Farishteh

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Photos from Farishteh's post 28/11/2025

*संसार में सबसे शक्तिशाली परमात्म ऊर्जा का केंद्र स्थान मधुबन है, जहाँ संसार की पवित्र आत्माएँ परमात्मा से सम्मुख मिलन मनाती है, लेकिन व्यक्त मधुबन में मिलन की और समय की लिमिटेशन होती है, पर अव्यक्त बापदादा के साथ मधुबन भी अव्यक्त है अव्यक्त वतन मधुबन में ना समय की कोई लिमिटेशन, ना मिलन की कोई लिमिटेशन। वहाँ मिलन मनाओ बापदादा का खुला निमंत्रण है। वहाँ ना कोई छोटा बड़ा, ना कोई भेदभाव, ना कोई टकराव। वहाँ आओ और बापदादा के साथ पवित्र फरिस्ता बन सकाश देने की सेवा करो, बापदादा का खुला निमंत्रण है।*

Photos from Farishteh's post 03/11/2025
Photos from Farishteh's post 30/10/2025

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*तो फिर हम अभुल कैसे बने ?*

🔸 परमात्मा की स्मृति कैसे रहे ? हम ईश्वरीय मर्यादा का उल्लंघन करने की जो भूल करते है उसके लिए क्या करे ? भूले रिपीट न हो उसके लिए क्या करें ? बार बार जो भूल होती है उस आदत से छूटने के लिए क्या करे ?

🔸ज़िम्मेवार व्यक्ति से कम भूले होती है क्योंकि वह सोचता है कि अगर नुकसान हुआ तो सब क्या कहेंगे ? प्रभु के यज्ञ में नुकसान हुआ तो मैं कितना पाप का भागीदार बनूँगा। वह पूरे ध्यान और ज़िम्मेवारी से अपना कार्य करेगा। वह समझता है कि जो भी चुनातियों आएंगी मुझे स्वीकार करना है।

🔸भगवान कहते है कि यह संगमयुग का समय है। कल्प कल्प का पार्ट और पोजीशन अभी के पुरुषार्थ पर निर्भर है। एक भूल की तो सारा पार्ट खराब हो जाएगा। इतनी ज़िम्मेवारी से अपना जीवन बिताएं ,अपना पार्ट बजाएं।

🔸ये नही सोचे कि भूलें तो सबसे होती है। भगवान कहते है कि आपको सन्तुष्टता का सर्टिफिकेट लेना है। अगर ध्यान नही देते ,जो मर्ज़ी बोलते रहते है ,करते रहते है तो इसका अर्थ है कि आप अपना पार्ट खराब करना चाहते है ,अपनी ज़िम्मेवारी का एहसास नही है ,ज्ञान की गहराई में नही गए है ,परमात्मा से मिलन का अनुभव नही किया है। इन कमियों को दूर कर ज़िम्मेवार बनकर चले तो अभुल बन जाएंगे ,दुखो से छूट जाएंगे।

*(परमात्मा की शिक्षाओं का स्पष्टीकरण : जगदीश भाई )*

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21/10/2025

फरिश्ता सदा ही ऊपर से नीचे आता है, फिर नीचे से ऊपर उड़ जाता है। फरिश्ता सेकण्ड में ऊंचा क्यों उड़ जाता? क्योंकि उसका कोई लगाव नहीं होता-न देह से, न देह की पुरानी दुनिया से। तो चेक करो कि लगाव की कोई जंजीरें रही हुई तो नहीं हैं? अगर कोई भी लगाव की जंजीर वा धागा लगा हुआ होगा तो उड़ सकेंगे? वह रस्सी वा धागा खींचकर नीचे ले आयेगा। तो फरिश्ता अर्थात् जिसका पुरानी दुनिया से कोई रिश्ता नहीं हो। ऐसे है या थोड़ा-थोड़ा रिश्ता है? मोटे-मोटे धागे खत्म हो गये। सूक्ष्म कोई रह तो नहीं गये? बहुत महीन धागे हैं। ऐसे न हो-मोटे-मोटे को देखकर समझो कि स्वतन्त्र हो गये और जब उड़ने लगो तो नीचे आ जाओ। तो सूक्ष्म रीति से चेक करो। अंश-मात्र भी नहीं हो। सुनाया था ना कि कई बच्चे कहते हैं-इच्छा नहीं है कोई चीज की लेकिन अच्छा लगता है। तो यह क्या हुआ? अंश-मात्र हो गया ना। जो चीज़ अच्छी लगेगी वह अपनी तरफ आकर्षित करेगी ना। तो ‘इच्छा’ है मोटा धागा और ‘अच्छा’ है सूक्ष्म धागा। मोटा तो खत्म कर दिया, लेकिन सूक्ष्म है तो उड़ने नहीं देगा।
Av 1992

18/10/2025

*🩵 मैं फरिश्ता उड़ चला आकाश मे परमधाम की ओर जहां मेरे परमात्मा शिवबाबा मेरी छत्रछाया बन गए है.*

*🩵 बाबा से दिव्य शक्तियों का प्रकाश निकल मुझ आत्मा मे समा रहा है.*

*🩵 मै परमात्मा की संतान विश्व कल्याणकारी फरिश्ता हूं.*

*🩵 मै फरिश्ता परमात्मा की इन किरणों को नीचे धरती को दे रहा हूं. मुझ आत्मा से सुख शान्ति और शक्तियों की किरणें निकल मेरे धरती मां मे समाती जा रहीं है.*

*🩵 संम्पूर्ण पृथ्वी पावन हो रहा है.*

*🩵 धरती मां मुझे दिल से दुआएं दे रही हैं.*

*🩵 हे धरती मां, 5000 वर्ष आपने मुझे सुख दिया है, मेरी पालना की है.*

*🩵 मै आपको दिल से शुक्रिया कहता हूं. इन पवित्रता की किरणों से धरती मां शान्त हो चुकी है.*

*🩵 यह धरती मां सम्पूर्ण प्रसन्न अवस्था में मुझ आत्मा को आशीर्वाद दे रहीं है और मुझ आत्मा को वरदान दे रहीं हैं - सम्पूर्ण निरोगी भव. प्रकृतिजीत भव, सदा सुखी भव.*

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