Sirat e Mustaqeem

پیغامِ حق

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12/03/2024

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*रमज़ाने मुबारक के फ़ज़ाइल व मसाइल*

अज़ः
अमीरे अहले सुन्नत मुजद्दिदे दीनो मिल्लत हुज़ूर मुनाज़िरे आज़म रदियल्लाहो अन्हो

रोयते हिलालः
हदीसे पाक में है कि रोज़ा न रखो जब तक चाँद न देख लो और इफ़्तार न करो जब तक चाँद न देख लो और अगर चाँद न हो तो तादाद पूरी करो।
हदीसे पाक में है जब रमज़ाने मुबारक आता है, जन्नत व रहमत के दरवाजे़ खोल दिये जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे़ बंद कर दिये जाते हैं और शयातीन ज़ंजीरों में जकड़ दिये जाते हैं। पूरे रमज़ाने मुबारक मेें जन्नत व रहमत के दरवाजे़ खुले रहते हैं और जहन्नम के दरवाजे़ बंद रहते हैं और शयातीन कै़द रहते हैं। रमज़ाने मुबारक में सुन्नत का सवाब और महीनों के फ़र्ज़ की बराबर और फ़र्ज़ का सवाब दूसरे महीनों के सत्तर फ़र्ज़ें के बराबर है। रमज़ाने मुबारक में मोमिन का रिज़्क़ बढ़ा दिया जाता है। रमज़ाने मुबारक में जो रोजे़दार को इफ़्तार कराएगा उसके गुनाहों की मग़फ़रत होती है, उसकी गर्दन आग से आज़ाद कर दी जाती है। इफ़्तार कराने वाले को इतना ही सवाब मिलेगा जैसा रोज़ा रखने वाले को और रोज़ा रखने वाले के अजरो सवाब में कोई कमी भी न आएगी, यह अजरो सवाब उसके लिये है जिस ने एक घूँट दूध या पानी या एक खजूर से इफ़्तार कराया और जिस ने रोजे़दार को पेट भर खाना खिलाया तो प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम फ़रमाते हैं केह क़यामत के दिल अल्लाह तआला उसे मेरे हौजे़ कोसर से पिलाएगा, यहाँ तक कि जन्नत में दाखि़ल हो जाएगा, मगर प्यास नहीं लगेगी।
रमज़ाने मुबारक के पहले 10 दिन रहमत के हैं, दर्मियानी 10 दिन मग़फ़रत के हैं और आख़री 10 या 9 दिन जहन्नम से आज़ादी के हैं। जो इस माहे मुबारक में अपने गु़लाम से काम कम लेेगा, अल्लाह तआला उसे बख्श देगा और जहन्नम से बरी फ़रमा देगा।
जन्नत के 8 दरवाजे़ हैं, एक दरवाजे़ का नाम ”रय्यान“ है, इस दरवाजे़ से जन्नत में सिर्फ़ रोजे़दार दाखि़ल होंगे। जो ईमान और सवाब की ख़ातिर रमज़ाने मुबारक के रोजे़ रखेगा और रातों को इबादत करेगा उसके गुनाह बख्श दिये जाऐंगे। क़यामत के दिन रोज़ा और कु़रआन बंदे की सिफ़ारिश करेंगे। रोज़ा दरबारे ख़ुदावंदी में अर्ज़ करेगा कि ऐ मौला! मैंने इस बंदे को दिन में खाने से रूके रखा, मेरी सिफ़ारिश इस के हक़ में कु़बूल फ़रमा। कु़रआन कहेगा ऐ मौला! मैंने इसको रात में सोने से रूके रखा, मेरी सिफ़ारिश इसके हक़ में कु़बूल फ़रमा, और दोनों (रोज़ा व कु़रआन) की सिफ़ारिशें कु़बूल होंगी।
रोजे़ की जज़ा खु़द अल्लाह तआला अता फ़रमाएगा। रोजे़दार के मुँह की बू अल्लाह तआला के नज़दीक मुश्क से ज़्यादा पाकीज़ा है। रोज़ा ढाल है और दोज़ख़ से हिफ़ाज़त का मज़बूत क़िलआ है।
रोजे़दार गन्दी बात न बके, न चीख़े चिल्लाये। अगर कोई उसे गाली दे या लड़ाई करे तो कहदे कि मैं रोजे़दार हूँ। रोेजे़ का सवाब अल्लाह तआला के अलावा कोई नहीं जानता, जिस ने अल्लाह तआला की रज़ा के लिये एक रोज़ा रखा, अल्लाह तआला उसे जहन्नम से इतनी दूर फ़रमा देगा जैसे कव्वे का बच्चा था कि उड़ा और बूढ़ा होकर मर गया। जिस्म की ज़कात रोज़ा है।
इफ़्तार के वक़्त रोजे़दार की दुआ रद्द नहीं की जाती।
रोजे़ का वक़्तः
सुबह सादिक़ से गु़रूब आफ़ताब तक है।
औरतों के हक़ में हैज़ व निफ़ास (माहवारी) से पाक होना रोजे़ के लिये शर्त है, ऐसी हालतों में क़ज़ा करनी होगी।
रोजे़ के मकरूहातः
किसी चीज़ का का बिला वजा चखना या चबाना मकरूह है। अगर औरत का शोहर बदमिज़ाज है इसलिये वह सालन चख ले या बच्चे के खाने के लिये कोई चीज़ न हो और घर में ऐसा कोई गै़र रोजे़दार शख्स न हो जो रोटी चबाकर बच्चे को खिला दे, ऐसी सूरत में औरत बच्चे के लिये रोटी चबा सकती है।
बिला वजा देर तक कुल्ली करना और नाक में पानी डाले रखना और ज़्यादा देर तक पानी से मुँह भर कर रखना मकरूह है।
रोज़े की हालत में मिसवाक जाइज़ है। सुरमा लगाना, बालों में तेल डालना मकरूह नहीं, जो शख्स सुबह को नापाक उठा या दिन में मोहतलिम हो गया वोह गु़स्ल कर ले कोई हर्ज नहीं। अगर रोज़े से गै़र मामूली थकान हो जाए या मशक़्क़त बढ़ जाए तो मुसाफ़िरों को रोज़ा मकरूह है वरना रोज़ा रखन अफ़्ज़ल है।
सहरीः
हदीस शरीफ़ में है कि सहरी खाओ, सहरी खाने में बरकत है। मुसलमानों और काफ़िरों के रोजे़ में फ़र्क़ सहरी का है, अल्लाह तआला और उसके फ़रिश्ते सहरी खाने वालों पर दरूद भेजते हैं।
मसअलाः सहरी देर से खाना मुस्तहब है लेकिन इतना नहीं कि वक़्त ही में शुबहा होने लगे।
