NRBC or NRST Centre Kafloo

NRBC or NRST Centre Kafloo Non Residential Bridge Course Center/ Non Residential Special Training Center under SSA Mandi A special training center under SSA Mandi Himachal Pradesh

16/09/2024

#साहब
जब साहब रिटायर होते हैं !
तब उनका सरकारी बँगला ,उसका हरा भरा लॉन ,
ड्राईवरों ,चपरासियों के साथ बिना नागा नमस्ते करने वालों की भीड एकाएक साथ छोड जाती है ..

चूँकि
वो हमेशा से यह माने बैठा था कि
वह बेहद ज्ञानी है !

दफ़्तर चलना मुश्किल होगा ..उसके बिना !

लोग
आयेंगे सलाह मशविरे के लिये !
मार्गदर्शन देने लिये बैचैन रिटायर साहब उम्मीद भरी आँखों से तकता है मार्ग !

पर
अफ़सोस !
कोई नही फटकता !

वह
पाता है दुनिया उसकी उम्मीद से कहीं पहले बदल गयी है !

अब
उसे कार का दरवाज़ा ख़ुद खोलना पड़ता है और शॉपिंग के वक्त बिल भी ख़ुद ही चुकाना होता है !

बैचैन
साहब अब मिलन सार होने की कोशिश करता है !

शादी ,मुंडन से लेकर तेरहवीं तक के हर न्योते की इज़्ज़त करने लगता है !

वो
पाता है उसके सामने याचक बने रहने वाले रिश्तेदार अचानक निष्ठुर हो चले हैं!

हैरान
परेशान रिटायर साहब बाल डाई करना भूलने लगता है !

तेज़ी से बूढ़ा होता है !

चिड़चिड़ाहट लौट आती है .. उसकी !

हताश
साहब घर मे साहबी करने की कोशिश करता है और मुँह की खाता है !

अनमना बेटा कन्नी काटता है !
नाती पोते दूर भागते है ,
बीबी उसे नाक़ाबिले बर्दाश्त घोषित कर देती है !

और
बडे जतन से पाला पोसा गया कुत्ता तक उसे देख बेड के नीचे घुस जाता है !

ऐसे
में वो कुढ़ता है और नाशुक्री दुनिया को गरियाता है !

दुखी
बना रहता है और आस पास वालों को दुखी करता है !
रिटायर साहब और कर भी क्या सकता है ?

जब
तक जीता है साहब ! यही करता है !

इन
साहबों के अधिकतर बच्चे बहू बेटे नाती पोते इनसे दूर बहुत दूर विदेशों में या बड़े शहरों में शिफ्ट हो चुके होते हैं ..

ये
अपना स्वयं का बनाया आलीशान घर माया मोह के चक्कर में छोड़ नही पाते हैं ...

नतीजन
इनकी जिन्दगी अकेले ही कटती है ,

बीमारी अजारी में कोई साथ नही होता , खाना भी रुखा सूखा या फिर नौकर ने जो बना दिया ठूंसना पड़ता है '

खाने में मीन मेष की गुंजाईश नही रह जाती !
मरते वक्त भी कोई साथ नही होता ..

जब
शव से भयंकर बदबू आती है तभी बगल वाला पुलिस को फोन कर !!

उफ्फ
कितना डरावना और वीभत्स अमानवीय लगता है न ये सब ?

इन
सबके जिम्मेदार वो साहब खुद ही होते हैं क्यों ये माया जाल उन्ही का रचा होता है !

अतः
समय रहते सुधार आवश्यक है, ये साहबगिरि साठ साल तक का ही खेला है ऊपर सबका हिसाब होना है।
साहबी छोड़ मानवीयता अपनाओ ..
समाज और देश के लिए कुछ करो जिसके लिए यह साहबगिरी मिली है आपको।

09/09/2021
19/02/2018
18/02/2018
17/02/2018

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Karsog
175046

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Tuesday 10am - 4pm
Wednesday 10am - 4pm
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