Sarva Shiksha Abhiyan

Sarva Shiksha Abhiyan Welcome Friends, My aim to design this page is to increase attraction towards schools. So that Teachers, Students and Community may think Positively ..

Sarva Shiksha Abhiyan overall goals include universal access and retention, bridging of gender and social category gaps in education and enhancement of learning levels of children. SSA provides for a variety of interventions, including inter alia, opening of new schools and alternate schooling facilities, construction of schools and additional classrooms, toilets and drinking water, provisioning f

or teachers, periodic teacher training and academic resource support, textbooks and support for learning achievement. These provisions need to be aligned with the legally mandated norms and standards and free entitlements mandated by the RTE act. The new law provides a justiciable legal framework that entitles all children between the age of 6-14 years free and compulsory admission, attendance and completion of elementary education. It provides for children's right to an education of equitable quality, based on principles of equity and non-discrimination. Most importantly, it provides for children's right to an education that is free from fear, stress and anxiety. Salient Features of the RTE Act, 2009

•The right of children to free and compulsory education till completion of elementary education in a neighborhood school.

•It clarifies that 'compulsory education' means obligation of the appropriate government to provide free elementary education and ensure compulsory admission, attendance and completion of elementary education to every child in the six to fourteen age group. 'Free' means that no child shall be liable to pay any kind of fee or charges or expenses which may prevent him or her from pursuing and completing elementary education.

•It makes provisions for a non-admitted child to be admitted to an age appropriate class.

•It specifies the duties and responsibilities of appropriate Governments, local authority and parents in providing free and compulsory education, and sharing of financial and other responsibilities between the Central and State Governments.

•It provides for rational deployment of teachers by ensuring that the specified pupil teacher ratio is maintained for each school, rather than just as an average for the State or District or Block, thus ensuring that there is no urban-rural imbalance in teacher postings. It also provides for prohibition of deployment of teachers for non-educational work, other than decennial census, elections to local authority, state legislatures and parliament, and disaster relief.

•It prohibits (a) physical punishment and mental harassment; (b) screening procedures for admission of children; (c) capitation free; (d) private tuition by teacher and (e) running of schools without recognition.

•It provides for development of curriculum in consonance with the values enshrined in the Constitution, and which would ensure the all-round development of the child, building on the child's knowledge, potentiality and talent and making the child free of fear, trauma and anxiety through a system of child friendly and child centered learning.

