19/11/2025
आज मुसलमानों की हालत — ख़ासकर हिंदुस्तानी मुसलमानों की — हालात से भी बदतर स्थिति में पहुँच चुकी है। न देश की राजनीति में कोई ठोस हिस्सेदारी, न ढंग का रोजगार, और न ही सामाजिक स्तर पर मज़बूती। शिक्षा का आलम यह है कि मुश्किल से 4% बच्चे ही कॉलेज तक पहुँच पाते हैं। यह भी नहीं कहा जा सकता कि इस कौम में क्षमता की कमी है या रहनुमाई मौजूद नहीं। हम तो यहाँ तक मानते हैं कि हमारे मज़हब का पहला पैग़ाम ही “इल्म हासिल करो” है। इसके बावजूद हालात इतने कमजोर क्यों हैं? इसकी सिर्फ एक वजह नज़र आती है — यह कौम सो चुकी है, अपने अतीत, अपनी रूहानी विरासत और अपनी ilm-o-fahm की शान को भूल चुकी है।
आज सबसे ज़रूरी यह है कि इस कौम को उसका अतीत याद दिलाया जाए, इसे जगाया जाए। और यह भी हक़ीक़त है कि जगाने की कोशिशें होती रही हैं—हर जुमे को खुतबा होता है, जलसे-जुलूस होते हैं—लेकिन हालात में कोई ठोस तब्दीली दिखाई नहीं दे रही।
ऐसे में मैंने भी अपनी तरफ़ से लेखों और लेक्चर्स के ज़रिए इस कौम को जागरूक करने का संकल्प लिया है। आज से मैं हर हफ़्ते 1–2 लेख या वीडियो इस कौम के अहम मुद्दों पर पोस्ट करने की कोशिश करूँगा।
आप सभी से गुज़ारिश है कि मेरी इस कोशिश में मेरी हौसलाअफ़ज़ाई करें। आपकी प्रेरणा मुझे और मजबूती देगी। आप बताएं कि किन-किन टॉपिक्स पर बात की जानी चाहिए। जिस विषय पर जानकारी होगी, उसे अपने लेखों में शामिल करूँगा, और जहाँ जानकारी कम होगी, वहाँ अध्ययन करके सही और भरोसेमंद तथ्य आपके सामने पेश करूँगा। इससे मेरी इल्म में भी इज़ाफ़ा होगा और आपका सहयोग भी शामिल रहेगा।
इसलिए आपसे फिर गुज़ारिश है कि मुझे फ़ॉलो ज़रूर करें, मेरी हर पोस्ट को पढ़ें या सुनें, अपनी राय दें, और इस कौम को जगाने की इस कोशिश में मेरा साथ दें।
– रियाज़ुल करीम
डायरेक्टर: IQRA Islamic School