31/08/2021
कहानी मार्मिक और आँखें खोलने वाली है... Like मत करिये बस पढ़ लिजिए ---मूल कहानी कुंवर हरिसिंह राठौड़ हरियासर की है | जो आजकल सभी समाज के युवाओं पर सटीक बैठती हैं ।
आज के कॉलेज विद्यार्थियों द्वारा पढ़ाई को छोड़कर अन्य गतिविधियों पर ध्यान देने और उनके पिताजी की हाड़तोड़ मेहनत पर कॉपी किया हुआ लेख .....
#आइठोंण--
एक बार पुरा जरूर पढ़ना
आज #फ़ौजी छुट्टी आया है वो घर आने से पहले #जैसलमेर से इम्तिहान देकर आ रहा है । गांव आने के लिए भड़भडाहट करती बस जिसमे ऐसा कुछ नही जो बजता नही हो ।पर सदीकिये के गीत उसे रेगिस्तान की मिट्टी की खुशबू को ओर अंदर तक रेगिस्तान मैं होने का एहसास दिला रहे थे । शाम के पांच बजे ढाणियों मैं सवारियों को उतारते हुए बस फौजी के गांव पहुची ।
उतरते ही मन मे कई ख्याल की कौन क्या कर रहा होगा। .....पापा...खेत मे होंगे।
मम्मी...... गायो को चारा डाल रही होगी ।
काकू... बा के पास चिलम पी रहे होंगे ।
कमली ....शायद रसोई मैं
सोचते सोचते घर के नजदीक कब पहुँचा भनक तक न लगी । देखा पिताजी वही अपने पुराने अंदाज मैं आकड़ो को मात दे रहे थे । मन थोड़ा विचलित हुआ कि अब तो उम्र हो गई फिर भी इनसे बैठा नही जाता । घर पहुच कर थैला रखा और इस मन से गया कि आज तो पूरे आकड़ो की बेंड बजा दूंगा न रहेगा आंकड़ा ओर न चलेगी कुल्हाड़ी ।
ज्यो ही पास पहुँचा..... बोले ....कणों आयो..हमेंइज
फौजी के मुँह से हल्के से शब्द निकले ...कवाड़ी (कुल्हाड़ी) मनो दयोरि ...की करणो कवाड़ी रो #आकड़ा सेंग बाढ़या पा थू घरे जा पानी पी हु आवो ।
फौजी बात टाल नही सका ........माडे मन हो घरे जाय पाणि पिनो ।
बैठे बैठे सोच रहा था कि अबकी बार तो पक्का ही बोल दूंगा की अब खेतों मैं कुछ नही करना आराम करने के दिन है आराम करो । पर कहे कब ये सोचते सोचते आज पांच साल बीत गए हर छुट्टी मैं यही सोचता पर कह नही पाता । थोड़ी देर मैं पिताजी घर आये। फौजी पास जाकर बैठा । समाचार पूछे जिसमे "हु" के सिवाय उसका कोई प्रतिउत्तर नही था । आज तक कभी पिताजी से सिर उठाके बात नही की । पर आज पांच साल से जो सोच रहा था वो मानो बोल ही देगा । उसी बोलने के अंदाज से सिर ऊपर उठाके कुछ कहने को हुआ कि पिताजी बोल पड़े ...पाणी रो लोटो दये तो । पानी का लोटा हाथ मे देते समय उसकी नजर हाथो के उन आइठाणो पर पड़ी जो हाथ की रेखाओं से कही ज्यादा ऊपर उठे उनकी बरसो की मेहनत , हाड़ तोड़ किसानी के सबूत थे । कई अकालों ...ओर जिम्मेदारियों को पूरा करते करते इन हाथो ने आइठोनो को अपना बसेरा जिंदगीभर के लिए बना लिया था । मन बहुत ही ज्यादा सोच मैं डूब गया कि उसके पढ़ाई , नोकरी , ओर अब फरके फरके फिरने के पीछे इन हाथो , आइठोनो का कितना योगदान है । उसका मन हाथो ओर पैरो के आइठोनो को देखते देखते अपने आप से सवाल पूछ रहा था कि इनका ये कर्ज वो इस जिंदगी मैं चुका पायेगा । इसी सोच मैं वो डूब सा गया । तभी एक जानी पहचानी आवाज ने उसका ध्यान भंग किया । .....