10/05/2022
समय सबका आता हैं , बस संयम बनाये रखें :-
साल 2004 । दिनेश कार्तिक नामक युवा विकेटकीपर ने भारतीय क्रिकेट टीम ने अपना डेब्यू किया । उनका क्रिकेट जीवन परवान चढ़ रहा था और सन 2007 में अपनी बचपन की दोस्त निकिता वंजारा से शादी कर ली।
दिनेश और निकिता अपनी शादीशुदा जिंदगी में बड़े खुश थे । दिनेश रणजी ट्रॉफी में तमिलनाडु टीम की कप्तानी भी कर रहे थे । उनके खास दोस्त थे तमिलनाडु की टीम के ओपनर ,जो बाद में भारतीय टीम का हिस्सा भी बने , मुरली विजय ।
तो एक दिन निकिता की मुलाकात दिनेश कार्तिक के इसी साथी खिलाड़ी मुरली विजय से हुई । मुरली विजय को निकिता भा गयी। भोले भाले दिनेश कार्तिक इस बात को महसूस नहीं कर पाए। निकिता और मुरली के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी और कुछ ही समय में दोनों का अफेयर शुरू हो गया । दोनों खुलकर मिलने लगे। दिनेश कार्तिक के अलावा पूरी तमिलनाडु की टीम जानती थी की मुरली विजय अपने कप्तान दिनेश की पत्नी निकिता के साथ इश्क लड़ा रहे हैं ।
फिर आया वर्ष 2012 । निकिता प्रेगनेंट हो गई । लेकिन तभी उसने धमाका करते हुए का यह बच्चा मुरली विजय का है । दिनेश कार्तिक टूट गए । उन्होंने निकिता से तलाक ले लिया । तलाक के अगले ही दिन निकिता ने मुरली विजय से शादी कर ली । और महज 3 महीने बाद उन्हें बच्चा हो गया।
दिनेश कार्तिक डिप्रेशन में चले गए। वह मानसिक तौर पर बीमार रहने लगे । वह अपनी पत्नी और दोस्त मुरली के इस धोखे को असानी से भूला नहीं पा रहे थे। वे शराबी हो गए। सुबह से लेकर शाम तक शराब पीने लगे। वे देवदास बन गए। उन्हें भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया । रणजी ट्रॉफी में भी वे असफल हो रहे थे ।
तमिलनाडु की टीम की कप्तानी उनसे छीन ली गयी। और मुरली विजय को नया कप्तान बना दिया गया।असफलता का दौर यहीं नहीं थमा , उन्हें आईपीएल में भी टीम में नहीं खिलाया गया। उन्होंने जिम जाना भी छोड़ दिया । अंत में दिनेश इतना हताश हो गए कि आत्महत्या कर लेने तक की बात करने लगे।
तभी एक दिन जिम में उनके ट्रेनर उनके घर पहुंचे । उन्होंने दिनेश कार्तिक को बुरी अवस्था में पाया । उन्होंने कार्तिक को पकड़ा और सीधा जिम लेकर आ गए।कार्तिक ने मना किया लेकिन उनके ट्रेनर ने उनकी एक न सुनी ।
उसी जिम में भारतीय स्क्वैश की महिला चैंपियन दीपिका पल्लीकल भी आती थी । जब उन्होंने दिनेश कार्तिक की स्थिति देखी तो ट्रेनर के साथ उन्होंने भी दिनेश कार्तिक की काउंसलिंग शुरू कर दी ।
ट्रेनर और दीपिका के मेहनत रंग लाने लगी। अब दिनेश कार्तिक सुधार की राह पर थे । उधर दूसरी ओर मुरली विजय का खेल निरंतर डाउन होता जा रहा था । इधर मुरली विजय को भारतीय टीम से बाहर कर दिया गया। बाद में उनकी खराब फॉर्म को देखते हुए आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स ने भी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।
दूसरी ओर दीपिका पल्लीकल के सहयोग से दिनेश कार्तिक नेट पर जोरदार अभ्यास करने लगे थे। इसका असर दिखने लगा और दिनेश कार्तिक घरेलू क्रिकेट में बड़े स्कोर बनाने लगे । शीघ्र ही उन्हें आईपीएल में भी चुन लिया गया और कोलकाता नाइट राइडर्स का कप्तान भी बना दिया गया । दीपिका पल्लीकल के वह बहुत नजदीक आ चुके थे । उन्होंने दीपिका से शादी कर ली ।
क्रिकेट की उम्र अनुसार दिनेश अब बूढ़ा चुके थे ।भारतीय क्रिकेट टीम में अब ऋषभ पंत का आगमन हो चुका था कार्तिक समझ गए कि अब उनका कैरियर समाप्त प्राय है । उन्होंने क्रिकेट से रिटायर होने का फैसला किया । इधर उनकी पत्नी दीपिका पल्लीकल प्रेग्नेंट हुई और उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया । दीपिका का स्क्वाश खेलना भी रुक गया ।
दीपिका और दिनेश कार्तिक की इच्छा थी कि उनका चेन्नई के संभ्रांत इलाके पोएस गार्डन एक बंगला हो । 2021 में चेन्नई के इसी इलाके में एक महलनुमा घर को खरीदने का ऑफर उनके पास आया । दिनेश ने उसे खरीदने का फैसला कर लिया । सब आश्चर्य कर रहे थे कि जब दीपिका और दिनेश दोनों ही करीब करीब खेल की दुनिया से बाहर हो चुके हैं , तब इतना महंगा सौदा वे कैसे पूरा करेंगे ?
