Al _ SADIQ Islamic Academy

Al _ SADIQ Islamic Academy आईये अपनी इस्लाह करें और अपनों की इस्लाह करें ।

।। मुबारक हो यौम इ आज़ादी मुबारक हो ।।जो यकीं की राह पर चल पड़े उन्हें मंज़िलों ने पनाह दी ...जिन्हें वसवसों ने डरा दिया वो...
15/08/2016

।। मुबारक हो यौम इ आज़ादी मुबारक हो ।।

जो यकीं की राह पर चल पड़े उन्हें मंज़िलों ने पनाह दी ...
जिन्हें वसवसों ने डरा दिया वो क़दम क़दम पे बहक गये ... ।।

यौम इ आज़ादी हमें यौम इ उम्मीद, यौम इ तशक़्क़ुर,और यौम इ तजदीद इ अहद के तौर पर मनाना है ।
आज़ादी बहुत बड़ी नेअमत है, लाखों क़ुर्बानियों से हसिलकरदा आज़ादी की हमें क़द्र करनी चाहिये, और अपने मुल्क की आज़ादी में अहम् किरदार निभाने वाले , वो किरदार जिसे इस मुल्क ने भुला दिया , वो जियाले जो इस मुल्क की सियासत का शिकार हो गये , वो शोहदा जिन्होंने अपनी जानें लुटा कर अपने मुल्क की आज़ादी में अहम किरदार अदा किये , आज उन्हें नफरतों की सूली चढ़ा दिया गया , आज जिनका ज़िक्र करने वाला कोई नहीँ ।।

इस मुल्क की आज़ादी में बेशुमार शहादतें देने वालो में से कुछ शहीदों के ज़िक्र के साथ उनके ख़्वाबो के मुताबिक़ इस मुल्क की तामीर की कोशिशें करना हमारा अज़ीम फ़र्ज़ है ।

हमारी आज़ादी के लिये सब कुछ क़ुर्बान कर देने वाले वो मर्द इ मुजाहिद , जिन्होनें हमारे बेहतर मुस्तक़बिल के लिये अपनी जानें क़ुर्बान की थी ,
वो अज़ीम शख्सियत हर दिल अज़ीज़ अली ब्रादरान हो या शाह इस्माईल शहीद , दुश्मनों में अपने नाम से दहशत पैदा करने वाले हज़रत इ टीपू सुलतान हो या अपनी क़लम से आज़ादी का नग़मा छेड़ने वाले मुफ़्ती किफायतुल्लाह देहलवी ,अपने किरदार से दुश्मनों के ख़ेमे में खलबली मचा देने वाले मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी हो या अपने तलबा के बीच आज़ादी की महक पहुचाने वाले प्रोफेसर बरकतुल्लाह,उलेमाओं के बीच आज़ादी के जज़्बे को जूनून बना देने वाले शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी हों या आज़ादी के काफ़िले को हक़ीक़त की मंज़िल की तरफ रवाँ दवाँ करने वाले इस काफ़िले के अज़ीम रहनुमा मौलाना आज़ाद ।

आईये इन अज़ीम शख्सियतों के ख़्वाबों के मुल्क की तामीर की जाये , वो मुल्क जहाँ इन्साफ किसी मज़हब की बुनियाद पर न होता हो , वो मुल्क जहाँ अवाम के दरम्यान किसी तरह की जात पात और ऊँच नीच, छुआ छूत और भेदभाव न हो , वो मुल्क जहाँ ग़रीब की थाली में दो वक़्त का खाना मौजूद हो,सर पर छत मौजूद हो ,वो मुल्क के जिस स्कूल में पैसे वालो के बच्चे तालीम हासिल करते हो उसी स्कूल के दरवाज़े ग़रीब मिस्कीन मोहताज और यतीम बच्चों के लिये भी खुले हों , वो मुल्क जहाँ किसी बीमार की जान पैसे की कमी से न जाती हो , वो मुल्क जहाँ मज़हब और धर्म की आड़ में नफ़रतें न बोई जाती हों , वो मुल्क जहाँ बेटियों को घर से निकलते वक़्त डर और दहशत का एहसास तक न हों , वो मुल्क जहाँ बेटियां दहेज़ के लिये आग के हवाले न की जाती हों ।।

