02/02/2026
सेहलाऊ शरीफ से एकता, अमन, इंसानियत और भाईचारे का पैग़ाम।
रामसर। रविवार को सेहलाऊ शरीफ, रामसर स्थित ऐतिहासिक दरगाह पीर सैय्यद हाजी आलीशाह बुखारी में सज्जादानशीन पीर सैय्यद नूरुल्लाह शाह बुखारी की सरपरस्ती में क़ौमी एकता आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारे, धार्मिक सद्भाव के साथ-साथ शिक्षा के महत्व को रेखांकित करना रहा। विभिन्न धर्मों, वर्गों और समुदायों के लोगों ने बड़ी संख्या में कार्यक्रम में भाग लेकर क़ौमी एकता का मजबूत संदेश दिया।
महंत श्री जगदीशपुरी जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की पहचान उसकी साझा संस्कृति और क़ौमी एकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो समाज से अज्ञानता, भेदभाव और नफ़रत को समाप्त कर सकती है। यदि शिक्षा के साथ संस्कार जुड़े हों तो समाज स्वतः मजबूत और एकजुट बनता है।
बाड़मेर–जैसलमेर सांसद श्री उम्मेदाराम
बेनीवाल ने कहा कि क़ौमी एकता और शिक्षा एक-दूसरे की पूरक हैं। शिक्षित समाज ही सही मायनों में एकजुट और जागरूक समाज बन सकता है। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों को शिक्षा को प्राथमिकता देकर आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य देना होगा।
मध्यप्रदेश प्रभारी श्री हरीश चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि दरगाहें और धार्मिक स्थल हमेशा से इंसानियत, अमन और इल्म का संदेश देते आए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बिना न तो सामाजिक न्याय संभव है और न ही मजबूत लोकतंत्र। ऐसे क़ौमी एकता कार्यक्रम समाज को सही दिशा देने का काम करते हैं।
दरगाह के सज्जादानशीन पीर सैय्यद नूरुल्लाह शाह बुखारी ने कहा कि सूफ़ी परंपरा का मूल संदेश मोहब्बत, भाईचारा और इल्म है। उन्होंने कहा कि शिक्षा इंसान को सही और ग़लत की पहचान कराती है और समाज को जोड़ने का काम करती है। उन्होंने देश में अमन-चैन, आपसी सद्भाव और शैक्षणिक उन्नति के लिए दुआ की।
पूर्व कांग्रेस ज़िलाध्यक्ष श्री फतेह ख़ान ने धन्यवाद प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में क़ौमी एकता, शांति और शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाते हैं। उन्होंने सभी अतिथियों, धर्मगुरुओं, जनप्रतिनिधियों और उपस्थित आमजन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा और भाईचारे के रास्ते पर चलकर ही एक मजबूत समाज का निर्माण संभव है।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल, कांग्रेस ज़िलाध्यक्ष लक्ष्मण गोदारा, पूर्व ज़िला प्रमुख महेन्द्र चौधरी, पूर्व जिलाअध्यक्ष गफूर अहमद, पूर्व प्रधान उदाराम मेघवाल, राणा जाडेजा कच्छ गुजरात, शेख मोहम्मद इब्राहिम भाई बम्बई महाराष्ट्र ) हाजी जुम्मा रायमा गांधीधाम गुजरात,सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे। सभी ने क़ौमी एकता, सामाजिक सौहार्द और शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
अंत में सभी ने नफ़रत के ख़िलाफ़ मोहब्बत और अज्ञानता के ख़िलाफ़ शिक्षा को अपनाने का संकल्प लिया।