Ejaz Ahmad
صدر مدرسہ ٹیچرس اینڈ ویلفیئر ایسوسی ایشن کٹیہار ،
جنرل سکریٹری انجمن ترقی اُردو کٹیہار
🌟 बिहार का सपना, हमारा वोट! 🌟
🔥 बिहार की गलियों, खेतों और कस्बों में चुनाव की गूँज है!
हर पार्टी वादे करती है, हर रैली में नारे लगते हैं…
लेकिन जनता के दिलों में छुपा सपना सबसे बड़ा है:
🌱 किसान का सपना: खेतों में पानी और फसल की उचित कीमत
💼 युवा का सपना: अपनी ज़मीन पर नौकरी और व्यवसाय के अवसर
🎓 माँ का सपना: बच्चों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरीन सुविधा
🕊️ बुजुर्ग की दुआ: शांति और खुशहाली
✅ यह चुनाव सिर्फ कुर्सी का खेल नहीं, यह बिहार के उज्जवल भविष्य का फैसला है!
अगर हम अपने सपनों को प्राथमिकता दें, तो वादे हकीकत बनेंगे और हर व्यक्ति के लिए नया सवेरा आएगा!
✨ अपने वोट से बिहार का भविष्य उज्जवल बनाएं! ✨
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आज का बिहार और मुसलमानों की राजनीतिक ताक़त — एक शोधपरक समीक्षा
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प्रस्तावना
बिहार की राजनीति में मुसलमान आबादी के लिहाज़ से हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। राज्य में लगभग 17 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जो 50 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों और कई संसदीय सीटों पर परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यही कारण है कि हर बड़ी राजनीतिक पार्टी मुसलमानों का वोट हासिल करने के लिए संघर्ष करती है। लेकिन सवाल यह है कि आज़ादी के बाद से अब तक क्या किसी पार्टी ने मुसलमानों को वह हक़ दिया, जिसके वे हक़दार थे? हक़ीक़त यही है कि सबने वोट तो लिया, लेकिन हक़ देने के मामले में सिर्फ़ वादे ही किए गए।
आरजेडी और मुसलमानों की राजनीति
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने दशकों तक मुसलमानों को अपना मज़बूत वोट बैंक बनाया। लालू प्रसाद यादव के दौर में यह कहा जाता था कि "मुसलमान और यादव" आरजेडी की जीत की गारंटी हैं। मुसलमानों ने भर-भर कर वोट दिया, लेकिन बदले में उन्हें राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर वह हिस्सेदारी नहीं मिली, जिसके वे हक़दार थे। प्रतिनिधित्व मिला भी तो सीमित स्तर पर, और विकास के असली दरवाज़े आज भी उनके लिए बंद हैं।
सेक्युलर गठबंधन और मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन
महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस और अन्य सेक्युलर दल) हमेशा खुद को मुसलमानों का संरक्षक बताते रहे हैं, लेकिन अगर उनके रिकॉर्ड पर नज़र डालें तो वे केवल "हमदर्दी की राजनीति" करते दिखते हैं। दूसरी ओर, मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने सीमांचल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है और वहाँ के पिछड़े मुसलमानों की बात की है, लेकिन वोटों के बँटवारे का ख़तरा भी सच्चाई है। यही बँटवारा मुसलमानों की असली ताक़त को कमज़ोर करता है।
जेडीयू और मुसलमानों का रवैया
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समय-समय पर मुसलमानों के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाए, जैसे अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड और शैक्षिक योजनाएँ। लेकिन बीजेपी के साथ गठबंधन ने उनकी इस छवि को नुक़सान पहुँचाया। नतीजा यह है कि मुसलमान जेडीयू को लेकर हमेशा शक और संशय में रहते हैं।
सीमांचल और शेरशाहाबादी तबक़ा — एक नज़रअंदाज़ किया हुआ इलाक़ा
बिहार का सीमांचल क्षेत्र (किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार आदि) मुसलमानों की बहुसंख्यक आबादी वाला इलाक़ा है, जहाँ ख़ास तौर पर शेरशाहाबादी तबक़ा बड़ी तादाद में रहता है। यह तबक़ा ग़रीबी, बेरोज़गारी, शिक्षा की कमी और बुनियादी सुविधाओं से महरूम है। लेकिन हक़ीक़त यह है कि सभी राजनीतिक दलों ने इस क्षेत्र को हमेशा नज़रअंदाज़ किया। यहाँ के लोगों को सिर्फ़ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया, उनके मसलों पर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। यह एक ऐसा "लम्हा-ए-फ़िकरिया" है जिस पर न केवल वहाँ के लोग बल्कि पूरे बिहार के मुसलमानों को सोचना होगा।
