09/06/2025
Sushila Sinha Hindi School, Ulhasnagar, Thane,
Huge curruption by the government official.. which leads to starving conditions of poor children in
09/06/2025
*/////स्वर्गीय सुशीला सिन्हा जी की////*
////////// *५७वी पुण्यतिथि* ////////////
****************************
आज दिनांक ०९ जून २०२५ को "सुशीला सिन्हा हिन्दी प्राथमिक पाठशाला" की नींव रखने वाली स्वर्गीय सुशीला सुरेशप्रसाद सिन्हा जी की ५७ वी पुण्यतिथि है।
दोस्तो,आज से उनसठ साल पूर्व,उल्हासनगर शहर में,बिहार राज्य से आये हुए एक दंपत्ति ने अपने खुद के रोजगार से पहले, यहां के गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान करने की बात सोची,औऱ उसके लिए उन्होंने अपने ही घर के एक हिस्से में छोटीसी पाठशाला की शुरुवात की,ये कितनी महत्वपूर्ण और गौर करने वाली बात है।बाद में जब बच्चे बढ़ने लगे,तब उन्होंने अपने घर के आधे हिस्से को बेचकर उल्हासनगर -५ में ही दो जमीने पाठशाला के लिए खरीदी,एक खुली जमीन,ब्लॉक ए-९९४ के पास,कैलाश कॉलोनी,उल्हासनगर -५,और दूसरा ब्लॉक नंबर १०००/२०००,कैलाश कॉलोनी उल्हासनगर -५.
सन १९६८ में मान. सुशीला जी का निधन हो गया,और पाठशाला की जिम्मेदारी उनके पति श्री. सुरेशप्रसाद जी के कंधों पर आ गई।
सुरेशप्रसाद जी ने भी हिम्मत नही हारी,और पाठशाला को नियमित रूपसे चलाया,उसे सरकारी अनुदान दिलवाया,आज उस पाठशाला में सैकड़ो विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे है।और कई शिक्षक/शिक्षकेतर कर्मचारियों का परिवार अपना पेट भर रहा है।
इस पोस्ट के द्वारा मैं अनिल सिन्हा और मेरा परिवार स्वर्गीय सुशीला सिन्हा जी को उनकी ५७ वी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते है।
दोस्तों,इस पाठशाला का संचालन करनेवाली संस्था "आदर्श शिक्षण समिति" जो कि एक "हिन्दी अल्पसंख्यक संस्था" है। जिसमे सिर्फ हिन्दी भाषिक प्रान्त जैसे उत्तर प्रदेश,बिहार,मध्यप्रदेश,राजस्थान राज्यो के लोगों का समूह या इन प्रान्तों के लोग ही पदाधिकारी के पद पर रह सकते है। इस तरह की शर्तों पर ही महाराष्ट्र शासन ने इस संस्था को मान्यता दी है। इस "हिन्दी अल्पसंख्यक" मान्यता का दुरुपयोग करके संस्थापकों को दादागिरी करके (गुन्हेगार राजनैतिक लोगो को साथ मे लेकर) संस्था से निकालने का प्रयत्न करने वाले नागेंद्र प्रसाद नाम के व्यक्ति ने अपने ९ वी,१० वी,और डी. एड.में एक-एक साल अनुतीर्ण होने वाले "......" बेटे को बच्चो का भविष्य खराब करने के लिए पाठशाला का मुख्याध्यापक बनाया है।
हिन्दी अल्पसंख्यांक मान्यता के कारण वरिष्ठ और योग्य शिक्षकों को मुख्याध्यापक न बनाकर अपने अयोग्य बेटे को नागेंद्र प्रसाद ने मुख्याध्यापक बनाया है। और संस्थापकों के परिवार पर दबाव बनाने के लिए,(सुशिला सिन्हा जी के बेटे अनिल सिन्हा को डराने,धमकाने के लिए) पहले हरदास माखीजा,(पूर्व महापौर, उ म पा),शिक्षक मतदार संघ के आमदार स्वर्गीय रामनाथ दादा मोते सर,मा.श्यामदादा गायकवाड़ जी के दामाद श्री.अरविंद उबाले सर जैसे गणमान्य लोगों को संस्था में पदाधिकारी बनाया। लेकिन सच्चाई जानने के बाद इन सभी महानुभावो ने अपने पद से इस्तीफा देकर संस्था से बाहर चले गए।