तभी दिनेश को सूचना मिली की चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से महेंद्र सिंह धोनी उन्हें विकेटकीपर के रूप में वापस टीम में देखना चाह रहे हैं । 2022 का आईपीएल का ऑक्शन शुरू हुआ । लेकिन इस बार चेन्नई की जगह रॉयल चैलेंजर बेंगलुरु ने उन्हें खरीद लिया । दिनेश की पत्नी दीपिका ने भी खेलना शुरू किया और अपनी जुड़वा बच्चों के जन्म के महज 6 महीने बाद उन्होंने स्क्वैश की वर्ल्ड चैंपियनशिप में , ग्लास्गो शहर में , मिक्स्ड डबल के साथ महिला युगल का खिताब जीत लिया । उनकी पार्टनर थी जोशना पुनप्पा।
पत्नी की सफलता और नई टीम के साथ जोड़कर दिनेश कार्तिक में भी ऊर्जा का संचार हुआ और उन्होंने 2022 के आईपीएल में कमाल दिखाना शुरू कर दिया । एक के बाद एक मैच जिताऊ पारियां खेली और उन्हें इस आईपीएल का सबसे बड़ा फिनिशर माने जाने लगा । अभी परसों ही हुए मैच में उन्होंने 8 गेंदों पर तीन छक्कों की सहायता से 30 रन ठोक डाले । मैच समाप्ति पर जब दिनेश ड्रेसिंग रूम पहुंचे तो विराट कोहली ने उन्हें झुककर सम्मान दिया । आज दिनेश कार्तिक भारतीय टी20 की टीम में आने के सबसे बड़े दावेदार बन गए हैं। 37 साल की उम्र में दिनेश कार्तिक इस वर्ष के आईपीएल के सबसे धमाकेदार खिलाड़ी हैं ।
उनकी यह सफलता की कहानी सभी को जाननी चाहिए। नीचे गिरकर उठना किसे कहते है यह कार्तिक का जीवन बताता है। सदैव संयम बनाये रखिये । परिस्थितियों से लड़ते रहिए । आप अपनी मंजिल तक अवश्य पहुंचेंगे।
#प्रेरक #जिंदगी #दिनेश_कार्तिक
19/10/2018
एक जज अपनी पत्नी को क्यों दे रहे हैं तलाक???।
""रोंगटे खड़े"" कर देने वाली सच्ची घटना।
कल रात एक ऐसा वाकया हुआ जिसने मेरी ज़िन्दगी के कई पहलुओं को छू लिया.
करीब 7 बजे होंगे,
शाम को मोबाइल बजा ।
उठाया तो उधर से रोने की आवाज...
मैंने शांत कराया और पूछा कि भाभीजी आखिर हुआ क्या?
उधर से आवाज़ आई..
आप कहाँ हैं??? और कितनी देर में आ सकते हैं?
मैंने कहा:- "आप परेशानी बताइये"।
और "भाई साहब कहाँ हैं...?माताजी किधर हैं..?" "आखिर हुआ क्या...?"
लेकिन
उधर से केवल एक रट कि "आप आ जाइए", मैंने आश्वाशन दिया कि कम से कम एक घंटा पहुंचने में लगेगा. जैसे तैसे पूरी घबड़ाहट में पहुँचा;
देखा तो भाई साहब [हमारे मित्र जो जज हैं] सामने बैठे हुए हैं;
भाभीजी रोना चीखना कर रही हैं 12 साल का बेटा भी परेशान है; 9 साल की बेटी भी कुछ नहीं कह पा रही है।
मैंने भाई साहब से पूछा कि ""आखिर क्या बात है""*???
""भाई साहब कोई जवाब नहीं दे रहे थे "".
फिर भाभी जी ने कहा ये देखिये *तलाक के पेपर, ये कोर्ट से तैयार करा के लाये हैं, मुझे तलाक देना चाहते हैं,
मैंने पूछा - ये कैसे हो सकता है???. इतनी अच्छी फैमिली है. 2 बच्चे हैं. सब कुछ सेटल्ड है. ""प्रथम दृष्टि में मुझे लगा ये मजाक है"".
लेकिन मैंने बच्चों से पूछा दादी किधर है,
बच्चों ने बताया पापा ने उन्हें 3 दिन पहले नोएडा के वृद्धाश्रम में शिफ्ट कर दिया है.