आईये कुछ इस तरह अपने मुल्क की तामीर की जाये ।

आज़ादी महज़ फ़िरंगियों को भगा देने का मक़सद नहीं था, बल्कि इस ज़मीन पर एक ऐसे निज़ाम के निफ़ाज़ का एलान था,जिसकी बुनियाद इन्सानियत, हमदर्दी, और इन्साफ पर हो ।।

आज़ादी के बाद से ले कर अब तक बहुत कुछ खोया भी है और बहुत कुछ पाया भी ।
माज़ी में जिन ग़लतियों से मन्ज़िल नहीं मिली ,उनसे सबक़ सीखना है और अमन पसंद भारत और खुश हाल भारत बना कर दम लेना है , मेरा यक़ीन है के एक अमन पसन्द भारत ही खुशहाल भारत बन सकता है ।

ग़ुरबत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में ...
समझो वहीँ हमें भी दिल हो जहाँ हमारा ...।

ऐ आब रूद इ गँगा वो दिन है याद तुझे ...
उतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा ...।

यूनानो मिस्रो रोमा सब मिट गये जहाँ से ...
अब तक मगर है बाक़ी नामो निशाँ हमारा ..।

कुछ बात है के हस्ती मिटती नही हमारी ...
सदियों रहा है दुश्मन दौर इ ज़माँ हमारा ...।

मज़हब नही सिखाता आपस में बैर रखना ...
हिंदी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा ...।

❤ सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा ❤

।❤ यौमे आज़ादी की बहुत बहुत मुबारकबाद ❤।

हिन्दोस्तां ज़िंदाबाद ।

यासिर शमीम

।। होशियार ।। ।। खबरदार  ।।इस माहे मुबारक के मौके का फायदा उठाने के लिये कुछ सफ़ेदपोश लुटेरे, आपकी मेहनत की गाढ़ी कमाई से ...
10/06/2016

।। होशियार ।।

।। खबरदार ।।

इस माहे मुबारक के मौके का फायदा उठाने के लिये कुछ सफ़ेदपोश लुटेरे, आपकी मेहनत की गाढ़ी कमाई से निकाली गयी जायज़ ज़कात को देख कर अपनी लार बहा रहे हैं ,बराये मेहेरबानी ऐसे लुटेरों से होशियार रहें , ये लुटेरे मुफलिसों का हक़ लूटने निकले हैं , परेशान हालों की परेशानी में इज़ाफ़ा करने निकले हैं, इन लुटेरों की वजह से ग़रीब बेटियों तक उनका हक़ नही पहुच रहा , एक बीमार तक उसकी दवा नही पहुँच रही , नाने शबीना को तरसते लोगों तक दो निवाले नहीं पहुँच रहें ।
ऐसे बदबख़्त लुटेरों से होशियार रहिये और अपनी ज़कात को उसके हक़दार तक पहुँचाइये , पहले अपने घर में देखिये ,फिर पड़ोसियों की खबर लीजिये ,रिश्तेदारों की फ़िक्र कीजिये, दोस्त अहबाब के दरम्यान देखिये , देखिये कही कोई मजबूर रातों को अपनी बेबसी पे आंसू बहा रहा है , लेकिन ग़ैरत ऐसी के ज़माने को अपनी लाचारी दिखाना नही चाहता , तलाशिये ऐसे लोगों को और उन तक उनका हक़ पहुँचाइये ।
तलाशिये ऐसे लोगों को जिनके घर की दहलीज़ पर ग़ुरबत की वजह से बेटियां बूढ़ी हो रही हैं , देखिये ऐसे लोगों को जो सरकारी अस्पतालों के जनरल वार्ड में पैसे की तंगी की वजह से धक्के खा रहे हैं , तलाशिये ऐसे बाप को जो अपनी नन्ही बेटी की चूड़ियों की फरमाइश पूरी न कर पाया तो 7 साल की बेटी ने ख़ुदकुशी कर ली , मैं पूछता हूँ आप सब से क्या ये उम्र होती है ख़ुदकुशी की ?

तलाशिये ऐसे मजबूर परेशांहाल दर्द में चीखते , परेशानियों में उलझे , बेचैनियों में करवटें बदलते उन लोगों को जिनके सरों पर बेटियों की ज़िम्मेदारी निभाने का बोझ है, बूढ़े बाप के इलाज की ज़िम्मेदारी है , बच्चों को तालीम दिलाने की कशमकश है ।
तलाशिये इन्हें और इनकी ज़िन्दगी को आसान बनाइये , अल्लाह आज के दिन आपको सब कुछ दे के बस ये आज़माना चाहता है के देखें तू मेरे बन्दे की मदद करता है या नही ?

बराये मेहेरबानी इन लुटेरों से बाख़बर रहें ये ख़ौफ़ का कारोबार करने वाले लोग हैं , ये आपको देवबंदियों का ख़ौफ़ दिखाएंगे , अहले हदीसियों की ताक़त से डराएंगे , अपने मदरसे को सबसे बेहतर बताएँगे , भले ही वहाँ से इस क़ौम को आजतक कोई फायदा न हुआ हो (मदरसे से मुताल्लिक़ पोस्ट फिर किसी दिन ) ,

ज़कात को उसके हक़दार तक पहुँचाईये तब ही ज़कात सही मायनों में अदा होगी ।

नक़्शबन्दी यासिर शमीम

05/06/2016

आँखे कुछ और देख रही हैं , ज़बान कुछ और बयान कर रही हैं , हालात कुछ और इशारा कर रहे हैं , ऐसे हालात में बड़ा मुश्किल हो जाता है ये फैसला करना , के आख़िर जो हम देख रहे हैं वो सच है , जो हम सुन रहे हैं वो सच है या हालात जो इशारा कर रहे हैं वो सच है ??
ज़हन तमाम तर दलाइल ,तमाम तर खुसुसियात , तमाम बेहतर बातें ,और तमाम ज़िक्र , और तमाम क़ाबिल इ क़द्र हस्तियों की मौजूदगी को सिरे से नकार देने पर आमादा है ,
और हो भी क्यूँ न , ऐसे वो तमाम तर दलाइल बेअसर नज़र आते हैं जो जमाअत की इस्लाह न कर पा रहे हों , ऐसी खुसुसियात किस काम की जो सिर्फ खुदपरस्ती तक महदूद रह जाये , ऐसी बेहतर बातों का क्या जो जमाअत पर असरअन्दाज़ न साबित हों , और ऐसे ज़िक्र का क्या फायदा जो रस्म रिवाज तक महदूद कर दिया गया हो , और ऐसी क़ाबिल इ क़द्र हस्तियों का क्या जो अपनी आँखों के सामने हराम होता हुआ देख रहीं हों ???

तमाम तर चीज़ें जो कल तक हक़ और बातिल के दरमियान तुर्रा इ इम्त्याज़ हुआ करती थीं आज हरामखोरों और ज़ानियों की हरामगाह बन गयी है ।

तकलीफ होती है जहालत में फंसे हुए लोगों को देख कर ,जो ये समझ ही नहीं पाते के वो किस भंवर में फंसे हुए हैं और वो अपनी तमाम तर क़ुव्वत जहालत के रास्ते पर खर्च कर रहे हैं ।

बेहयाई , बेग़ैरती , हराम नज़ारे , हाथों में हाथ डाले बेख़ौफ़ घूमते हुए बदकिरदार नौजवान , हरामख़ोरी और ज़िना की गवाही देते हुए सुनसान रास्ते , लंगरख़ानों में बेहयाई के मनाज़िर , दीन और ख़िदमत की आड़ ले के अपनी शैतानी मंसूबों को पूरा करते लोग , और वो लोग जो इन सब हरामकारियों को अल्लाह के वली का फैज़ समझ बैठे हैं ,बरकात समझ बैठे हैं , मज़हब समझ बैठे हैं ,दीन समझ बैठे हैं , मसलक समझ बैठे हैं ,सिरात इ मुस्तक़ीम समझ बैठे हैं , राहे निजात समझ बैठे हैं ........

ज़रूरत है उन नाम निहाद अकीदतमंदों को फ़िक्र करने की , हक़ समझने की , दीन समझने की , मज़हब समझने की ।

ये सब न कभी आफ़ाक़ी मज़हब , मज़हब इ इस्लाम का हिस्सा रहा है, न है , और न क़यामत तक होगा .......

जहालत से बाहर आईये , हक़ीक़त समझिये ....

सोचिये और ख़ुद फैसला कीजिये ......