29/05/2017

एक छोटे से शहर के प्राथमिक स्कूल में कक्षा 5 की शिक्षिका थीं।
उनकी एक आदत थी कि वह कक्षा शुरू करने से पहले हमेशा "आई लव यू ऑल" बोला करतीं। मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं कहती । वह कक्षा के सभी बच्चों से उतना प्यार नहीं करती थीं।
कक्षा में एक ऐसा बच्चा था जो उनको एक आंख नहीं भाता। उसका नाम राजू था। राजू मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आजाया करता है। उसके बाल खराब होते, जूतों के बन्ध खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान। । । व्याख्यान के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता।
मिस के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखता तो लग जाता..मगर उसकी खाली खाली नज़रों से उन्हें साफ पता लगता रहता.कि राजू शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब हे.धीरे धीरे मिस को राजू से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही राजू मिस की आलोचना का निशाना बनने लगता। सब बुराई उदाहरण राजू के नाम पर किये जाते. बच्चे उस पर खिलखिला कर हंसते.और मिस उसको अपमानित कर के संतोष प्राप्त करतीं। राजू ने हालांकि किसी बात का कभी कोई जवाब नहीं दिया था।
मिस को वह एक बेजान पत्थर की तरह लगता जिसके अंदर महसूस नाम की कोई चीज नहीं थी। प्रत्येक डांट, व्यंग्य और सजा के जवाब में वह बस अपनी भावनाओं से खाली नज़रों से उन्हें देखा करता और सिर झुका लेता । मिस को अब इससे गंभीर चिढ़ हो चुकी थी।
पहला सेमेस्टर समाप्त हो गया और रिपोर्ट बनाने का चरण आया तो मिस ने राजू की प्रगति रिपोर्ट में यह सब बुरी बातें लिख मारी । प्रगति रिपोर्ट माता पिता को दिखाने से पहले हेड मिसट्रेस के पास जाया करती थी। उन्होंने जब राजू की रिपोर्ट देखी तो मिस को बुला लिया। "मिस प्रगति रिपोर्ट में कुछ तो प्रगति भी लिखनी चाहिए। आपने तो जो कुछ लिखा है इससे राजू के पिता इससे बिल्कुल निराश हो जाएंगे।" "मैं माफी माँगती हूँ, लेकिन राजू एक बिल्कुल ही अशिष्ट और निकम्मा बच्चा है । मुझे नहीं लगता कि मैं उसकी प्रगति के बारे में कुछ लिख सकती हूँ। "मिस घृणित लहजे में बोलकर वहां से उठ आईं।
हेड मिसट्रेस ने एक अजीब हरकत की। उन्होंने चपरासी के हाथ मिस की डेस्क पर राजू की पिछले वर्षों की प्रगति रिपोर्ट रखवा दी । अगले दिन मिस ने कक्षा में प्रवेश किया तो रिपोर्ट पर नजर पड़ी। पलट कर देखा तो पता लगा कि यह राजू की रिपोर्ट हैं। "पिछली कक्षाओं में भी उसने निश्चय ही यही गुल खिलाए होंगे।" उन्होंने सोचा और कक्षा 3 की रिपोर्ट खोली। रिपोर्ट में टिप्पणी पढ़कर उनकी आश्चर्य की कोई सीमा न रही जब उन्होंने देखा कि रिपोर्ट उसकी तारीफों से भरी पड़ी है। "राजू जैसा बुद्धिमान बच्चा मैंने आज तक नहीं देखा।" "बेहद संवेदनशील बच्चा है और अपने मित्रों और शिक्षक से बेहद लगाव रखता है।" "
अंतिम सेमेस्टर में भी राजू ने प्रथम स्थान प्राप्त कर लिया है। "मिस ने अनिश्चित स्थिति में कक्षा 4 की रिपोर्ट खोली।" राजू ने अपनी मां की बीमारी का बेहद प्रभाव लिया। .उसका ध्यान पढ़ाई से हट रहा है। "" राजू की माँ को अंतिम चरण का कैंसर हुआ है। । घर पर उसका और कोई ध्यान रखनेवाला नहीं है.जिसका गहरा प्रभाव उसकी पढ़ाई पर पड़ा है। ""
राजू की माँ मर चुकी है और इसके साथ ही राजू के जीवन की चमक और रौनक भी। । उसे बचाना होगा...इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। "मिस के दिमाग पर भयानक बोझ हावी हो गया। कांपते हाथों से उन्होंने प्रगति रिपोर्ट बंद की । आंसू उनकी आँखों से एक के बाद एक गिरने लगे.
