Panchgavya Vidyapeetham

Panchgavya Vidyapeetham FOUNDER INSTITUTE OF PANCHGAVYA MEDICAL SCIENCES

We are a GURUKULIYA VISHWAVIDYALAYA DEDICATED TO BHARTIYA ANCIENT KNOWLEDGE. Learn more at: panchvidya.com

Our mission is to revive and establish Panchgavya as a complete, comprehensive medical system.

20/08/2026

THE JOURNEY CONTINUES — 14th PMC 2026
The wait is over. The destination is revealed. ✨
After Tirupati, the 14th Panchgavya Medical Conference now journeys to the sacred land of Amarkantak — where the spiritual essence of Bharat meets the living wisdom of Panchgavya.

📍 Amarkantak, Madhya Pradesh
🗓️ 27–29 November 2026
Three days. One sacred land. A national gathering of knowledge, tradition, research and Panchgavya Chikitsa.
Save the Dates.
The 14th PMC is coming to Amarkantak.

🌿 Gomaata Se Nirogi Bharat
🌿 Gomaata Se Asadhya Nahi Koi Rog

19/08/2026

यात्रा जारी है — 14वाँ पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन 2026
प्रतीक्षा समाप्त हुई।
गंतव्य की घोषणा हो गई। ✨
तिरुपति के बाद, 14वाँ पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन अब पहुँचेगा भारत की पवित्र तपोभूमि अमरकंटक में — जहाँ भारत की आध्यात्मिक चेतना और पंचगव्य के सनातन ज्ञान का अद्भुत संगम होगा।
📍 अमरकंटक, मध्य प्रदेश
🗓️ 27–29 नवम्बर 2026
तीन दिन।
एक पवित्र भूमि।
ज्ञान, परंपरा, अनुसंधान और पंचगव्य चिकित्सा का एक विराट राष्ट्रीय संगम।
तिथियाँ अभी से सुरक्षित कर लीजिए।
14वाँ पंचगव्य चिकित्सा महासम्मेलन — अब अमरकंटक में।
🌿 गऊमाता से निरोगी भारत
🌿 गऊमाता से असाध्य नहीं कोई रोग

🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!जस भारत भूमि ने विश्व को सात्विकता और वैदिक ज्ञान का मार्ग दिखया, उसी भारत की म...
15/08/2026

🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!

जस भारत भूमि ने विश्व को सात्विकता और वैदिक ज्ञान का मार्ग दिखया, उसी भारत की मिट्टी में आज पंचगव्य विज्ञान फिर से अपनी जड़ें मज़बूत कर रहा है।

आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर संकल्प लें — अपनी जड़ों की ओर लौटने का, स्वदेशी और सात्विक जवनशैली अपनाने का।

जय हिंद 🇮🇳

🇮🇳

07/08/2026

क्रोध — आभामंडल को कमज़ोर करने वाला सबसे बड़ा कारण

Guruji गव्यसिद्धाचार्य डॉ. निरंजनभाई वर्मा जी बता रहे हैं — मनुष्य के पास आभामंडल को विकृत और कमज़ोर करने की जो विशेषता है, उसमें सबसे बड़ी भूमिका क्रोध की है।

जैसे ही आप क्रोध करते हैं, आभामंडल की ऊर्जा तेज़ी से विपरीत दिशा में घूमने लगती है — और यही असंतुलन शरीर और मन दोनों को प्रभावित करता है।

पूरा वीडियो देखने के लिए बायो लिंक पर क्लिक करें 👆

06/08/2026

🛡️ अपने आभामंडल को कैसे बनाएं मजबूत?

Guruji गव्यसिद्धाचार्य डॉ. निरंजनभाई वर जी बता रहे हैं — कैसे हम अपने आभामंडल को इतना सुदृढ़ बना सकते हैं कि हमारे आभामंडल में बैठा हुआ कोई भी व्यक्ति हमें प्रभावित न कर पाए।

यह वैदिक विज्ञान हमें नकारात्मक ऊर्जाओं से स्वयं की रक्षा करना सिखाता है।

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05/08/2026

क्या आपने कभी सोचा है कि भोजन करने से पहले थाली के चारों ओर जल क्यों डाला जाता है?

