सल्फर की मात्रा अधिक होती है अतः रासायनिक प्रक्रिया का जो अंतिम उत्पाद बणता है वो होता है सल्फ्युरिक अम्ल (H2SO4), यह अम्ल एक्वा रिजिया के बाद पाया जाने वाला सबसे शक्तिशाली अम्ल होता है जो सोने व प्लेटिनम को छोड़ किसी भी धातु के साथ क्रिया कर उसे नष्ट कर सकता है।
दूसरी बात प्याज की हर परत पर ऊपर व नीचे एक झिल्ली होती है यो कि अपाच्य होती है। वह झिल्ली फोड़णे से ही अलग हो पाती है, काटणे पर वह साथ में कट जाती है। इसलिए प्याज को किसी भी धातु से काटणा उचित नहीं है। खुद को आधुनिक दिखाने के लिए इसे काटकर नहीं फोड़ कर खाना चाहिए. आप भी आगे से ऐसा ही कीजिये।

सब औजार होने के बावजूद भी हमारे बुजुर्ग प्याज को फोड़ कर ही क्यों खाते थे
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दोस्तों क्या आपने कभी खुद से सवाल किया है कि सारे औजार होने के बावजूद हमारे बुजुर्ग प्याज को फोड़ कर ही क्यों खाते थे, काट कर क्यों नहीं खाते थे तो उसका उत्तर इस प्रकार है:-

प्याज पिछले 5000 साल से भारत भर में व आजकल सारे विश्व में उगाया व खाया जाता है। दोस्तो प्याज के काटने पर जितनी तेजी से उस में पाये जाने वाले पदार्थ रासायनिक क्रिया करते हैं उतणी किसी अन्य खाद्य पदार्थ के नहीं करते। प्याज में सल्फर की मात्रा अधिक होती है अतः रासायनिक प्रक्रिया का जो अंतिम उत्पाद बणता है वो होता है सल्फ्युरिक अम्ल (H2SO4), यह अम्ल एक्वा रिजिया के बाद पाया जाने वाला सबसे शक्तिशाली अम्ल होता है जो सोने व प्लेटिनम को छोड़ किसी भी धातु के साथ क्रिया कर उसे नष्ट कर सकता है।



दूसरी बात प्याज की हर परत पर ऊपर व नीचे एक झिल्ली होती है यो कि अपाच्य होती है। वह झिल्ली फोड़णे से ही अलग हो पाती है, काटणे पर वह साथ में कट जाती है। इसलिए प्याज को किसी भी धातु से काटणा उचित नहीं है। खुद को आधुनिक दिखाने के लिए इसे काटकर नहीं फोड़ कर खाना चाहिए. आप भी आगे से ऐसा ही कीजिये.


यह सल्फर युक्त पदार्थ गंठे (प्याज) की ऊपरी परतों में सबसे ज्यादा होता है तथा बीच में नाम मात्र का होता है। Wageningen विश्वविद्यालय, नीदरलैंड्स की खोज के अनुसार गंठे (प्याज) के बीच में पाये जाने वाला quercetin बहुत ही प्रभावी ऐंटिऑक्सिडेंट है जो कि जवानी को बरकरार रखता है तथा विटामिन ई का मुख्य स्त्रोत है। वैसे तो यह पदार्थ चाय व सेब में भी पाया जाता है लेकिन गंठे (प्याज) के बीच में पाया जाने वाला पदार्थ चाय के पदार्थ से दो गुणा व सेब में पाये जाने वाले इसी पदार्थ से तीन गुणा जल्दी हजम होता है। 100 ग्राम गंठे (प्याज) में यह 22.40 से 51.82 मिलीग्राम तक होता है।
Bern विश्वविद्यालय स्वीट्जरलैंड ने चूहों को प्रति दिन एक ग्राम प्याज खिलाया तो उन की हड्डी 17% तक मजबूत हो गई। प्याज का बीच वाला हिस्सा पेट का अल्सर व सभी प्रकार के हृदय रोगों को ठीक करती है। गंठे (प्याज) व इसके बीच के हिस्से पर एक पूरी किताब लिखी जा सकती है लेकिन आज के लिए बस इतणा ही।

तो दोस्तों प्याज को कभी भी काटकर सलाद बनाकर ना खाएं. उसको मुक्का मारकर, या किसी चीज से फोड़कर खाए इससे आपको काफी हेल्थ बेनिफिट होंगे और आंसू भी नहीं आएंगे. हमारे बुजुर्ग प्याज को फोड़कर ही खाते थे या फिर खेत से डायरेक्ट हरे पत्ते वाला प्याज लेते थे और बिना फोड़े ही डायरेक्ट खाते थे, जैसे आप सेब और अमरूद खाते थे.
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11/08/2020