अब इन लोगो के त्यागपत्र देने के बाद नागेंद्र प्रसाद और उसके ९ वी,१० वी और डी.एड.में एक-एक वर्ष अनुतीर्ण होने वाला बेटा राकेश नागेंद्र प्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी के मुरबाड तालुका के आमदार श्री.किशन शंकर कथोरे के परिवार को संस्था में अध्यक्ष से लेकर सदस्य तक का पद देने का षड्यंत्र किया है।जिसका कानूनी तरीके से सुशिला सिन्हा जी के पुत्र अनिल सिन्हा ने विरोध किया है। और बहुत जल्द ही किशन कथोरे साहब के परिवार वालो को इस हिन्दी अल्पसंख्यांक संस्था से कानूनी तरीके से बाहर निकाल दिया जावेगा।
उपरोक्त जितने लोगो को अल्पसंख्यक संस्था में अध्यक्ष या अन्य कोई पद पर लेने का सिर्फ एक कारण है की "इन लोगो के राजनैतिक दबाव से सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन पूरी तरह से नही करते है। साथ ही सुशीला सिन्हा जी के परिवार वालों को दादागिरी और गुंडागिरी से डराया जाता है।"
दोस्तो,इस पाठशाला और संस्था को मेरे माता-पिता ने कड़ी मेहनत से खड़ा किया है। क्या बाहुबली राजनेताओं से डर कर मै चुप रहूँ? क्या पाठशाला को बिकने से बचना मेरा फर्ज नही है? इसलिए पाठशाला के विकास के लिए संघर्ष करने वाले सुशिला सिन्हाजी के परिवार के सदस्यों को ताकत प्रदान करने की प्रार्थना ईश्वर से करें,ये विनती है।
*श्रद्धांजलि देने वाले*
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*अनिलकुमार सुरेशप्रसाद सिन्हा*-सुपुत्र सुशीला सु.सिन्हा
*अंजू अनिलकुमार सिन्हा*-पुत्रवधु सुशीला सु.सिन्हा
*अमित अनिलकुमार सिन्हा*-पौत्र सुशीला सु. सिन्हा
*अनामिका अनिलकुमार सिन्हा*-पौत्री सुशीला सु.सिन्हा
🌹🌹🌹🌹 १९ वी पुण्यतिथि 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹पुण्यतिथि 🌹🌹🌹🌹
स्व. श्री सुरेश प्रसाद सिन्हा (Founder of Sushila Sinha School & Founder chairman of Adarsh Shikshan Simiti)
आपकी शिक्षा के प्रति लगाव और गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की इच्छा से आपने अपनी पत्नी स्व. सुशील सिन्हाजी के नाम से सन1966-67 में ही सुशील सिन्हा पाठशाला की स्थापना की.. औऱ कठीन श्रम करके 100% अनुदान प्राप्त करवाया .. औऱ आज वहाँ हज़ारो गरीब बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे है..और कई शिक्षकों का परिवार आपके इस सामाजिक कार्य के करण चल रहा है।
आपके इस नेक कार्य को आपका वंश हमेशा क्रियाशील रहेगा।
ऐसी महान आत्मा को शत-शत नमन
सिन्हा परिवार
अनिलकुमार सिन्हा
अंजू अनिलकुमार सिन्हा
अनामिका अनिलकुमार सिन्हा
अमित अनिलकुमार सिन्हा
Memes office Memes and entertainment
30/08/2024
"सुशीला सिन्हा हिंदी प्राथमिक पाठशाळेतील "लिपिक अंजु सिन्हा यांचा सेवानिवृत्ती सोहळा अंजु अनिलकुमार सिन्हा यांचा सेवानिवृत्ती सोहळा
22/08/2024
20/08/2024
*सेवानिवृति समारोह*
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*"आदर्श शिक्षण समिति"* द्वारा संचालित *"सुशीला सिन्हा हिन्दी प्राथमिक पाठशाला"* में लिपिक के पद पर कार्यरत स्वर्गीय सुशीला सिन्हाजी की बहु श्रीमती अंजु अनिल सिन्हा,पाठशाला को पैंतीस वर्षों की सेवा प्रदान करके सेवानिवृत हुई।
श्रीमती अंजु सिन्हाजी ने पाठशाला में स्थापित स्वर्गीय सुशीला सिन्हाजी के तस्वीर पर हारफूल चढ़ाकर उनका आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर कैलाश कॉलोनी के प्राचीन हनुमान मंदिर के पुजारी एवम मंदिर कमेटी के सदस्य श्री.संतोष वाघ साहब और श्री.पाटिल साहब ने श्रीफल,और पुष्पगुच्छ देकर श्रीमती अंजु अनिल सिन्हाजी का सम्मान किया।