अफ़्तारः
हदीसे पाक में है कि लोग हमेशा बख़ैर रहेंगे, जब तक अफ़्तार में जल्दी करते रहेंगे। अफ़्तार में जल्दी करने वाला अल्लाह तआला को अपने बंदों में ज़्यादा प्यारा है। तीन चीजे़ अल्लाह तआला को महबूब हैंः (1)अफ्तार में जल्दी करना (2)सहरी में ताख़ीर करना (3)और नमाज़ में हाथ पर हाथ रखना।
अफ़्तार खजूर या छुवारे से करे कि इन में बरकत है या पानी से करे कि इसमें तहारत है। जो रोजे़दार को हलाल खाने या पानी से अफ़्तार कराए, फ़रिश्ते माहे रमज़ान ही में उसके लिये मग़फ़िरत की दुआ करते हैं और दरूद भेजते हैं और हज़रते जिबरीले अमीन शबे क़द्र में उस से मुसाफ़ा करते हैं।
मसअलाः अफ़्तार नमाज़े मग़रिब से पहले करना मुस्तहब है।
रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ेंः
दो क़िस्म की हैं एक वह जिन से सिर्फ़ क़ज़ा वाजिब होती है कफ़्फ़ार नहीं, दूसरे वह जिन से क़ज़ा व कफ़्फ़ार दोनों वाजिब होते हैं।
अगर रोजे़दार ने भूल कर खाया, पिया, सम्भोग किया तो रोजे़ में कोई नुक़सान न आया। दाँतो के दर्मियान जो चीज़ रह जाती है उसको खा लिया अगर चने की बराबर या उस से ज़्यादा है तो रोज़ा जाता रहा वरना नहीं।
सहरी खा रहा था मुँह में निवाला था कि वक्त खतम हो गया उसके बाद उसको निगल गया, खाने के लिये रोटी तोड़ी थी उसको रोज़ा याद न था जब चबाया तो याद आया केह रोजे़दार है फिर उसको निगल गया तो उस पर कफ़्फ़ारा है और उसको निकाल लिया फिर मुँह में रख कर निगल गया तो रोज़ा फ़ासिद हो गया कफ़्फ़ारा लाज़िम नहीं,।
अगर कुल्ली के बाद तरी बाक़ी रही और थूक के साथ निगल गया, रोज़ा खतम न हुवा, हुक़्क़ा, बीड़ी, सिग्रेट पीने से रोज़ा टूट जाता है, आँखों में दवा टपकाई, रोज़ा खतम न हुवा, चाहे उसका मज़ा हलक़ में पाया या थूक में सुरमे का असर या रंग देखा, कै़ (उलटी) मुँह भर कर आई, रोज़ा खतम न हुवा, जिस शख्स को अमल दिया गया या नाक में दवा सुड़की या कान में तेल टपकाया, रोज़ा खतम हो गया। रोजे़ की हालत में कोई शख्स इंजक्शन न लगवाए क्योंकि इंजक्शन की दवा पतली होती है और दिमाग़ व मैदे में पहुँचती है ऐसी हर दवा के इस्तेमाल से सय्येदेना हुज़ूर इमामे आज़म अबू हनीफ़ा रज़ियल्लाहो तआला अन्हो के मुताबिक़ रोज़ा खतम हो जाता है।
एज़ारे मबीहाः
जब आदमी बीमार हो जाए या उस को अपनी जान का खतरा हो का या जिस्म के किसी हिस्से के जाते रहने का अंदेशा हो तो उस के लिये रोज़ा न जाइज़ है और उस पर क़ज़ा लाज़िम होगी, हामिला या दूध पिलाने वाली जब कि उसे अपने बच्चे का अंदेशा तो इफ़्तार करें, इसी तरह किसी औरत माहवारी हो तो वह भी इफ़्तार करे, पेशेवर मज़दूर जिसको अपने घर के ख़र्च के लिये महनत व मज़दूरी ज़रूरी हो वोह माजू़र नहीं है उस पर रोज़ा रखना लाज़िम है।
तरावीहः
प्यारे नबी हुज़ूरे अक़्दस सरवरे आलम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम रमज़ाने मुबारक में 20 रकत तरावीह और 3 वित्र अदा फ़रमाया करते थे। सय्येदेना हुज़ूर फ़ारूके़ आज़म रज़ियल्लाहो तआला अन्हो के ज़माने में 20 रकत तरावीह और 3 वित्र पढ़े जाते थे। मसअलाः तरावीह की 20 रकतें जमआत के साथ सुन्नते मोअक्कदा हैं, इस पर इजमा है, हुज़ूर सय्येदेना शाह अब्दुल अज़ीज़ मोहद्दिस देहलवी रज़ियल्लाहो तआला अन्हो अपने फ़तवे में लिखते हैं कि तरावीह की 20 रकत पर सहाबए किराम का इजमा साबित है, 20 रकत तरावीह प्यारे नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम व ख़ुलाफ़ा ए राशिदीन की सुन्नत हैं। तरावीह में एक मरतबा ख़त्मे कु़रआने करीम सुन्नत है, क़ौम की सुस्ती की वजा से न छोड़ा जाए, नाबालिग़ की इमामत किसी नफ़्ल में भी जाइज़ नहीं है।
एतेकाफ़ः
हीदस शरीफ़ में है कि जिस ने रमज़ाने मुबारक के आख़री अशरे का एतेाकाफ़ किया तो ऐसा है जैसे दो हज और दो उमरे किये। एताकाफ़ 20 रमज़ाने मुुबारक को ग़ुरूब आफ़्ताब के पहले से चाँद होने तक मस्जिद में सुन्नते है, एताकाफ़ करने वाला किसी वक़्त बिला वजा एतेकाफ़ की जगह से बाहर नहीं निकले।
फ़ित्राः
हदीसे पाक में है कि रोज़े में गन्दे व बेहूदा कलाम की गन्दगी फ़ित्रे से दूर हो जाती है। बंदे का रोज़ा ज़मीन व आसमान के दर्मियान रहता है, जब तक फ़ित्रा अदा न करे। मसअलाः मालिके निसाब की तरफ़ से वाजिब है कि अपनी और अपने नाबालिग़ बच्चों की तरफ़ से 2 किलो 41 ग्राम गेहूँ या उसकी क़ीमत द, यही अछछा है।
वित्रः
वित्र वाजिब है तीन रकत एक सलाम के साथ, यही अहादीस से साबित है। नोटः जो शख़्स इशा के फ़र्ज़ जमाअत से न पढ़ सका वह वित्र की नमाज़ भी बजमाअत से न पढ़े।
ज़कातः