निष्कर्ष और सुझाव
विश्लेषण यह बताता है कि अब तक किसी भी पार्टी ने मुसलमानों को वह हिस्सेदारी और न्याय नहीं दिया, जिसके वे हक़दार हैं। आरजेडी ने सबसे अधिक वोट तो लिए मगर समान प्रतिनिधित्व नहीं दिया। सेक्युलर गठबंधन ने वादे किए मगर पूरे नहीं किए। जेडीयू ने कभी नज़दीकी तो कभी दूरी का रवैया अपनाया। और मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन की आमद से नई आवाज़ तो पैदा हुई, लेकिन इससे वोटों के बँटवारे का ख़तरा भी बढ़ गया।
इसलिए मुसलमानों के लिए ज़रूरी है कि वे एकजुट और जागरूक राजनीतिक रणनीति अपनाएँ। वोट देने से पहले केवल नारों या भावनाओं पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रदर्शन और भविष्य की नीतियों को देखकर फ़ैसला करें। सीमांचल जैसे इलाक़े और शेरशाहाबादी जैसे तबक़े की महरूमी दूर करना किसी भी राजनीतिक दल की प्राथमिकता होनी चाहिए। वरना यह महरूमियाँ और नज़रअंदाज़ किए जाने का सिलसिला हमेशा जारी रहेगा।
पूर्णिया हवाई अड्डे का उद्घाटन — सीमांचल की तक़दीर बदलने की दिशा में
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पूर्णिया हवाई अड्डे का प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन सीमांचल के लिए केवल एक विकासात्मक कदम नहीं, बल्कि वर्षों की उपेक्षा और प्रतीक्षा के बाद नई उम्मीदों की किरण है। यह इलाका हमेशा से पिछड़ेपन, पलायन और नज़रअंदाज़ किए जाने का शिकार रहा है। आज जब सीमांचल सीधे देश के हवाई नक्शे पर जुड़ गया है तो यह सिर्फ़ एक सपने की ताबीर नहीं, बल्कि संभावनाओं के नए दरवाज़े खुलने का संकेत भी है।
सीमांचल अपनी उपजाऊ ज़मीनों, मखाने, जूट और सब्ज़ियों की पैदावार के लिए पहचाना जाता है, लेकिन मंडियों तक समय पर पहुंच न होने के कारण किसानों को अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। अब हवाई संपर्क से इन उपजों को बड़े शहरों तक पहुंचाना आसान होगा, जिससे इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई जान मिल सकती है। इसी तरह, उच्च शिक्षा और इलाज के लिए दूर-दराज़ शहरों जाने वाले छात्रों और मरीज़ों के लिए भी यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं। कारोबार और पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी और इससे रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।
हालाँकि, यह सच्चाई नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती कि केवल उद्घाटन ही काफ़ी नहीं है। हवाई अड्डे को सफल बनाने के लिए कुछ बुनियादी पहलुओं पर तुरंत ध्यान देना होगा। सबसे पहला सवाल किरायों का है। अगर टिकट आम आदमी की पहुँच से बाहर रहे तो यह सुविधा केवल कुछ सम्पन्न वर्ग तक सीमित रह जाएगी। दूसरा बड़ा चुनौती बुनियादी ढांचे की है। हवाई अड्डे तक पहुँचने के लिए सड़कों और परिवहन के बेहतर इंतज़ाम ज़रूरी हैं। इसके साथ-साथ नियमित उड़ानों की उपलब्धता भी आवश्यक है, वरना उद्घाटन का जोश जल्दी ही मायूसी में बदल सकता है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह उद्घाटन सरकार के लिए एक बड़ा संदेश है। यह कदम इस क्षेत्र की जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश है कि वे राष्ट्रीय विकास की धारा में बराबर के सहभागी हैं। लेकिन यह विश्वास तभी स्थायी होगा जब योजना ज़मीनी सच्चाइयों के साथ आगे बढ़े। सीमांचल की जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं है, वह वास्तविक बदलाव चाहती है।
पूर्णिया हवाई अड्डे का उद्घाटन एक ऐतिहासिक पड़ाव अवश्य है, मगर असली परीक्षा अभी बाकी है। अगर सरकार ने किराए आम जनता की पहुँच में रखे, बुनियादी ढांचे को मज़बूत किया और उड़ानों को नियमित किया, तो यह परियोजना सीमांचल की तक़दीर बदलने का साधन बन सकती है। अन्यथा, यह सिर्फ़ एक राजनीतिक दिखावा बनकर रह जाएगी। जनता की इच्छा है कि यह हवाई अड्डा क्षेत्र की उपेक्षाओं को दूर करने और विकास की राहों को रोशन करने वाला वास्तविक साधन बने।
رسالة بمناسبة يوم المعلم
مقدمة من: أعجاز أحمد القاسمي
مدير: مدرسة إصلاح المسلمين، دادن غاٹ، براري، كتيهار
الحمد لله رب العالمين، والصلاة والسلام على سيد المرسلين، وعلى آله وأصحابه أجمعين.