पाठशाला की नीव रखने वाली महिला स्वर्गीय सुशीला सुरेशप्रसाद सिन्हा और पाठशाला का संचालन करने वाली संस्था के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय सुरेशप्रसाद सिन्हा के पूरे परिवार की तरफ से श्रीमती अंजु अनिल सिन्हाजी को हार्दिक हार्दिक शुभकामना दी गई। इस अवसर पर उल्हासनगर और अंबरनाथ के रहवासियों और गणमान्य लोगो ने समारोह में उपस्थित होकर श्रीमती अंजु सिन्हाजी को शुभकामना एवम आशीर्वाद दिए।
*कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वाले*
*उल्हासनगर के साथ साथ थाने जिला के रहवासियों की निस्वार्थ सेवा करने वाले समाजसेवक डॉक्टर श्री. शाहबुद्दीन शेख साहब*
*उल्हासनगर शहर जिल्हा कांग्रेस के अध्यक्ष श्री.रोहित साल्वे साहब*
*अंबरनाथ और उल्हासनगर में समाज सेवा करनेवाले समाज सेवक जनाब बशीर भाई शेख,जनाब नज़ीर भाई शेख*
*मुस्लिम जमात सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष जनाब श्री.जलील खान,कार्यध्यक्ष जनाब श्री.शकील खान,जनाब हाजी वली मोहम्मद खान,*
जनाब साबिर शेख,जनाब जाफर चौधरी,जनाब अंसार भाई, डॉक्टर बलबीर सिंह,श्री.सज्जन शेकटे,और उनका परिवार, श्री.मनोहर मनुजा,जनाब शेराज शेख, जनाब इरफान सुलतान खान,और उनका परिवार,जनाब गुफरान खान,जनाब रिजवान खान,और उनका परिवार, शंकर भाई,वकील कुमारी रूमाना शेख और उनका परिवार,झरीना खान,निशा कांबले,श्रीमती ज्योतिलता सिंह और उनका परिवार,कंचन चावला, श्री.सतीश सोनी और उनका परिवार, एवम अन्य
*पत्रकार श्री.भाजुशाली,*
*आभार प्रकट करनेवाले*
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*श्री.अरुणकुमार सुरेशप्रसाद सिन्हा* – संस्थापक सदस्य एवं स्वर्गीय सुशीला सुरेशप्रसाद सिन्हाजी के बड़े सुपुत्र.
श्रीमती माया अरुणकुमार सिन्हा
डॉ.राजकुमार अरुणकुमार सिन्हा
श्रीमती अर्पिता राजकुमार सिन्हा
कु. श्रेया राजकुमार सिन्हा
*श्री.अनिलकुमार सुरेशप्रसाद सिन्हा* – स्वर्गीय सुशीला सुरेशप्रसाद सिन्हाजी के छोटे सुपुत्र.
प्रो.अमित अनिलकुमार सिन्हा
एड.अनामिका अनिलकुमार सिन्हा
*श्री.सुनिल कामेश्वरप्रसाद सिन्हा* – स्वर्गीय सुशीला सिन्हाजी के भतीजे.
श्रीमती सीमा सुनिल सिन्हा
कु.पूर्वा सुनिल सिन्हा
कु.पायल सुनिल सिन्हा
*श्री.प्रमोदकुमार हरसहाय सक्सेना*
श्रीमती संतोष प्रमोद सक्सेना
श्री.शेखर प्रमोद सक्सेना
श्रीमती मुदिता शेखर सक्सेना
कु.प्रपन्न शेखर सक्सेना
*कल्पना प्रदीप सक्सेना*
कु.कृष्णा प्रदीप सक्सेना
कु.वैष्णवी प्रदीप सक्सेना
*श्री.आलोककुमार हरसहाय सक्सेना*
*समस्त सिन्हा और सक्सेना परिवार*
09/06/2024
*/////स्वर्गीय सुशीला सिन्हा जी की////*
////////// *५६ वी पुण्यतिथि* ////////////
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आज दिनांक ०९ जून २०२४ को "सुशीला सिन्हा हिन्दी प्राथमिक पाठशाला" की नींव रखने वाली स्वर्गीय सुशीला सुरेशप्रसाद सिन्हा जी की ५६ वी पुण्यतिथि है।
दोस्तो,आज से उनसठ साल पूर्व,उल्हासनगर शहर में,बिहार राज्य से आये हुए एक दंपत्ति ने अपने खुद के रोजगार से पहले, यहां के गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान करने की बात सोची,औऱ उसके लिए उन्होंने अपने ही घर के एक हिस्से में छोटीसी पाठशाला की शुरुवात की,ये कितनी महत्वपूर्ण और गौर करने वाली बात है।बाद में जब बच्चे बढ़ने लगे,तब उन्होंने अपने घर के आधे हिस्से को बेचकर उल्हासनगर -५ में ही दो जमीने पाठशाला के लिए खरीदी,एक खुली जमीन,ब्लॉक ए-९९४ के पास,कैलाश कॉलोनी,उल्हासनगर -५,और दूसरा ब्लॉक नंबर १०००/२०००,कैलाश कॉलोनी उल्हासनगर -५.