हदीसे पाक में है कि जिस माल की ज़कात नहीं दी गई वह माल क़यामत में गंजे साँप की शक्ल में होगा, अपने मालिक को दौड़ाएगा, वह भागेगा यहाँ तक कि अपनी उंगलियाँ उसके मुँह में डाल देगा।
साहिबे निसाब अगर ज़कात नहीं देगा तो उसके माल को पत्र बनाया जाएगा और जहन्नम की आग से तपाया जाएगा और पत्र से ज़कात ने देने वालों की करवटें पेशानियाँ और पीठें दाग़ी जाऐंगी।
जो क़ौम ज़कात नहीं देगी अल्लाह तआला उसे क़हत में डाल देगा। मोमिन का जो माल बरबाद होता है, वह ज़कात ने देने की वजा से बरबाद होता है। दोज़ख़ में सबसे पहले तीन शख्स जाऐंगे, उनमें से एक ज़कात ने देने वाला है। किसी का रोज़ा नमाज़ व हज काम न आएगा जबतक ज़कात अदा न करे। ज़कात न देने वाले की नमाज़ कु़बूल नहीं होती। ज़कात अदा करने से माल कम नहीं होता बल्कि बढ़ता है। ज़कात इस्लाम का पुल है। मसअलाः ज़कात अल्लाह तआला के लिये माल के चालीस हिस्सों में से एक हिस्से को मुसलमान फ़क़ीर व मिसकीन को मालिक कर देना है, जो मालदार और सय्यद न हो।
मसअलाः ज़कात फ़र्ज़ है, इसका मुनकिर काफ़िर है और न अदा करने वाला फ़ासिक़ और क़त्ल का मुस्तहिक़्क़ है और ज़कात को देर से अदा करने वाला गुनहगार है।
मसअलाः ज़कात हर उस आक़िल बालिग़ मर्द मोमिन और आक़िला व बालिग़ा मोमिना पर फ़र्ज़ है जो बक़दरे निसाबे माल के मालिक और उस पर क़ाबिज़ हुवे हों और उस माल पर एक साल गुज़र चुका हो और वह अस्ल ज़रूरतों और क़र्ज़े से फ़ारिग़ हो।
मसअलाः साहिबे निसाब वह है जो साढ़े सात तौले सोना या साढ़े बावन तौले चाँदी का मालिक हो या वोह इतने रूपये पैसे नोट वगै़रा का मालिक हो जो सोने चाँदी के इस निसाबे की क़ीमत के बराबर हो या इतने सामाने तिजारत का मालिक हो जो सोने चाँदी के निसाब की कीमत के बराबर हो।
मसअलाः जिस शख्स को माले ज़कात दे उसको माल का मालिक बना दे, बतौरे एबाहत देने से ज़कात अदा न होगी।
मसअलाः मालिक कर देने में यह भी ज़रूरी है कि ऐसे को दे जो क़ब्ज़ा करना जानता हो वरना ज़कात अदा न होगी।
मसअलाः सोना चाँदी ईंटों की शक्ल में हो या सोने चाँदी के ज़ेवरात और बरतन वगै़रा बक़दरे निसाब हों तो उन पर भी ज़कात फ़र्ज़ है।
मसअलाः अस्ल ज़रूरतों में वह तमाम चीजे़ं शमिल हैं जिनकी ज़रूरत ज़िंदगी बुज़ारने में इन्सान को पड़ती है, एसी चीज़ों की ज़कात फ़र्ज़ नहीं है जैसे रहने का मकान, पहनने के कपड़े, घ्र में काम आने वाला सामान, सवारी के जानवर, असलहा, कारीगरों के औज़ार, अहले इल्म के लिये ज़रूरत की किताबें और खाने के लिये ग़ल्ला।
मसअलाः साहिबे निसाब तो हो लेकिन उस पर इतना क़र्ज़ भी है कि क़र्ज़ अदा करने के बाद निसाब नहीं रहता तो उस पर ज़कात फ़र्ज़ नहीं है। मसअलाः आमतार पर औरतें महर का आदतन मुतालबा नहीं करतीं लिहाज़ा उनके शोहरों पर कितना ही दैन महर हो अगर वह मालिके निसाब हैं तो उन पर ज़कात फ़र्ज़ है, ऐसे दैन महर से ज़कात का वाजिब होना ख़तम नहीं होता।
मसअलाः ज़कात का माल फ़क़ीर, मिसकीन, मक़रूज़, मुसाफ़िर और इल्मे दीन के तलबा को दें।
मसअलाः अपनी अस्ल जैसे माँ बाप, दादा दादी, नाना नानी वगै़रा और अपनी फ़रा जैसे बेटा बेटी, पोता पोती, नवासा नवासी वगै़रा को ज़कात का माल देना जाइज़ नहीं।
मसअलाः यूँ ही शौहर बीवी को और बीवी शोहर को ज़कात का माल नहीं दे सकती।
मसअलाः अपनी अस्ल व फ़रा और शौहर बीवी के अलावा हर रिश्तेदार को ज़कात का माल दे सकता है, लेकिन जिसका खर्चा साहिबे निसाब पर वाजिब हो अगर उसे ज़कात का माल दे तो वह खर्चे में न जोड़े। मसअलाः माले ज़कात मुर्दे के कफन दफ़न में, मस्जिद, मुसाफ़िर ख़ाने, सराय, पुल, क़ब्रिसतान व कुँवें वगै़रा की तामीर में भी नहीं दिया जा सकता। अलवी या अब्बासी और हाश्मी (सय्यद) मालदार या ग़ैर मुस्लिम या बदमज़हब को माले ज़कात देना जाइज़ नहीं।
मसअलाः फ़क़ीर, मिसकीन, मदयून और दीनी तलबा जो ज़कात के हक़दार हैं उन में से जिनको चाहें माले ज़कात दें, लेकिन जाहिल के मुक़ाबले में आलिम को और फ़ासिक़ के मुक़ाबले में सालेह व मुत्तक़ी को माले ज़कात देना अफ़्ज़ल है क्योंकि अगर यह खु़द ज़कात का हक़दार न होगा तो ज़कात के माल को सही जगा ख़र्च कर देगा। मसअलाः मालदार की बीवी या मालदार औरत के शौहर और उसके वालेदैन और उसकी नाबालिग़ औलाद को माले ज़कात देना जाइज़ है। मसअलाः जो लोग माले ज़कात और फ़ित्र किसी दीनी मदरसे में भेजें तो उनको चाहिये कि मदरसे के मोहतमिम या संचालक को बता दें कि यह ज़कात का माल है ताकि मोहतमिम व संचालक उसे ग़रीब तलबा पर ही खर्च करें।
*पैशकरदा*
सय्यद मोहम्मद एहतेसाब हुसैन
क़दीरी अशरफ़ी मदारी
नाज़िमे आला मरकज़े अहले सुन्नत जामिया क़दीरिया तखत वाली मस्जिद
वलीअहद व नायब सज्जादा नशीन आसताना ए क़दीरिया हुज़ूर मुजददिद मुरादाबादी

