15/08/2016
।। मुबारक हो यौम इ आज़ादी मुबारक हो ।।
जो यकीं की राह पर चल पड़े उन्हें मंज़िलों ने पनाह दी ...
जिन्हें वसवसों ने डरा दिया वो क़दम क़दम पे बहक गये ... ।।
यौम इ आज़ादी हमें यौम इ उम्मीद, यौम इ तशक़्क़ुर,और यौम इ तजदीद इ अहद के तौर पर मनाना है ।
आज़ादी बहुत बड़ी नेअमत है, लाखों क़ुर्बानियों से हसिलकरदा आज़ादी की हमें क़द्र करनी चाहिये, और अपने मुल्क की आज़ादी में अहम् किरदार निभाने वाले , वो किरदार जिसे इस मुल्क ने भुला दिया , वो जियाले जो इस मुल्क की सियासत का शिकार हो गये , वो शोहदा जिन्होंने अपनी जानें लुटा कर अपने मुल्क की आज़ादी में अहम किरदार अदा किये , आज उन्हें नफरतों की सूली चढ़ा दिया गया , आज जिनका ज़िक्र करने वाला कोई नहीँ ।।
इस मुल्क की आज़ादी में बेशुमार शहादतें देने वालो में से कुछ शहीदों के ज़िक्र के साथ उनके ख़्वाबो के मुताबिक़ इस मुल्क की तामीर की कोशिशें करना हमारा अज़ीम फ़र्ज़ है ।
हमारी आज़ादी के लिये सब कुछ क़ुर्बान कर देने वाले वो मर्द इ मुजाहिद , जिन्होनें हमारे बेहतर मुस्तक़बिल के लिये अपनी जानें क़ुर्बान की थी ,
वो अज़ीम शख्सियत हर दिल अज़ीज़ अली ब्रादरान हो या शाह इस्माईल शहीद , दुश्मनों में अपने नाम से दहशत पैदा करने वाले हज़रत इ टीपू सुलतान हो या अपनी क़लम से आज़ादी का नग़मा छेड़ने वाले मुफ़्ती किफायतुल्लाह देहलवी ,अपने किरदार से दुश्मनों के ख़ेमे में खलबली मचा देने वाले मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी हो या अपने तलबा के बीच आज़ादी की महक पहुचाने वाले प्रोफेसर बरकतुल्लाह,उलेमाओं के बीच आज़ादी के जज़्बे को जूनून बना देने वाले शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी हों या आज़ादी के काफ़िले को हक़ीक़त की मंज़िल की तरफ रवाँ दवाँ करने वाले इस काफ़िले के अज़ीम रहनुमा मौलाना आज़ाद ।
आईये इन अज़ीम शख्सियतों के ख़्वाबों के मुल्क की तामीर की जाये , वो मुल्क जहाँ इन्साफ किसी मज़हब की बुनियाद पर न होता हो , वो मुल्क जहाँ अवाम के दरम्यान किसी तरह की जात पात और ऊँच नीच, छुआ छूत और भेदभाव न हो , वो मुल्क जहाँ ग़रीब की थाली में दो वक़्त का खाना मौजूद हो,सर पर छत मौजूद हो ,वो मुल्क के जिस स्कूल में पैसे वालो के बच्चे तालीम हासिल करते हो उसी स्कूल के दरवाज़े ग़रीब मिस्कीन मोहताज और यतीम बच्चों के लिये भी खुले हों , वो मुल्क जहाँ किसी बीमार की जान पैसे की कमी से न जाती हो , वो मुल्क जहाँ मज़हब और धर्म की आड़ में नफ़रतें न बोई जाती हों , वो मुल्क जहाँ बेटियों को घर से निकलते वक़्त डर और दहशत का एहसास तक न हों , वो मुल्क जहाँ बेटियां दहेज़ के लिये आग के हवाले न की जाती हों ।।
आईये कुछ इस तरह अपने मुल्क की तामीर की जाये ।
आज़ादी महज़ फ़िरंगियों को भगा देने का मक़सद नहीं था, बल्कि इस ज़मीन पर एक ऐसे निज़ाम के निफ़ाज़ का एलान था,जिसकी बुनियाद इन्सानियत, हमदर्दी, और इन्साफ पर हो ।।
आज़ादी के बाद से ले कर अब तक बहुत कुछ खोया भी है और बहुत कुछ पाया भी ।
माज़ी में जिन ग़लतियों से मन्ज़िल नहीं मिली ,उनसे सबक़ सीखना है और अमन पसंद भारत और खुश हाल भारत बना कर दम लेना है , मेरा यक़ीन है के एक अमन पसन्द भारत ही खुशहाल भारत बन सकता है ।
ग़ुरबत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में ...
समझो वहीँ हमें भी दिल हो जहाँ हमारा ...।
ऐ आब रूद इ गँगा वो दिन है याद तुझे ...
उतरा तेरे किनारे जब कारवाँ हमारा ...।
यूनानो मिस्रो रोमा सब मिट गये जहाँ से ...
अब तक मगर है बाक़ी नामो निशाँ हमारा ..।
कुछ बात है के हस्ती मिटती नही हमारी ...
सदियों रहा है दुश्मन दौर इ ज़माँ हमारा ...।
मज़हब नही सिखाता आपस में बैर रखना ...
हिंदी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा ...।
❤ सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा ❤
।❤ यौमे आज़ादी की बहुत बहुत मुबारकबाद ❤।
हिन्दोस्तां ज़िंदाबाद ।
यासिर शमीम