अगले दिन जब मिस कक्षा में दाख़िल हुईं तो उन्होंने अपनी आदत के अनुसार अपना पारंपरिक वाक्यांश "आई लव यू ऑल" दोहराया। मगर वह जानती थीं कि वह आज भी झूठ बोल रही हैं। क्योंकि इसी क्लास में बैठे एक उलझे बालों वाले बच्चे राजू के लिए जो प्यार वह आज अपने दिल में महसूस कर रही थीं..वह कक्षा में बैठे और किसी भी बच्चे से हो ही नहीं सकता था । व्याख्यान के दौरान उन्होंने रोजाना दिनचर्या की तरह एक सवाल राजू पर दागा और हमेशा की तरह राजू ने सिर झुका लिया। जब कुछ देर तक मिस से कोई डांट फटकार और सहपाठी सहयोगियों से हंसी की आवाज उसके कानों में न पड़ी तो उसने अचंभे में सिर उठाकर उनकी ओर देखा। अप्रत्याशित उनके माथे पर आज बल न थे, वह मुस्कुरा रही थीं। उन्होंने राजू को अपने पास बुलाया और उसे सवाल का जवाब बताकर जबरन दोहराने के लिए कहा। राजू तीन चार बार के आग्रह के बाद अंतत:बोल ही पड़ा। इसके जवाब देते ही मिस ने न सिर्फ खुद खुशान्दाज़ होकर तालियाँ बजाईं बल्कि सभी से भी बजवायी.. फिर तो यह दिनचर्या बन गयी। मिस हर सवाल का जवाब अपने आप बताती और फिर उसकी खूब सराहना तारीफ करतीं। प्रत्येक अच्छा उदाहरण राजू के कारण दिया जाने लगा । धीरे-धीरे पुराना राजू सन्नाटे की कब्र फाड़ कर बाहर आ गया। अब मिस को सवाल के साथ जवाब बताने की जरूरत नहीं पड़ती। वह रोज बिना त्रुटि उत्तर देकर सभी को प्रभावित करता और नये नए सवाल पूछ कर सबको हैरान भी।
उसके बाल अब कुछ हद तक सुधरे हुए होते, कपड़े भी काफी हद तक साफ होते जिन्हें शायद वह खुद धोने लगा था। देखते ही देखते साल समाप्त हो गया और राजू ने दूसरा स्थान हासिल कर लिया यानी दूसरी क्लास ।
विदाई समारोह में सभी बच्चे मिस के लिये सुंदर उपहार लेकर आए और मिस की टेबल पर ढेर लग गये । इन खूबसूरती से पैक हुए उपहार में एक पुराने अखबार में बद सलीके से पैक हुआ एक उपहार भी पड़ा था। बच्चे उसे देखकर हंस पड़े। किसी को जानने में देर न लगी कि उपहार के नाम पर ये राजू लाया होगा। मिस ने उपहार के इस छोटे से पहाड़ में से लपक कर उसे निकाला। खोलकर देखा तो उसके अंदर एक महिलाओं की इत्र की आधी इस्तेमाल की हुई शीशी और एक हाथ में पहनने वाला एक बड़ा सा कड़ा था जिसके ज्यादातर मोती झड़ चुके थे। मिस ने चुपचाप इस इत्र को खुद पर छिड़का और हाथ में कंगन पहन लिया। बच्चे यह दृश्य देखकर हैरान रह गए। खुद राजू भी। आखिर राजू से रहा न गया और मिस के पास आकर खड़ा हो गया। ।
कुछ देर बाद उसने अटक अटक कर मिस को बताया कि "आज आप में से मेरी माँ जैसी खुशबू आ रही है।"
समय पर लगाकर उड़ने लगा। दिन सप्ताह, सप्ताह महीने और महीने साल में बदलते भला कहां देर लगती है? मगर हर साल के अंत में मिस को राजू से एक पत्र नियमित रूप से प्राप्त होता जिसमें लिखा होता कि "इस साल कई नए टीचर्स से मिला।। मगर आप जैसा कोई नहीं था।" फिर राजू का स्कूल समाप्त हो गया और पत्रों का सिलसिला भी। कई साल आगे गुज़रे और मिस रिटायर हो गईं। एक दिन उन्हें अपनी मेल में राजू का पत्र मिला जिसमें लिखा था:
"इस महीने के अंत में मेरी शादी है और आपके बिना शादी की बात मैं नहीं सोच सकता। एक और बात .. मैं जीवन में बहुत सारे लोगों से मिल चुका हूं।। आप जैसा कोई नहीं है.........डॉक्टर राजू
साथ ही विमान का आने जाने का टिकट भी लिफाफे में मौजूद था। मिस खुद को हरगिज़ न रोक सकती थीं। उन्होंने अपने पति से अनुमति ली और वह दूसरे शहर के लिए रवाना हो गईं। शादी के दिन जब वह शादी की जगह पहुंची तो थोड़ी लेट हो चुकी थीं। उन्हें लगा समारोह समाप्त हो चुका होगा.. मगर यह देखकर उनके आश्चर्य की सीमा न रही कि शहर के बड़े डॉ, बिजनेसमैन और यहां तक कि वहां पर शादी कराने वाले पंडितजी भी थक गये थे. कि आखिर कौन आना बाकी है...मगर राजू समारोह में शादी के मंडप के बजाय गेट की तरफ टकटकी लगाए उनके आने का इंतजार कर रहा था। फिर सबने देखा कि जैसे ही यह पुरानी शिक्षिका ने गेट से प्रवेश किया राजू उनकी ओर लपका और उनका वह हाथ पकड़ा जिसमें उन्होंने अब तक वह सड़ा हुआ सा कंगन पहना हुआ था और उन्हें सीधा मंच पर ले गया। माइक हाथ में पकड़ कर उसने कुछ यूं बोला "दोस्तों आप सभी हमेशा मुझसे मेरी माँ के बारे में पूछा करते थे और मैं आप सबसे वादा किया करता था कि जल्द ही आप सबको उनसे मिलाउंगा।।।........यह मेरी माँ हैं - ------------------------- "
_____
!! प्रिय दोस्तों.... इस सुंदर कहानी को सिर्फ शिक्षक और शिष्य के रिश्ते के कारण ही मत सोचिएगा । अपने आसपास देखें, राजू जैसे कई फूल मुरझा रहे हैं जिन्हें आप का जरा सा ध्यान, प्यार और स्नेह नया जीवन दे सकता है...........

