28/01/2026
यूजीसी (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) ने 13 जनवरी 2026 को नए विनियम अधिसूचित किए हैं, जिन्हें 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना विनियम, 2026' कहा जा रहा है। यह 2012 के पुराने नियमों की जगह लेगा और इसका मुख्य उद्देश्य परिसरों में जाति, धर्म, लिंग और विकलांगता आधारित भेदभाव को समाप्त करना है।
यूजीसी विनियम 2026 की प्रमुख विशेषताएं:
समानता समितियाँ (Equity Committees): प्रत्येक संस्थान में कम से कम 10 सदस्यों वाली एक 'इक्विटी कमेटी' और 'समान अवसर केंद्र' (EOC) बनाना अनिवार्य है।
विस्तृत दायरा: पहली बार इन नियमों के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी जाति-आधारित भेदभाव से सुरक्षा के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
शिकायत निवारण: संस्थानों को 24x7 हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल बनाए रखना होगा। शिकायतों का समाधान एक निश्चित समय सीमा में करना अनिवार्य है।
कठोर दंड: नियमों का उल्लंघन करने पर यूजीसी संस्थान की फंडिंग रोक सकता है, मान्यता रद्द कर सकता है या भारी जुर्माना लगा सकता है।
विवाद और विरोध का कारण:
इस बिल को लेकर दिल्ली, लखनऊ और अन्य शहरों में छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सामान्य वर्ग की चिंता: कुछ छात्र समूहों का तर्क है कि ये नियम केवल आरक्षित श्रेणियों (SC, ST, OBC) पर केंद्रित हैं, जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की अनदेखी हो सकती है।
स्वायत्तता पर प्रभाव: आलोचकों का मानना है कि इससे विश्वविद्यालयों के कामकाज में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा।
नोट: साथ ही, सरकार 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' पर भी काम कर रही है, जो यूजीसी और AICTE जैसी संस्थाओं को बदलकर एक एकल नियामक (HECI) बनाने का प्रस्ताव देता है।