एक दम्पति ने रिटायरमेंट के बाद अपने बनाये शहर वाले मकान में अपने बेटे व बहुओं के साथ रहने का निर्णय लिया।
पहले कुछ महीने सब सही चल रहा था। लेकिन धीरे-धीरे चीजें बिगड़ने लगी।
फ़िर एक दिन ऐसा भी आया जब बेटों ने कहा,
"पिताजी आपको नहीं लगता कि यहाँ शहर में बहुत भीड़ है? आप-दोनों हमारे गाँव में खाली पड़े पुश्तैनी घर मे जाकर क्यों नहीं रह लेते?"
दम्पति, बेटों के कहने का अर्थ बख़ूबी समझ गए। और उन्होंने वह पूरी रात आँसुओं में गुजारी।
सुबह उठकर पिता ने अपने बेटों व बहुओं को कुछ पैसे देकर घूमने जाने के लिए कहा। बेटे-बहु बहुत ख़ुश होकर घूमने चले गए।
पीछे से दम्पति ने शहर वाला अपना मकान बेचा और मकान के नए मालिक से कहा कि कुछ दिन बाद बेटे आकर अपना सामान निकाल लेंगे, तब तक आप बाक़ी कमरों में रहना शुरू कर सकते है।
दम्पति आराम से गाँव मे बने पुश्तैनी घर मे जाकर रहने लगे।
बेटे-बहु घूमकर वापस आये तो सीधे गए, गाँव मे अपने पिताजी के पास।
"पिताजी आपने ऐसा क्यों किया?", दुःखी होकर बेटों ने पूछा।
"बेटे तुमने ही तो कहा था कि शांति से पुश्तैनी घर मे रहो। तो शहर की भीड़भाड़ से बचकर यहाँ आ गए।", पिता ने शांत स्वर में कहा।
"लेकिन पिताजी, आपने हमारा वो घर बेच क्यों दिया? आप ऐसा कैसे कर सकते है?", अब बेटे क्रोध को नियंत्रित करने की कोशिश में थे।
"ठीक वैसे बेटा, जैसे तुम हमें, घर से निकलने को कह सकते हो। वो घर मैंने अपनी कमाई से बनाया था, मैं जो चाहे करूँ। तुम सब नौकरी कर रहे हो। अच्छा कमा रहे हो। अपने-अपने घर बनाओ और शान से रहो। जब तक मैं हूँ तब तक ये पुश्तैनी घर मेरा है, मेरे बाद ये तुम्हारा हो जाएगा। तुम भी बुढ़ापे में शहर की भीड़ से बचकर यहाँ रहने के लिए आ जाना। जैसा कि तुमने कहा था, बहुत शांति और सुकून है यहाँ।", कहते हुए पिता बाहर निकल गए।
आपके दिल का पता नहीं, पर मेरे दिल को छू लेने के लिए ये कहानी बहुत अच्छी थी।
Knowledge CHEST
It's a chest.. ...
What is your biggest realization about life?
A newly married couple arrived to live in a rented house. The next morning, when they were having breakfast, his wife looked through the window to a neighbor's terrace. She noticed that some clothes were drying there but they were looking dirty.
Wife : Looks like these people don't even know how to clean clothes. Just look so dirty!
The husband listened to her but did not pay much attention.
After a day or two, again clothes were drying all over that place. The wife saw it and again noticed the same. Repeatedly she used to say this every day -
She : When will these people learn, how to clean cloths?
The husband kept listening but this time too he said nothing.
After about a month when they were having breakfast, Wife eyes, as usual, looked at the front terrace and said,
She : Oh wow! They seem to be wise. Today the clothes are very clean. Maybe someone saw or told them to clean properly.
Husband : No one has said anything.
Wife : How do you know?
Husband : Today I woke up early in the morning and cleaned our window from outside. That's why now clothes are clearly visible and look clean.
The same thing applies to life. How we notice good or bad in others depend upon how we look at them! How much we are clear from inside!
यदि ट्रेन चल रही है तो ट्रेन चालक सो गया तो ट्रेन का क्या होगा?
भारतीय रेल दुनिया की सबसे बड़ी रेल सेवाओं में से एक है। करोड़ों लोग प्रतिदिन ट्रेन के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते हैं। इनमें से लाखों ऐसे होते हैं जो डेली अप डाउन करते हैं। वर्तमान में करीब 4000 ट्रेनें हर रोज रेल की पटरियों पर दौड़ती है और सफलतापूर्वक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंच जाती हैं। सवाल यह है कि ट्रेन चलाने वाला ड्राइवर भी इंसान होता है। यदि बहुत चलती ट्रेन में बीमार हो जाए, बेहोश हो जाए, उसे हार्ट अटैक आ जाए तब ट्रेन का क्या होगा। आइए इस सवाल का जवाब पता करते हैं:
ट्रेन के ड्राइवर को यदि नींद आ जाए या फिर वह किसी भी कारण से बेहोश हो जाए तो उसके साथ एक असिस्टेंट ड्राइवर होता है। वह सबसे पहले ड्राइवर को जगाने की कोशिश करेगा। यदि स्थिति सामान्य नहीं हुई तो वह सक्षम है, ट्रेन को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए।
लेकिन यदि बदकिस्मती से Driver और असिस्टेंट Driver दोनों सो जाते हैं तो उस स्थिति से निपटने के लिए इंजन में ‘विजीलेंस कन्ट्रोल डिवाइस’ लगा होता है। यह डिवाइस यह नोटिस करता है कि यदि एक मिनिट के अन्दर Driver ने न ही स्पीड बढ़ाने के लिए थ्राटल को बढ़ाया हो या स्पीड कम करने के लिए थ्राटल को कम किया हो या ब्रेक लगाया हो या हार्न बजाया हो तो 72 सेकंड के अन्दर एक विजुअल इंडीकेशन आयेगा, Driver को उसको एक बटन दबाकर एकनोलेज करना है। इससे डिवाइस को पता चल जाएगा कि ड्राइवर अपनी ड्यूटी पर तैनात है। यदि Driver एकनोलेज नहीं करता है तो 60 सेकंड में ट्रेन में आटोमैटिक ब्रेक लगना शुरु हो जायेंगे और एक किमी के अन्दर ट्रेन रुक जायेगी। इस तरह से किसी बड़ी दुर्घटना को होने से रोका जा सकता है।
How dangerous is the coronavirus?
Things you have to do when you test Positive for Corona are mentioned below.
Do not worry. Do not panic. If you are infected with the virus, have trust on your immune system and maintain your mental peace. This is very very crucial for the entire cycle.
Drink warm water everytime. Try to drink atleast 1.2 litres of water in a day.
Take Vitamin C tablets (Limcee). It tastes like an orange candy, you can have it twice or even thrice a day.
Have Coronil atleast 7 days with the dosage mentioned.
Gargle and take steam twice a day.
Wear proper mask and isolate yourself in different rooms if possible. Also use separate washrooms if that is a possibility.
Have separate utensils for Covid positive patients and try to have minimum if not zero contact with them.
To make things clear, Covid doesnt spread through food. As my mom cooked food for all of us throughout the cycle. Yes she took all precautions.
Eat watery food, like soup, green tea, and kadha if possible.
Take daily temperature and oxygen level twice.
If you feel any kind of abnormality, Please consult your doctor and ask for proper medication.
Do not be afraid of taking Covid test, even if you are tested positive several times. Our health workers who we also call as warriors are doing an amazing job. They take care of all the things. They will help you.
Even if you are tested negative, through rapid antigen test, Isolate yourself further for 14 days.
Covid is a very difficult disease to handle because it keeps on changing its trend. So stay alert and informed.
Post negative testing of patients, get your entire house sanitized.
As 70-80 percent cases in India are asymptomatic (without any symptoms).
This long post is just to aware all the people in here to guide their parents not to panic if any such situation happens.
Just like any other phase this will get over.
I wish all of you good health
This long post is just to aware🙏🙏🙏
ईश्वर सभी लोगों के जीवन को सुखी क्यों नहीं कर देते?
इस इस कहानी से समझिए।
एक बार की बात है, एक कृष्ण भक्त एक सैलून में बढ़े हुये अपने बाल कटवाने गया था। जैसा की हम जानते हैं छोटे कस्बों की नाई की दुकान में जाते ही तुरंत सेवा मिलना, गया-पटना की सुबह वाली पैसेंजर ट्रेन में घुसते ही जगह मिलने के जैसी खुशकिस्मती वाली बात है
मतलब...कृष्ण भक्त प्रतीक्षा में बेंच पर बैठ गया, हज्जाम किसी और की चिकने गाल पर फोम रगड़ रहा था इसका नंबर तीसरा था। समय काटने के लिए अखबार पढ़ते हुये वह बीच -बीच में राधे -कृष्ण; राधे कृष्ण बोल उठता
कृष्ण भक्त के मुंह से ईश्वर का सुंदर नाम सुनकर नाई की पता नहीं क्यों जल उठती। दो चार बार वह केवल बुदबुदा कर रह गया। जब राधे-कृष्ण का फिर उच्चार सुनाई दिया तो नास्तिक नाई आग बबुआ हो जाता है
वह हज्जाम उसपर खीज कर कहा भाई क्यों अपनी जुबान और हमारे कान को तकलीफ देते हो। दुनिया में भगवान केवल भ्रम है, मन का वहम बस। कृष्ण भक्त समझ गया कि पट्ठा कंस के कुल का लगता है; जो कहता था कृष्ण एक बालक मुझे क्या मरेगा
कृष्ण भक्त बिना विवाद किए बैठा रहा और फिर से मुंह से निकला "राधे-कृष्ण"
इस बार हज्जाम का सिर घूम गया, उसका उस्तरा गलत जगह लगते-लगते बचा। वह क्रोध में कृष्ण भक्त का हाथ पकड़ कर बाहर लाया और बोला,"आओ कुछ दिखाना चाहता हूँ आपको, देखो सामने अस्पताल बाहर कितनी लंबी लाईन लगी हुई है, अगर भगवान होते तो क्या इन सब लोगों के दुःख दूर ना करते, बेचारे कितने दुःखी व असहाय हैं
देखो सामने के स्टेशन पर कितने भिखारी बैठे है, क्या तेरे कृष्ण को को इन बेबस, गरीब व लाचारों पर ज़रा भी दया नहीं आती
"इसलिए कहता हूँ ई ढकोसला बंद करो। भगवान है ही नहीं"
कृष्ण भक्त मन ही मन को को पुकारा। उसने हज्जाम से कहा,"मुझे लगता है दुनिया से नाई या हज्जाम खतम हो गए है कोई है ही नहीं"
इतनी बात सुनकर हज्जाम ठहाके मार कर हंसने लगा, कि अगर इस दुनिया में नाई नहीं होता तो आखिर मैं कौन हूँ
तो कृष्ण भक्त ने नाई का हाथ पकड़ कर दुकान से बाहर लाया और बोला बाहर ये लोग तुम्हें आते जाते दिखाई दे रहे हैं कि नहीं, नाई बोला मैं आपकी बात का मतलब नहीं समझा, कृष्ण भक्त बोला कि देखो लोगों को किसी के बाल बहुत बड़े बड़े हैं तो किसी कि दाढ़ी बहुत बड़ी हुई है अगर दुनिया में नाई होता तो इन सभी लोगों के बाल सही से बने रहते, दाढ़ी मुछे भी सही से संवरीं होती
अब नाई बोला ऐसा नहीं है अब तुम ही कहो मैं क्या करूँ, जिस भी व्यक्ति को अपने को संवारना है उसे मेरी दुकान पर आना होगा तभी मैं व्यक्ति को संवार सकूंगा, अब हर किसी को तो सडक़ पर पकड़ कर बाल-दाढ़ी नहीं ना काट सकता हूँ मैं
अब कृष्ण भक्त ने नाई से कहा कुछ समझ में आया कि नहीं, इस दुनिया में भगवान होते हैं जैसे जिसे बाल-दाढ़ी संवारनी हो तो तुम्हारे पास चल कर तुम्हारी दुकान पर आना पड़ेगा ठीक उसी प्रकार सभी प्राणियों को अपने प्रयासों से,अपने सुकर्मों से भगवान के चरणों तक पहुंचना होगा.
आपके पिता ने आपको सबसे सुरक्षित सलाह क्या दी थी?
