23/08/2023
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर 'चंद्रयान-3' का सफल अवतरण करवाकर विश्व दरबार में भारत की सर्वश्रेष्ठता को प्रतिफलित करते हुए ऐतिहासिक उपलब्धि दिलानेवाले 'इसरो' के समस्त वैज्ञानिकों व परियोजना से जुड़े सभी व्यक्तियों को नमन करता हूँ।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित पंक्तियों से सभी का अभिनन्दन, वंदन।
है कौन विघ्न ऐसा जग में,
टिक सके वीर नर के मग में ।
खम ठोंक ठेलता है जब नर,
पर्वत के जाते पांव उखड़ ।
मानव जब जोर लगाता है,
पत्थर पानी बन जाता है।।
माँ भारती के सपूतों ने जो कर दिखाया वह इस बात का प्रमाण है कि-
भारत " विश्वगुरु " था, है और रहेगा।