Ejaz Ahmad

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Ejaz Ahmad صدر مدرسہ ٹیچرس اینڈ ویلفیئر ایسوسی ایشن کٹیہار ،
جنرل سکریٹری انجمن ترقی اُردو کٹیہار

30/07/2026
28/07/2026

ہر انسان کا سالِ پیدائش بتائے گا اس کی نسل اور اندازِ فکر: ماہرین کی اہم درجہ بندی
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​انسانی تاریخ، تمدن اور ٹیکنالوجی کی تیز رفتار تبدیلیوں نے نہ صرف دنیا کا نقشہ بدلا ہے بلکہ ہر دور میں پیدا ہونے والے انسانوں کی سوچ، مزاج اور زندگی گزارنے کے طریقوں پر بھی گہرے اثرات مرتب کیے ہیں۔ ماہرینِ اجتماع اور مؤرخین نے انسانوں کو ان کے سالِ پیدائش کے اعتبار سے مختلف نسلوں (Generations) میں تقسیم کیا ہے، تاکہ یہ سمجھنا آسان ہو سکے کہ کون سا طبقہ کس ماحول میں پروان چڑھا۔
​تصویر کے مطابق دنیا کی اہم نسلوں کی تاریخ اور ان کی خصوصیات کا احاطہ ذیل میں کیا جا رہا ہے:
​لوسٹ جنریشن (Lost Gen) — 1883 تا 1900:
یہ وہ نسل ہے جس نے پہلی جنگِ عظیم کے ہولناک حالات دیکھے۔ جنگی تباہ کاریوں اور عدم استحکام کی وجہ سے اس دور کے نوجوانوں کا ایک بڑا حصہ نفسیاتی اور سماجی الجھنوں کا شکار رہا، اسی لیے انہیں 'گمشدہ نسل' کہا گیا۔
​گریٹسٹ جنریشن (Greatest Gen) — 1901 تا 1927:
'عظیم ترین نسل' کہلانے والے ان افراد نے عالمی معاشی بحران (Great Depression) اور دوسری جنگِ عظیم کی سختیوں کا صابرانہ مقابلہ کیا۔ جنگ کے بعد دنیا کی ازسرِنو تعمیر میں اس نسل نے تاریخی کردار ادا کیا۔
​سائلنٹ جنریشن (Silent Gen) — 1928 تا 1945:
جنگ کے بعد کے پرتشدد اور نازک ماحول میں پرورش پانے والی اس نسل کو 'خاموش نسل' کہا جاتا ہے۔ یہ لوگ کسی بڑے احتجاج کے بجائے خاموشی سے محنت کرنے اور روایتی اقدار سے جڑے رہنے کے لیے جانے جاتے ہیں۔
​بیبی بومرز (Baby Boomers) — 1946 تا 1964:
دوسری جنگِ عظیم کے خاتمے کے بعد دنیا بھر میں شرحِ پیدائش میں غیر معمولی اضافہ ہوا، جس کے باعث اس نسل کو 'بیبی بومرز' کا نام ملا۔ انہوں نے عالمی معیشت کو مضبوط بنانے اور صنعتی انقلاب کو آگے بڑھانے میں اہم حصہ لیا۔
​جنریشن ایکس (Gen X) — 1965 تا 1980:
یہ وہ انقلابی نسل ہے جس نے تکنیکی تبدیلی کا ابتدائی دور دیکھا۔ کمپیوٹر، رنگین ٹی وی اور ابتدائی انٹرنیٹ کے سفر کی شروعات اسی دور میں ہوئی۔ اس نسل کے لوگ انتہائی خود مختار اور سخت محنتی تسلیم کیے جاتے ہیں۔
​ملینیئلز (Millennials) — 1981 تا 1996:
انہیں 'جنریشن Y' بھی کہا جاتا ہے۔ یہ وہ پہلی نسل ہے جس نے قدیم اور جدید دور کا مرحلہ وار سفر طے کیا۔ انہوں نے بچپن روایتی انداز میں گزارا جبکہ جوانی میں انٹرنیٹ، موبائل فون اور سوشل میڈیا کے طوفان کا استقبال کیا۔
​جنریشن زی (Gen Z) — 1997 تا 2012:
انہیں 'ڈیجیٹل نیٹیو' کا نام دیا گیا ہے، کیونکہ ان کی آنکھ اسمارٹ فونز اور تیز رفتار انٹرنیٹ کے دور میں کھلی۔ تکنیکی معاملات میں بے حد مہارت اور سوشل میڈیا پر فعال رہنا اس نسل کا بنیادی طرۂ امتیاز ہے۔
​جنریشن الفا (Gen Alpha) — 2013 تا 2024:
اکیسویں صدی کی یہ پہلی مکمل جدید نسل ہے، جس کی تعلیم و تربیت میں آرٹیفیشل انٹیلی جنس (AI)، آن لائن کلاسز اور اسمارٹ گیجٹس کا بنادی کردار رہا ہے۔
​جنریشن بیٹا (Gen Beta) — 2025 تا 2039:
آنے والے دنوں اور سالوں میں جنم لینے والی یہ نسل مکمل طور پر اے آئی (AI) اور جدید ترین خودکار سائنسی دنیا میں اپنی زندگی کا آغاز کرے گی۔
​جنریشن گاما (Gen Gamma) — 2040 تا 2054:
مستقبل بعید کی یہ نسل خلائی تحقیق اور حیرت انگیز تکنیکی پیشرفت کے ایک ایسے دور کا حصہ ہوگی جس کی صرف تصوراتی شکلیں آج ہمارے سامنے ہیں۔
​تجزیہ:
ماہرین کا ماننا ہے کہ سالِ پیدائش کے مطابق کی جانے والی یہ درجہ بندی صرف اعداد و شمار کا کھیل نہیں، بلکہ یہ ہمیں مختلف عمر کے لوگوں کے رویوں اور ان کے نقطۂ نظر کو سمجھنے کا بہترین طریقہ فراہم کرتی ہے۔

