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सावन मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी कब है? Purada ekadshi 2026, पुत्रदा एकादशी कब है 2026 में, पवित्रा एकादशी व्रत ...
21/08/2026

सावन मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी कब है? Purada ekadshi 2026, पुत्रदा एकादशी कब है 2026 में, पवित्रा एकादशी व्रत 2026.

एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित महत्वपूर्ण व्रत में से एक है इस दिन विधि विधान से पूजा और व्रत करने से सुख समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है।

आईए जानते हैं साल 2026 में श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी की सही तारीख पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व।

पुत्रदा एकादशी 2026

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी या पवित्रा एकादशी के नाम से जाना जाता है।

हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करने से संतान सुख, संतान के उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख समृद्धि की कामना पूरी होती है।

इस साल 2026 में श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त रविवार को रखा जाएगा।

माना जाता है कि इस पवित्र तिथि पर सच्ची श्रद्धा और नियम पूर्वक व्रत पूजन करने से भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही परिवार में सुख शांति बनी रहती है।

आईए जानते हैं पुत्रदा एकादशी की सही तिथि पूजा का शुभ मुहूर्त और इसके धार्मिक महत्व के बारे में..

एकादशी तिथि कब है और पूजा का समय

पंचांग के अनुसार श्रावण शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी 23 अगस्त 2026 रविवार को मनाई जाएगी।

एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात्रि 2:00 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त को सुबह 4:18 मिनट तक रहेगी।

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ समय सुबह 5:30 से लेकर दोपहर 12:30 मिनट तक रहेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन श्रद्धा पूर्वक श्री हरि का स्मरण और पूजन करने से मन को शांति मिलती है और परिवार में सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

पुत्रदा एकादशी व्रत की पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, और स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प करें।

घर के पूजा स्थान की अच्छी तरह सफाई करने के बाद एक चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

भगवान विष्णु के सामने दीपक और धूप जलाएं और उन्हें फूल माला आदि अर्पित करें।

पूजा में रोली, कुमकुम, नैवेद्य सहित अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजन सामग्री अर्पित करें।

भगवान विष्णु को तुलसी दल जरूर अर्पित करें, क्योंकि विष्णु पूजा में तुलसी का विशेष महत्व माना जाता है।

इसके बाद पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें, और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें

पूजा के अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख समृद्धि व संतान के कल्याण की प्रार्थना करें।

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Palmistry: हाथ में शुक्र पर्वत पर विविध प्रकार के चिन्हों का फल ? Palmistry signs, hast rekha kaise dekhe.🙏 जय श्री राधे...
21/08/2026

Palmistry: हाथ में शुक्र पर्वत पर विविध प्रकार के चिन्हों का फल ? Palmistry signs, hast rekha kaise dekhe.

🙏 जय श्री राधे 🙏

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आज हम बात करेंगे हाथ में शुक्र पर्वत पर विविध प्रकार के चिन्हों के बारे में तो आइए जानते हैं...

यदि शुक्र पर्वत पर त्रिभुज का चिन्ह है तो व्यक्ति भौतिकवादी होता है।

यदि शुक्र पर्वत पर तीन रेखाएं हैं तो वह व्यक्ति तनावपूर्ण जीवन व्यतीत करता है।

यदि शुक्र पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह है तो उसे बदनामी मिलती है।

यदि शुक्र पर्वत पर काला तिल है तो उसे गुप्तांग से कष्ट होता है तथापि कामी अधिक होता है ऐसे व्यक्ति प्रेम के क्षेत्र में गंभीर नहीं होते।

यदि शुक्र पर्वत पर वृत्त का चिन्ह है तो व्यक्ति भोगी और कामी होता है। यदि चिन्ह गहरा तथा स्पष्ट हो तो नपुंसक होगा।

यदि शुक्र पर्वत पर द्वीप का चिन्ह है तो उसका पारिवारिक जीवन अत्यंत कष्टदाई होता है। जीवन में निराशाएं बहुत मिलती हैं।

यदि शुक्र पर्वत पर वर्ग का चिन्ह है तो उसका प्रेम विवाह होता है। यह प्रेम के क्षेत्र में अत्यधिक सावधानी से काम लेते हैं इसलिए बदनामी से बचते रहते हैं।