मैंने घर के नौकर से कहा।
मुझे और भाई साहब को चाय पिलाओ;
कुछ देर में चाय आई. भाई साहब को बहुत कोशिशें कीं चाय पिलाने की.
लेकिन उन्होंने नहीं पी और कुछ ही देर में वो एक "मासूम बच्चे की तरह फूटफूट कर रोने लगे "बोले मैंने 3 दिन से कुछ भी नहीं खाया है. मैं अपनी 61 साल की माँ को कुछ लोगों के हवाले करके आया हूँ.
पिछले साल से मेरे घर में उनके लिए इतनी मुसीबतें हो गईं कि पत्नी (भाभीजी) ने कसम खा ली. कि ""मैं माँ जी का ध्यान नहीं रख सकती"" ना तो ये उनसे बात करती थी
और ना ही मेरे बच्चे बात करते थे. *रोज़ मेरे कोर्ट से आने के बाद माँ खूब रोती थी. नौकर तक भी *अपनी मनमानी से व्यवहार करते थे
माँ ने 10 दिन पहले बोल दिया.. बेटा तू मुझे ओल्ड ऐज होम में शिफ्ट कर दे.
मैंने बहुत कोशिशें कीं पूरी फैमिली को समझाने की, लेकिन किसी ने माँ से सीधे मुँह बात नहीं की.
जब मैं 2 साल का था तब पापा की मृत्यु हो गई थी दूसरों के घरों में काम करके ""मुझे पढ़ाया. मुझे इस काबिल बनाया कि आज मैं जज हूँ"". लोग बताते हैं माँ कभी दूसरों के घरों में काम करते वक़्त भी मुझे अकेला नहीं छोड़ती थीं.
उस माँ को मैं ओल्ड ऐज होम में शिफ्ट करके आया हूँ। पिछले 3 दिनों से
मैं अपनी माँ के एक-एक दुःख को याद करके तड़प रहा हूँ,जो उसने केवल मेरे लिए उठाये।
मुझे आज भी याद है जब..
""मैं 10th की परीक्षा में अपीयर होने वाला था. माँ मेरे साथ रात रात भर बैठी रहती"".
एक बार माँ को बहुत फीवर हुआ मैं तभी स्कूल से आया था. उसका शरीर गर्म था, तप रहा था. मैंने कहा *माँ तुझे फीवर है हँसते हुए बोली अभी खाना बना रही थी इसलिए गर्म है।
लोगों से उधार माँग कर मुझे दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलबी तक पढ़ाया. मुझे ट्यूशन तक नहीं पढ़ाने देती थीं कि कहीं मेरा टाइम ख़राब ना हो जाए.
कहते-कहते रोने लगे..और बोले--""जब ऐसी माँ के हम नहीं हो सके तो हम अपने बीबी और बच्चों के क्या होंगे"".
हम जिनके शरीर के टुकड़े हैं,आज हम उनको ऐसे लोगों के हवाले कर आये, ""जो उनकी आदत, उनकी बीमारी, उनके बारे में कुछ भी नहीं जानते"",
जब मैं ऐसी माँ के लिए कुछ नहीं कर सकता तो "मैं किसी और के लिए भला क्या कर सकता हूँ".
आज़ादी अगर इतनी प्यारी है और माँ इतनी बोझ लग रही हैं, तो मैं पूरी आज़ादी देना चाहता हूँ
जब मैं बिना बाप के पल गया तो ये बच्चे भी पल जाएंगे. इसीलिए मैं तलाक देना चाहता हूँ।
सारी प्रॉपर्टी इन लोगों के हवाले* करके उस ओल्ड ऐज होम में रहूँगा. कम से कम मैं माँ के साथ रह तो सकता हूँ।
और अगर इतना सब कुछ कर के ""माँ आश्रम में रहने के लिए मजबूर है"", तो एक दिन मुझे भी आखिर जाना ही पड़ेगा.
माँ के साथ रहते-रहते आदत भी हो जायेगी. माँ की तरह तकलीफ तो नहीं होगी.
जितना बोलते उससे भी ज्यादा रो रहे थे।
बातें करते करते रात के 12:30 हो गए।
मैंने भाभीजी के चेहरे को देखा.
उनके भाव भी प्रायश्चित्त और ग्लानि से भरे हुए थे; मैंने ड्राईवर से कहा अभी हम लोग नोएडा जाएंगे।
भाभीजी और बच्चे हम सारे लोग नोएडा पहुँचे.
बहुत ज़्यादा रिक्वेस्ट करने पर गेट खुला। भाई साहब ने उस गेटकीपर के पैर पकड़ लिए, बोले मेरी माँ है, मैं उसको लेने आया हूँ,
चौकीदार ने कहा क्या करते हो साहब,
भाई साहब ने कहा मैं जज हूँ,
उस चौकीदार ने कहा:-
""जहाँ सारे सबूत सामने हैं तब तो आप अपनी माँ के साथ न्याय नहीं कर पाये,
औरों के साथ क्या न्याय करते होंगे साहब"।
इतना कहकर हम लोगों को वहीं रोककर वह अन्दर चला गया.