कांकेर ...... '' उमंग ' में  पुस्तक उत्सव बाल गतिविधियां ''छत्तीसगढ़ शासन व स्थानीय जिला प्रशासन दा्रा आयोजित बच्चों के ...
17/05/2017

कांकेर ......

'' उमंग ' में पुस्तक उत्सव बाल गतिविधियां ''

छत्तीसगढ़ शासन व स्थानीय जिला प्रशासन दा्रा आयोजित बच्चों के लिए समर कैम्प का आयोजन किया गया।
जिसमें जिले भर के 200 से अधिक छात्र और छात्राओं ने भाग लिया।बच्चे भीषण गर्मी में जब तापमान 46 डिग्री पर हैं,ऐसे समय भी बच्चों में सीखने की उत्सुकता का निर्माण देखते ही बनता था।
बहरहाल राष्ट्रीय पुस्तक न्यास,भारत ने इन बच्चों के लिए 15 से 19 मई के मध्य बेहतरीन गतिविधियां का आयोजन किया।जिसमें देश के प्रख्यात रचनाकारों को आमंत्रित किया गया जिसमें प्रख्यात साहित्यकार डॉ दिविक रमेश,डॉ प्रत्युष गुलेरी हिमाचल से,उत्तर प्रदेश से डॉ सुरेंद्र विक्रम शुभराम्भ अवसर पर मौजूद रहे।मुख्य अतिथि डॉ दिविक रमेश ने कहा '
न्यास एक बड़ा प्रकाशन संस्थान है जो मन से लिखी गई सुन्दर पुस्तकों का प्रकाशन विगत 60 वर्षों से करता आया है।देश भर की श्रेष्ठ पुस्तकों के प्रकाशन में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास,भारत अव्वल है जिसने हजारों की संख्या में पुस्तकें तमाम भारतीय भाषाओं में प्रकाशित की हैं।देश और दुनिया मे बेहतरीन साहित्य को उपलब्ध कराने का दायित्व न्यास ने उठाया हैं।आज हम यह विश्वास दिलाते है कि पढ़ने की आदत को अपने रोजमर्रा के जीवन मे अपनाएंगे।बच्चों के संवाद के सत्र में सब की उत्सुकता देखते ही बनीं।ऐसा लग रहा था मानों उनके भीतर की ललक उन्हें रचनाकारों से सम्वाद करने को उकसा रही थीं।दिविक रमेश ने इस अवसर पर सुंदर और सार्थक कविताओं को सुना कर सभी बच्चों को मंत्र मुग्ध कर दिया '
विशिष्ठ अतिथि डॉ सुरेन्द विक्रम ने कहा '
अपने बालपन से शुरु कर जीवन से जुड़े कई किस्सों को देखते ही देखते गढ़ दिया,यह भावना होती है लेखक की।विचार आते ही शब्द किताब के माध्यम से देश भर में दुनिया के बीच के पाठकों तक पहुंचने में पुस्तक कामयाब होती हैं।सीधे संवाद में बच्चों ने सुरेंद्र विक्रम से सवाल किए और उतने ही मासूमियत से बच्चों ने जवाब भी दिए।लगने लगा था मानो बच्चों की इस गतिविधि सत्र की वाकई प्रतीक्षा थीं।बच्चों ने मौके पर मौलिक कविताएं भी सुनाई और दूसरे बड़े साहित्यकारों की रचनाएं भी सुनाई।इशिका मिश्रा ने कविता सुनाई जिसे बाल श्रोताओं ने अपने बीच की कवयित्री का स्वागत किया।डॉ विक्रम ने कहा-हम देखते सब है पर कितने लोग संवेदनशील है कितने रचनात्मक हो पाते है,नहीं न!
हमें देखना यह है कि कितना समय हम पढ़ने को देते है और अन्य सांस्कृतिक कार्यों के लिये कितना समय निकाल पाते है।इसलिए हमें प्राथमिकता देनी होगी ताकि हम पुस्तक से जुड़ सकें।
कार्यक्रम में अध्यक्षता करते हुए हिमाचल से पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी के वंशज डॉ प्रत्युष गुलेरी ने कहा 'आज अपने अध्यापकों से मैं गुजारिश करना चाहूंगा कि वे अपने विद्यार्थियों को एक सीख दें ताकि बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो।न्यास के इस आयोजन हेतु डॉ गुलेरी ने जिलाधिकारी कांकेर को बधाई देते हुए कहा-इस आयोजन से जिले के बच्चों में एक स्वस्थ संदेश जाएगा कि पुस्तकों में किस्से है और कहानियां है,जो साहित्य के प्रति आज रुचि विकसित हुई,निश्चित ही यह भाव बच्चों को स्थायी सुख प्रदान करेगा।न्यास को भी बधाई दी कि वह पुस्तक प्रकाशन के साथ देश और दुनिया मे भी रचनाकारों को न्यास ने मंच दिया।उसके लिए न्यास को साधुवाद।शुभराम्भ सत्र में बच्चों ने रचनाकारों से भी दिल खोल के संवाद किया।न्यास ने रचनाकारों को तैयार किया है।न्यास से सबको जोड़ा है।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास,भारत के सहायक सम्पादक डॉ ललित किशोर मंडोरा ने कहा -निश्चित ही यह आयोजन बच्चों में पुस्तकों के प्रति एक संस्कार पैदा करेगा।बच्चे ही कल का भविष्य है।न्यास आपके लिए सुन्दर और बेहतरीन पुस्तकें ले कर आया है ताकि आप देख सके कि इन पुस्तकों के भीतर कितनी ज्ञान संपदा छिपी हुई हैं।
इस अवधि में न्यास ने नाटकों के जानकार,चित्रकारों और आदिवासी लेखन से जुड़े जानकारों को आमंत्रित किया।न्यास ने विषय के विशेष जानकारों को इसलिए बुलाया ताकि बच्चों में पढ़ने का गुण विकसित हो सके।
सहायक कार्यक्रम समन्वयक श्री संजीत श्रीवास्तव, स्थानीय समन्वयक श्री अनुपम और श्री गुप्तेश सलाम का सहयोग निश्चित ही इस आयोजन में एक बड़ी उम्मीद बच्चों से जुडी गतिविधियों के लिये दे गया।
पुस्तकों के बीच मे इस तरह के सार्थक संवाद बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए जरूरी ही नहीं अपितु अनिवार्य भी हैं।