यदि शुक्र पर्वत में जाल का चिन्ह हो तो व्यक्ति आवश्यकता से अधिक भोगी होगा।

शुक्र पर्वत पर नक्षत्र या तारे का चिन्ह हो तो उस व्यक्ति का संबंध पत्नी के अलावा कई अन्य महिलाओं से होता है।

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Raksha Bandhan Kab Hai 2026 | रक्षाबंधन कब है 2026 | Rakhi Kab Ki Hai | Chandra Grahan Kab Lagega.आप सभी मित्रों का हम अ...
20/08/2026

Raksha Bandhan Kab Hai 2026 | रक्षाबंधन कब है 2026 | Rakhi Kab Ki Hai | Chandra Grahan Kab Lagega.

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आज हम इस आर्टिकल में आपको बताएंगे साल 2026 में रक्षाबंधन कब है। चंद्र ग्रहण का समय, राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और भद्रा कब से कब तक रहेगी।

सावन मास की पूर्णिमा को भद्रा रहित मुहूर्त में रखी या रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। रक्षाबंधन भाई बहन के पवित्र रिश्ते, स्नेह और प्रेम का प्रतीक है। ज्योतिष के अनुसार इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण का साया भी रहेगा। जिस कारण रक्षाबंधन कब मनाएं इसे लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं साल 2026 में रक्षा बंधन कब है। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त, चंद्र ग्रहण का समय, भद्रा कब से कब तक रहेगी।

रक्षा बंधन कब है 2026

👉 साल 2026 में रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार 28 अगस्त को मनाया जायेगा।
👉 पूर्णिमा प्रारंभ ÷ 27 अगस्त प्रातः 09 : 08 मिनट।
👉 पूर्णिमा समाप्त ÷ 28 अगस्त प्रातः 09 : 48 मिनट।

भद्रा कब से कब तक रहेगी

👉 भद्रा प्रारंभ ÷ 27 अगस्त प्रातः 09 : 08 मिनट।
👉 भद्रा समाप्त÷ 27 अगस्त रात्रि 09 : 28 मिनट।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

✅ ज्योतिष के अनुसार इस बार रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को भद्रा नहीं है। क्योंकि भद्रा 27 अगस्त को ही समाप्त हो जायेगी।
✅ जिस कारण पूरा दिन राखी बांधने के लिए शुभ है।
✅ राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 28 अगस्त प्रातः काल 05 : 51 मिनट से प्रातः काल 09 : 48 मिनट।
✅ अभिजित मुहूर्त प्रातः काल 11 : 56 मिनट से दोपहर 12 : 48 मिनट तक।

चन्द्र ग्रहण कब लगेगा

⚠️साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण शुक्रवार 28 अगस्त सावन पूर्णिमा रक्षा बंधन के दिन लगेगा।
⚠️भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को प्रातः काल 08 : 04 मिनट पर शुरू होगा।
⚠️ चंद्र ग्रहण समाप्त प्रातः काल 11 : 22 मिनट पर होगा।
⚠️ चंद्र ग्रहण का सूतक काल लगभग 8 घंटे पहले शुरू होता है।
✅ भारत में यह ग्रहण किसी भी स्थान पर दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक मान्य नहीं होगा।

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palmistry : टूटी हुई भाग्य रेखा का मतलब ? bhagya rekha in hand, luck line in palmistry.🙏 जय श्री राधे 🙏आप सभी मित्रों का...
20/08/2026

palmistry : टूटी हुई भाग्य रेखा का मतलब ? bhagya rekha in hand, luck line in palmistry.

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आज हम बात करेंगे हाथ में के बारे में तो आइए जानते हैं..