अन्दर से एक महिला आई जो वार्डन थी.
उसने बड़े कातर शब्दों में कहा:-
"2 बजे रात को आप लोग ले जाके कहीं मार दें, तो
मैं अपने ईश्वर को क्या जबाब दूंगी..?"
मैंने सिस्टर से कहा आप विश्वास करिये. ये लोग *बहुत बड़े पश्चाताप में जी रहे हैं।
अंत में किसी तरह उनके कमरे में ले गईं. कमरे में जो दृश्य था, उसको कहने की स्थिति में मैं नहीं हूँ।
केवल एक फ़ोटो जिसमें पूरी फैमिली है और वो भी माँ जी के बगल में, जैसे किसी बच्चे को सुला रखा है.
मुझे देखीं तो उनको लगा कि बात न खुल जाए
लेकिन जब मैंने कहा हम लोग आप को लेने आये हैं, तो पूरी फैमिली एक दूसरे को पकड़ कर रोने लगी
आसपास के कमरों में और भी बुजुर्ग थे सब लोग जाग कर बाहर तक ही आ गए.
उनकी भी आँखें नम थीं
कुछ समय के बाद चलने की तैयारी हुई. पूरे आश्रम के लोग बाहर तक आये. किसी तरह हम लोग आश्रम के लोगों को छोड़ पाये.
सब लोग इस आशा से देख रहे थे कि शायद उनको भी कोई लेने आए, रास्ते भर बच्चे और भाभी जी तो शान्त रहे......
लेकिन भाई साहब और माताजी एक दूसरे की भावनाओं को अपने पुराने रिश्ते पर बिठा रहे थे।घर आते-आते करीब 3:45 हो गया.
भाभीजी भी अपनी ख़ुशी की चाबी कहाँ है; ये समझ गई थी।
मैं भी चल दिया. लेकिन *रास्ते भर वो सारी बातें और दृश्य घूमते रहे*.
""माँ केवल माँ है""
उसको मरने से पहले ना मारें.
माँ हमारी ताकत है उसे बेसहारा न होने दें , अगर वह कमज़ोर हो गई तो हमारी संस्कृति की ""रीढ़ कमज़ोर"" हो जाएगी , बिना रीढ़ का समाज कैसा होता है किसी से छुपा नहीं
अगर आपकी परिचित परिवार में ऐसी कोई समस्या हो तो उसको ये जरूर पढ़ायें, बात को प्रभावी ढंग से समझायें , कुछ भी करें लेकिन हमारी जननी को बेसहारा बेघर न होने दें, अगर माँ की आँख से आँसू गिर गए तो "ये क़र्ज़ कई जन्मों तक रहेगा", यकीन मानना सब होगा तुम्हारे पास पर ""सुकून नहीं होगा"" , सुकून सिर्फ माँ के आँचल में होता है उस आँचल को बिखरने मत देना।
इस मार्मिक दास्तान को खुद भी पढ़िये और अपने बच्चों को भी पढ़ाइये ताकि पश्चाताप न करना पड़े।
धन्यवाद!!!
#शेयर ताकि लोगो की आँखे खुल सके।
05/09/2018
गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः।।
27/04/2018
*एक दोस्त की आत्मकथा*
हम दोनों ने 18 की उम्र में घर छोड़ा,
1. तुमने *JEE* पास की........
1. मेने *INDIAN NAVY* के लिए Test पास की
2. तुम्हे IIT मिली,
2.मुझे INDIAN NAVY (FOJ)
3.तुमने डिग्री हांसिल की,
3.मेने कठोर प्रशिक्षण,(HARD TRAINING)
4.तुम्हारा दिन सुबह 7 से शुरू होकर शाम 5 खत्म होता
4. मेरा सवेरे 4 बजे से रात 9 बजे तक और कभी कभार 24 घंटे...
5.तुम्हारी कनवोकेशन सेरेमनी हुई,
5.मेरी नियुक्ति हुई,
6.सबसे बेहतर कंपनी तुम्हे लेकर गयी और सबसे शानदार पैकेज मिला,
6.मुझे कंधो पर SHIP के साथ पलटन ज्वाइन करने का आदेश मिला,
7.तुम्हे नोकरी मिली,
7.मुझे जीने का तरीका,
8.हर सांझ तुम परिवार से मिलते,
8.मुझे उम्मीद रहती की जल्द मिलूँगा,
9.तुम हर त्यौहार उजाले और संगीत में मनाते,
9.मैं अपने commander संग बंकर में,
हम दोनों की शादी हुई.......... marriage life
10.तुम्हारी पत्नी रोज तुम्हे देख लिया करती,
10.मेरी पत्नी बस मेरे जिन्दा रहने की आस करती,
11.तुम्हे बिजनेस ट्रिप पर भेजा गया,
11.मुझे SHIP पर भेजा गया,( AT SEA)
12.हम दोनो लोटे ......