सन १९६८ में मान. सुशीला जी का निधन हो गया,और पाठशाला की जिम्मेदारी उनके पति श्री. सुरेशप्रसाद जी के कंधों पर आ गई।
सुरेशप्रसाद जी ने भी हिम्मत नही हारी,और पाठशाला को नियमित रूपसे चलाया,उसे सरकारी अनुदान दिलवाया,आज उस पाठशाला में सैकड़ो विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे है।और कई शिक्षक/शिक्षकेतर कर्मचारियों का परिवार अपना पेट भर रहा है।
इस पोस्ट के द्वारा मैं अनिल सिन्हा और मेरा परिवार स्वर्गीय सुशीला सिन्हा जी को उनकी ५६ वी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते है।
दोस्तों,इस पाठशाला का संचालन करनेवाली संस्था "आदर्श शिक्षण समिति" जो कि एक "हिन्दी अल्पसंख्यक संस्था" है। जिसमे सिर्फ हिन्दी भाषिक प्रान्त जैसे उत्तर प्रदेश,बिहार,मध्यप्रदेश,राजस्थान राज्यो के लोगों का समूह या इन प्रान्तों के लोग ही पदाधिकारी के पद पर रह सकते है। इस तरह की शर्तों पर ही महाराष्ट्र शासन ने इस संस्था को मान्यता दी है। इस "हिन्दी अल्पसंख्यक" मान्यता का दुरुपयोग करके संस्थापकों को दादागिरी करके (गुन्हेगार राजनैतिक लोगो को साथ मे लेकर) संस्था से निकालने का प्रयत्न करने वाले नागेंद्र प्रसाद नाम के व्यक्ति ने अपने ९ वी,१० वी,और डी. एड.में एक-एक साल अनुतीर्ण होने वाले "......" बेटे को बच्चो का भविष्य खराब करने के लिए पाठशाला का मुख्याध्यापक बनाया है।
हिन्दी अल्पसंख्यांक मान्यता के कारण वरिष्ठ और योग्य शिक्षकों को मुख्याध्यापक न बनाकर अपने अयोग्य बेटे को नागेंद्र प्रसाद ने मुख्याध्यापक बनाया है। और संस्थापकों के परिवार पर दबाव बनाने के लिए,(सुशिला सिन्हा जी के बेटे अनिल सिन्हा को डराने,धमकाने के लिए) पहले हरदास माखीजा,(पूर्व महापौर, उ म पा),शिक्षक मतदार संघ के आमदार स्वर्गीय रामनाथ दादा मोते सर,मा.श्यामदादा गायकवाड़ जी के दामाद श्री.अरविंद उबाले सर जैसे गणमान्य लोगों को संस्था में पदाधिकारी बनाया। लेकिन सच्चाई जानने के बाद इन सभी महानुभावो ने अपने पद से इस्तीफा देकर संस्था से बाहर चले गए।
अब इन लोगो के त्यागपत्र देने के बाद नागेंद्र प्रसाद और उसके ९ वी,१० वी और डी.एड.में एक-एक वर्ष अनुतीर्ण होने वाला बेटा राकेश नागेंद्र प्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी के मुरबाड तालुका के आमदार श्री.किशन शंकर कथोरे के परिवार को संस्था में अध्यक्ष से लेकर सदस्य तक का पद देने का षड्यंत्र किया है।जिसका कानूनी तरीके से सुशिला सिन्हा जी के पुत्र अनिल सिन्हा ने विरोध किया है। और बहुत जल्द ही किशन कथोरे साहब के परिवार वालो को इस हिन्दी अल्पसंख्यांक संस्था से कानूनी तरीके से बाहर निकाल दिया जावेगा।
उपरोक्त जितने लोगो को अल्पसंख्यक संस्था में अध्यक्ष या अन्य कोई पद पर लेने का सिर्फ एक कारण है की "इन लोगो के राजनैतिक दबाव से सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन पूरी तरह से नही करते है। साथ ही सुशीला सिन्हा जी के परिवार वालों को दादागिरी और गुंडागिरी से डराया जाता है।"
दोस्तो,इस पाठशाला और संस्था को मेरे माता-पिता ने कड़ी मेहनत से खड़ा किया है। क्या बाहुबली राजनेताओं से डर कर मै चुप रहूँ? क्या पाठशाला को बिकने से बचना मेरा फर्ज नही है? इसलिए पाठशाला के विकास के लिए संघर्ष करने वाले सुशिला सिन्हाजी के परिवार के सदस्यों को ताकत प्रदान करने की प्रार्थना ईश्वर से करें,ये विनती है।
*श्रद्धांजलि देने वाले*
