श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन, हरण भवभय दारुणम्।
कंज लोचन, कंज मुख, कर कंज, पद कंजारुणम्॥
अर्थ: हे मन! संसार के भयानक जन्म-मरण रूपी भय को दूर करने वाले, कृपालु श्री रामचंद्र जी का भजन कर। उनके नेत्र, मुख, हाथ और चरण लाल कमल के समान सुंदर हैं।
2. कंदर्प अगणित अमित छवि, नव नील नीरद सुन्दरम्।
पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि, नौमि जनक सुतावरम्॥
अर्थ: जिनका सौंदर्य अगणित कामदेवों से भी अधिक है, जो नवीन नील सजल बादल के समान सुंदर हैं, जिनके पीले वस्त्र बिजली के समान चमक रहे हैं, उन पवित्र जानकी जी के पति (श्री राम) को मैं नमस्कार करता हूँ।
3. भजु दीनबंधु दिनेश दानव, दैत्य वंश निकन्दनम्।
रघुनंद आनंदकंद कौसल, चंद दशरथ नन्दनम्॥
अर्थ: दिनों (दुखियों) के बंधु, सूर्य के समान तेजस्वी, राक्षस और दैत्य वंश का नाश करने वाले, रघुकुल में आनंद के मूल, कौशल देश को सुख देने वाले, दशरथ नंदन श्री राम का भजन करें।
4. सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु, उदार अंग विभूषणम्।
आजानु भुज शर चाप धर, स
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अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूतिकृते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥
पर्वतराज हिमालयकी कन्यारूपिणी, पृथ्वीको आनन्दित करनेवाली, संसारको हर्षित रखनेवाली, नन्दिगणसे नमस्कार की जानेवाली, गिरिश्रेष्ठ विन्ध्याचलके शिखरपर निवास करनेवाली, भगवान् विष्णुको प्रसन्न रखनेवाली, इन्द्रसे नमस्कृत होनेवाली, भगवान् शिवकी भार्याके रूपमें प्रतिष्ठित, विशाल कुटुम्बवाली और ऐश्वर्य प्रदान करनेवाली हे भगवान् शिवकी प्रिय पत्नी महिषासुरमर्दिनी पार्वती ! आपकी जय हो, जय हो ॥ १ ॥
21/10/2025
!! शुभ दीपावली!!
✨🎇🎉❤️
19/07/2025
-"Happiness is acceptance"
08/07/2025
One beautiful heart is better then a thousand beautiful faces
25/03/2025
धैर्य सर्वत्र साधनम्:-
Patience is the solution to everything:-
16/06/2024
जनकश्चोपनेता च यश्च विद्यां प्रयच्छति।
अन्नदाता भयत्राता पश्चैते पितरः स्मृताः॥
अर्थात् -
जन्मदाता, उपनयन संस्कारकर्ता, विद्या प्रदान करने वाला,
अन्नदाता और भय से रक्षा करने वाला – ये पांच व्यक्ति को पिता कहा गया है।
English translation:
One who gives birth, one who initiates, one who imparts knowledge, one who provides food and protects
from fear – these five are considered as fathers.
14/06/2024
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
अर्थ: मन ही मनुष्य के मोक्ष तथा बंधन का कारण है।
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12/06/2024
02/08/2023
बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता।
अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत्।।
भावार्थ: बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, स्वास्थ्य, चेतना और वाक्पटुता,
यह सब श्री हनुमान जी को याद करने से प्राप्त किया जा सकता है।
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