24/05/2023
Basic Education Department Kannauj
Teaching staff in UP Basic Education Department, District Kannauj has been working hard and had achieved high quality improvement in schools.
24/05/2023
23/05/2023
23/05/2023
शेरशाह सूरी : हुमायूँ को हराने वाले एक दूरदर्शी शासक
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आज शेर शाह सूरी की बरसी है । शेर शाह सूरी ने सिर्फ़ पाँच साल, पाँच दिन (1486 - 22 मई 1545 ) राज किया था, इस बीच वो 31 महीने युद्ध की वजह से राजधानी दिल्ली से दूर रहे थे। इसके बाद भी, उन्होंने सिर्फ़ 5 सालों में जो कर दिखाया, वो आज भी किसी रिकॉर्ड से कम नहीं है।
उन्होंने, पूरे राज्य में ज़मीन के सर्वे और मपाई का सिस्टम शुरू किया। खेती की ज़मीन को नापने के लिए 39 इंच के लोहे की छड़ का स्टैंडर्ड तय किया, जिसे गज़ कहा गया। (सिकंदर गज़ नाम की इस छड़ का सिस्टम आज तक इस्तेमाल होता है) ज़मीन की ख़रीद बिक्री के लिए पट्टा सिस्टम लागू किया।
उन्होंने, रुपया का सिस्टम शुरू किया, जो 178 रत्ती, चाँदी का सिक्का था। एक रुपया 64 दाम का था। इसी दाम को बाद में ‘आना’ कहा गया, भारत मे रुपया शेर शाह सूरी की देन है।
राज्य में, 47 जिले बनाए, जिन्हें सरकार कहा जाता था। हर जिले यानि सरकार में एक फ़ौजी अफ़सर (शिक़दर-ए-शिक़दरान) और एक सिविल अफ़सर (मुंसिफ़) नियुक्त किया। ये आज की SP और DM की प्रणाली की तरह है।
हर जिले या सरकार में रेवेन्यू अदालतें बनायी, जिसमें मुंसिफ़ आज के DM, रेवेन्यू केस में जज की भूमिका में होते थे। हर जिले या सरकार में फ़ौजदारी अदालतें भी बनायी, जिसमें शिक़दर आज के SP क्रिमिनल केस में जज की भूमिका में होते थे।
शासन की कैबिनेट व्यवस्था बनायी, जिसमें वित्त मंत्री (दीवान-ए-वजीरत) रक्षा मंत्री (दीवान-ए-अर्ज़) विदेश मंत्री (दीवान-ए-रसालत) संचार मंत्री (दीवान-ए-इंशा) बनाए गए थे। लेकिन सारे फ़ैसले ख़ुद शेर शाह के स्तर पर एप्रूव होते थे।
किसानों के लिए क़र्ज़ (तक़ावी) की व्यवस्था शुरू की, ताकि किसान अच्छी फसल उगा सके।
व्यापार में दो टैक्स व्यवस्था बनायी- एक टैक्स राज्य में समान के प्रवेश पर और एक दुकान पर समान की बिक्री पर। यानी आज का कस्टम टैक्स और जीएसटी, बाक़ी सभी टैक्स को उन्होंने ख़त्म कर दिया।
फ़ौज का नया सिस्टम बनाया, जिसमें फ़ौजियों के विस्तृत रेकार्ड, घोड़ों को दाग़ कर निशानदेही की व्यवस्था, उनकी भर्ती और यूनिट की व्यवस्था शुरू की। यही सिस्टम बाद में मनसबदारी में विकसित हुआ, जो बाद के रेजिमेंट सिस्टम की तरह था।
आगरा से जोधपुर, आगरा से बुरहानपुर, लाहौर से मुलतान के हाइवे बनवाए। GT रोड बनवायी, जो पेशावर से सोनारगाँव, बांग्लादेश तक 3000 किमी लम्बी थी, उन रास्तों पर 1700 सरायें बनायीं (आज का मुग़लसराय उन्ही सराय में से एक है) राजगीरों की हिफाज़त की जवाबदेही गाँव के मुखिया और लोगों की तय की। अगर यात्री के साथ लूटपाट हो जाती, उनपर हुक़्म था, तब गाँव के लोग या तो अपराधी को पेश करें या फिर, मिल कर यात्री के आर्थिक नुक़सान की भरपायी करें। क़त्ल के केस में अगर गाँव के बड़े क़ातिल नहीं ढूँढ सके, तो सज़ा मुखिया को मिलती थी। इसी वजह से सफ़र करना काफ़ी महफूज़ हो गया था।
दिल्ली का पुराना क़िला, रोहतासगढ़ क़िला और कई बिल्डिंग बनवायीं।
शेरशाह सूरी भारत में जन्मे पठान थे। जिन्होंने हुमायूँ को 1540 में हराकर उत्तर भारत में सूरी साम्राज्य स्थापित किया था। शेरशाह सूरी ने पहले बाबर के लिये एक सैनिक के रूप में काम किया था जिन्होंने उन्हें पदोन्नत कर सेनापति बनाया और फिर बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया। 1537 में, जब हुमायूँ कहीं सुदूर अभियान पर थे तब शेरशाह ने बंगाल पर कब्ज़ा कर सूरी वंश स्थापित किया था। सन् 1539 में, शेरशाह को चौसा की लड़ाई में हुमायूँ का सामना करना पड़ा जिसे शेरशाह ने जीत लिया। 1540 ई. में शेरशाह ने हुमायूँ को पुनः हराकर भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया और शेर खान की उपाधि लेकर सम्पूर्ण उत्तर भारत पर अपना साम्रज्य स्थापित किया l
23/05/2023
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Kannauj
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