11/03/2024

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07/03/2024

अली,बसरी,हबीब ओ बायज़ीद हज़रत बदीउद्दीन
बहुत ही मुख़्तसर शजरा मदारुल आलमीं का है

06/03/2024

सैयदों से उनका शजरा ए नसब मांगने वालों के लिए लम्हा ए फिक्र!!!
Faqeehul Ummat Jalalatul ilm Ustazul Ulma Hazrat Allama M***i Abul Hammad Muhammad Israfeel Haidari Habeebi Madari Uztaz o Sadrul Mudarriseen Jamia Arbiya Madarul Uloom Madeenatul Auliya Makanpur Shareef

29/02/2024

Huzur Ameerul Qalam Raisul khutba Adeebe Shaheer Hazrat Allama Maolana Hafiz Syed Azbar Ali Husaini Jafari Madari Makanpur Shareef

21/02/2024

20 फ़रवरी 2018 मोहिनी ज़िला सीतामढ़ी बिहार मुनाज़रे के जज मुफ़्ती शहाब उद्दीन अशरफी़ का फ़ैसला "रज़वी लोग राहे फ़रार इख़्तियार कर गए (रज़वी लोग भाग गए)

21/02/2024

*موہنی ضلع سیتامڑهی کے مناظرہ میں رضویوں کی جانب کے مناظر مفتی مطیع الرحمٰن رضوی اور صدر مناظر مفتی عبد المنان کلیمی پر توبہ اور تجدید ایمان لازم*

(1) موہنی مناظرہ کے اسٹیج سے مولانا سید اظہر عقیل صاحب مداری نے اپنی تقریر میں کہا تها *" خلق خدا کو پریشانی ہوئ "*
جس پر رضوی خیمہ کے صدر مناظر مفتی عبدالمنان کلیمی نے شور مچایا کہ
*" ان مولانا سے توبہ تجدید ایمان وغیرہ کرایا جائے انہوں نے کہا ہے خدا کو پریشانی ہوئ اور یہ کفر ہے "*
رضوی مناظر مفتی مطیع الرحمٰن رضوی مظفر پوری نے بهی اس بات کو دوہرایا اور مناظرہ کے ثالث حضرت علامہ مفتی شہاب الدین اشرفی سے مخاطب ہوکر پوچھا کہ
*" آپ بحیثیت ثالث بتلائیں کہ ایسا کہنا کفر ہے کہ نہیں اور ان پر توبہ تجدید ایمان اور جو جوکچه لازم آنا چاہئے وہ لازم ہوا کہ نہیں ؟ "*
ثالث مناظرہ نے فرمایا
" میں بغور سن نہیں سکا اگر وہی کہا ہے جو آپ بتلا رہے ہیں تو کفر لازم آیا لیکن وہ (مولانا اظہر عقیل) کہہ رہے ہیں کہ میں نے کہا تها *خلق خدا*کو پریشانی ہوگئی"
ثالث کا جواب سن کر رضوی مناظر مفتی مطیع الرحمٰن رضوی بولے
*" آپ تاویل کر رہے ہیں "*
(حضرات ! یہ باتیں ویڈیو آڈیو میں سنی جا سکتی ہیں )

*شرعی حکم* چونکہ ان نام نہاد مفتیوں نے اپنا تبحر علمی جهاڑنے کے لئے اور ایک سنی عالم دین مولانا سید اظہر عقیل صاحب کو بر سر عام ذلیل کرنے کے لئے ان کی طرف کفر کی جهوٹی نسبت کی ہے - ( مداری مناظر کے مطالبہ کے باوجود جس کا ثبوت نہ وہ مناظرہ میں دے پائے اور نہ دے پائیں گے) لہذا یہ حرام و کفر ہے اس لئے ان دونوں مفتیوں پر توبہ، تجدید ایمان و نکاح وغیرہ لازم ہے
رضوی مناظر مفتی مطیع الرحمٰن رضوی نے مداری مناظر سے کہا
( 2) *" آپ کے ذریعہ دوہزار کلو میٹر سے انہوں ( مولانا سید ہاشم القادری) نے اپنا شجرہ منگایا"*
( 3 ) *" جو مداری ہوجاتا ہے وہ سید بن جاتا ہے"* (اس بات کو مفتی عبد المنان کلیمی کے آڈیو میں بهی سنا جا سکتا ہے)
حضرات ! یہ دونوں باتیں سراسر جھوٹ دروغ بے فروغ ہیں - مداری مناظر کے مطالبہ کے باوجود جس کا ثبوت شرعی نہ وہ مناظرہ میں دے پائے اور نہ کبهی دے پائیں گے -
*شرعی حکم* جهوٹ بولنا تو عام مومن کے لئے بهی جائز نہیں ہے چہ جائیکہ کسی مفتی کے لئے پهر اس جهوٹ سے تحقیر مسلمین و سادات بهی لازم آتی ہے وہ بھی حرام ہے - بلکہ سادات کرام کی تحقیر موجب کفر ہے
اس لئے یہ دونوں مفتی اپنے ان اقوال کی وجہ سے بهی مرتکب حرام اور مردود الشهادہ ٹهہرے لهذا اس وجہ سے بهی ان پر توبہ لازم ہے انہیں چاہئے کہ اپنے ان اقوال سے توبہ کریں اور جن جن سادات کرام اور مسلمین کی تحقیر لازم آ رہی ہے ان سے معافی مانگیں -
نیز جو لوگ اس قسم کے غیر شرعی اقوال کی حقیقت جانتے ہوئے بهی ان کو معتبر سمجه رہے ہیں اور انہیں پهیلا رہے ہیں ان کے لئے بهی یہی حکم شرع ہے
واللہ الهادی من یشآء و هو اعلم بالصواب
فقیر مداری سید منورعلی حسینی جعفری
خادم سجادہء عالیہ حضور مدارالعالمین و خادم افتآء خانقاہ مداریہ و خادم طلبہ جامعہ عربیہ مدارالعلوم مدینتہ الاولیاء
دارالنور مکن پور شریف

21/02/2024

*موہنی مناظرہ سے بهاگنے والے رضوی علماء کا فراڈ*

موہنی ضلع سیتامڑهی بہار کے مناظرہ سے بهاگنے والے رضوی علماء کا کہنا ہے کہ
*"چونکہ مناظرہ میں مولانا ہاشم القادری صاحب نہیں آئے اس لئے مکھیا نے اعلان کر دیا کہ مولانا ہاشم القادری صاحب نہیں آئے لهذا مناظرہ ختم کیا جاتا ہے اس طرح مداریوں کی شکست ہوئ"*

میں کہتا ہوں کہ مناظرہ سے قبل کئی مرتبہ مولانا سید ہاشم القادری صاحب نے اپنا ثبوت سیادت دیا جس کو رضوی لوگوں (بشمول مفتی مطیع الرحمٰن رضوی مظفر پوری) نے تسلیم نہیں کیا - اسی وجہ سے بات مناظرہ تک پہنچی - اور مناظرہ میں تو مناظر ہی بات کرتا ہے - لهذا مداریوں کے مناظر سے رضویوں کے مناظر مفتی مطیع الرحمٰن رضوی صاحب کا بات نہ کرنا اور مولانا ہاشم القادری صاحب سے بات کرنے پر مصر اور بضد رہنا ہی رضویوں کی شکست کی دلیل ہے -
پهر جس مکھیا نے ختم مناظرہ کا اعلان کیا وہ کوئ مناظرہ کا مکھیا نہیں تها ایک غیر عالم فاسق و فاجر کے اعلان پر علماء رضویہ کا مناظرہ گاہ سے اٹه کهڑا ہونا نعرہ بازی کرنا ایک غیر اصولی کام تها -
رضویوں کو راہ فرار اختیار کرتے دیکه کر علماء مداریہ نے انہیں للکارا بهی کہ ابهی مناظرہ ختم نہیں ہوا ہے - آپ لوگ بهاگ کیوں رہے ہیں - مناظرہ کرو تم تو مناظرہ کرنے آئے تھے - مگر اس للکار پر بھی رضوی علماء مناظرہ کرنے کو تیار نہیں ہوئے اور اپنی فتح کا ڈهونگ رچاکر نعرہ بازی کرتے ہوئے چلے گئے