12.हम दोनों की पत्नियां आंसू नहीं रोक पाई....
लेकिन....
13.तुमने उसके आंसू पोंछ दिए,
13.मैं नहीं पोंछ पाया,
14.तुमने उसे गले लगा लिया,
14.मैं नहीं लगा पाया,
15.क्यूंकि मैं एक तिरंगे में लिपटे हुए कॉफिन के अन्दर छाती पर मैडल लेकर लेटा हुआ था,
मेरे जीने का तरीका ख़त्म हो गया.....
15.तुम्हारी नोकरी जारी है....
हम दोनों ने 18 की उम्र में घर छोड़ा
इस लेख ने हमें रुलाया
सीना गर्व और मन ग्लानि से भर आया
इस माटी की खातिर न जाने कितनो ने अपना चिराग गंवाया
मेरे सभी फोजी भाइयो के लिए
वंदे मातरम!!
जय हिंद!!
06/04/2018
स्कूल से
एक 6'th क्लास का बच्चा
अपने घर आकर
अपनी माँ से पूछता है :- "माँ ये SC और ST क्या हैं ?"
माँ :- बेटा,
ये तुम्हे क्यों जानना है ?
बच्चा :- माँ आज सर हमसे पूछ रहे थे
की कौन-कौन SC ST का हैं
माँ :- बेटा उन्होंने ऐसा क्यों पूछा,
उन्होंने नहीं बताया क्या ?
बच्चा :- बताया पर सिर्फ इतना कि,
जो जो SC ST के हैं
उन्हें पैसे मिलेंगे,
पर माँ ये क्या होता हैं?
माँ :- बेटा
हमारे सविधान में
4 कास्ट बनायीं है --
SC, ST, Obc और General
तो सरकार उन्हें गरीब और पिछड़े हुए लोगो को मदद करने के लिए सुविधा दी हैं।
बच्चा -: पर माँ
सिर्फ उन्हें ही क्यों मिलती हैं और
मेरा दोस्त तो गरीब भी नहीं हैं फिर
भी उसे मिलेगे पैसे,
ये सुविधा गरीब के लिए हैं तो
हम भी गरीब है न तो
हमको क्यों नहीं मिलेंगे पैसे?
माँ :- बेटा ये सविधान में लिखा है।
बेटा :- पर माँ सविधान के बारे में कहा था की सबको एक जैसा हक़ है तो फिर ये क्यों ?
माँ :- बेटा
ये सब राजनीति का गन्दा खेल हैं
उनकी वजह से आज
धर्म और जाति के नाम पर लोग एक सामान नही हैं
बेटा :- पर माँ हम क्या हैं,..? जिससे हम को पैसे नहीं मिलेगे
माँ :- बदनसीब,
हम लोग बदनसीब है बेटा
पूरे विश्व में कही पर
इस तरह का नियम नहीं है
बस हमारे भारत में है
ये सुविधा, सविधान निर्माता ने इसको सिर्फ 10 वर्ष के लिए रखा था
पर ये देश के दलालो ने इसको पूर्ण रूप से लागू कर दिया.
बेटा :- माँ क्या आगे भी
मुझे इसी तरह की दिक्कत होगी ?
माँ :- हाँ बेटा,
आगे तुझे पढ़ाई में,
नोकरी में, प्रमोशन में,
हर जगह दिक्कत आएगी,
जातिवाद का जहर तुझे मजबूर कर देगा और
तू कितना भी सहन करले,
एक दिन तू जरूर बोलेगा की ये कोटा बंद करो
बेटा :- माँ तो क्या हमारी मदद कोई नहीं करेगा,..?