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*अनिलकुमार सुरेशप्रसाद सिन्हा*-सुपुत्र सुशीला सु.सिन्हा
*अंजू अनिलकुमार सिन्हा*-पुत्रवधु सुशीला सु.सिन्हा
*अमित अनिलकुमार सिन्हा*-पौत्र सुशीला सु. सिन्हा
*अनामिका अनिलकुमार सिन्हा*-पौत्री सुशीला सु.सिन्हा
24/05/2024
*भावपूर्ण श्रद्धांजली*
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*आज दिनांक २४/०५/२०२४ को सुशीला सिन्हा हिन्दी प्राथमिक पाठशाला के संस्थापक और इस पाठशाला का संचालन करने वाली संस्था "आदर्श शिक्षण समिति" के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय सुरेशप्रसाद सिन्हा जी की १८ रवी (अट्ठारवी) पुण्यतिथि पर सुरेश प्रसाद सिन्हा जी के परिवार की तरफ से उनको भावपूर्ण श्रद्धांजली अर्पित कि जाती है।*
*दोस्तों,इन्होंने अपनी पत्नी स्वर्गीय सुशीला सिन्हा जी के साथ मिलकर आज से ६० साल पहले (१९६४ – ६५ में) गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान करने के लिए अपना घर बेचकर अपनी पत्नी के नाम से सुशीला सिन्हा हिन्दी प्राथमिक पाठशाला की स्थापना की थी। और नौकरी करके अपनी पगार से पाठशाला के शिक्षकों को वेतन देकर पाठशाला को संभाला*
*इस पाठशाला का संचालन करने हेतु सन १९७७ में सरकारी आदेश पर एक संस्था "आदर्श शिक्षण समिति" की स्थापना की और अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल करते हुए नागेंद्र प्रसाद नाम के व्यक्ति को संस्था का सचिव बनाया*
*इसी नागेंद्र प्रसाद नामक व्यक्ति ने सुरेश प्रसाद सिन्हा जी को पहले दादागिरी करके संस्था से बाहर निकाला और उनके देहांत के बाद इस पाठशाला की एक जमीन पर (पाठशाला का संचालन करने वाली संस्था के कार्यालय पर) गैरकानूनी तरीके से कब्जा करके उसपर अपने लिए बंगला बना लिया, और दूसरी जमीन को (जिसपर पाठशाला चल रही है) हड़पने के लिए पहले उल्हासनगर के पूर्व महापौर हरदास मखीजा नाम के व्यक्ति को संस्था का अध्यक्ष बनाया,बाद में अरविंद उबाले नाम के व्यक्ति को अध्यक्ष बनाया। लेकिन ये लोग पढेलिखे समझदार लोग थे,इनको जब नागेंद्र प्रसाद की असलियत पता चली (संस्थापकों से गद्दारी करके जमीन हड़पने की) तो इन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देकर जमीन हड़पने के षड्यंत्र में नागेंद्र प्रसाद का साथ नही दिया।*
*अब इस नागेंद्र प्रसाद और उसके बेटे राकेश नागेंद्र प्रसाद ने मिलकर हिन्दी भाषिक अल्पसंख्यक संस्था में मराठी लोगो को पदाधिकारी बनाकर पाठशाला की जमीन हड़पने का षड्यंत्र रचा है। जिसका विरोध सुरेश प्रसाद सिन्हा जी के सुपुत्र ने पूरे जोरदार तरीके से मान.सहाय्यक धर्मादाय आयुक्त साहब के सामने किया है। बहुत जल्द ही नागेंद्र प्रसाद और उसके बेटे राकेश नागेंद्र प्रसाद के षड्यंत्र का भंडाफोड़ होने वाला है।और कानूनी तरीके से मान.सहाय्यक धर्मादाय आयुक्त साहब इनपर उचित करवाई करेंगे। ऐसा विश्वास सिन्हा परिवार को है।*
*आप सभी से निवेदन है की, इस पाठशाला की जमीन को भूमाफियाओं के हाथो से बचाकर इसे माध्यमिक और उच्च माध्यमिक बनाने के लिए सुरेश प्रसाद सिन्हा जी के परिवार को ताकत मिले इसलिए भगवान से प्रार्थना करने की कृपा करें।*
*श्रद्धांजली अर्पित करने वाले*
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*अनिलकुमार सिन्हा (पुत्र)*
*अंजु अनिलकुमार सिन्हा (पुत्रवधु)*
*अमित अनिलकुमार सिन्हा (पौत्र)*