یہاں یہ بھی عرض کر دینا چاہئے کہ مناظرہ تین موضوعات پر ہونا تها
( 1 ) مولانا سید ہاشم القادری صاحب سید ہیں کہ نہیں
( 2 ) سلسلہء مداریہ جاری ہے یا سوخت
( 3 ) مولانا ہاشم القادری صاحب اور ان کے صاحبزادگان اعلیحضرت کے گستاخ ہیں یا نہیں ؟
لیکن طئے شدہ ان تینوں موضوعات میں سے کسی ایک پر بهی مناظرہ کئے بغیر نعرہ بازی کرتے ہوئے چلے جانا عوام اہلسنت کی آنکھوں میں دهول جهونکنا ہے جو کوئ حیا دار انسان نہیں کرسکتا ہے

21/02/2024

*بہارمناظرےمیں علمائے اہلسنت کےبالمقابل رضوی بریلوی فرقےکے علماءکوذلت آمیزشکست کاسامناہوا*

*تفصیلی تحریر*

مورخہ 20 فروری 2018 عیسوی بروزمنگل صبح دس بجے صوبہ بہار کےضلع سیتامڑھی کےموضع موہنی میں رضوی بریلوی فرقےکے علماء اورعلمائےاہلسنت کےدرمیان ایک تاریخ سازمناظرہ ہوا جسمیں علمائےرضویہ بریلویہ کوذلت آمیز شکست کاسامناکرتےہوئےراہ فراراختیارکرنا پڑا مناظرےکی تفصیل کچھ اسطورسےہے کہ
کئی ماہ قبل موہنی گاؤں کےمعزز باشندے موضع مذکورمیں واقع جامع مسجدکےخطیب وامام استاذالعلماء حضرت علامہ سیدمحمد ہاشم القادری المنظری کےنسب شریف پروہاں کےکچھ ناسمجھ افرادنےسوال اٹھایا کہ حضرت موصوف "سید"نہیں بلکہ "شاہ"ہیں واضح رہےکہ اس اعتراض کاپس منظرکچھ اسطورسےہے کہ موصوف جس مسجدکےخطیب وامام ہیں اس مسجدمیں آج سے برسہابرس پہلےسے ایک بڑی سی بینرلگی ہوئی تھی جسمیں علامہ ہاشم القادری کےنام کیساتھ سیدکالفظ لکھاہواتھا مگرکسی کوکوئی اعتراض نہیں ہوا نیز علامہ موصوف کےصاحبزادے حضرت علامہ مفتی سیدمشرف عقیل امجدی نےآج سےکئی سال قبل ایک کتاب المسمیٰ بہ "مسائل تجہیزوتکفین" لکھی جسمیں انکے نام کےساتھ بھی لفظ سیدلکھاہواھے لیکن قابل غوربات یہ ہیکہ سالہاسال سےکسی کوانکی سیادت کےثبوت کےکوئی ضرورت محسوس نہیں ہوئی البتہ جب علامہ سیدمحمدہاشم القادری صاحب سن 2017عیسوی میں بارگاہ مدارالعٰلمین میں حاضری کیلئےمکن پورشریف حاضر ہوئے اورخانقاہ مداریہ مکنپورشریف کےصاحب سجادہ صدرالمششائخ حضرت علامہ پیرصوفی سیدمحمدمجیب الباقی جعفری مداری مدظلہ العالی نے حضرت موصوف اورانکےصاحبزادے مفتی سیدمشرف عقیل امجدی کوسلسلئہ مداریہ کی اجازت وخلافت سےسرفراز فرمایا اوریہ خبر فیسبک کےذریعہ عام ہوئی تو موہنی کےاطراف کےکچھ ناسمجھ قسم کےبریلوی مولویوں نے علامہ سیدمحمد ہاشم القادری اورانکےفرزندوں پراعتراضات کی بوچھارکردی اوربرسرعام سلسلئہ مداریہ کی توہین وتنقیص پراترآئے اور سلسلئہ مداریہ کےخلاف منظراسلام بریلی نیزبہارکےکچھ مفتیوں سےفتویٰ لیناشروع کردیا اوروٹس اپ فیسبک پرایک طویل جنگ چھیڑدی اورقطعی سطحیت پراترآئے باالآخر 24اگست 2017عیسوی کوموہنی گاؤں میں مفتی مطیع الرحمٰن رضوی کی سرکردگی میں علاقےکےکچھ شرپسند ملت فروش مولویوں کا ایک جھمگھٹ آکرپھاٹ پڑا اورعلامہ سیدہاشم القادری اورانکےفرزندوں کو موضع مذکورکےباشندےجناب عبداللطیف کےمکان پربلوایا اور انکی سیادت و سلسلئہ مداریہ سےمتعلق سوال کیا جسکا تشفی بخش جواب علامہ سیدہاشم القادری کےصاحبزادے حضرت مولانا سیداظہرعقیل شاہ حلیمی مداری نے مفتی مطیع الرحمٰن رضوی کودیاجبکہ اسےبرخلاف مولانا سیداظہرعقیل صاحب کی طرف سےجوسوالات ہوئے انکاجواب دینےسے مفتی مطیع الرحمٰن صاحب قاصرنظرآئے اوریہ کہہ کرمجلس برخاست کردی کہ میں ان سوالات کا جواب دینے سےقاصرہوں لیکن قاصرہونےکےباوجود ایک فتنہ انگیزتحریرجو بنام متفقہ فیصلہ تیارکردی جسکےبعد سےاس گاؤں کی مسجدمیں دوجماعتوں کاسلسلہ شروع ہوگیا جوآج تک جاری ھے
مفتی مطیع الرحمٰن رضوی صاحب کےہم مزاج کچھ اورعلماءسنی مداری قادری علماء کےخلاف ماحول بگاڑنےکیلئےسرگرم ہوگئے چنانچہ بات یہاں تک پہونچی کی علامہ سیدہاشم القادری صاحب کےفرزندان نےایک پمفلٹ کےذریعہ اعلان کیاکہ 8فروری 2018عیسوی کوصبح 8بجے موہنی مسجدکےپاس علامہ سیدہاشم القادری صاحب کاشجرہ سیادت اورسلسلئہ مداریہ کےاجراءکاثبوت پیش کیاجائیگا ساتھ ہی ساتھ سنی علماء نےرضوی بریلوی فرقےکےسرغنہ عالم مفتی مطیع الرحمٰن رضوی کوبھی خصوصی طورسےمدعوکیا تاکہ انھیں تشفی حاصل ہوسکےاورآں موصوف اپنی غلط اور فتنہ انگیزتحریرسےتوبہ ورجوع کرسکیں لیکن ہوایہ کہ علمائےرضویہ بریلویہ نےاس پروگرام کوکینسل کروانےکی بھرپورطریقے سےکوشش کرڈالی لیکن سنی مداری قادری علماءکی کوششو‍ سےکینسل کروانےمیں کامیاب نہ ہوسکےالبتہ یہ ضرورہوگیاکہ بریلوی حضرات کےاصرارپر 8فروری کایہ پروگرام آگےبڑھاکر 20فروری کوکردیاگیا
جسکےبعد بریلوی علماءکی جانب سےایک اشتہاربعنوان *رضویوں کاڈھونگی مداریوں سے کھلامناظرہ*منظرعام پرآیا جبکہ علمائےحق اہلسنت وجماعت نےایک پملفٹ بعنوان *اعلان عام*شائع کیا
المختصر سوشل میڈیا میں اس مناظرےکا زبردست پرچارکیاگیا تاریخ مقررہ آنےسےقبل بریلوی مولویوں نے علمائےاہلسنت کےتعلق سےپورےبہاربلکہ پورےملک میں زبردست طریقےسےغلط فہمیاں پھیلادیں
نیز علمائےحق اورانکےمتبعین کو ہراساں کرنےکیلئے غلام مذکرنامی ایک پیشہ ور مولوی جوجلسوں میں اناؤنسرنگ کرکے پیٹ پالتاھےاس پگلیٹ نے سوشل میڈیا میں ایک آڈیوڈالا جسکےذریعہ علمائےاہلسنت یعنی سلسلئہ مداریہ و قادریہ سے وابستہ علماءکرام کو مارنےپیٹنےکی دھمکی دی نیزاسکے بڑےبھائی مولوی غلام مقتدرنےبھی اسی قسم کاایک آڈیونشر کیا انکےبرخلاف علمائےاہلسنت ازاول تاآخر سنجیدہ ذہنی وشرافت نسبی کاہی ثبوت دیتےرہے بالآخر 19 فروری کوہی درج ذیل علمائےاہلسنت ازجانب حق موہنی بہارپہونچ گئے
*حضرت علامہ مفتی شھاب الدین صاحب اشرفی کچھوچھہ مقدسہ*
*حضرت علامہ مفتی محمدحبیب الرحمٰن صاحب علوی مداری جھہراؤں شریف سدھارتھنگریوپی*
*حضرت علامہ مفتی سیدمنورعلی صاحب حسینی جعفری مداری مکن پورشریف*
*حضرت علامہ مفتی سیدنثارحسین صاحب جعفری مداری مکن پورشریف*
*حضرت علامہ مفتی محمداسرافیل صاحب حیدری مداری مکن پورشریف*
*حضرت علامہ حافظ سیدازبرعلی جعفری مداری مکن پورشریف*
*حضرت علامہ اشرف چترویدی صاحب دربھنگہ بہار*
*حضرت علامہ اشتیاق احمدصاحب اشرفی ویشالی بہار*
*حضرت علامہ مفتی عبدالمعید صاحب شکوہی مداری سیتاپور یوپی*
*جناب مولانا محمد خامس صاحب علوی مداری*
*جناب مولوی محمدشعیب صاحب علوی مداری*
*ان علمائےاہلسنت کےعلاوہ اہلسنت کی ایک بہت باقارمعززشخصیت عزت مآب جناب اسیرالدین شاہ علوی مداری کلکتوی کی بھی تھی جو علمائےاہلسنت کی طرف سے سیاسی مورچہ سنبھالےہوئے تھے*