काश में भारत छोड़ कही और पैदा हुआ होता
माँ :- ऐसा नहीं बोलते बेटा
इस धरती को
हमारे पूर्वजो ने खून से सींचा हैं और
बलिदान दिया है
तुम्हे गर्व होना चाहिए की तुम एक भारतीय हो,
बस ये सत्ता के भूखे लोग हमारी गरीबी दूर करने के बजाये वोट पाने की होड़ में हैं ।
बेटा :- माँ मेरा दोस्त बोलता हैं की पैसे मिलेगे तो पार्टी करेगे,
माँ हमें एक रोज की रोटी
बड़ी मुश्किल से मिलती हैं और
मेरे दोस्त पार्टी करेगे,
माँ में नहीं जाउगा स्कूल कल से ।
माँ :- नहीं बेटा,
तुम रोज स्कूल जाओ और पढ़ो,
पढ़लिख कर शायद तुम इस कोटा को बदल दो
बेटा :- हा माँ में खूब पढूंगा पर
हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं की आगे पढ़ सकूँ
माँ :- तू चिंता न कर, मैं काम करुँगी न तेरी पढ़ाई के लिए
ये सन्देश
हमारे राजनेताओ तक पहुचे और वो
सिर्फ गरीबो को कोटा दे न कि विकसितl
अगर 40% नंबर पाने वाला
पुलिस अधिकारी बन जाता है और
80% नंबर पाने वाला
रोजगार न मिलने के कारण चोर बन जाता है, l
27/08/2017
*एक संदेश अभिभावकों के नाम*
पिता बेटे को डॉक्टर बनाना चाहता था। बेटा इतना मेधावी नहीं था कि PMT क्लियर कर लेता। इसलिए दलालों से MBBS की सीट खरीदने का जुगाड़ किया गया। जमीन, जायदाद जेवर गिरवी रख के 35 लाख रूपये दलालों को दिए, लेकिन वहाँ धोखा हो गया।
फिर किसी तरह विदेश में लड़के का एडमीशन कराया गया, वहाँ भी चल नहीं पाया। फेल होने लगा.. डिप्रेशन में रहने लगा। रक्षाबंधन पर घर आया और यहाँ फांसी लगा ली। 20 दिन बाद माँ बाप और बहन ने भी कीटनाशक खा के आत्म हत्या कर ली। अपने बेटे को डॉक्टर बनाने की झूठी महत्वाकांक्षा ने पूरा परिवार लील लिया।
माँ बाप अपने सपने, अपनी महत्वाकांक्षा अपने बच्चों से पूरी करना चाहते हैं। मैंने देखा कि कुछ माँ-बाप अपने बच्चों को
Topper बनाने के लिए इतना ज़्यादा अनर्गल दबाव डालते हैं कि बच्चे का स्वाभाविक विकास ही रुक जाता है।
आधुनिक स्कूली शिक्षा बच्चे की Evaluation और Grading ऐसे करती है जैसे सेब के बाग़ में सेब की खेती की जाती है। पूरे देश के करोड़ों बच्चों को एक ही Syllabus पढ़ाया जा रहा है .......
For Example - जंगल में सभी पशुओं को एकत्र कर सबका इम्तहान लिया जा रहा है और पेड़ पर चढ़ने की क्षमता देख के Ranking निकाली जा रही है। यह शिक्षा व्यवस्था ये भूल जाती है कि इस प्रश्नपत्र में तो बेचारा हाथी का बच्चा फेल हो जाएगा और बन्दर First आ जाएगा।
अब पूरे जंगल में ये बात फ़ैल गयी कि कामयाब वो जो झट से कूद के पेड़ पर चढ़ जाए। बाकी सबका जीवन व्यर्थ है।
इसलिए उन सब जानवरों के, जिनके बच्चे कूद के झटपट पेड़ पर न चढ़ पाए, उनके लिए कोचिंग Institute खुल गए, व्हाँ पर बच्चों को पेड़ पर चढ़ना सिखाया जाता है। चल पड़े हाथी, जिराफ, शेर और सांड़, भैंसे और समंदर की सब मछलियाँ चल पड़ीं अपने बच्चों के साथ, Coaching institute की ओर ........ हमारा बिटवा भी पेड़ पर चढ़ेगा और हमारा नाम रोशन करेगा।
हाथी के घर लड़का हुआ.. तो उसने उसे गोद में ले के कहा- 'हमरी जिन्दगी का एक ही मक़सद है कि हमार बिटवा पेड़ पर चढ़ेगा।' और जब बिटवा पेड़ पर नहीं चढ़ पाया, तो हाथी ने सपरिवार ख़ुदकुशी कर ली।
अपने बच्चे को पहचानिए। वो क्या है, ये जानिये। हाथी है या शेर ,चीता, लकडबग्घा , जिराफ ऊँट है या मछली , या फिर हंस , मोर या कोयल ? क्या पता वो चींटी ही हो ?