أبنائي وبناتي الأعزاء!
السلام عليكم ورحمة الله وبركاته
إن يوم المعلم مناسبة عظيمة نتذكر فيها فضل المعلمين ومكانتهم السامية، فهم ورثة الأنبياء وحملة مشاعل العلم. المعلم هو الذي ينير عقولنا بالمعرفة، ويهذب أخلاقنا، ويزرع فينا القيم الفاضلة.
المعلم أشبه بالشمعة التي تحترق لتضيء لغيرها الطريق، وأشبه بالبستاني الذي يعتني بالزهور حتى تثمر وتزهر. ولولا جهود المعلمين ما نهضت الأمم ولا ازدهرت الحضارات.
أبنائي الأعزاء، أوصيكم بثلاث وصايا:
1. احترام المعلم، فهو حق بعد حق الوالدين.
2. الحرص على العلم، فهو النور الذي يبدد ظلام الجهل.
3. التحلي بالأخلاق الفاضلة، فهي زينة طالب العلم وسرّ نجاحه.
فلنُجدّد في هذا اليوم العهد على أن نكرم معلمينا، ونصغي إلى توجيهاتهم، ونحفظ مكانتهم في قلوبنا.
المعلم الحق يزرع الأمل في النفوس، ويوقظ الطموحات، ويغرس بذور العلم التي تبقى خالدة مدى الحياة.
وفقكم الله جميعًا للعلم النافع والعمل الصالح، وجعلنا وإياكم من عباده المخلصين.
وكل عام وأنتم بخير بمناسبة يوم المعلم.
ترانے میں مدرسہ دادن گھاٹ کے طلبہ و طالبات تعلیمی سال کے آخری دن
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15/12/2024
انجمن ترقی اُردو کٹیہار کے عہدے داران وممبران کی افتتاحی نشست منعقد
پریس ریلیز جاری کرتے ہوۓ انجمن ترقی اُردو کٹیہار کے جنرل سیکرٹری جناب اعجاز احمد قاسمی نے کہا کہ آج مؤرخہ 15/12/2024 کو ایک نشست انجمن ترقی اُردو کٹیہار کے صدر جناب پروفیسر انور ایرج کی صدارت میں منعقد ہوئ جس میں کل دس ایجنڈے تھے ۔وہ اس طرح ہے'
١- نو منتخب عہد داران و ممبران کا تعارف
٢- انجمن ترقی اردو کٹیھار کو ضلعی سطح پر مستحکم و منظم کرنے پر غور
٣- انجمن ترقی اردو کے بینر تلے ضلع کے تمام دفاتر میں اردو نیم پلیٹ لگانے کے لیے افسران کو میمورنڈم دیے جانے پر غور ۔
٤- مدارس و اسکول میں اردو کے طلبہ و طالبات کے مابین سلسلہ وار اردو کوئز منعقد کرانے پر غور۔
٥- ضلع میں اردو کی موجودہ صورتحال پر غور۔
٦- وقتا فوقتا اردو سے متعلق سیمینار سمپوزیم اور مشاعرہ کرانے پر غور۔
٧- انجمن ترقی اردو کٹیہار کی جانب سے سالنامہ مجلہ نکالے جانے پر غور۔
٨- انجمن ترقی اردو کٹیہار کے میڈیا انچارج بنانے پر غور۔
٩- اردو اساتذہ کو بہتر کارکردگی کی بنیاد پر ریاستی سطح پر ایوارڈ و توصیفی سند دیے جانے کے لیے مستحق ناموں کو ریاستی کمیٹی کو بھیجنے پر غور۔
١٠- متفرقات با اجازت صدر۔
جن میں پانچ ایجنڈوں پر بحث ومباحثہ کے بعد لیئے گیۓ فیصلے اس طرح ہیں ۔
