03/12/2025
“किताबें सिर्फ़ कहानियाँ नहीं, अनुभवों का आईना होती हैं… और मैं उसी आईने में अपने को तलाश रहा हूँ।
“गोदान—सिर्फ़ उपन्यास नहीं, भारतीय गाँव की आत्मा की आवाज़… इसे पढ़ते हुए मानो स्वयं होरी-धनिया बन जाते हैं।
"प्रेमचन्द" के द्वारा लिखा गया यह किताब मानो इस किरदारों से रुबरु करवाते है। इसमें एक किसान की एक कहानी जो सारी जिंदगी संघर्षों तथा कर्जदार बन कर बीत गई। यह किताब आजादी से पहली लिखी हुई है। आजादी से लेकर आजतक भी किसानों की वही स्थिति है। किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पाता है। सरकार किसानों की सहायता करती है,ये तो बस कहने की बात है।