कांकेर ज़िला में "उमंग 2017" ग्रीष्मकालीन कायर्क्रम का शुभारंभ
06/05/2017

कांकेर ज़िला में "उमंग 2017" ग्रीष्मकालीन कायर्क्रम का शुभारंभ

कांकेर जिला के नरहरपुर विकासखंड में माध्यमिक शाला देवगांव के विद्यालय परिसर में जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव मनाग्राम द...
20/04/2016

कांकेर जिला के नरहरपुर विकासखंड में माध्यमिक शाला देवगांव के विद्यालय परिसर में जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव मना

ग्राम देवगांव विकास खंड नरहरपुर में जिला स्तरीय प्रवेश उत्सव मनाया गया जिस के मुख्य अतिथि माननीय विक्रम देव उसेंडी सांसद कांकेर लोकसभा एवं जिला पंचायत अध्यक्ष ,उपाध्यक्ष जिला पंचायत सदस्य जनपद अध्यक्ष नरहरपुर , कलेक्टर श्रीमती शम्मी आबिदी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री चंदन कुमार अनुभागीय अधिकारी सुश्री रेणुका श्रीवास्तव जिला शिक्षा अधिकारी श्री भारद्वाज ,जिला परियोजना समन्वयक श्री गुप्ता ,समस्त विकासखंड के बी.इ.ओ.,बी.आर.सी. शिक्षक पालक सहित बच्चे उपस्थित थे