29/09/2025

🌟 बिहार का सपना, हमारा वोट! 🌟

🔥 बिहार की गलियों, खेतों और कस्बों में चुनाव की गूँज है!
हर पार्टी वादे करती है, हर रैली में नारे लगते हैं…
लेकिन जनता के दिलों में छुपा सपना सबसे बड़ा है:

🌱 किसान का सपना: खेतों में पानी और फसल की उचित कीमत
💼 युवा का सपना: अपनी ज़मीन पर नौकरी और व्यवसाय के अवसर
🎓 माँ का सपना: बच्चों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरीन सुविधा
🕊️ बुजुर्ग की दुआ: शांति और खुशहाली

✅ यह चुनाव सिर्फ कुर्सी का खेल नहीं, यह बिहार के उज्जवल भविष्य का फैसला है!
अगर हम अपने सपनों को प्राथमिकता दें, तो वादे हकीकत बनेंगे और हर व्यक्ति के लिए नया सवेरा आएगा!

✨ अपने वोट से बिहार का भविष्य उज्जवल बनाएं! ✨

#बिहार2025 #चुनाव #आशाऔरविकास #नयसवेरा #जनता_का_अधिकार

26/09/2025

आज का बिहार और मुसलमानों की राजनीतिक ताक़त — एक शोधपरक समीक्षा
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प्रस्तावना

बिहार की राजनीति में मुसलमान आबादी के लिहाज़ से हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। राज्य में लगभग 17 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, जो 50 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों और कई संसदीय सीटों पर परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। यही कारण है कि हर बड़ी राजनीतिक पार्टी मुसलमानों का वोट हासिल करने के लिए संघर्ष करती है। लेकिन सवाल यह है कि आज़ादी के बाद से अब तक क्या किसी पार्टी ने मुसलमानों को वह हक़ दिया, जिसके वे हक़दार थे? हक़ीक़त यही है कि सबने वोट तो लिया, लेकिन हक़ देने के मामले में सिर्फ़ वादे ही किए गए।

आरजेडी और मुसलमानों की राजनीति

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने दशकों तक मुसलमानों को अपना मज़बूत वोट बैंक बनाया। लालू प्रसाद यादव के दौर में यह कहा जाता था कि "मुसलमान और यादव" आरजेडी की जीत की गारंटी हैं। मुसलमानों ने भर-भर कर वोट दिया, लेकिन बदले में उन्हें राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर वह हिस्सेदारी नहीं मिली, जिसके वे हक़दार थे। प्रतिनिधित्व मिला भी तो सीमित स्तर पर, और विकास के असली दरवाज़े आज भी उनके लिए बंद हैं।

