19/08/2026
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल तो खड़े किए गए? आंदोलन भी हुए! सरकार को झुकना भी पड़ा! शिक्षा मंत्री का स्तीफा भी लेना पड़ा!
इतना सब कुछ होने के बावजूद युवाओं के प्रदर्शन राज्य दर राज्य बढ़ते ही जा रहे झारखंड तथा बिहार जिसके उद्धरण है
किंतु मूल प्रश्न तो यह है कि क्या सिर्फ़ सवाल खड़ा कर देने से इन आंदोलनों को सफल माना जा सकता है ?
क्या युवाओं का इस्तेमाल राजनीति के लिए राजनेता नहीं कर रहे?
क्या अभी तक किसी भी राजनेता या राजनीतिक दल ने कोई भी ठोस उपाय या सुझाव शिक्षा की व्यवस्था को सुधारने तथा पेपर लीक को रोकने के लिए सरकार को दिए ?
एक कहावत से शुरुआत करूंगा जो कि प्रत्येक राजनीतिक दल तथा राजनेताओं के लिए
चलनी माँ दूध दुहो और कर्मन का दोष देओ
जहाँ तक मेरी जानकारी है
इस देश में हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट के रिजल्ट पर यदि गौर करें तो पहले की कल्याण सिंह की सरकार हो या फिर बहन मायावती जी की इनके शासन में रिजल्ट का % प्रतिशत क्या था?
तथा मौजूद सरकार तथा इससे पहले कि सरकारों में रिजल्ट का प्रतिशत % क्या रहा?
इस सवाल के हल में आपको बिगड़ती हुई शिक्षा व्यवस्था के कारण उपजती हुई बेरोजगारी तथा बेरोजगारी से उत्पन्न होती अराजकता साफ देखने को मिल सकती है?
एक दौर वो था जब हाइस्कूल पास कर लेना ही महारत का काम हुआ करता था उसके लिए छात्र दिन रात मेहनत करते थे मैने ऐसे लोग भी देखे है जिन्हों ने पंचवर्षीय योजना तक बना डाली हाईस्कूल पास करने में और हम ऐसे उदाहरण दे भी सकते है इसी समाज में आज भी वो लोग है ?
एक दौर ये है जिसमें बच्चे को पहले से ही पता है कि पास तो हो ही जाएंगे पढ़ने लिखने की क्या आवश्यकता है ?
कुछ जो पढ़ने लिखने वाले योग्य बच्चे है भी तो इन गधों की भींड को आगे करने में उनकी काबलियत निर्ममता से कुचल जाती है और वो बेचारे गेहूं में घुन की तरह इस देश की शिक्षा व्यवस्था में पिस जाते हैं?
जब बच्चा हाइस्कूल इंटर पास कर लेता है तो कॉलेज में सीट के लिए जद्दोजहद उसके बाद सरकारी नौकरी के लिए जद्दोजहद उसके बाद कहीं कोई खामी रह जाए तो इनकी इतनी संख्या हो जाती है कि ये कहीं भी इस्तेमाल किए जा सकते है अराजकता हो या राजनीति दोनों ही इनके कंधों के इस्तेमाल से की जा सकती है ?
इनकी यौवन अवस्था मिट्टी के उस घड़े के समान है जिसे इशारों से कहीं भी कोई भी आकार दे सकता है ?
इसी का लाभ कहीं न कहीं विपक्षी दल उठा रहे है आगे भी उठाने का प्रयास कर सकते है ?
अच्छा ये जो बिना पढ़े लिखे पास होने वाले छात्र है इनके साथ सबसे बड़ी समस्या क्या है ?
समस्या ये है कि हांथ में डिग्री है तो 4rth ग्रेड की नौकरी इनके शान के खिलाफ हो जाती है और भीतर से इतने खोखले है कि अफसर बाबू ये बन नहीं सकते तो इन्हीं बेरोजगारों ने आज सरकार के माथे पर पसीना ला दिया ?
मेरी निजी सोच
#भारतीय
#किसान
#श्रमिक
#युवा
जय हिंद जय अखंड भारत