05/02/2018
=>भारत अश्गाबात समझौते में शामिल,यूरेशिया क्षेत्र तक पहुँच होगी आसान
- भारत अश्गाबात समझौते में शामिल हो गया।चीन की वन बेल्ट-वन रोड (ओबोर) परियोजना के मुकाबले दुनिया के कई हिस्सों में कनेक्टिविटी बनाने की तैयारियों में जुटे भारत के लिए इस समझौते में शामिल होने के कई मायने हैं।
- सबसे पहले तो भारत ओमान, ईरान, तुर्केमिनिस्तान और उज्बेकिस्तान की सड़क, रेल व बंदरगाह परियोजनाओं में हिस्सेदारी ले सकेगा जिससे चीन के एकाधिकार को चुनौती मिलेगी।
- भारत को इससे एक बड़ा फायदा यह होगा कि चाबहार पोर्ट (ईरान) के जरिए वह यूरेशिया क्षेत्र के बाजारों में अपने उत्पाद भेज सकेगा।
- ओमान, ईरान, तुर्केमिनिस्तान और उज्बेकिस्तान के बीच अशगाबात समझौता वर्ष 2011 में हुआ था। भारत ने इसमें शामिल होने का प्रस्ताव पिछले वर्ष किया था जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।
- तुर्केमिनिस्तान सरकार ने 01 फरवरी को भारत को सूचित किया है कि 03 फरवरी, 2018 से उसे इसका सदस्य बनाया जा रहा है।
- अशगाबात समझौते में शामिल होने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत केंद्रीय एशिया के साथ ही पूर्वी यूरोप के बाजार में तेजी से अपने उत्पाद पहुंचाने में सफल हो सकेगा। चूंकि ईरान भी इसका एक अहम सदस्य है तो भारत की तरफ से वहां बनाये जा रहे चाबहार पोर्ट की उपयोगिता और बढ़ जाएगी।
- यही नहीं भारत की मंशा यह भी है कि उसकी आर्थिक मदद से तैयार हो रहे नार्थ साउथ इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट कारीडोर (एनएसआइटीसी) से जोड़ा जाए।
=>अन्य महत्वपूर्ण बातें-
-अश्गाबात समझौता मध्य एशिया एवं फारस की खाड़ी के बीच वस्तुओं की आवाजाही को सुगम बनाने वाला एक अंतर्राष्ट्रीय परिवहन एवं पारगमन गलियारा है।
- अश्गाबात समझौते के संस्थापक सदस्यों में यमन, ईरान, तुर्कमेनिस्तान एवं उज्बेकिस्तान शामिल हैं।
इसके बाद इस समझौते से कजाकिस्तान भी जुड़ गया है।
- इस समझौते में सम्मिलित होने से भारत को यूरेशिया क्षेत्र के साथ व्यापार एवं व्यावसायिक मेल-जोल बढ़ाने में इस मौजूदा परिवहन एवं पारगमन गलियारा का उपयोग करने में मदद मिलेगी।
=>एनएसआइटीसी भारत की इंटरनेशनल कनेक्टिविटी की सबसे महत्वाकांक्षी योजना है जिसके तहत रेल, सड़क व जल मार्ग से ईरान, अफगानिस्तान, अर्मेनिया, अजरेबेजान, रुस के अलावा केंद्रीय एशिया के कुछ देशों को जोड़ा जाना है।
- एक अनुमान के मुताबिक इस मार्ग से भारतीय उत्पादों को केंद्रीय एशिया में भेजना न सिर्फ 30 फीसद सस्ता पड़ेगा बल्कि इसे 40 फीसद कम समय में भेजा जा सकेगा। जानकार मानते हैं कि अशगाबात समझौता और एनएसआइटीसी का गठजोड़ चीन की ओबोर का एक हद तक सामना कर सकता है