सेक्युलर गठबंधन और मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन

महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस और अन्य सेक्युलर दल) हमेशा खुद को मुसलमानों का संरक्षक बताते रहे हैं, लेकिन अगर उनके रिकॉर्ड पर नज़र डालें तो वे केवल "हमदर्दी की राजनीति" करते दिखते हैं। दूसरी ओर, मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने सीमांचल में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है और वहाँ के पिछड़े मुसलमानों की बात की है, लेकिन वोटों के बँटवारे का ख़तरा भी सच्चाई है। यही बँटवारा मुसलमानों की असली ताक़त को कमज़ोर करता है।

जेडीयू और मुसलमानों का रवैया

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समय-समय पर मुसलमानों के लिए कुछ सकारात्मक कदम उठाए, जैसे अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड और शैक्षिक योजनाएँ। लेकिन बीजेपी के साथ गठबंधन ने उनकी इस छवि को नुक़सान पहुँचाया। नतीजा यह है कि मुसलमान जेडीयू को लेकर हमेशा शक और संशय में रहते हैं।

सीमांचल और शेरशाहाबादी तबक़ा — एक नज़रअंदाज़ किया हुआ इलाक़ा

बिहार का सीमांचल क्षेत्र (किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार आदि) मुसलमानों की बहुसंख्यक आबादी वाला इलाक़ा है, जहाँ ख़ास तौर पर शेरशाहाबादी तबक़ा बड़ी तादाद में रहता है। यह तबक़ा ग़रीबी, बेरोज़गारी, शिक्षा की कमी और बुनियादी सुविधाओं से महरूम है। लेकिन हक़ीक़त यह है कि सभी राजनीतिक दलों ने इस क्षेत्र को हमेशा नज़रअंदाज़ किया। यहाँ के लोगों को सिर्फ़ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया, उनके मसलों पर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। यह एक ऐसा "लम्हा-ए-फ़िकरिया" है जिस पर न केवल वहाँ के लोग बल्कि पूरे बिहार के मुसलमानों को सोचना होगा।

निष्कर्ष और सुझाव

विश्लेषण यह बताता है कि अब तक किसी भी पार्टी ने मुसलमानों को वह हिस्सेदारी और न्याय नहीं दिया, जिसके वे हक़दार हैं। आरजेडी ने सबसे अधिक वोट तो लिए मगर समान प्रतिनिधित्व नहीं दिया। सेक्युलर गठबंधन ने वादे किए मगर पूरे नहीं किए। जेडीयू ने कभी नज़दीकी तो कभी दूरी का रवैया अपनाया। और मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन की आमद से नई आवाज़ तो पैदा हुई, लेकिन इससे वोटों के बँटवारे का ख़तरा भी बढ़ गया।

इसलिए मुसलमानों के लिए ज़रूरी है कि वे एकजुट और जागरूक राजनीतिक रणनीति अपनाएँ। वोट देने से पहले केवल नारों या भावनाओं पर नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रदर्शन और भविष्य की नीतियों को देखकर फ़ैसला करें। सीमांचल जैसे इलाक़े और शेरशाहाबादी जैसे तबक़े की महरूमी दूर करना किसी भी राजनीतिक दल की प्राथमिकता होनी चाहिए। वरना यह महरूमियाँ और नज़रअंदाज़ किए जाने का सिलसिला हमेशा जारी रहेगा।

16/09/2025

पूर्णिया हवाई अड्डे का उद्घाटन — सीमांचल की तक़दीर बदलने की दिशा में...................................................

पूर्णिया हवाई अड्डे का प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन सीमांचल के लिए केवल एक विकासात्मक कदम नहीं, बल्कि वर्षों की उपेक्षा और प्रतीक्षा के बाद नई उम्मीदों की किरण है। यह इलाका हमेशा से पिछड़ेपन, पलायन और नज़रअंदाज़ किए जाने का शिकार रहा है। आज जब सीमांचल सीधे देश के हवाई नक्शे पर जुड़ गया है तो यह सिर्फ़ एक सपने की ताबीर नहीं, बल्कि संभावनाओं के नए दरवाज़े खुलने का संकेत भी है।

सीमांचल अपनी उपजाऊ ज़मीनों, मखाने, जूट और सब्ज़ियों की पैदावार के लिए पहचाना जाता है, लेकिन मंडियों तक समय पर पहुंच न होने के कारण किसानों को अक्सर नुकसान उठाना पड़ता है। अब हवाई संपर्क से इन उपजों को बड़े शहरों तक पहुंचाना आसान होगा, जिससे इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई जान मिल सकती है। इसी तरह, उच्च शिक्षा और इलाज के लिए दूर-दराज़ शहरों जाने वाले छात्रों और मरीज़ों के लिए भी यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं। कारोबार और पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी और इससे रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे।