यदि भाग्य रेखा टूटी फूटी हो या छोटे छोटे टुकड़ों से बनी हो, तो जातक की जीवनवृत्ति में कठिनाइयां और बाधाएं आएंगी, और वह किसी भी काम पर स्थाई रूप से नही टिक सकेगा।

ऐसे व्यक्तियों को अपने जीवन में सफलता नहीं प्राप्त होती।

यदि भाग्य रेखा किसी एक स्थान पर टूटी हो, तो यह एक अशुभ चिन्ह है।

परंतु यदि टूट के स्थान से ऊपर की रेखा, उस स्थान के नीचे से आरंभ हो, जिससे टूट का स्थान ढक जाए, तो जातक के जीवन में बिल्कुल नया परिवर्तन आएगा।

और नई रेखा यदि अच्छी और सीधी हो तो यह परिवर्तन जातक के जीवन में उन्नति देने वाला होगा। यह परिवर्तन उस रेखा के आरंभ होने के समय घटित होगा।

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Palmistry: ऐसी रेखा वाली स्त्री प्रधानमंत्री पद तक प्राप्त करने में होती है समर्थ ? hast rekha gyan in hindi

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आज हम बात करेंगे हाथ में बुध पर्वत के बारे में तो आइए जानते हैं...

हस्त सामुद्रिक विज्ञान के अनुसार यदि किसी स्त्री के हाथ में बुध पर्वत उच्च हो, तो वह उच्च पद प्राप्त करती है।

ऐसी स्त्री प्रधानमंत्री तक का पद प्राप्त करने में भी समर्थ होती है। उसकी कीर्ती चारों ओर फैलती है।

लेकिन उसका चरित्र अच्छा नही होता। वह विलासिनी, नीच पुरषों में अनुरक्ता, नौकर एवं पड़ोसी से प्रेम करने वाली होती है।

ऐसी स्त्री किसी से अपनी बुराई नहीं सुन सकती। फिर भी उसका यश समाज में फैलता है। लोग उसका विश्वास करते हैं। अपने लोगों पर भी उसका प्रभाव बना रहता है।

नोट 🚫
हस्त रेखा शास्त्र में किसी एक रेखा या चिन्ह से पूर्ण फलादेश सत्य नही होता। उसके लिए हाथ में अन्य रेखा, चिन्ह और लक्षण देखना अनिवार्य है।

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18/08/2026

palmistry: हाथ में बुध पर्वत का महत्व? हस्त रेखा ज्योतिष, hast rekha vigyan.

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आज हम बात करेंगे हाथ में बुध पर्वत के बारे में तो आइए जानते हैं..
यह पर्वत कनिष्ठिका उंगली के बीच में होता है। यह पर्वत हस्त रेखा विज्ञान में इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह भौतिक समृद्धि का कारक है।

बुध प्रधान व्यक्ति जिस कार्य को आरंभ करते हैं उसे पूर्ण करके मानते हैं। ऐसे व्यक्ति बालू से भी पैसा कमाना जानते हैं।

ऐसे लोग तीव्र बुध के, शोधकार्य करने वाले, श्रेष्ठ वक्ता, परिस्थितियों से समझौता करने वाले, योजना बद्ध जीवन यापन करने वाले, विनोदी स्वभाव के होते हैं। ये लोग व्यापारिक क्षेत्र में अधिक सफलता प्राप्त करते हैं।

बुध पर्वत का अत्यधिक विकसित होना उत्तम नही होता है। ऐसे व्यक्ति धन प्राप्ति हेतु,अपराध करने में भी नही चूकते। लेकिन कई बार ये लोग कानून से बचते रहते हैं। ऐसे व्यक्ति धूर्त, धोखेबाज, विश्वासघाती, चालाक एवं स्वार्थी होते हैं।

जिन हथेलियों में बुध पर्वत सही रूप से विकसित होता है वे व्यक्ति श्रेष्ठ मनो वैज्ञानिक और व्यवहार कुशल होते हैं।

सामने वाले व्यक्ति को प्रभावित करके अपना कार्य करवाने की इनमे क्षमता होती है। ऐसा व्यक्ति चालक व चतुर होता है। व्यापारिक कार्यों में श्रेष्ठ व्यापारी, वकील, चिकित्सक, पत्रकार तथा नेता होते हैं।

यदि बुध पर्वत अविकसित हो तो ऐसे व्यक्ति नित्य अप्रसन्न रहने वाले, मंद बुद्धि, आलसी, परिजनों के विरोधी, एवं धन हीन होते हैं। स्नायु विकार, उदर विकार, त्वचा रोग से ऐसे व्यक्ति पीड़ित होते हैं।

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