Sindhi Muslim History सिंंधी मुसलमान इतिहास

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सिंधी मुसलमान समाज के इतिहास,कला-संस्कृति का पेज।
Page Admin Insaf Khan Juneja
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17/03/2026

मुसलमान जाति नहीं है, ।।।
जाति क्षत्रिय है,पहले सिंधी सिपाही और करीब 13वी शदी में राजपूत क्योंकि राज था उनके पूर्वजों का। आज कल सिंधी मुसलमान टाइटल अपना लिया गया है।।

उनमें से कुछ ने बाद में जुल्म को छोड़ नबी की शालीन सीरत को अपना लिया।

राजपूत कोई जाति नहीं, वो भी सिर्फ राजशाही वालो का संघ है।। उनमें भी सिपाई है पर वो राजपूत बुलवाना पसंद करते है।उनको भ्रम में जीना अच्छा लगता है।।। राजपूत टाइटल सिर्फ पुत्र तक सीमित था।
लोकतंत्र में राजशाही मानसिकता विचारधारा देशविरोधी है।।।

जो जुल्मी, सत्ता के लिए बेहद हो जाए।
आज भी अपने आप को राजपूत बोलता है।। बाकी लोग अपने आप को नागरिक ही समझते है।।।

08/03/2026

इमाम खामेनेई की वंशावली

• सैय्यद अली खामेनेई
• पुत्र: जवाद
• पुत्र: सैय्यद अली (अल-खामेनेई)
• पुत्र: मुहम्मद
• पुत्र: मुहम्मद तक़ी
• पुत्र: मीर मुहम्मद
• पुत्र: मीर मुहम्मद तक़ी
• पुत्र: मीर मिर्ज़ा
• पुत्र: मीर हबीब अल्लाह
• पुत्र: मीर मुहम्मद
• पुत्र: मीर अली अकबर
• पुत्र: मीर फ़ख्र अल-दीन
• पुत्र: मीर ज़हीर अल-दीन
• पुत्र: मीर कुत्ब अल-दीन
• पुत्र: मीर रुक्न अल-दीन
• पुत्र: मीर क़वाम अल-दीन
• पुत्र: मीर इब्राहिम
• पुत्र: मीर मुसलिह अल-दीन
• पुत्र: मीर मुहम्मद
• पुत्र: मीर यह्या
• पुत्र: मीर मुहम्मद
• पुत्र: मीर अली
• पुत्र: मीर इब्राहिम
• पुत्र: मीर अली
• पुत्र: मीर अली
• पुत्र: मीर ईसा
• पुत्र: मीर अबी जाफ़र
• पुत्र: मीर इसहाक
• पुत्र: मीर इब्राहिम अल-असग़र
• पुत्र: मीर अली अल-शदीद
• पुत्र: मीर अब्दुल्लाह
• पुत्र: मीर जाफ़र
• पुत्र: मीर अब्दुल्लाह
• पुत्र: मीर इब्राहिम अल-असग़र
• पुत्र: इमाम मूसा अल-काज़िम (अ.स.)
• पुत्र: इमाम जाफ़र अल-सादिक़ (अ.स.)
• पुत्र: इमाम मुहम्मद अल-बाक़िर (अ.स.)
• पुत्र: इमाम अली ज़ैन अल-आबिदीन (अ.स.)
• पुत्र: इमाम अल-हुसैन (अ.स.)
• पुत्र: अमीर अल-मुमिनीन अली इब्न अबी तालिब (अ.स.)