हालाँकि, यह सच्चाई नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती कि केवल उद्घाटन ही काफ़ी नहीं है। हवाई अड्डे को सफल बनाने के लिए कुछ बुनियादी पहलुओं पर तुरंत ध्यान देना होगा। सबसे पहला सवाल किरायों का है। अगर टिकट आम आदमी की पहुँच से बाहर रहे तो यह सुविधा केवल कुछ सम्पन्न वर्ग तक सीमित रह जाएगी। दूसरा बड़ा चुनौती बुनियादी ढांचे की है। हवाई अड्डे तक पहुँचने के लिए सड़कों और परिवहन के बेहतर इंतज़ाम ज़रूरी हैं। इसके साथ-साथ नियमित उड़ानों की उपलब्धता भी आवश्यक है, वरना उद्घाटन का जोश जल्दी ही मायूसी में बदल सकता है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह उद्घाटन सरकार के लिए एक बड़ा संदेश है। यह कदम इस क्षेत्र की जनता को यह भरोसा दिलाने की कोशिश है कि वे राष्ट्रीय विकास की धारा में बराबर के सहभागी हैं। लेकिन यह विश्वास तभी स्थायी होगा जब योजना ज़मीनी सच्चाइयों के साथ आगे बढ़े। सीमांचल की जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं है, वह वास्तविक बदलाव चाहती है।

पूर्णिया हवाई अड्डे का उद्घाटन एक ऐतिहासिक पड़ाव अवश्य है, मगर असली परीक्षा अभी बाकी है। अगर सरकार ने किराए आम जनता की पहुँच में रखे, बुनियादी ढांचे को मज़बूत किया और उड़ानों को नियमित किया, तो यह परियोजना सीमांचल की तक़दीर बदलने का साधन बन सकती है। अन्यथा, यह सिर्फ़ एक राजनीतिक दिखावा बनकर रह जाएगी। जनता की इच्छा है कि यह हवाई अड्डा क्षेत्र की उपेक्षाओं को दूर करने और विकास की राहों को रोशन करने वाला वास्तविक साधन बने।

05/09/2025

رسالة بمناسبة يوم المعلم
مقدمة من: أعجاز أحمد القاسمي
مدير: مدرسة إصلاح المسلمين، دادن غاٹ، براري، كتيهار

الحمد لله رب العالمين، والصلاة والسلام على سيد المرسلين، وعلى آله وأصحابه أجمعين.

أبنائي وبناتي الأعزاء!
السلام عليكم ورحمة الله وبركاته

إن يوم المعلم مناسبة عظيمة نتذكر فيها فضل المعلمين ومكانتهم السامية، فهم ورثة الأنبياء وحملة مشاعل العلم. المعلم هو الذي ينير عقولنا بالمعرفة، ويهذب أخلاقنا، ويزرع فينا القيم الفاضلة.

المعلم أشبه بالشمعة التي تحترق لتضيء لغيرها الطريق، وأشبه بالبستاني الذي يعتني بالزهور حتى تثمر وتزهر. ولولا جهود المعلمين ما نهضت الأمم ولا ازدهرت الحضارات.

أبنائي الأعزاء، أوصيكم بثلاث وصايا:

1. احترام المعلم، فهو حق بعد حق الوالدين.

2. الحرص على العلم، فهو النور الذي يبدد ظلام الجهل.

3. التحلي بالأخلاق الفاضلة، فهي زينة طالب العلم وسرّ نجاحه.

فلنُجدّد في هذا اليوم العهد على أن نكرم معلمينا، ونصغي إلى توجيهاتهم، ونحفظ مكانتهم في قلوبنا.

المعلم الحق يزرع الأمل في النفوس، ويوقظ الطموحات، ويغرس بذور العلم التي تبقى خالدة مدى الحياة.

وفقكم الله جميعًا للعلم النافع والعمل الصالح، وجعلنا وإياكم من عباده المخلصين.

وكل عام وأنتم بخير بمناسبة يوم المعلم.

01/03/2025

ترانے میں مدرسہ دادن گھاٹ کے طلبہ و طالبات تعلیمی سال کے آخری دن

28/02/2025

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