क्या यह केवल एक परंपरा है, या इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक रहस्य छिपा है?

इस ज्ञानवर्धक वीडियो में गव्यसिद्धाचार्य डॉ. निरंजन भाई वर्मा जी (गुरुजी) भोजन से पूर्व थाली के चारों ओर जल डालने की प्राचीन भारतीय परंपरा का महत्व समझा रहे हैं। यह प्रक्रिया भोजन के अन्नमंडल को संतुलित एवं शुद्ध करने में सहायक मानी गई है।

हमारी संस्कृति की ऐसी ही अनेक दिव्य परंपराओं के पीछे छिपे ज्ञान को जानने के लिए यह वीडियो अवश्य देखें।

🙏 अपने परिवार और मित्रों के साथ भी साझा करें।

▶️ इस विषय को विस्तार से समझने के लिए पूरा वीडियो देखें।
🔗 पूरा वीडियो देखने के लिए हमारी प्रोफ़ाइल (Bio) में दिए गए लिंक पर जाएँ।

04/08/2026

🐄✨ गौमाता के आभामंडल में असाध्य रोगों का उपचार

Guruji गव्यसिद्धाचार्य डॉ. निरंजनभाई वर्मा जी बता रहे हैं — गौमाता के आभामंडल में रहकर बड़ी से बड़ी बीमारियां बिल्कुल ठीक हो सकती हैं, और यह केवल कहा नहीं गया, बल्कि करके भी देखा गया है।

यह वैदिक विज्ञान गौमाता की चिकित्सीय शक्ति का जीवंत प्रमाण है।

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01/08/2026

🐄☀️ गाय — साक्षात सूर्य नारायण का स्वरूप

Guruji गव्यसिद्धाचार्य डॉ. निरंजनभाई वर्मा जी बता रहे हैं — हमारे शास्त्र कहते हैं कि गाय कुछ और नहीं, साक्षात् सूर्य हैं। जिस सूर्य नारायण के समीप हम कभी जा नहीं सकते, वही सूर्य नारायण गौ रूपी शरीर में हमारे साथ, हमारे बीच विराजमान हैं।

यह वैदिक ज्ञान गौमता के प्रति हमारी श्रद्धा को एक नई गहराई देता है।

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31/07/2026

💧 बहता जल vs संग्रहित जल — हमारे पूर्वजों का जल विज्ञान

Guruji गव्यसिद्धाचार्य डॉ. निरंजनभाई वर्मा जी बता रहे हैं — हमारे पूर्वज सदैव बहती हुई नदियों का जल पीते थे, संग्रहित जल कभी नहीं। यह कोई परंपरा मात्र नहीं, बल्कि गहरा वैज्ञानिक सत्य है।

आज भी योगियों को देख लीजिए — वे संग्रहित जल या बोतल का पानी कभी नहीं पीते। यही जल विज्ञान हमारे शरीर के आभामंडल को प्राकृत बनाए रखने की कुंजी है।

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30/07/2026

श्वास (सांस) और आभामंडल का गहरा सम्बन्ध
Guruji गव्यसिद्धाचार्य डॉ. निरंजनभाई वर्मा जी बता रहे हैं — यदि हमारी श्वास प्राकृत है, तो उससे उत्पन्न होने वाला हमारा आभामंडल भी प्राकृत होगा।

लेकिन प्राकृत श्वास वहीं मिलेगी जहाँ प्रदूषण नहीं है — और आज शहरों में रहते हुए यह हमारे लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

पूरा वीडियो देखने के लिए बायो लिंक पर क्लिक करें 👆

Address

No. 1 Gavyasiddh Bhawan, Panchgavya Street, Kallipattu, Puthagaram
Kanchipuram
631561

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