١- پہلے ایجنڈے کے تحت تمام عہدے داران و ممبران نے اپنا اپنا تعارف کرایا۔
٢- ایجنڈا نمبر دو کے تحت متعدد لوگوں نے مختلف تجاویز پیش کی پہلی تجویز یہ پیش ہوئی کہ اخبارات میں سے کوئی ایک ہر کوئی جو اردو پڑھنا جانتا ہو اپنے نام جاری کرائے یا خریدے نیز اردو کے تئیں لوگوں کی بے حسی کو ختم کی کیا جائے صدر انجمن ترقی اردو کٹیھار کی طرف سے یہ تجویز پیش ہوئی کہ اردو اساتذہ کو بیدار کیا جائے انہوں نے مزید کہا کہ ذمہ داران اپنی ذمہ داری سے بھاگ رہے ہیں۔وزڈم پبلک اسکول کے چیئرمین جناب نسیم اختر ندوی کی طرف سے یہ تجویز ائی کہ انگلش میڈیم اسکولوں کے پرنسپلز حضرات سے ملاقات کر کے انہیں اردو اساتذہ کے تقرر کی تحریک دی جائے یہ کام وفد کی صورت میں کیا جانا طے پایا۔وفد میں جناب نسیم اختر ندوی جناب کلام اجنبی جناب ابراہیم سجاد تیمی اور انجمن ترقی اردو کٹیھار کے صدر و سکریٹری دونوں میں سے کوئی ایک شامل ہوں گے،یہ وفد سب سے پہلے نوودے اسکول کولہا سی کٹیہار اور جے مالا نکیتن مرچائ باڑی کی زیارت کریں گے ۔اس ضمن میں یہ تجویز پیش ہوئی کہ بلاک پنچائت اور ضلع اور سیل کے ذمے داروں اور مترجمین کو اردو میں درخواستیں دی جائیں اور جہاں بحالیاں ہونی ہیں مثلا تھانہ پیمانے پر نائب تھانہ دار اور منشی کی تقرری اس ضمن میں حکومت کی توجہ مبذول کرائی جائے۔
٣- ایجنڈا نمبر تین کے تحت یہ ہے قرار پایا کہ ڈیلیگیشن کی شکل میں ضلع کے ڈی ایم ڈی ار ایم اور ڈی ای او سے مل کر تمام دفتروں میں اردو نیم پلیٹ لگوانے کی گزارش کی جائے۔
٤- اور چوتھے ایجنڈے پر گفت و شنید کے بعد یہ فیصلہ لیا گیا کہ مدارس و اسکول میں اردو کے طلبہ و طالبات کے مابین سلسلہ وار اردو کوئز منعقد کرانے کے لیے ایک کوئز بک تیار کرائی جائے جو تین حصوں پر مشتمل ہوں ابتدائیہ،ثانویہ،اور عالمیہ جب یہ بک تیار ہو جائے گی تو انجمن ترقی اردو کے عہدے داران و ممبران کے سامنے پیش کی جائے گی ۔
٥- انجمن ترقی اردو کٹیہار کے میڈیا انچارج بنانے پر تبادلہ خیال کیا گیا اور اتفاق رائے سے الیکٹرانک میڈیا کے لیے جناب کلام اجنبی اور پرنٹ میڈیا کے لیے جناب احمد حسین قاسمی و ابراہیم سجاد تیمی کو چن لیا گیا۔
وقت کی نزاکت کو دیکھتے ہوئے باقی پانچ ایجنڈوں پر بحث نہیں ہو سکی اور اگلی میٹنگ کے لیے چھوڑ دیا گیا اسی کے ساتھ صدر مجلس کی اجازت سے جناب مشتاق احمد ندوی نے تمام اراکین کا شکریہ ادا کرتے ہوئے مجلس کا اختتام کیا گیا۔
جناب نتیش کمار وزیر اعلیٰ بہار انمول ہے ،
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