नोट: यह वही वंशावली है जिसका दावा सैय्यद अली खामेनेई के परिवार द्वारा किया जाता है। शिया जगत में उन्हें इमाम हुसैन का वंशज माना जाता है, और इस प्रकार वह हज़रत अली (र.) एवं हज़रत फ़ातिमा (र.) के माध्यम से पैगंबर मोहम्मद (स.) के वंशज कहलाते हैं, जिन्हें शिया समुदाय में 'अहले-बैत' के रूप में प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त है और उन्हें काली पगड़ी पहने का अधिकार है।

24/02/2026

यह सिंधी समाज में महिला सामूहिक इफ़्तारी का प्रेरणादायक दृश्य अल्पसंख्यक आवासीय बालिका स्कूल, अभे का पार का है।

समाज में मोहब्बत, भाईचारे और एकता का सशक्त संदेश दे रहा है। 🤲

रोज़ा इफ़्तार के इस मुक़द्दस मौके पर सभी का एक साथ बैठकर दुआ के साथ इफ़्तार करना आपसी सम्मान, इंसानियत और सामाजिक सौहार्द की बेहतरीन मिसाल है।

21/02/2026

Soda Saund History
Redana Barmer

21/02/2026

Sama/Sameja/Aarisar का इतिहास।

06/02/2026

Ajrakh safa represents Sindhi cultural heritage

05/02/2026

जो लोग ब्याज का काम करते है वो इस्लाम के खिलाफ है।।।

Photos from Sindhi Muslim History सिंंधी मुसलमान इतिहास's post 02/02/2026

सेहलाऊ शरीफ से एकता, अमन, इंसानियत और भाईचारे का पैग़ाम।
रामसर। रविवार को सेहलाऊ शरीफ, रामसर स्थित ऐतिहासिक दरगाह पीर सैय्यद हाजी आलीशाह बुखारी में सज्जादानशीन पीर सैय्यद नूरुल्लाह शाह बुखारी की सरपरस्ती में क़ौमी एकता आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारे, धार्मिक सद्भाव के साथ-साथ शिक्षा के महत्व को रेखांकित करना रहा। विभिन्न धर्मों, वर्गों और समुदायों के लोगों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लेकर क़ौमी एकता का मजबूत संदेश दिया।

महंत श्री जगदीशपुरी जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की पहचान उसकी साझा संस्कृति और क़ौमी एकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो समाज से अज्ञानता, भेदभाव और नफ़रत को समाप्त कर सकती है। यदि शिक्षा के साथ संस्कार जुड़े हों तो समाज स्वतः मजबूत और एकजुट बनता है।

बाड़मेर–जैसलमेर सांसद श्री उम्मेदाराम
बेनीवाल ने कहा कि क़ौमी एकता और शिक्षा एक-दूसरे की पूरक हैं। शिक्षित समाज ही सही मायनों में एकजुट और जागरूक समाज बन सकता है। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों को शिक्षा को प्राथमिकता देकर आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देना होगा।

मध्यप्रदेश प्रभारी श्री हरीश चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि दरगाहें और धार्मिक स्थल हमेशा से इंसानियत, अमन और इल्म का संदेश देते आए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बिना न तो सामाजिक न्याय संभव है और न ही मजबूत लोकतंत्र। ऐसे क़ौमी एकता कार्यक्रम समाज को सही दिशा देने का काम करते हैं।

दरगाह के सज्जादानशीन पीर सैय्यद नूरुल्लाह शाह बुखारी ने कहा कि सूफ़ी परंपरा का मूल संदेश मोहब्बत, भाईचारा और इल्म है। उन्होंने कहा कि शिक्षा इंसान को सही और ग़लत की पहचान कराती है और समाज को जोड़ने का काम करती है। उन्होंने देश में अमन-चैन, आपसी सद्भाव और शैक्षणिक उन्नति के लिए दुआ की।

पूर्व कांग्रेस ज़िलाध्यक्ष श्री फतेह ख़ान ने धन्यवाद प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में क़ौमी एकता, शांति और शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाते हैं। उन्होंने सभी अतिथियों, धर्मगुरुओं, जनप्रतिनिधियों और उपस्थित आमजन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा और भाईचारे के रास्ते पर चलकर ही एक मजबूत समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल, कांग्रेस ज़िलाध्यक्ष लक्ष्मण गोदारा, पूर्व ज़िला प्रमुख महेन्द्र चौधरी, पूर्व जिलाअध्यक्ष गफूर अहमद, पूर्व प्रधान उदाराम मेघवाल, राणा जाडेजा कच्छ गुजरात, शेख मोहम्मद इब्राहिम भाई बम्बई महाराष्ट्र ) हाजी जुम्मा रायमा गांधीधाम गुजरात,सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे। सभी ने क़ौमी एकता, सामाजिक सौहार्द और शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

