20/11/2025
🌀 कर्मों की गुह्य गति 🌀
जैसा कर्म, वैसा फल
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान के यह महावाक्य हैं – ‘ हे वत्स ! कर्म, अकर्म और विकर्म की गति अति गहन है इसे पंडित और विद्वान भी नहीं जानते, इसलिए तू कर्म-गति का ज्ञान मुझसे ही प्राप्त कर । ‘
कर्मों की गुह्य गति का🙅🏼♂️ ज्ञान न होने के कारण .….जब मनुष्य धर्म भ्रष्ट और कर्म भ्रष्ट हो जाता है..... चारों और असत्य , हिंसा, अधर्म 😟का बोलबाला हो जाता है तब ☝🏻खुद परमात्मा मनुष्य के कल्याण करने☝🏼कर्मों की गुह्य गति का राज🪩 समझाने के लिए 🌎इस धरती पर आते हैं 🪄।
*इस #राजयोग परमात्म-ज्ञान को धारण कर ...आचरण में लाने से मनुष्य का कर्म श्रेष्ठ बनता है ।कर्म के नियम अनुसार श्रेष्ठ कर्म का फल भी श्रेष्ठ मिलता है।
इस संसार में दो बातों की गुह्य गति मानी जाती है ।
*1️⃣समय की गुह्य गति अर्थात कालचक्र ।*
#सृष्टिचक्र
*2️⃣कर्म की गुह्य गति ।*
*इन दोनों को गुह्य गतियों का परस्पर गहरा संबंध 🫴होने के साथ ही हमारे जीवन और पिछले जन्मों से कर्म और संस्कार से भी बहुत गुह्य संबंध है ।*
*यह तो सब मानते है की इस संसार का प्रत्येक कार्य,कारण और परिणाम के नियम/ law of action and reaction कर्म और उसका निश्चित फल में बंधा हुआ है।*
*👉🏽🌧️अर्थात ऐसी कोई घटना नही घटती जिसके पीछे कोई कारण न हो ।*
*ऐसा कोई कर्म नही जिसका परिणाम न निकलता हो।*
कर्म की शुरुआत संकल्प से होती है।
जैसी सोच वैसा जीवन।
इसलिए गलत सोच चलाना भी आत्मा को सजा का पात्र बनाता है।जिसे हम कहते है नेगेटिव थिंकिंग जिससे मन कमजोर हो जाता है और जीवन में दुख अनुभव होता।
🇲🇰कर्म के सिद्धांत का अटल नियम है।👇🏼
🪨जो करेगा सो पाएगा,
🌝जैसा करेगा वैसा पाएगा,
🌞जितना करेगा उतना पाएगा!
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय