Swami Vivekananda vidya Mandir mudila

Swami Vivekananda vidya Mandir mudila Vasudhaiva Kutumbakam
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प्रकृति की मनोरम छटा बिखेरते ऋतुराज वसंत के आगमन पर माँ सरस्वती जी के आशीर्वाद से आपका जीवन शिक्षा, विद्या, आरोग्यता व ख...
10/02/2019

प्रकृति की मनोरम छटा बिखेरते ऋतुराज वसंत के आगमन पर माँ सरस्वती जी के आशीर्वाद से आपका जीवन शिक्षा, विद्या, आरोग्यता व खुशियों के प्रकाश से रोशन रहे। आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

05/09/2018

*"शिक्षक कभी साधारण नहीं होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद में पलते हैं।"-
शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई /शुभकामनायें।*

26/08/2018

हम जन्म वहाँ लिया जहां की माटी को चन्दन कहते हैं
हम प्यार भरे कच्चे धागे को रक्षाबन्धन कहते हैं

रक्षाबन्धन की बहुत शुभकामनाएँ ।।

12/01/2018

।। वन्दे महापुरुष ते चरणारविन्दम् ।।
उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो। ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हम हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है..."उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये"...!!!
स्वामी विवेकानंदजी की 155 वीं जन्म जयन्ती पर उनके चरणों में शत शत नमन
एवं राष्ट्रीय युवा दिन की शुभकामनाएँ.

या कुन्देन्दुतुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता , या वीणावरदण्डमण्तिकरा या शवेतपद्मासना ! या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्द...
01/02/2017

या कुन्देन्दुतुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता ,
या वीणावरदण्डमण्तिकरा या शवेतपद्मासना !
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता ,
सा माम् पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्यापहा ।।
ऊँ वीणा पुस्तकधारिण्यै श्रीसरस्वत्यै नमः

एक ऐसे महामानव का जन्मदिन आज है जिन्होने भारत की धरती का मान बढाया है ,जिन्होने सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुये विश...
12/01/2017

एक ऐसे महामानव का जन्मदिन आज है जिन्होने भारत की धरती का मान बढाया है ,जिन्होने सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुये विश्व धर्म सम्मेलन मे अपने ज्ञान,संस्कार और विद्वतता से समूचे ब्रह्माण्ड के धार्मिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति मे सनातन धर्म की श्रेष्ठता और प्राचीनता को सिद्ध किया .....आदिगुरू शंकराचार्य के बाद वे सनातन धर्म के सर्वश्रेष्ठ उद्धारक माने जाते हैं ....उन्होने सनातन धर्म को न सिर्फ पुनर्जीवित किया अपितु उसका नवीनीकरण भी किया...
सनातन धर्म का सच्चा रहनुमा होने के बावजूद उन्होने सभी धर्मों को अपने मे श्रेष्ठ बताया और सभी धर्मों के सम्मान की बात की ....
उन्हे युवाओं के आदर्श के रूप मे भी जाना जाता है अतः उनके जन्म दिन को युवा दिवस के रूप मे भी मनाया जाता है.....
आज हम सभी # युवाउनके जन्मदिन पर यह # संकल्पलें कि हम उनके बनाये # नियमोंऔर # आदर्शोंपर चलेंगें....... —

12 तक शीतलहर को देखते हुए अवकाश।जिलाधिकारी महोदय और bsa महोदय सुल्तानपुर को हार्दिक धन्यवाद।
09/01/2017

12 तक शीतलहर को देखते हुए अवकाश।जिलाधिकारी महोदय और bsa महोदय सुल्तानपुर को हार्दिक धन्यवाद।

24/09/2016

" गरीबों की सेवा ही ईश्वर की सेवा है " ~ सरदार वल्लभभाई पटेल

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05/09/2016

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25/08/2016

भगवान के अन्य रूपों की तुलना में श्री कृष्ण इतने विशेष क्यों हैं?
मेरे विचार में भगवान अपने इस रूप में हममें से ही एक बने। मानव सुलभ गुण अपने में समाहित कर के उन्होंने हमारा मार्गदर्शन और उद्धार किया। सर्वप्रिय श्री कृष्ण एक नटखट पुत्र, एक अदभुत प्रेमी, एक करुणामय मित्र की भूमिका निभाते हुए भी मानवता के परामर्शकर्ता बने। श्री कृष्ण इस लिए भी अपने भक्तों में प्रिय हैं क्योंकि वे प्रेम का प्रत्युत्तर प्रेम से ही देते हैं। भक्तों की अवहेलना असंभव है।
जन्माष्टमी पर सभी को मेरी तरफ से हार्दिक शुभकामनाएँ।

15/08/2016

आप सबने कई बार स्वतंत्रता दिवस मनाया होगा। परन्तु क्या कभी "स्वतंत्रता" के वास्तविक अर्थ के बारे में सोचा है? क्या आपने कभी सोचा है कि स्वतंत्रता दिवस इतने हर्षोल्लास के साथ हर साल क्यों मनाया जाता है? क्या स्वतंत्रता दिवस एक औपचारिकता मात्र है जो साल में एक दिन हमारी देशभक्ति जगा कर चला जाता है, और अगले दिन से फिर वही पुराना ढर्रा?
शायद ये सवाल आपको अटपटे लगें। मगर इनके जवाब ढूँढने हम सभी को चाहिए। और मैंने कई बार भारतीयों को इन सवालों पर अपनी बगलें झाँकते पाया है। अक्सर उनके उत्तर कुछ इस प्रकार के होते हैं- "स्वतंत्रता मतलब ______ करने की आज़ादी।" रिक्त स्थान में कोई भी व्यक्तिगत स्वार्थ भर लीजिये। दोष उनका नहीं है। स्वतंत्रता उन्हें जन्म से मिली हुई है।
आप यही सवाल अगर किसी स्वतंत्रता सैनानी से या किसी सैनिक से पूछें, तो दोनों शायद ग्रन्थ भर दें अपने उत्तर से। एक ने स्वतंत्रता जीती है, दूसरे ने उसे सहेजा है। स्वतंत्रता का अर्थ उनसे अच्छा कोई नहीं समझा पायेगा।
और उनके उत्तर में साथी, समाज, और अपना देश अवश्य स्थान पाते हैं।
यदि अपना ही सोचना था तो ग़ुलाम भारत क्या कम था? तब क्यों भारत के महावीरों ने अपने लहु से इस देश को सींचा? कहीं स्वतंत्रता संग्रामी तो कहीं सीमा पर सैनिक इसी स्वतंत्रता के लिए शहीद हुए। उनके सर्वोच्च बलिदान क्या सिर्फ हमारी व्यग्तिगत महत्वाकांक्षाओं की रक्षा में समर्पित थे?
उत्तर है नहीं।
एक देश के नागरिक होते हुए आज हम अपने देश, और अपने साथी नागरिकों की पहचान से स्वयं की अभिन्नता भूल चुके हैं।
स्वतंत्रता दिवस इसी अभिन्नता का उत्सव है। साथ ही यह उत्सव हैं उन महावीरों के सम्मान का जिनका बलिदान इस देश की नींव बना है। इस स्वतंत्रता दिवस पर इस भाव को अपने अंदर जगाइये।

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