और यदि चींटी है आपका बच्चा, तो हताश निराश न हों। चींटी धरती का सबसे परिश्रमी जीव है और अपने खुद के वज़न की तुलना में एक हज़ार गुना ज्यादा वजन उठा सकती है।
इसलिए अपने बच्चों की क्षमता को परखें और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें.. हतोत्साहित नही......🙏🙏
22/05/2017
एक छोटे से शहर के निजी स्कूल में कक्षा 5 की शिक्षिका थीं।
उनकी एक आदत थी कि वह कक्षा शुरू करने से पहले हमेशा "आई लव यू ऑल" बोला करतीं। मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं कहती । वह कक्षा के सभी बच्चों से उतना प्यार नहीं करती थीं।
कक्षा में एक ऐसा बच्चा था जो उनको एक आंख नहीं भाता। उसका नाम राजू था। राजू मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आजाया करता है। उसके बाल खराब होते, जूतों के बन्ध खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान। । । व्याख्यान के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता।
मिस के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखता तो लग जाता..मगर उसकी खाली खाली नज़रों से उन्हें साफ पता लगता रहता.कि राजू शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब हे.धीरे धीरे मिस को राजू से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही राजू मिस की आलोचना का निशाना बनने लगता। सब बुराई उदाहरण राजू के नाम पर किये जाते. बच्चे उस पर खिलखिला कर हंसते.और मिस उसको अपमानित कर के संतोष प्राप्त करतीं। राजू ने हालांकि किसी बात का कभी कोई जवाब नहीं दिया था।
मिस को वह एक बेजान पत्थर की तरह लगता जिसके अंदर महसूस नाम की कोई चीज नहीं थी। प्रत्येक डांट, व्यंग्य और सजा के जवाब में वह बस अपनी भावनाओं से खाली नज़रों से उन्हें देखा करता और सिर झुका लेता । मिस को अब इससे गंभीर चिढ़ हो चुकी थी।
पहला सेमेस्टर समाप्त हो गया और रिपोर्ट बनाने का चरण आया तो मिस ने राजू की प्रगति रिपोर्ट में यह सब बुरी बातें लिख मारी । प्रगति रिपोर्ट माता पिता को दिखाने से पहले हेड मिसट्रेस के पास जाया करती थी। उन्होंने जब राजू की रिपोर्ट देखी तो मिस को बुला लिया। "मिस प्रगति रिपोर्ट में कुछ तो प्रगति भी लिखनी चाहिए। आपने तो जो कुछ लिखा है इससे राजू के पिता इससे बिल्कुल निराश हो जाएंगे।" "मैं माफी माँगती हूँ, लेकिन राजू एक बिल्कुल ही अशिष्ट और निकम्मा बच्चा है । मुझे नहीं लगता कि मैं उसकी प्रगति के बारे में कुछ लिख सकती हूँ। "मिस घृणित लहजे में बोलकर वहां से उठ आईं।
हेड मिसट्रेस ने एक अजीब हरकत की। उन्होंने चपरासी के हाथ मिस की डेस्क पर राजू की पिछले वर्षों की प्रगति रिपोर्ट रखवा दी । अगले दिन मिस ने कक्षा में प्रवेश किया तो रिपोर्ट पर नजर पड़ी। पलट कर देखा तो पता लगा कि यह राजू की रिपोर्ट हैं। "पिछली कक्षाओं में भी उसने निश्चय ही यही गुल खिलाए होंगे।" उन्होंने सोचा और कक्षा 3 की रिपोर्ट खोली। रिपोर्ट में टिप्पणी पढ़कर उनकी आश्चर्य की कोई सीमा न रही जब उन्होंने देखा कि रिपोर्ट उसकी तारीफों से भरी पड़ी है। "राजू जैसा बुद्धिमान बच्चा मैंने आज तक नहीं देखा।" "बेहद संवेदनशील बच्चा है और अपने मित्रों और शिक्षक से बेहद लगाव रखता है।" "
अंतिम सेमेस्टर में भी राजू ने प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया है। "मिस ने अनिश्चित स्थिति में कक्षा 4 की रिपोर्ट खोली।" राजू ने अपनी मां की बीमारी का बेहद प्रभाव लिया। .उसका ध्यान पढ़ाई से हट रहा है। "" राजू की माँ को अंतिम चरण का कैंसर हुआ है। । घर पर उसका और कोई ध्यान रखनेवाला नहीं है.जिसका गहरा प्रभाव उसकी पढ़ाई पर पड़ा है। ""
राजू की माँ मर चुकी है और इसके साथ ही राजू के जीवन की चमक और रौनक भी। । उसे बचाना होगा...इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। "मिस के दिमाग पर भयानक बोझ हावी हो गया। कांपते हाथों से उन्होंने प्रगति रिपोर्ट बंद की । आंसू उनकी आँखों से एक के बाद एक गिरने लगे.