नक़्शबन्दी यासिर शमीम

एक दानिशवर से किसी ने पूछा कि इबादत करने के लिये बेहतरीन दिन कौनसा है ??दानिशवर ने कहा : मौत से एक दिन पहले...!उस शख्स न...
17/05/2016

एक दानिशवर से किसी ने पूछा कि इबादत करने के लिये बेहतरीन दिन कौनसा है ??
दानिशवर ने कहा : मौत से एक दिन पहले...!

उस शख्स ने हैरानगी से पुछा : मौत का वक़्त तो किसी इन्सान को मालूम ही नहीं ?

फ़रमाया : तो फिर हर दिन को ज़िन्दगी का आख़री दिन समझो , हर रात को ज़िन्दगी की आख़री रात समझो ।

आओ नमाज़ पढ़ें इससे पहले की हमारी नमाज़ इ जनाज़ा पढ़ी जाये ।

नक़्शबन्दी यासिर शमीम ।

।। शअबान की पंद्रहवीं शब् ।।"शब् इ बरात" या "शब् इ बराअत"आजकल लोगों की ज़बानों पर "शब् इ बरात" का लफ्ज़ आम हो गया है । "बर...
16/05/2016

।। शअबान की पंद्रहवीं शब् ।।

"शब् इ बरात" या "शब् इ बराअत"

आजकल लोगों की ज़बानों पर "शब् इ बरात" का लफ्ज़ आम हो गया है ।
"बरात" उर्दू ज़बान में दूल्हे के साथ जाने वाले क़ाफ़िले को कहा जाता है और शायद यही वजह है कि जिस तरह दूल्हे की बरात में पटाख़े फोड़ते जाते हैं और फुलझड़ियाँ जलायी जातीं हैं , इस मुबारक रात में भी लोगों ने ये जाहिलाना रुसूम शुरू कर दिए ।

ये लफ्ज़ "बरात" नहीं बल्कि "बराअत" है जिसके मअनी निजात हासिल करना और छुटकारा पाना है, चूंकि इस रात में रहमत इ ख़ुदावंदी इंसानों की तरफ मुतअवज्जेह होती है और सिवाये चंद गुनाहगारों के, तमाम लोगों को अल्लाह करीम जहन्नम से बराअत और छुटकारा अता फ़रमा देता है, इसलिये इस रात को " लैलतुल बरा अत " या " शब् इ बरा अत " कहा जाता है ।

या रसूलल्लाहि उन्ज़ुर हा__लना सल्लाहो अलैहि वसल्लम _/\_

नक़्शबन्दी यासिर शमीम

02/05/2016

तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर ...
सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर ...।।

मेरे आक़ा ﷺ ने सिखाई है वतन से वफ़ादारी...हाँ फ़ख्र है मुझे मैं हूँ हिंदुस्तानी ....।अल सादिक़ इस्लामिक एकेडमी की जानिब से त...
26/01/2016

मेरे आक़ा ﷺ ने सिखाई है वतन से वफ़ादारी...
हाँ फ़ख्र है मुझे मैं हूँ हिंदुस्तानी ....।

अल सादिक़ इस्लामिक एकेडमी की जानिब से तमाम अहले वतन को यौम इ जम्हूरिया की दिली मुबारकबाद ।

उन्हें ये भी बता देना जो हम इस राह पर निकले ...सिवाय दर्द इ उम्मत के हमें दरपेश ग़म न था ...।।💖सिद्दीक़ी कारवाँ 💖
05/01/2016

उन्हें ये भी बता देना
जो हम इस राह पर निकले ...

सिवाय दर्द इ उम्मत के
हमें दरपेश ग़म न था ...।।

💖सिद्दीक़ी कारवाँ 💖

💎EK AARIFANA NUKTA💎⤵ ⤵ ⤵ ⤵ ⤵ ⤵ ⤵🔮 Ek Aarif Ki Baat Me Arz Kiye Deta Hu,🔱 Apne Ek Mureed Se Puchha, Beta Yeh Bata Ki Momi...
05/01/2016

💎EK AARIFANA NUKTA💎
⤵ ⤵ ⤵ ⤵ ⤵ ⤵ ⤵

🔮 Ek Aarif Ki Baat Me Arz Kiye Deta Hu,

🔱 Apne Ek Mureed Se Puchha, Beta Yeh Bata Ki Momin Ka Dil Kahan Rehta Hai.?