*अनामिका अनिलकुमार सिन्हा (पौत्री)*
09/06/2023
*/////स्वर्गीय सुशीला सिन्हा जी की////*
////////// *55 वी पुण्यतिथि* ////////////
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आज दिनांक ०९ जून २०२३ को "सुशीला सिन्हा हिन्दी प्राथमिक पाठशाला" की नींव रखने वाली स्वर्गीय सुशीला सुरेशप्रसाद सिन्हा जी की ५५ वी पुण्यतिथि है।
दोस्तो,आज से अट्ठावन साल पूर्व,उल्हासनगर शहर में,बिहार राज्य से आये हुए एक दंपत्ति ने अपने खुद के रोजगार से पहले, यहां के गरीब बच्चों को मुफ्त में शिक्षा प्रदान करने की बात सोची,औऱ उसके लिए उन्होंने अपने ही घर के एक हिस्से में छोटीसी पाठशाला की शुरुवात की,ये कितनी महत्वपूर्ण और गौर करने वाली बात है।बाद में जब बच्चे बढ़ने लगे,तब उन्होंने अपने घर के आधे हिस्से को बेचकर उल्हासनगर -५ में ही दो जमीने पाठशाला के लिए खरीदी,एक खुली जमीन,ब्लॉक ए-९९४ के पास,कैलाश कॉलोनी,उल्हासनगर -५,और दूसरा ब्लॉक नंबर १०००/२०००,कैलाश कॉलोनी उल्हासनगर -५.
सन १९६८ में मान. सुशीला जी का निधन हो गया,और पाठशाला की जिम्मेदारी उनके पति श्री. सुरेशप्रसाद जी के कंधों पर आ गई।
सुरेशप्रसाद जी ने भी हिम्मत नही हारी,और पाठशाला को नियमित रूपसे चलाया,उसे सरकारी अनुदान दिलवाया,आज उस पाठशाला में सैकड़ो विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे है।और कई शिक्षक/शिक्षकेतर कर्मचारियों का परिवार अपना पेट भर रहा है।
इस पोस्ट के द्वारा मैं अनिल सिन्हा और मेरा परिवार स्वर्गीय सुशीला सिन्हा जी को उनकी ५५ वी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते है।
दोस्तों,इस पाठशाला का संचालन करनेवाली संस्था "आदर्श शिक्षण समिति" जो कि एक "हिन्दी अल्पभाषिक संस्था" है। जिसमे सिर्फ हिन्दी भाषिक प्रान्त जैसे उत्तर प्रदेश,बिहार,मध्यप्रदेश,राजस्थान राज्यो के लोगों का समूह या इन प्रान्तों के लोग ही पदाधिकारी के पद पर रह सकते है। इस तरह की शर्तों पर ही महाराष्ट्र शासन ने इस संस्था को मान्यता दी है। इस "हिन्दी अल्पभाधिक" मान्यता का दुरुपयोग करके संस्थापकों को दादागिरी करके (गुन्हेगार राजनैतिक लोगो को साथ मे लेकर) संस्था से निकालने का प्रयत्न करने वाले नागेंद्र प्रसाद नाम के व्यक्ति ने अपने ९ वी,१० वी,और डी. एड.में एक-एक साल अनुतीर्ण होने वाले "......" बेटे को बच्चो का भविष्य खराब करने के लिए पाठशाला का मुख्याध्यापक बनाया है।
हिन्दी अल्पभाषिक मान्यता के कारण वरिष्ठ और योग्य शिक्षकों को मुख्याध्यापक न बनाकर अपने अयोग्य बेटे को नागेंद्र प्रसाद ने मुख्याध्यापक बनाया है। और संस्थापकों के परिवार पर दबाव बनाने के लिए,(सुशिला सिन्हा जी के बेटे अनिल सिन्हा को डराने,धमकाने के लिए) पहले हरदास माखीजा,(पूर्व महापौर, उ म पा),शिक्षक मतदार संघ के आमदार स्वर्गीय रामनाथ दादा मोते सर,मा.श्यामदादा गायकवाड़ जी के दामाद श्री.अरविंद उबाले सर जैसे गणमान्य लोगों को संस्था में पदाधिकारी बनाया। लेकिन सच्चाई जानने के बाद इन सभी महानुभावो ने अपने पद से इस्तीफा देकर संस्था से बाहर चले गए।
अब इन लोगो के त्यागपत्र देने के बाद नागेंद्र प्रसाद और उसके ९ वी,१० वी और डी.एड.में एक-एक वर्ष अनुतीर्ण होने वाला बेटा राकेश नागेंद्र प्रसाद ने भारतीय जनता पार्टी के मुरबाड तालुका के आमदार श्री.किशन शंकर कथोरे के परिवार को संस्था में अध्यक्ष से लेकर सदस्य तक का पद देने का षड्यंत्र किया है।जिसका कानूनी तरीके से सुशिला सिन्हा जी के पुत्र अनिल सिन्हा ने विरोध किया है। और बहुत जल्द ही किशन कथोरे साहब के परिवार वालो को इस हिन्दी अल्पभाषिक संस्था से कानूनी तरीके से बाहर निकाल दिया जावेगा।