अगले दिन जब मिस कक्षा में दाख़िल हुईं तो उन्होंने अपनी आदत के अनुसार अपना पारंपरिक वाक्यांश "आई लव यू ऑल" दोहराया। मगर वह जानती थीं कि वह आज भी झूठ बोल रही हैं। क्योंकि इसी क्लास में बैठे एक उलझे बालों वाले बच्चे राजू के लिए जो प्यार वह आज अपने दिल में महसूस कर रही थीं..वह कक्षा में बैठे और किसी भी बच्चे से हो ही नहीं सकता था । व्याख्यान के दौरान उन्होंने रोजाना दिनचर्या की तरह एक सवाल राजू पर दागा और हमेशा की तरह राजू ने सिर झुका लिया। जब कुछ देर तक मिस से कोई डांट फटकार और सहपाठी सहयोगियों से हंसी की आवाज उसके कानों में न पड़ी तो उसने अचंभे में सिर उठाकर उनकी ओर देखा। अप्रत्याशित उनके माथे पर आज बल न थे, वह मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने राजू को अपने पास बुलाया और उसे सवाल का जवाब बताकर जबरन दोहराने के लिए कहा। राजू तीन चार बार के आग्रह के बाद अंतत:बोल ही पड़ा। इसके जवाब देते ही मिस ने न सिर्फ खुद खुशान्दाज़ होकर तालियाँ बजाईं बल्कि सभी से भी बजवायी.. फिर तो यह दिनचर्या बन गयी। मिस हर सवाल का जवाब अपने आप बताती और फिर उसकी खूब सराहना तारीफ करतीं। प्रत्येक अच्छा उदाहरण राजू के कारण दिया जाने लगा । धीरे-धीरे पुराना राजू सन्नाटे की कब्र फाड़ कर बाहर आ गया। अब मिस को सवाल के साथ जवाब बताने की जरूरत नहीं पड़ती। वह रोज बिना त्रुटि उत्तर देकर सभी को प्रभावित करता और नये नए सवाल पूछ कर सबको हैरान भी।
उसके बाल अब कुछ हद तक सुधरे हुए होते, कपड़े भी काफी हद तक साफ होते जिन्हें शायद वह खुद धोने लगा था। देखते ही देखते साल समाप्त हो गया और राजू ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया यानी दूसरी क्लास ।
विदाई समारोह में सभी बच्चे मिस के लिये सुंदर उपहार लेकर आए और मिस की टेबल पर ढेर लग गये । इन खूबसूरती से पैक हुए उपहार में एक पुराने अखबार में बद सलीके से पैक हुआ एक उपहार भी पड़ा था। बच्चे उसे देखकर हंस पड़े। किसी को जानने में देर न लगी कि उपहार के नाम पर ये राजू लाया होगा। मिस ने उपहार के इस छोटे से पहाड़ में से लपक कर उसे निकाला। खोलकर देखा तो उसके अंदर एक महिलाओं की इत्र की आधी इस्तेमाल की हुई शीशी और एक हाथ में पहनने वाला एक बड़ा सा कड़ा था जिसके ज्यादातर मोती झड़ चुके थे। मिस ने चुपचाप इस इत्र को खुद पर छिड़का और हाथ में कंगन पहन लिया। बच्चे यह दृश्य देखकर हैरान रह गए। खुद राजू भी। आखिर राजू से रहा न गया और मिस के पास आकर खड़ा हो गया। ।
कुछ देर बाद उसने अटक अटक कर मिस को बताया कि "आज आप में से मेरी माँ जैसी खुशबू आ रही है।"
समय पर लगाकर उड़ने लगा। दिन सप्ताह, सप्ताह महीने और महीने साल में बदलते भला कहां देर लगती है? मगर हर साल के अंत में मिस को राजू से एक पत्र नियमित रूप से प्राप्त होता जिसमें लिखा होता कि "इस साल कई नए टीचर्स से मिला।। मगर आप जैसा कोई नहीं था।" फिर राजू का स्कूल समाप्त हो गया और पत्रों का सिलसिला भी। कई साल आगे गुज़रे और मिस रिटायर हो गईं। एक दिन उन्हें अपनी मेल में राजू का पत्र मिला जिसमें लिखा था:
"इस महीने के अंत में मेरी शादी है और आपके बिना शादी की बात मैं नहीं सोच सकता। एक और बात .. मैं जीवन में बहुत सारे लोगों से मिल चुका हूं।। आप जैसा कोई नहीं है.........डॉक्टर राजू
साथ ही विमान का आने जाने का टिकट भी लिफाफे में मौजूद था। मिस खुद को हरगिज़ न रोक सकती थीं। उन्होंने अपने पति से अनुमति ली और वह दूसरे शहर के लिए रवाना हो गईं। शादी के दिन जब वह शादी की जगह पहुंची तो थोड़ी लेट हो चुकी थीं। उन्हें लगा समारोह समाप्त हो चुका होगा.. मगर यह देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रही कि शहर के बड़े डॉ, बिजनेसमैन और यहां तक कि वहां पर शादी कराने वाले पंडितजी भी थक गये थे. कि आखिर कौन आना बाकी है...मगर राजू समारोह में शादी के मंडप के बजाय गेट की तरफ टकटकी लगाए उनके आने का इंतजार कर रहा था। फिर सबने देखा कि जैसे ही यह पुरानी शिक्षिका ने गेट से प्रवेश किया राजू उनकी ओर लपका और उनका वह हाथ पकड़ा जिसमें उन्होंने अब तक वह सड़ा हुआ सा कंगन पहना हुआ था और उन्हें सीधा मंच पर ले गया। माइक हाथ में पकड़ कर उसने कुछ यूं बोला "दोस्तों आप सभी हमेशा मुझसे मेरी माँ के बारे में पूछा करते थे और मैं आप सबसे वादा किया करता था कि जल्द ही आप सबको उनसे मिलाउंगा।।।........यह मेरी माँ हैं - ------------------------- "
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!! प्रिय दोस्तों.... इस सुंदर कहानी को सिर्फ शिक्षक और शिष्य के रिश्ते के कारण ही मत सोचिएगा । अपने आसपास देखें, राजू जैसे कई फूल मुरझा रहे हैं जिन्हें आप का जरा सा ध्यान, प्यार और स्नेह नया जीवन दे सकता है...........
09/07/2015
Plz do share the pic of our school whoever having...
09/07/2015
Welcome to the page n proud to be a student of Shiksha niketan.