फौजी कदे आयो.......आज हीज....सिर ऊपर किया तो देखा #माधोहिंग.. 60 साल की उम्र , केसरिया साफा , मटमैली कमीज पर अखण्ड भारत का नक्शा उनकी मेहनती पसीने से बना था । अत्यंत ही मेहनती इस उम्र मैं भी दस किलोमीटर दूर पैदल जाके खेतो मैं अपनी मेहनत करते और शाम को पैदल ही घर आ जाते । हमेशा शाम को खेतों से घर लौटते समय शाम की एक चिलम तो "बा" के पास जरूर पीते । आज उन्होंने देखा फौजी भी आया हुआ है तो "बा" के पास न जाकर वही बेठ गए । बाते की... केडी थारे नोकरी बिजी , कितरी छुट्टी आयो है , बीजो कुन कुन है आपो दिहला था भेला , अनेको सवाल जिनके जवाब फौजी बड़ी सहानुभूति से दे रहा था । दे भी क्यों नही उसे तो बंतळ का बड़ा शौक था । बातो ही बातों मैं माधोहिंग बोले । मोंटी फौजी मोरे रामो पढ़े है जोपतर( #जोधपुर ) बे बरह हुआ है ठानी की करे है । उसने उनको सकारात्मक जवाब जरूर दिया । पर माधोहिंग हकिकत से बहुत परे थे । रामो (रामसिंह) उनके लड़के का नाम था जो फ़ौजी का फेसबुक दोस्त रामसिंह #जेएनवीयु के नाम से था । उसकी पूरी पढ़ाई #फेसबुक की पोस्टों मैं जिसमे सिर्फ आज की #शायरियों , चुनावो के #पोस्टरों , सेल्फियों का अंधाधुन कबाड़ा , नए नए शोरूमों से खरीदारी करते हुए के फोटो , मूवी होल की पोस्टो ओर तो ओर उसे समाज की इतनी चिंता की इस पढ़ाई की उम्र मैं वो कई सामाजिक और #राजनीतिक हस्तियों के साथ अपनी मौजूदगी को फेसबुक के माध्यम से दोस्तों मैं वाहवाही लेने के चक्कर मे , हमेशा एक नयी हस्ती के साथ अपनी सेल्फी फसबुक पर डालता । पिछली बार फौजी की मुलाकात उससे हुई तो उसकी बातो से मानो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि पूरे समाज और देश की चिंता उसे पढ़ाई नही करने दे रही हो । फौजी ने माधोहिंग के आइठोनो को देखते हुए मन ही मन सोचा की कितनी तमन्नाएं इन आइठोनो के पीछे छिपी है, कितने अरमान इनके पीछे दबे है, क्या क्या सोच के पाई पाई इक्कठी करके माधोहिंग ने रामे को पढ़ने भेजा है काश रामा आज आइ- ठाणो को उसकी सही कीमत चुकाए । पर आजकल ऐसे कई रामे माधोहिंग के आइठाणो को नही समझ पा रहे है । उन्हें तो सिर्फ फेसबुक , कॉलेज की राजनीति , दोस्तो के साथ पार्टी की पड़ी है । इसी चकाचोंध भरी दुनिया से निकल कर काश रामा माधोहिंग की ख्वाहिशे पूरी कर उनके आइठानो की असली कीमत चुका पाए । फौजी को अब अफसोस नही था कि उसके पिताजी के आइ- ठानो से उसने जरूर थोड़ा कुछ हासिल किया है ।
#कॉपी_पेस्ट