जब मैं छोटा था मेरे पिताजी लगभग रोज़ एक ही कहानी मेरे जिद करने पर सुनाते थे । तब मुझे उसका मतलब समझ नहीं आता था आज आता है । कई वर्ष बीत गए है ।
कहानी _। एक आदमी जिसकी जेब में सिर्फ 1 रुपया था और वह तीन दिन से भूखा था। शहर के बाजार की और चल पड़ा, और खाने के लिए चीज़े खोजने लगा । सबसे पहले समौसे की दुकान आईं जी ललचाया पर बाहर बोर्ड पर उसकी कीमत 5 रुपए लिखी वह आगे बढ़ गया मिठाई की दुकान के पास से निकलते हुए जब कीमत पर नजर पड़ी वह में मसोस कर रह गया और भगवान को गालियां देने लगा कि तुमने मुझे सिर्फ 1 रुपया ही दिया क्यों मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा? कहते कहते उसकी आंखो में पानी भर आया । आगे नमकीन, फल, चने ,हलवा पूरी की दुकान आते गई पर वह 1 रुपए से कुछ नहीं खरीद सका । उसकी भगवान को गालियां, क्रोध और आंसू तीनो थमने का नाम नहीं ले रहे थे ।
शाम होने को आई बाजार ख़त्म दुकान वाले भी सामान समेटने लगा था। वह व्यक्ति बाजार के अंतिम छोर पर पहुंचा अंतिम आशा में उसने एक थैले पर केले बेचने वाले को देखा वह भी सब घर जाने के लिए समान समेट रहा था । उसने हिम्मत जुटाई और केले वाले के पास जाकर उसने कहा "भईया 1 रुपए में एक केला दोगे ? केले वाले ने एक बार उसे ऊपर से नीचे देखा और एक रुपया लेकर एक छोटा केला उसको दे दिया । आदमी ने केले को छीला छिलका पीछे फेका और थोड़ी देर के लिए सब भूलकर केले का आंनद लेने लगा, चलते चलते खाते हुए एक छोटा खड्डा आया और सड़क पर गिर गया, गिरते ही उसने पीछे देखा और फिर रोने लगा , उसने देखा कि एक आदमी
उसका फेका हुआ केले का छिलका उठा कर खा रहा था । हाथ में केला लिए उसने ऊपर देखा और कहा " धन्यवाद भगवान" उठा और चल दिया ।
शिक्षा= पिताजी कहते थे, आपके पास जो है वह कई लोगो को नसीब नहीं, जब आपको लगे कि मेरे पास कुछ नहीं है तो अपने से पीछे वाले को देखे, और जब घमंड होने लगे की मेरे पास कुछ हो गया है तो अपने से आगे वाले को देखे। इस से संतुलन बना रहेगा ना कभी कम आत्मविश्वासी होंगे न कभी अति आत्मविश्वासी
ऐसा क्या है जो कुछ माता-पिता सोचते हैं कि वे अपने बच्चों के साथ सही कर रहे हैं लेकिन वास्तव में वह गलत कर रहे हैं?
इसका जवाब मैं मनोहर पर्रिकर जी द्वारा सुनाई एक कहानी के माध्यम से बताना चाहत हूँ….
मनोहर पर्रिकर ने एक बार अपनी आपबीती बयान की थी।
"मैं गोआ के एक गाँव "पर्रा" से हूँ, इसलिये हम "पर्रिकर" कहे जाते हैं। मेरा गाँव अपने तरबूजों के लिये प्रसिद्ध है। जब मैं बच्चा था, वहाँ फसल कटाई के बाद मई में किसान एक 'तरबूज खाओ प्रतियोगिता' आयोजित करते थे। सभी बच्चों को बुलाया जाता था और उन्हें जितने चाहो उतने तरबूज खाने को कहा जाता था।
कई साल बाद, मैं इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिये IIT मुम्बई चला गया। फिर 6.5 साल बाद अपने गाँव वापस आया। मैं तरबूज ढूंढने बाजार गया। पर वो गायब थे। जो वहाँ मिले भी वे बहुत छोटे-छोटे थे।
मैं उस किसान से मिलने गया जो 'तरबूज खाओ प्रतियोगिता' आयोजित करता था। अब उसकी जगह उसके बेटे ने ले ली थी। वह प्रतियोगिता आयोजित करता था पर एक अंतर था। जब वो बूढ़ा किसान हमें तरबूज खाने को देता था, वह हमें एक कटोरे में बीज थूक देने को कहता। हमें बीज चबाने की मनाही थी। वह अगली फसल के लिये बीज इकट्ठा कर रहा था।
हम अवैतनिक बाल मजदूर थे, असल में ।
वह प्रतियोगिता के लिये अपने बेहतरीन तरबूजे रखता था जिनसे वह सबसे अच्छे बीज प्राप्त करता था जिनसे अगले साल और भी बड़े तरबूज पैदा होते थे। जब उसका बेटा आ गया, तो उसने सोचा कि बड़े वाले तरबूजों के बाजार में ज्यादा दाम मिलेंगे सो उसने बड़े वाले तो बेचने शुरू किये और प्रतियोगिता के लिये छोटे तरबूज रखने लगा। अगले साल, तरबूज छोटे हुए, और अगले साल उनसे भी छोटे। तरबूजों की पीढ़ी एक साल की होती है।
सात सालों में, पर्रा के बेहतरीन तरबूजों का सफाया हो गया। मनुष्यों में, 25 साल पर पीढ़ी बदल जाती है। हमें 200 सालों में यह पता चलेगा कि हम अपने बच्चों को पढ़ाने में क्या त्रुटियाँ कर रहे थे।
अच्छे बीज याने प्रतिभाओं का चयन अपने आप में एक बड़ा कार्य है। विसंगत विचार, सरकारी नौकरी का भूत उन्हें ये बताना की अगर नहीं कर सके तो वो जीवन में कुछ भी नहीं कर पायेन्गे जैसी बेकार की बातों के चलते हमारे अच्छे तरबूज बाज़ार (यानि हमारे बच्चे) छोटे से तरबूज बन के रह जायेंगे अपनी प्रतिभा को दबाये
क्या आप किसी विशेष महापुरुष को जानते हो जिनके बारे में आपने पहले कभी शायद ही सुना हो?
