21/08/2026
सावन मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी कब है? Purada ekadshi 2026, पुत्रदा एकादशी कब है 2026 में, पवित्रा एकादशी व्रत 2026.
एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित महत्वपूर्ण व्रत में से एक है इस दिन विधि विधान से पूजा और व्रत करने से सुख समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
आईए जानते हैं साल 2026 में श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी की सही तारीख पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।
पुत्रदा एकादशी 2026
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी या पवित्रा एकादशी के नाम से जाना जाता है।
हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने से संतान सुख, संतान के उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख समृद्धि की कामना पूरी होती है।
इस साल 2026 में श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त रविवार को रखा जाएगा।
माना जाता है कि इस पवित्र तिथि पर सच्ची श्रद्धा और नियम पूर्वक व्रत पूजन करने से भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही परिवार में सुख शांति बनी रहती है।
आईए जानते हैं पुत्रदा एकादशी की सही तिथि पूजा का शुभ मुहूर्त और इसके धार्मिक महत्व के बारे में..
एकादशी तिथि कब है और पूजा का समय
पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026 रविवार को मनाई जाएगी।
एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात्रि 2:00 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त को सुबह 4:18 मिनट तक रहेगी।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ समय सुबह 5:30 से लेकर दोपहर 12:30 मिनट तक रहेगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन श्रद्धा पूर्वक श्री हरि का स्मरण और पूजन करने से मन को शांति मिलती है और परिवार में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
पुत्रदा एकादशी व्रत की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, और स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प करें।
घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करने के बाद एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
भगवान विष्णु के सामने दीपक और धूप जलाएं और उन्हें फूल माला आदि अर्पित करें।
पूजा में रोली, कुमकुम, नैवेद्य सहित अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन सामग्री अर्पित करें।
भगवान विष्णु को तुलसी दल जरूर अर्पित करें, क्योंकि विष्णु पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है।
इसके बाद पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें, और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें
पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख समृद्धि व संतान के कल्याण की प्रार्थना करें।
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