جبکہ ازجانب باطل یعنی رضوی بریلوی فرقےکے علماء سینکڑوں کی تعدادمیں موہنی پہونچ گئے اور انکے جھانسےمیں پھنس کر ہزاروں عام مسلمان بھی آگئے 20فروری کو دس بجےصبح سےمناظرہ ہونا طےتھا لیکن علمائےاہلسنت بیس منٹ قبل ہی اسٹیج پر پہونچ گئے جبکہ رضوی بریلوی فرقے کے علماء دس بجے کےبعد مناظرہ گاہ میں پہونچے
علمائےاہلسنت کی طرف ثالث (جج) استاذالفقہاء حضرت علامہ مفتی شھاب الدین اشرفی صدرمفتی مرکزی دارالافتاءجامع اشرف کچھوچھہ مقدسہ منتخب ہوئے( واضح رہےکہ علمائےرضویہ نےبھی حضرت موصوف کو ثالث (جج) تسلیم کیاتھا جیساکہ ایک ویڈیوکلپ میں رضوی مناظرنےانھیں ثالث کہہ کرخطاب کیاھے) اور جلالتہ العلم مناظراسلام حضرت علامہ مفتی محمدحبیب الرحمٰن علوی مداری جھہراؤں شریف سدھارتھنگریوپی مناظرمقررہوئےاورمعاون مناظرکی حیثیت سے فقیہ امت حضرت علامہ ابواالحمادمفتی محمداسرافیل حیدری مداری کاانتخاب کیاگیا جبکہ فقیہ عصر حضرت علامہ مفتی پیرسیدنثارحسین جعفری مداری کوسرپرست مناظرہ منتخب کیاگیا اورکرسئی صدارت پر محقق عصر شہزادئہ قطب المدار حضرت علامہ پیرمفتی سیدمنورعلی حسینی مداری جلوہ فرماہوئے

