18/11/2019
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जाने क्या है सबरीमाला के स, जजसे सुप्रीम क्ट न ने.....
बडी बेंच क् स ौंपा
Sabrimala temple ki kuch janneka chis...
सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर 2019 को के रल के सबरीमाला मंददर में मदहलाओं
के प्रवेश के फ़ै सले के दवरुद्ध दाद़िल की गई पुनदवटचार यादचका को पांच जजों
की बेंच ने सात जजों की बडी बेंच के पास भेज दी ह़ै. यह फ़ै सला बेंच ने 3:2 से
सुनाया ह़ै.
पुनदवटचार यादचकाएं सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई
वाली पांच जजों की बेंच में दायर की गई थीं. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई,
जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस एएम खानदवलकर ने के स बडी बेंच को
भेजने का फ़ै सला ददया. जस्टिस फली नरीमन तथा जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने
इसके स्टखलाफ फ़ै सला ददया....
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2019 में मंददर में मदहलाओं के प्रवेश को लेकर अपने
फ़ै सले पर पुनदवटचार यादचका की सुनवाई करने के बाद फ़ै सला सुरदित रख
दलया था. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंददर में मदहलाओं के प्रवेश
पर लगी पाबंदी हर्ा दी थी.
पुनदवटचार यादचका का दवरोध करते हुए के रल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा
दक मदहलाओं को रोकना दहन्दू धमट में अदनवायट नहीं ह़ै. सुप्रीम कोर्ट के फ़ै सले
के बाद सबरीमाला मंददर में के वल दो मदहलाएं दकसी तरह पहुंच पाई थीं.
हालांदक इन दो मदहलाओं के प्रवेश से के रल में व्यापक दवरोध प्रदशटन शुरू हो
गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने 28 दसतंबर 2018 को 4:1 के बहुमत से मंददर में मदहलाओं के
प्रवेश को मंजूरी दी थी. सबरीमाला फ़ै सले पर 56 पुनदवटचार समेत 65
यादचकाएं दायर की गई थीं. कोर्ट ने इन पर 06 फरवरी 2019 को फ़ै सला
सुरदित रख दलया था..........
*y .सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ै सले में मदहलाओं के प्रवेश को मंजूरी ददया था. कोर्ट ने
कहा था की दशकों पुरानी दहंदू धादमटक प्रथा ग़ैरकानूनी और असंव़ैधादनक थी.
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा था की धमटदनरपेिता का माहौल
कायम रखने हेतु कोर्ट को धादमटक अथों से जुडे मुद्ों को नहीं छे डना चादहए.
जस्टिस दीपक दमश्रा ने कहा था की शारीररक वजहों से मंददर आने से रोकना
ररवाज का जरूरी दहस्सा नहीं ह़ै. ये सोच पुरूष प्रधान दशाटता ह़ै. जस्टिस
डीवाई चंद्रचूड ने कहा था की मदहला को पीररयड्स के आ
#सबरीमाला मौंजिर में मजहलाओौं पर प्रजिबन्ध क्य्ौं?...
=}मदहलाओं को पीररयड्स के दौरान दहंदू मान्यता में अपदवत्र माना जाता ह़ै.
दजसके अक्रन मंददर में उनके प्रवेश पर रोक थी. कई मदहला वकीलों ने साल
2006 मेंलैंदगक समानता को आधार बनाकर मंददर में मदहलाओं के प्रवेश पर
प्रदतबंध को चुनौती देने वाली यादचका डाली थी. इस संबंध में उसके बाद कई
और यादचकाएं डाली गईं. केरल दहंदूप्लेसेस ऑफ पस्टिक वदशटप रूल्स,
1965 के दनयम 3(बी) को पांच मदहला वकीलों के समूह ने चुनौती दी थी. इस
दनयम में मदहलाओं को पीररयड्स वाले आयुवगट के दौरान मंददर में प्रवेश से
रोके जाने का प्रावधान ह़ै. ऐसे में मदहला वकीलों ने के रल हाईकोर्ट के बाद
न्याय हेतु सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खर्खर्ाया था.
#सबरीमाला कायनसजमजि का आर्प
=}सबरीमाला कायटसदमदत ने आरोप लगाया था दक सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयु की
मदहलाओं को मंददर में प्रवेश की अनुमदत देकर उनके रीदत-ररवाज तथा
परंपराओं को नष्ट दकया ह़ै. लोगों की मान्यता ह़ै दक 12वीं सदी के भगवान
अयप्पा ब्रह्मचारी हैं. दजस कारण से मंददर में 10 साल से 50 साल की
मदहलाओं का प्रवेश वदजटत दकया गया था.