🔮 Toh Kehta Hai Ki Baayi Taraf (Left Side) Me,

🔱 Unhone (Aarif Ne) Kahan Baayi Taraf Toh Kafir Ka Bhi Dil Hota Hai, Usne (Mureed Ne) Dil Ka Matlab Lothda (Badan Me Jo Maans Se Bana Hua Dil) Samaj Liya, Wahan Toh Kafir Ka Bhi (Dil) Rehta Hai Momin Ka Kahan Rehta Hai.?

🔮 (Mureed) Ghabra Gaya.!!

🔱 (Aarif) Acchha Ab Yeh Bata Aarif Ka Dil Kahab Rehta Hai.?

🔮 Woh (Mureed) Pehle Hi Samj Gaya Tha, Usne Kaha Hazrat Woh Aap Hi Bataye Kahan Rehta Hai.?

🔱 (Aarif Ne Kaha) "Dekho MOMIN Ka DIL Apne MEHBOOB Ke Paas Rehta Hai Aur AARIF Ka DIL Kahi Nahi Jata MEHBOOB Khud Aake Rehta Hai (DIL Me)."

बिन तेरे इश्क़ के नबी ﷺ से इश्क़,ना मुकम्मल है ना तमाम हुसैन ...तेरी निस्बत ही है मेरा एज़ाज़,नाम से तेरे मेरा नाम हुसैन ......
19/10/2015

बिन तेरे इश्क़ के नबी ﷺ से इश्क़,ना मुकम्मल है ना तमाम हुसैन ...
तेरी निस्बत ही है मेरा एज़ाज़,नाम से तेरे मेरा नाम हुसैन ... (अला जद्दिहि व अलैहिस्सलाम)

नमाज़ रूह को राहत और क़ल्ब का नूर है ।।
26/09/2015

नमाज़ रूह को राहत और क़ल्ब का नूर है ।।

अल सादिक़ इस्लामिक एकेडमी की जानिब से अहल इ इस्लाम को ईद उल अज़हा की दिली मुबारकबाद ।आईये इस दिन अपनी ज़िन्दगी और अपने हाला...
24/09/2015

अल सादिक़ इस्लामिक एकेडमी की जानिब से अहल इ इस्लाम को ईद उल अज़हा की दिली मुबारकबाद ।

आईये इस दिन अपनी ज़िन्दगी और अपने हालात पर ग़ौर करें और जायज़ा लें के हमने आख़िर क्या सबक़ हासिल किये इस मुबारक दिन से ।

इस क़ुरबानी के दिन के सदके जब हम अल्लाह की राह में क़ुर्बानी पेश करें तो जानवर के साथ साथ अपनी तमाम नफ़सानियत को क़ुर्बान करदें , तमाम हसद और तमाम जलन को क़ुर्बान कर दें , दुनिया की वो मोहब्बत जिसने हमारे दिलों पर क़ब्ज़ा कर रखा है, ऐसी फ़ानी मोहब्बत को क़ुर्बान करदें , शोहरत और दौलत के तमाम लालच को क़ुर्बान करदें , अपनों से बेरुख़ी और मोहताजो से बेमुरव्वत बर्ताव को क़ुर्बान करदें , और एक नयी सुबह के साथ एक नयी ज़िन्दगी का आग़ाज़ करें , वो ज़िन्दगी के जहाँ हर क़दम अल्लाह की रज़ा हासिल करने के लिए उठे , वो ज़िन्दगी के जहाँ हाथ बढे तो अल्लाह की रज़ा हासिल करने के लिए बढे , उन घरों और उन मोहताज और मिस्कीनों की ख़बर लें जहाँ दो वक़्त की रोटी भी मुहैया नहीं हैं ।
अल्लाह ने जितनी ताक़त हिम्मत दौलत शोहरत और क़ुव्वत दी है उसे दीन की बालादस्ती में लगा दें ।

अल्लाह हम सबकी ज़िन्दगी कामयाब करदे, दुनयावी तकाज़े इज़्ज़त से पूरे हो जाएँ और क़ब्र में सुकून और आख़िरत में कामयाबी हमारा नसीब हो जाये ।

आमीन

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Kalpi
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9369671970

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