رضوی بریلوی فرقے کی طرف سے مفتی عبدالمنان کلیمی مرادآباد
مفتی مطیع الرحمٰن رضوی مظفرپوری اورکئی ٹرک رضوی مولوی اسٹیج سےلیکر مناظرہ گاہ تک موجودتھے رضوی فرقےکی جانب سے علمائےاہلسنت سےمناظرہ کرنےکیلئے مفتی مطیع الرحمٰن رضوی کومنتخب کیاگیا اورمفتی عبدالمنان کلیمی اسکےمعاون اورنہ جانےکیاکیا منتخب ہوئے بڑاقابل دیدمنظرتھاکہ رضوی فرقہ کےاسٹیج کےسامنے کئی ہزارآدمی موجودتھے لیکن وابستگان اہلسنت کےاسٹیج کےسامنے ویڈیوکلپ میں مجھے بیس آدمی بھی نظرنہیں آئے اوروہاں پرموجودمناظرے میں شامل سنی علماءجوبارہ پندرہ کی تعدادمیں رہےہونگے انکابھی یہی بیان ھے رضوی فرقےکی عوام اورعلماءکی تعداد بہت زیادہ تھی اورہرپانچ منٹ کےبعد غنڈہ گردی کرنےپرآمادہ ہوجاتےتھے لیکن پرشاسن انھیں داب دیتاتھا اوربزرگان دین کی حمایت انھیں دبوچ لیتی تھی واقعتہً یہ ایک کرامت ہی تھی کہ مفتی مطیع الرحمٰن رضوی کو سنی مناظرمفتی محمدحبیب الرحمٰن علوی مداری کےکربلائی جملے پسینہ پسینہ کررہےتھے اورمفتی عبدالمنان کلیمی بھی حواس باختہ ہوچکےتھے یہ تاریخ فرقئہ رضویہ کیلئےکالادن ثابت ہوئی کہ جب اس علاقےکےسرخیل رضاخانیوں کو اپنےہی علاقےاوراپنےہی جمگھٹ میں برسراسٹیج ذلیل وخوار ہوناپڑا اور پھروہ ذلت آمیز گھڑی بھی آئی کہ جب ایک فاسق وفاجرسے مناظرہ کےختم کرنے کا اعلان کرواکر مطیع الرحمٰن اورانکے فرقےکےلوگ بھاگنےلگے موصوف کوبھاگتادیکھکر کچھ لوگ انھیں جاکر پکڑلئے لیکن تب تک رضوی فرقےکےلوگ شوروہنگامہ کرنےپراترآئے جسکی وجہ سےاسےچھوڑدیاگیا سنی علماءرضوی بریلوی علماءکومسلسل بلاتےرہےاورکہتےرہےکہ بھاگومت آپ لوگ توسلسلئہ مداریہ کےاجراء پرمناظرہ کرنےآئےتھے آؤمناظرہ کرو بھاگتےکیوں ہو ؟؟؟
سنی علماءنےبلانےکی ہزارکوشش کی لیکن رضوی بریلوی علماء کونہ آنا تھانہ آئے اورحسبِ عادت بےشرمی کامظاہرہ کرتےہوئے اپنی فتح وکامیابی کےنعرےلگانےلگے بھگوڑوں کےبھاگنےکے بعد پولیس انتظامیہ سنی علماءکےپاس پہونچی اورانھیں بحفاظت ہاشمی منزل پر لائی اورپھرکچھ دیرکےبعد سارے سنی علماءکو اپنےسامنےانکےمقامات کی طرف رخصت کیا اہلسنت کی اس زبردست فتح وکامرانی کا جشن ہر سنی خانقاہ میں منایاگیا جبکہ رضوی بریلوی جماعت میں صف ماتم بچھی رہی اس مناظرےکے بعد خانقاہیں مزید متحدہوگئیں اورسب نےاپنےاپنےطور اس فتح مبین کی مبارکباد پیش کی اوررضوی بریلوی فرقہ کےجال سےسنیوں کوبچانےکا عزم کیا اوراپنی مساجد اورمدارس سے رضوی بریلوی فرقے کےائمہ ومدرسین کونکالنےکاعزم کیا اوران ناپاکوں سےجملہ مقدس مقامات کوبچانےکا عہدکیا اورباہم تمام خانقاہیں یہ فیصلہ لےچکی ہیں کہ اب رضویوں بریلویوں کا مکمل بائیکاٹ کیاجائے اورتمام خانقاہیں مل جل کر انھیں نیست ونابودکریں ورنہ ان ملعونوں کےظلم سےکوئی بھی خانقاہ ویسےبھی نہیں بچی ھے مزید حرج میں پڑیگی مداری برادران نےان ابلیسیوں کوذلیل کرکے بہت اچھی پہل کی ھے ان شاءاللہ راقم الحروف بالخصوص بہارکی تمام خانقاہوں سے انکےخلاف مہم جاری کروائےگا اورانھیں بےنقاب کریگا
کیونکہ یہ صرف مداری برادران ہی نہیں بلکہ
چشتی
صابری
نظامی
اشرفی
قادری
برکاتی
فردوسی
منعمی
ابوالعلائی
وارثی
مجددی
رحمانی
وغیرہم سبکےہی باغی اوردشمن ہیں


فقط
یکےازغلامان سرکارمخدوم جہاں
محمد تنویراحسن فردوسی چشتی نظامی

20/02/2024

وَ قُلْ جَآءَ الْحَقُّ وَ زَهَقَ الْبَاطِلُؕ-اِنَّ الْبَاطِلَ كَانَ زَهُوْقًا

20/02/2018

20/02/2024

20 February 2018 Sarzameene Mohini Zila Sitamarhi Bihar Par Arbabe Madariyat ki Fatah o Nusrat ke bad Ulma e Madariya ka Makanpur Shareef Me Behtareen Istiqbal 🌹

Photos from Sirat e Mustaqeem 's post 20/02/2024

السلام علیکم ورحمتہ اللہ وبرکاتہ

سامعین وناظرین کرام.
جیسے جیسے ماضی فراموشی کی دبیز چادر میں ملبوس ہوتا جاتاہے ویسے ویسے اسکی سنہری یادیں, لمعات حسن , لذا ت وکاوشات نتائج کامیابی وغیرہ ایک یادگار بن جاتی ہیں لکن جوماضی تاریخ کے اوراق وابسطہ ہوتی ہے وہ یادیں نہیں بلکہ زندہ تاریخ بن کر سامنے آتی رہتی ہے
20فروری 2018 تاریخی اعتبار سے ایک نمائیاں شان وشوکت کے صفحئہ دہر پر راج کرتی ہے یعنی سرزمین موہنی ضلع سیتامڑھی بہار پر ارباب مداریت کی فتح ونصرت حاصل ہوئی
مناظرہ کے بعد مکنپور شریف میں علماء مداریہ کا بہترین استقبال ملاحظہ کیجئے

14/02/2024
14/02/2024

Youme Husain Mubarak ho
@फ़ॉलोअर्स Sirat e Mustaqeem

31/01/2024

*कूंडों के तअल्लुक़ से एक अहम नज़रयाती ख़ाका*
""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""
*अज़ क़लम- अमीरूल क़लम, रईसुल ख़ुतबा, हज़रत अल्लामा मौलाना हाफ़िज़ सय्यद अज़बर अली जाफ़री मदारी*
*ख़ादिम आस्ताना ए आलिया मदारिया*
*दारुन्नूर मकनपुर शरीफ़ ज़िला कानपुर नगर यू पी 9648180965*
"""""""""""""""""'"""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""""
आज मिल्लते इस्लामिया में नए नए इख्तिलाफ़ी मसाइल पैदा कर के कारोबारी उलमा ने अहले सुन्नत को सीधे रास्ते से हटा कर अपने मसलको मशरब तौर तरीक़ों की ज़न्जीर का पाबंद करने के लिए नई नई तावीलों के ख़िर्मन तामीर कर लिए हैं
बिलख़ुसूस हज़राते अहले बैत अलैहिमुस्सलाम से मंसूबो मर्बूत अल्क़ाब व तक़ारीब का गला काटने के लिए ख़ून आशाम ख़ंजर आस्तीनों में छिपे हैं और जब जहां मौक़ा लगा एक एक हसीन गले पर फ़त्वे का ख़ंजर घोंप दिया
मिसाल के तौर पर हज़रात अइम्मा ए अहले बैत के लिए अलैहिस्सलाम का इस्तेमाल नाजाइज़ है