अंत में सभी ने नफ़रत के ख़िलाफ़ मोहब्बत और अज्ञानता के ख़िलाफ़ शिक्षा को अपनाने का संकल्प लिया।

30/01/2026

बहादुर और दिलेर लोग कभी मरते नहीं,
वे लोकगीतों, किस्सों और यादों के ज़रिए हमेशा ज़िंदा रहते हैं।
भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद कुछ ऐसे शख़्स हुए,जो सरहद के दोनों ओर लोगों के दिलों में बस गए।
उनमें एक नाम था — शकूर खान नोहड़ी।
जन्म भले ही पाकिस्तान में हुआ,लेकिन उसकी धाक सिंध से लेकर मारवाड़ के धोरो तक रही।

विभाजन के बाद से लेकर अपनी मौत तक वह लगातार सक्रिय रहा।सिंध के मगरे और मारवाड़ के धोरे उसके लिए हमेशा अपने रहे।
हिंदुस्तान में दक्षिणी बसिया(जैसलमेर के रामसिंगोत भाटियों के 12 गांव)।उसकी शरणस्थली रहे।
मेरे गांव तेजमालता में आज भी एक जगह है
जिसे “शकूर का डेरा” कहा जाता है।
ऐसी जगहें बसिया के लगभग हर गांव में मिल जाएंगी।
इसकी वजह थी —बसिया के भाटी, जो उस समय बरोटिये (फरार/डाकू) थे,उनसे शकूर खान की गहरी दोस्ती।
सिंध में किसके पास संपत्ति है,कहां और कैसे वार करना है —यह सारी जानकारी शकूर खान बसिया के बरोटियों तक पहुंचाता रहा।
तारबंदी के बाद तक भी सिंध के सोढ़ों और बसिया के भाटियों के रिश्ते शकूर खान की ज़ुबान के सहारे जुड़े रहे।
आजादी के बाद पाकिस्तान जाकर चोरी-छिपे हुई शादियों की बारातों को सरहद पार कराने की जिम्मेदारी भी अक्सर शकूर खान निभाता था।करीब 35 साल पहले,पाकिस्तान से शादी कर लौटे 10-12 जोड़ों के साथ शकूर खान भी था।
उनकी वापसी की बारात तेजमालता में रुकी।
उसी दौरान पुलिस ने पूरे गांव को घेर लिया
और गांव के मौजिज लोगों से शकूर खान को सौंपने और इनाम लेने की पेशकश की।

गांव वालों ने साफ़ कह दिया —“हम इसका दुगुना पैसा आपको दे देंगे,लेकिन शकूर खान को नहीं सौंपेंगे।और अगर ज़ोर भी लगाओगे,तो वह तुम्हारी पकड़ में आने वाला नहीं है।”
आख़िरकार सभी बरोटियों ने मिलकर शकूर खान को पुलिस घेरे से सकुशल निकाल लिया।हालांकि इस दौरान उसका घोड़ा गोली लगने से मारा गया।
दुर्भाग्य से,बाद में पाकिस्तान में ही उसके अपने नोहड़ी भाइयों ने धोखे से उसकी हत्या कर दी।
आज भी बसिया में शकूर खान का नाम आते ही
उसके साथियों की आंखें भर आती हैं।
कुछ लोग कागज़ों में इतिहास बनते हैं,और कुछ —दिलों में…शकूर खां नोहड़ी उन्हीं में से एक था।

29/01/2026

Sindhi culture par bana bahut hi acha song hai yeh।
Sindhi Jaan

Photos from Sindhi Muslim History सिंंधी मुसलमान इतिहास's post 28/01/2026

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