एक दिन जवाहरलाल नेहरू को मिलने के लिए एक महिला आयी और उनको एक नोटबुक और एक थैली दे गयी। नेहरू ने वह थैली खोली तो उसमें ३५ लाख रुपये थे और उस नोटबुक में रुपयों का पूरा हिसाब था।
वह रकम कांग्रेस संस्था की पूँजी थी। इसका हिसाब उस महिला के पिता करते थे। उनके पिता की मृत्यु के पश्चात एक भी रुपया अपने पास रखे बिना उस महिला ने वह रकम नेहरू को दे दी थी और वह अपने घर चली गयी थी।
आजीवन अकिंचन व्रत का पालन करना, हमेशा रेल के सामान्य वर्ग की श्रेणी के डिब्बों में सफर करना, और अपने हाथों से बने हुये वस्त्र पहनने वाली वह महिला कौन थी ?
वह महिला थी - स्वतंत्रता के बाद लम्बे समय तक विस्मृत हुई -भारत के महान नेता सरदार वल्लभभाई पटेल की पुत्री -"मणिबहन "
आजादी के यह अमर प्रतीक हैं। इन्होंने देश की निःस्वार्थ सेवा की है। यह हमारे देश का अमूल्य गहना हैं।
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क्या तरक्की पाने के बाद दोस्ती खत्म हो जाती है?
*उन चारों को होटल में बैठा देख, मनीष हड़बड़ा गया.*
लगभग 25 सालों बाद वे फिर उसके सामने थे.
शायद अब वो बहुत बड़े और संपन्न आदमी हो गये थे.
मनीष को अपने स्कूल के दोस्तों का खाने का आर्डर लेकर परोसते समय बड़ा अटपटा लग रहा था.
उनमे से दो मोबाईल फोन पर व्यस्त थे और दो लैपटाप पर.
मनीष पढ़ाई पुरी नही कर पाया था. उन्होंने उसे पहचानने का प्रयास भी नही किया.*
वे खाना खा कर बिल चुका कर चले गये.
मनीष को लगा उन चारों ने शायद उसे पहचाना नहीं या उसकी गरीबी देखकर जानबूझ कर कोशिश नहीं की.
उसने एक गहरी लंबी सांस ली और टेबल साफ करने लगा.
टिश्यु पेपर उठाकर कचरे मे डलने ही वाला था,शायद उन्होने उस पे कुछ* *जोड़-घटाया था.
अचानक उसकी नजर उस पर लिखे हुये शब्दों पर पड़ी. लिखा था - अबे साले तू हमे खाना खिला रहा था तो तुझे क्या लगा तुझे हम पहचानें नहीं?
अबे 25 साल क्या अगले जनम बाद भी मिलता तो तुझे पहचान लेते.तुझे टिप देने की हिम्मत हममे नही थी.
हमने पास ही फैक्ट्री के लिये जगह खरीदी है.
औरअब हमारा इधर आन-जाना तो लगा ही रहेगा.
*आज तेरा इस होटल का आखरी दिन है.*
*हमारे फैक्ट्री की कैंटीन कौन चलाएगा बे*
*तू चलायेगा ना?*
*तुझसे अच्छा पार्टनर और कहां मिलेगा??? याद हैं न स्कुल के दिनों हम पांचो एक दुसरे का टिफिन खा जाते थे. आज के बाद रोटी भी मिल बाँट कर साथ-साथ खाएंगे.*
*मनीष की आंखें भर आई* 😢😢😢😢😢😢😢😢😢😢
*उसने डबडबाई आँखों से आकाश की तरफ देखा और उस पेपर को होंठो से लगाकर करीने से दिल के पास वाली जेब मे रख लिया.*
*सच्चे दोस्त वही तो होते है*
*जो दोस्त की कमजोरी नही सिर्फ दोस्त देख कर ही खुश हो जाते है..*
*हमेशा अपने अच्छे दोस्त की कद्र करे*
दोस्त जहां न खून का रिश्ता ना समाज की कोई बंदिशे फिर हवा सा पवित्र ये रिश्ता।।कोई भी दोस्त जो सच में आपको दोस्त मानता है वो कभी भी नहीं बदलता है…!!
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