ताज़ियादारी हराम है
अलम मेंहदी जुलूस
नारा ए हैदरी लगाना शीइयत है
मौला अली से मुहब्बत करना राफ़ज़ियत है
जशने ईद मिलादुन्नबी में ज़िक्रे शहादत हुसैन करना नाजायज है
मौला अली सय्यद नहीं हैं
इसी तरह से 22 रजब को नज़रो नियाज़े इमाम जाफ़र सादिक़ पर भी फतवा कि यह अहले तशय्युअ का शिआर है
लिहाज़ा सुन्नी मुसलमानों को इस दिन इजतिनाब करना चाहिए क्योंकि हज़रत अमीर मुआविया रज़ी अल्लाह अन्हो की वफ़ात पर बतौर मसर्रत राईज किया है
जब के हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिससलाम की शहादत 15 रजब है
तो 22 को कुंडे कैसे
बाज़ का कहना है कि यह 150 साल पुरानी ईजाद है
इस सिलसिले मे सब से पहले तारीख़ी हकायक़ व शवाहिद की रोशनी में हज़रत अमीर मुआविया रज़ी अल्लाह अन्हो की वफ़ात पर इख्तिलाफ़ी नज़रयात कारईन की ख़िदमत में पेश हैं
ताके पहली ग़लत फहमी दूर हो सके

हज़रत अमीर मुआविया रज़ियल्लाहु अन्ह की तारीख़े विसाल एक इख़्तिलाफ़ी मसअला है

हज़रत अल्लामा सईद बिन इब्राहीम के नज़दीक तारीख़े विसाल एक रजबुल मुरज्जब है,
अल्लामा इबने इस्हाक़ ने लिखा है कि 8 रजब तारीख़े वफ़ात है
ब हवाला अल बिदाया वन निहाया, अल्लामा इबने कसीर
15 रजबुल मुरज्जब तारीख़ विसाल है, अल्लामा इबने जौज़ी (तलक़ीहो फ़ुहूले अहलिल असर )

अल्लामा इबने हजर व इब्ने अब्दुल बर ने फरमाया कि जब आपकी वफ़ात हुई तो रजब की चार राते बाक़ी थीं
यानी 24/25 रजब वफ़ात हुई अल इस्तीआब फ़ी मारिफ़तुल असहाब व तहज़ीबुल तहज़ीब
अल्लामा तबरी ने तीन अक़्वाल नक़्ल किये हैं
10 रजब, 2 रजब, 15 रजब,
वफ़ात के वक़्त रजब की 8 राते बाक़ी थीं
( ब हवाला तारीखुल उममे वलमुल्क जरीर तबरी)
इस हवाले में अगर महीना 29 का था तो 21 रजब वफ़ात की तारीख़ हुई और अगर महीना 30 का महीना था तो 22 वफ़ात की तारीख़ हुई
अब जबकि मोअतबर आईम्मा ए तवारीख़ सियर के बयानात से वाज़ेह हो गया कि अमीर मुआविया रज़ी अल्लाह अन्हो की तारीख़े वफ़ात 22 रजब उलमाए अहले सुन्नत के नज़दीक मुतअय्यन नहीं है
न अमीर मुआविया रज़ी अल्लाह अन्हो की वफ़ात सन 60 हिजरी से लेकर सन 1440 हिजरी तक यानी तक़रीबन 1380 साल तक कहीं इस 22 रजब को उर्स व नज़रों नियाज़ या उनकी वफ़ात का धूम धड़ाका अहले सुन्नत के यहां बिलख़ुसूस नहीं मिला फिर 22 रजब को खुशी मनाने का इल्ज़ाम हमारे सर क्यों?

हां अगर शीओं में यही वजह है तो हमसे शीओं से किया मतलब? हमने तो अपने बुज़ुर्गों से सुना है कि 22 रजब की तारीख़ में हुज़ूर इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम को इमामत व क़ुत्बियते उज़मा के मंसब पर फाइज़ किया गया
इस अज़ीम नेअ़मत के हुसूल की ख़ुशी में इमाम पाक शीरीनी तक़सीम फरमाया करते थे बाद के ज़माने में वो कुंडो की नियाज़ की शक्ल में तबदील हो गया तरीक़ा ए अहले सुन्नत के मुताबिक़ इस में कोई शरई क़बाहत नहीं है

सुन्नी मुसलमान 22 रजबुल मुरज्जब को तरीक़ा ए शरई के मुताबिक़ नज़रों नियाज़ का अहतिमाम करें रहा कहना के 150 साल पुरानी ईजाद है तो मै गोश गुज़ार किए देता हूं
हज़रत शाह अब्दुल अज़ीज़ मुहद्दिस देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की तहक़ीक़ के मुताबिक़ अहले बैत से वाबस्ता तक़ारीब व अय्याम जैसे 22 रजब को कुंडो की फ़ातिहा कदीम ज़माने से चली आ रही है जो हिन्दुस्तान कि इईजाद नहीं हैं (तोहफ़ए इसना अशरिया)
मुफ्ती-ए-आज़म पाकिस्तान अल्लामा मुफ्ती मुहम्मद खलील खान क़ादरी बरकाती मारहरवी अलैह रहमह बानी वा शेखुल हदीस एहसानुल बरकात हैदराबाद

फरमाते हैं
माशा अल्लाह
इस माहे रजब में हज़रत जलाल बुखारी रहमतुल्लाह अलैह और बाज़ जगह हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ रज़ी अल्लाह अन्हो को इसाले सवाब के लिए खीर पूरी पका कर कुंडे भरे जाते हैं और फातिहा दिलाकर लोगों को खिलाते है यह भी जायज़ है
( सुन्नी बहिश्ती ज़ेवर कामिल 318 )

अब इन दलाइल की रोशनी में बात बिल्कुल साफ़ हो गई कि 22 रजब को अहले सुन्नत की मामूलात में नज़रों नियाज़ कुंडे शरीफ़ शामिल हैं लिहाज़ा इस तारीख़ पर कूडों को शरई तरीक़े पर मनाना जायज़ है
वल्लाह आलम बिस्सवाब
______________________________________
तालिबे ख़ैर मौलाना काज़ी सय्यद मुहम्मद तशरीक़ जाफ़री मदारी ख़ादिम आस्ताने आलिया मदारिया मकनपुर शरीफ़ ज़िला कानपुर नगर यू पी

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सैयदों से उनका शजरा ए नसब मांगने वालों के लिए लम्हा ए फिक्र!!!Faqeehul Ummat Jalalatul ilm Ustazul Ulma Hazrat Allama Mu...
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Darbar Nirala hai Aye Zinda vali tera Sirat e Mustaqeem
Huzur Ameerul Qalam about Shabe Bar at Sirat e Mustaqeem  @फ़ॉलोअर्स
وَ قُلْ جَآءَ الْحَقُّ وَ زَهَقَ الْبَاطِلُؕ-اِنَّ الْبَاطِلَ كَانَ زَهُوْقًا20/02/2018
20 February 2018 Sarzameene Mohini Zila Sitamarhi Bihar Par Arbabe Madariyat ki Fatah o Nusrat ke bad Ulma e Madariya ka...
Youme Husain Mubarak ho@फ़ॉलोअर्स Sirat e Mustaqeem
Youme Viladat Maola Ali @फ़ॉलोअर्स Sirat e Mustaqeem
عقائد اہل سنت والجماعت
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