दोस्तो,इस पाठशाला और संस्था को मेरे माता-पिता ने कड़ी मेहनत से खड़ा किया है। क्या बाहुबली राजनेताओं से डर कर मै चुप रहूँ? क्या पाठशाला को बिकने से बचना मेरा फर्ज नही है? इसलिए पाठशाला के विकास के लिए संघर्ष करने वाले सुशिला सिन्हाजी के परिवार के सदस्यों को ताकत प्रदान करने की प्रार्थना ईश्वर से करें,ये विनती है।
*श्रद्धांजलि देने वाले*
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*अनिलकुमार सुरेशप्रसाद सिन्हा*-सुपुत्र सुशीला सु.सिन्हा
*अंजू अनिलकुमार सिन्हा*-पुत्रवधु सुशीला सु.सिन्हा
*अमित अनिलकुमार सिन्हा*-पौत्र सुशीला सु. सिन्हा
*अनामिका अनिलकुमार सिन्हा*-पौत्री सुशीला सु.सिन्हा
🌹🌹🌹🌹 १७ वी पुण्यतिथि 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹पुण्यतिथि 🌹🌹🌹🌹
स्व. श्री सुरेश प्रसाद सिन्हा (Founder of Sushila Sinha School & Founder chairman of Adarsh Shikshan Simiti)
आपकी शिक्षा के प्रति लगाव और गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करने की इच्छा से आपने अपनी पत्नी स्व. सुशील सिन्हाजी के नाम से सन1966-67 में ही सुशील सिन्हा पाठशाला की स्थापना की.. औऱ कठीन श्रम करके 100% अनुदान प्राप्त करवाया .. औऱ आज वहाँ हज़ारो गरीब बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे है..और कई शिक्षकों का परिवार आपके इस सामाजिक कार्य के करण चल रहा है।
आपके इस नेक कार्य को आपका वंश हमेशा क्रियाशील रहेगा।
ऐसी महान आत्मा को शत-शत नमन
सिन्हा परिवार
अनिलकुमार सिन्हा
अंजू अनिलकुमार सिन्हा
अनामिका अनिलकुमार सिन्हा
अमित अनिलकुमार सिन्हा
*मागासवर्गीय पात्र आणि शिक्षित लोकांवर अन्याय करून त्यांना मुख्यध्यापक पदापासून वंचित ठेवणारी संस्था, आदर्श शिक्षण समिती,उल्हासनगर -५, ठाणे.*
सदरील संस्थेचे संस्थाचालकांनी उल्हासनगर महानगरपालिकेचे प्रशासनाधिकारी कार्यालयामार्फत बोगस व बनावट कागतपत्र मा.शिक्षण उपसंचालक कार्यालयात सादर करून १९९७ साली महाराष्ट्र खाजगी शाळा कर्मचारी (सेवाशर्ती) विनियमन अधिनियम १९७७ चे कलम ३(२) अन्वये मुख्यध्यापक पदासाठी दोन शिक्षकांचे नाव अधिसूचित करून घेतले होते.
त्यातून एकाचे शिक्षण बी.ए.,बी.एड. होते.त्यांचे नाव-शर्मा मॅडम असून सदर महिला ब्राह्मण असल्याने त्यांना मुख्यध्यापक करण्यासाठी अनुसूचित जातीचे शिक्षका कडून "ना हरकत पत्र" घेतले गेले होते.शाळेची प्रथम मुख्यध्यापिका १९६८ ते २००३ पर्यंत आशा मॅडम होती,ती सवर्ण जातीची महिला होती.त्यानंतर २००३ पासून दुसरी मुख्यध्यापिका शर्मा मॅडम ब्राह्मण सवर्ण जातीची महिला होती.
आता २०१७ पासून मुख्यध्यापक पदावर विराजमान झालेला तिसरा व्यक्ती राकेश सर, सवर्ण जातीचा असून याची शैक्षणिक पात्रता अशी आहे की हा व्यक्ती इयत्ता नववी,दहावी आणि डी.एड. मध्ये एक-एक वर्ष अनुत्तीर्ण असलेला शिक्षक आहे, या अपात्र सवर्ण जातीचा व्यक्तीला मुख्यध्यापक पदावर बसवण्यासाठी संस्थाचालकांनी पात्र व शिक्षित अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जनजातीच्या शिक्षकांकडून "ना हरकत पत्र" घेतले. वाह! एस.सी./एस.टी./ओ.बी.सी.समाजाचे पात्र आणि योग्य शिक्षक कोणाचा दबावाखाली स्वतः पदोन्नती त्यागत आहे ?
