Shashank kumar

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17/05/2026

अनुपात समानुपात स्वाह::

17/05/2026

_मैं बेसिक शिक्षा परिषद से कहूंगा,_

_ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं बल्कि उन्हें सम्मानित करना चाहिए...

17/05/2026

17/05/2026

इंदौर से दिल्ली जा रहे 6 कॉलेज स्टूडेंट्स ट्रेन में सफर कर रहे थे।

3 लड़के थे और 3 लड़कियां थीं।

देखिए सीट की हालत कैसे कर दी है। खाना फर्श पर पड़ा है। कचरा पूरी सीट पर फैला हुआ है। तकिए का कवर तक फाड़ दिया गया।

रात में तेज म्यूजिक बजा रहे थे। आसपास बैठे लोग परेशान हो गए थे। कई लोग तो सो भी नहीं पाए।

लोग अक्सर कहते हैं पढ़ाई इंसान को सभ्य बनाती है।

लेकिन सिर्फ कॉलेज जाने और डिग्री लेने से तमीज नहीं आती। असली पहचान इंसान के व्यवहार से होती है।

17/05/2026

*लखनऊ में वकीलों पर जमकर बरसी लाठियां*

हाई कोर्ट के आदेश पर लखनऊ के केसरबाग की सिविल कोर्ट में अतिक्रमण हटाओ अभियान में 200 से ज्यादा वकीलों के चैंबर को तोड़ा गया। विरोध की तस्वीरें भी काफ़ी तीखी आई।

17/05/2026

17/05/2026

आजकल कुछ शिक्षक शिक्षा से ज्यादा अपना निजी एजेंडा चलाने में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं।
लेकिन जब शिक्षक ही पक्षपाती हो जाए, तब सबसे बड़ा नुकसान छात्रों और बेरोजगार युवाओं के भविष्य का होता है।

शिक्षा क्षेत्र की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले दो चर्चित शिक्षक — हिमांशी सिंह मैडम और सचिन सर — अब नोटिफिकेशन की सूचना को लेकर आमने-सामने हैं।

सवाल यह है कि क्या केवल सूचना देना ही युवाओं के संघर्ष का समाधान है?
क्या नोटिफिकेशन सच में संघर्ष करके लाया गया या सिर्फ सोशल मीडिया की सुर्खियां बनाने का माध्यम बन गया?

उत्तर प्रदेश के शिक्षक भर्ती बेरोजगार युवा पूछ रहे हैं —
कितनी बार प्रयागराज आकर सिर्फ बैच लॉन्च कर देना ही युवाओं के संघर्ष में साथ देना कहलाता है?
जब भर्ती आंदोलनों में हजारों युवा सड़कों पर लड़ रहे होते हैं, तब बड़े-बड़े शिक्षकों की आवाज़ और उपस्थिति आखिर कहां गायब हो जाती है?

अगर टॉपर निकालने का श्रेय शिक्षक लेते हैं,
तो असफल हुए हजारों छात्रों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्योंकि बैच तो वही पढ़ते हैं — फिर केवल सफल छात्र ही “अपना” कैसे हो जाते हैं?

युवाओं का दर्द केवल सरकार ने नहीं बढ़ाया,
बल्कि कुछ शिक्षकों ने भी संघर्ष को कमाई और प्रसिद्धि का माध्यम बना दिया।
स्टूडियो में खड़े होकर दहाड़ने से सरकारें नहीं हिलतीं,
जमीन पर युवाओं के साथ खड़ा होना पड़ता है।

याद रखिए —
एक शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, वह सैकड़ों छात्रों की सोच और भविष्य तैयार करता है।
अगर गुरु ही गलत दिशा दिखाने लगे,
तो आने वाली पीढ़ी का क्या होगा?

सम्मान उसी शिक्षक का होना चाहिए
जो शिक्षा को सेवा समझे,
ना कि प्रसिद्धि और कमाई का हथियार।

अब उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षक भर्ती युवाओं का दर्द सवाल नहीं, चीख बन चुका है।
और युवा जानना चाहते हैं —
अगर चुनावी वर्ष में भी सरकार प्राथमिक शिक्षक भर्ती नहीं देती,
तो क्या बड़े शिक्षक लखनऊ की सड़कों पर युवाओं के लोकतांत्रिक संघर्ष में साथ खड़े दिखाई देंगे?

17/05/2026

18 मई
PCS 24 नियुक्ति पत्र वितरण समारोह 🌺

आनन फानन में नियुक्ति पत्र

17/05/2026

सचिव जी के अनुसार 👉 मई अंत से भर्तियों के विज्ञापन देखने को मिलेगा

1100+पद
/Aro2026 500+पद
200+पद

17/05/2026

प्रधानमंत्री के नीदरलैंड्स की यात्रा के दौरान , नीदरलैंड्स ने एक सदी से भी अधिक समय के बाद भारत को 1,000 साल पुराने 'अनैमंगलम ताम्र पत्र' (तांबे की प्लेटें) लौटा दिए हैं। ये कलाकृतियाँ चोल राजवंश से संबंधित हैं।

17/05/2026

एक विवाह ऐसा भी: आग, दर्द और फिर भी सात फेरे

कानपुर में एक ऐसी शादी देखने को मिली जिसने रिश्तों की असली परिभाषा लोगों के सामने रख दी। यहां खुशियों से भरे घर में अचानक हादसा हुआ, चीख-पुकार मची, दुल्हन झुलस गई… लेकिन फिर भी प्यार और विश्वास के सात फेरे रुक नहीं सके।

दरअसल, कानपुर की रहने वाली गरिमा सिंह की शादी विकास के साथ 14 मई को तय थी। शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। घर में मेहंदी का कार्यक्रम चल रहा था, रिश्तेदार और मेहमान खुशियों में डूबे थे। तभी अचानक घर में गैस रिसाव होने से आग लग गई।

बताया जा रहा है कि चूल्हे पर खौलते तेल से भरी कड़ाही रखी थी, जो अफरा-तफरी के बीच वहां मौजूद लोगों पर पलट गई। हादसे में दुल्हन गरिमा सिंह समेत कई लोग झुलस गए। आनन-फानन में सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

हादसे के बाद परिवार को लगा कि अब शादी टालनी पड़ेगी। खुशियों का माहौल मातम में बदल चुका था। लेकिन इसी बीच दूल्हे विकास ने ऐसा फैसला लिया जिसने हर किसी का दिल जीत लिया।

विकास ने साफ कहा कि शादी हर हाल में होगी। इसके बाद दोनों परिवारों ने मिलकर अस्पताल के बर्न वार्ड में ही शादी करवाने का फैसला लिया। डॉक्टरों की अनुमति के बाद वार्ड को फूल-मालाओं से सजाया गया और वहीं बेहद सादगी लेकिन भावुक माहौल में शादी की रस्में पूरी हुईं।

दुल्हन गरिमा अस्पताल के बेड पर थीं और दूल्हा विकास उनके साथ खड़ा रहा। दर्द और तकलीफ के बीच दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा किया।

यह शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि सच्चे प्यार, विश्वास और मुश्किल वक्त में साथ निभाने की मिसाल बन गई।

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