17/11/2022
स्वामी विवेकानंद, एक दिन एक विद्यालय के कुछ छात्रों से बातचीत कर रहे थे और उन से प्रश्न भी पूछ रहे थे और उनके प्रश्नों के उत्तर भी दे रहे थे.
बातचीत के दौरान स्वामी जी ने उन बच्चों से पूछा, “क्या तुम लोग जानते हो कि शिक्षा क्या होती है? तुममे से कोई मुझे समझा सकता है क्या?”
एक छात्र ने आगे बढ़ कर कहा, “स्वामीजी, विद्या ग्रहण करने को ही शिक्षा कहा जाता है.”
स्वामी जी ने फिर पूछा, “अच्छा अब बताओ कि शिक्षा का उद्देश्य क्या होता है?”
सभी विद्दार्थियों ने अपने अपने विचार रखने शुरू कर दिए. स्वामी जी ने हर एक छात्र के विचार को बड़े ध्यान से सुना और फिर कहा, “जिस चीज़ से मनुष्य की शक्तियों का विकास होता है, वही शिक्षा होती है.
शब्दों को कंठ कर लेना ही शिक्षा नहीं होता है. शिक्षा से मनुष्य की मानसिक शक्तियों का इस तरह विकास होता है कि वो स्वंय सवतंत्रता से कुछ कर सकता है.”
तभी एक विद्यार्थी बोला, “स्वामी जी, शिक्षा से हम नई-नई बातें भी तो सीखते हैं.”
यह सुन कर स्वामी जी बोले, “तुम्हारी बात ठीक है बालक, लेकिन नई जानकारी का अर्थ यह नहीं कि उस में अधकचरी ऐसी बातें हों, जिन्हें तुम पचा ही ना पाओ.
शिक्षा जीवन निर्माण करती है. चरित्र सुगठित करती है, विचारों में सामंजस्य पैदा करती है और दुर्भावनाओं पर नियंत्रण करना भी सिखाती है.
शिक्षा तभी सार्थक होती है जब विपरीत परिस्थिति में भी शिक्षा का सही प्रयोग करके विजय प्राप्त की जाए. व्यक्ति शिक्षा का सदुपयोग कर ना केवल अपना और अपने परिवार का बल्कि पूरे देश का भला करता है.
स्वामी जी की बातें सुन कर वहां उपस्थित विद्यार्थी एक स्वर में बोले, “स्वामी जी, आज से हम भी शिक्षा ग्रहण कर हर अशिक्षित व्यक्ति को शिक्षित करने का प्रयास करेंगे.
जो गलत और रूढ़िवादी बातें लोगों में भ्रम बनकर फैली हैं, उन्हें दूर करेंगे.”
विद्यर्थियों की बाते सुनकर स्वामी जी बोले, “अगर तुम सब आज से ही ऐसा करना प्रारंभ कर दोगे तो वह दिन दूर नहीं जब भारत में तकनिकी ज्ञान भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होगा और तकनिकी स्तर पर भी भारत विश्व के सामने नई नजीर पेश करेगा.”
Jitendra Kumar Tripathi