Happy janmmastmi

08/08/2020
03/08/2020

एक लोक श्रुत आस्था है कि दूब(घास)और माता सीता दोनों की उत्पत्ति पृथ्वी से है,इसलिए दोनों सहोदर है,।जब माता सीता को रावण लंका ले गया और उनके ऊपर कुदृष्टि डाली तो माता सीता ने दूब को अपने और रावण के बीच ईश्वर को साक्षी मान कर रख दिया।एक भाई के रहते कोई उसकी बहन पर गलत नियत कैसे रख सकता।
भाई और बहन के पवित्र रिश्ते आस्था का प्रतीक रक्षा बंधन की आप सब को हार्दिक बधाई।

01/08/2020

*बाल गंगाधर तिलक जी को "लोकमान्य" की उपाधि किसने दी?*
आइए जानें.....
बाल गंगाधर तिलक एक भारतीय समाज सुधारक और स्वतंत्रता के कार्यकर्ता थे. आधुनिक भारत के प्रधान आर्किटेक्ट में से एक थे. उनके अनुयायियों ने उन्हें 'लोकमान्य' की उपाधि दी जिसका अर्थ है जो लोगों द्वारा प्रतिष्ठित है. अखबार केसरी में छपने वाले उनके लेखों की वजह से उन्हें कई बार जेल भेजा गया.
बाल गंगाधर तिलक का जन्म महाराष्ट्र के कोंकण प्रदेश (रत्नागिरि) के चिक्कन गांव में 23 जुलाई 1856 को हुआ था। इनके पिता गंगाधर रामचंद्र तिलक एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे।

अपने परिश्रम के बल पर शाला के मेधावी छात्रों में बाल गंगाधर तिलक की गिनती होती थी। वे पढ़ने के साथ-साथ प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम भी करते थे, अतः उनका शरीर स्वस्थ और पुष्ट था।

सन्‌ 1879 में उन्होंने बी.ए. तथा कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की। घरवाले और उनके मित्र संबंधी यह आशा कर रहे थे कि तिलक वकालत कर धन कमाएंगे और वंश के गौरव को बढ़ाएंगे, परंतु तिलक ने प्रारंभ से ही जनता की सेवा का व्रत धारण कर लिया था।
परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने अपनी सेवाएं पूर्ण रूप से एक शिक्षण संस्था के निर्माण को दे दीं। सन्‌ 1880 में न्यू इंग्लिश स्कूल और कुछ साल बाद फर्ग्युसन कॉलेज की स्थापना की।

वे हिन्दुस्तान के एक प्रमुख नेता, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता थे। इन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश राज के दौरान पूर्ण स्वराज की मांग उठाई।

तिलक का यह कथन कि 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा' बहुत प्रसिद्ध हुआ। लोग उन्हें आदर से 'लोकमान्य' नाम से पुकार कर सम्मानित करते थे। उन्हें हिन्दू राष्ट्रवाद का पिता भी कहा जाता है।
बाल गंगाधर तिलक एक राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक और वकील थे। वो अंग्रेजी शिक्षा के घोर आलोचक थे, वो मानते थे कि अंग्रेजी शिक्षा भारतीय सभ्यता का अनादर करती है। पहले स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान स्वराज की मांग उठाई।

इसके अलावा लोकमान्य तिलक ने अंग्रेजी भाषा में मराठा दर्पण और मराठी भाषा में केसरी दो दैनिक समाचार पत्र शुरू किए। केसरी में छपने वाले उनके लेखों की वजह से उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा था। बाल गंगाधर तिलक अपने पत्रों के माध्यम से अंग्रेजी हुकुमत की काफी आलोचना करते थे।
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01/08/2020

*आज से क्या खुलेगा क्या बंद रहेगा ?* 3.0
गृह मंत्रालय ने देश में अनलॉक 3 के लिए दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं. इनके तहत COVID-19 कंटेनमेंट जोन्स के बाहर कई अन्य गतिविधियों को इजाजत दे दी गई है. वहीं कंटेनमेंट जोन्स में लॉकडाउन 31 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया गया है. नए दिशानिर्देशों के तहत देश में अनलॉक 3 में योगा इंस्टीट्यूट, जिम 5 अगस्त से खुल सकेंगे. इस बारे में स्वास्थ्य मंत्रालय SOP जारी करेगा.

हालांकि सिनेमा हॉल, स्विमिंग पूल, एंटरटेनमेंट पार्क, थिऐटर, बार, ऑडिटोरियम, मेट्रो, असेंबली हॉल 31 अगस्त तक बंद रहेंगे. इसके अलावा गृह मंत्रालय ने सोशल डिस्टेंसिंग बरकरार रखते हुए स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित करने को अनुमति दे दी है. अनलॉक 3 दिशानिर्देशों के तहत फिलहाल अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा वंदेभारत मिशन के अंतर्गत ही सीमित रहेगी.

स्कूल, कॉलेज 31 अगस्त तक बंद
रात में लोगों की आवाजाही पर से प्रतिबंध हटा लिया गया है. सामाजिक/राजनीतिक/खेलकूद संबंधी/मनोरंजन/शैक्षणिक/सांस्कृतिक/धार्मिक समारोह व अन्य भीड़भाड़ वाले आयोजनों को अभी भी अनुमति नहीं है. स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान भी 31 अगस्त तक बंद रहेंगे.
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