15/04/2016
कांकेर ज़िला में "उमंग" ग्रीष्मकालीन कायर्क्रम का सफल आयोजन ।
31/05/2015

कांकेर ज़िला में "उमंग" ग्रीष्मकालीन कायर्क्रम का सफल आयोजन ।

स्वच्छ भारत में सर्व शिक्षा अभियान ने भी बढ़ाया कदम ....कांकेर जिले में आयोजित स्वच्छता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत स्वच्...
22/03/2015

स्वच्छ भारत में सर्व शिक्षा अभियान ने भी बढ़ाया कदम ....कांकेर जिले में आयोजित स्वच्छता जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत स्वच्छता शपथ, विशेष आवशयकता वाले बच्चों की चित्रकला, वाल पेंटिंग , विशाल रंगोली के माध्यम से दिया स्वच्छता का सन्देश ।

एक नई दिशा दीजिये अपने बच्चे के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिये ।
24/12/2014

एक नई दिशा दीजिये अपने बच्चे के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिये ।

छ.ग. राज्य योजना आयोग में चेतन भगत का स्वागत है. सुनील कुमार जी को भी साधुवाद, वे सिर्फ १रूपये ही लेंगे. जयहिंद ...........
19/07/2014

छ.ग. राज्य योजना आयोग में चेतन भगत का स्वागत है. सुनील कुमार जी को भी साधुवाद, वे सिर्फ १रूपये ही लेंगे. जयहिंद ............

13/07/2014

Sarva Shiksha Abhiyan :- overall goals include universal access and retention, bridging of gender and social category gaps in education and enhancement of learning levels of children. SSA provides for a variety of interventions, including inter alia, opening of new schools and alternate schooling facilities, construction of schools and additional classrooms, toilets and drinking water, provisioning for teachers, periodic teacher training and academic resource support, textbooks and support for learning achievement. These provisions need to be aligned with the legally mandated norms and standards and free entitlements mandated by the RTE act.

The new law provides a justiciable legal framework that entitles all children between the age of 6-14 years free and compulsory admission, attendance and completion of elementary education. It provides for children's right to an education of equitable quality, based on principles of equity and non-discrimination. Most importantly, it provides for children's right to an education that is free from fear, stress and anxiety.

Salient Features of the RTE Act, 2009

•The right of children to free and compulsory education till completion of elementary education in a neighborhood school.

•It clarifies that 'compulsory education' means obligation of the appropriate government to provide free elementary education and ensure compulsory admission, attendance and completion of elementary education to every child in the six to fourteen age group. 'Free' means that no child shall be liable to pay any kind of fee or charges or expenses which may prevent him or her from pursuing and completing elementary education.

•It makes provisions for a non-admitted child to be admitted to an age appropriate class.

•It specifies the duties and responsibilities of appropriate Governments, local authority and parents in providing free and compulsory education, and sharing of financial and other responsibilities between the Central and State Governments.

•It provides for rational deployment of teachers by ensuring that the specified pupil teacher ratio is maintained for each school, rather than just as an average for the State or District or Block, thus ensuring that there is no urban-rural imbalance in teacher postings. It also provides for prohibition of deployment of teachers for non-educational work, other than decennial census, elections to local authority, state legislatures and parliament, and disaster relief.

•It prohibits (a) physical punishment and mental harassment; (b) screening procedures for admission of children; (c) capitation free; (d) private tuition by teacher and (e) running of schools without recognition.

•It provides for development of curriculum in consonance with the values enshrined in the Constitution, and which would ensure the all-round development of the child, building on the child's knowledge, potentiality and talent and making the child free of fear, trauma and anxiety through a system of child friendly and child centered learning.

शाला प्रवेश उत्सव ... विकासखंड नरहरपुर जिला कांकेर 2014
13/07/2014

शाला प्रवेश उत्सव ... विकासखंड नरहरपुर जिला कांकेर 2014

Address

Kanker
494334

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Sarva Shiksha Abhiyan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to Sarva Shiksha Abhiyan:

Shortcuts

Share