सदर शाळेत शिकणारे १५०० विद्यार्थ्यांचे भविष्य उधवस्थ होऊ नये म्हणून सर्व विभागात याची लेखी तक्रार देऊन पद अधिसूचित साठी दिलेली मान्यता रद्द करण्यासाठी आम्ही विनंती केलेली आहेत.परंतु काही राजकीय नेत्यांच्या पाळीव लोकांनी व शिक्षक संघटनेचे काही दलाल शिक्षकांनी शासकीय अधिकाऱ्यांवर कार्यवाही न करण्यासाठी दबाव टाकलेला आहे की काय? किवां शाळेला मिळणारे अनुदानाच्या रकमेतून अधिकाऱ्यांची टक्केवारी निश्चित असल्याने एकही जवाबदार अधिकारी आज पर्यंत कर्तव्यचे पालन करीत नाही,असे आहे का ? कारण सदर शाळेच्या विरोधात पुरवेसह दिलेल्या शेकडो तक्रारींवर आज पर्यंत कारवाई का झालेली नाही ? छि.छि... पुरोगामी महाराष्ट्रात कसे - कसे लोकं जवाबदार शासकीय पदावर येऊन बसलेले आहेत? एकालाही लाज-लज्जा राहिलेली नाही असे वाटू लागले आहे.
*कृपया लक्ष देण्याची कृपा करावी*
१)-प्रथम मुख्यध्यापिका आशा मॅडम, एम.ए.बी.एड. सवर्ण हिंदू कायस्थ जातीची महिला.(१९६८-२००३)
२)- अनुसूचित जातीचे वरिष्ठ शिक्षकाची शैक्षणिक पात्रता एम.ए.बी.एड.असून, त्याचाकडून "ना हरकत पत्र" घेऊन दुसरी ब्राह्मण जातीची शर्मा मॅडम यांना मुख्यध्यापक पदावर बसवण्यात आले.(२००३ ते २०१७)
३)- एस.सी./एस.टी./ओ.बी.सी. समाजाचे पात्र बी.ए.बी.एड. शिक्षकांकडून "ना हरकत पत्र" घेऊन नववी,दहावी आणि डी.एड.मध्ये एक-एक वर्ष अनुत्तीर्ण झालेला अपात्र व्यक्ती राकेश सर ला २०१७ मध्ये मुख्यध्यापक पदावर बसवले गेले.
अनुसूचित जाती आणि अनुसूचित जनजातीच्या पात्र आणि शिक्षित लोकांवर अन्याय करून,अपात्र सवर्ण जातीच्या लोकांना मुख्यध्यापक पदावर बसवून १५०० विद्यार्थ्यांचे भविष्य उधवस्थ करण्याचे काम जर सुरू असेल,आणि त्यावर कारवाई न करता, चिरीमिरी घेऊन जवाबदार शासकीय अधिकारी आपल्या कर्तव्याचे पालन करीत नसेल तर आमच्या सारख्या जागरूक नागरिकांना यावर गांभीर्याने लक्ष घालून, १५०० विद्यार्थ्यांचे भविष्यासाठी कायदेनुसार संघर्ष करणे अत्यंत गरजेचे आहे.
सज्जन बापूराव शेकटे
अध्यक्ष
मराठवाडा बहुजन विकास मंच
उल्हासनगर
*विशेष बाब*
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सदरील "आदर्श शिक्षण समिती" ही संस्था "'हिन्दी अल्पभाषिक संस्था" असल्याने संस्थेला मुख्यध्यापक पदावर त्यांच्या मनाप्रमाणे व्यक्तीची नियुक्ती करण्याचा पूर्ण अधिकार प्राप्त असल्याने संस्थाचालकांनी योग्य आणि पात्र मागासवर्गीय शिक्षकांना डावलून,सवर्ण जातीचा अपात्र/अयोग्य व्यक्तीची नियुक्ती मुख्यध्यापक पदावर केली आहेत.(२०१७ पासून नववी,दहावी आणि डी.एड.मध्ये एक-एक वर्ष अनुत्तीर्ण असलेल्या अपात्र आणि अयोग्य व्यक्तीला अल्पभाषिक मान्यतेचा गैरवापर करून मुख्यध्यापक पदावर बसवलेला आहे.) हे कितपत योग्य आहे?
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