13/04/2026
कल बाबा साहब भीम राव अंबेडकर जी की जयंती है आज उनके स्मरण के अवसर पर ग्राविस बाल विकास उच्च प्राथमिक विद्यालय गगाड़ी में भाषण प्रतियोगिता निबंध प्रतियोगिता चित्रकला आदि का आयोजन किया गया जिसमें भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble)का स्मरण करना बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने समतामूलक और न्यायप्रिय समाज की नींव रखी। इस अवसर पर राधेश पालीवाल एवं भरत कुमार पालीवाल प्रियांशी गहलोत ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया।
विद्यार्थियो ने चित्र बनाऐ एवं पुष्प अर्पित कर बाबा साहब को याद किया।
11/04/2026
ग्राम पंचायत जेलू से हमारे मेघवाल समाज के भाटिया परिवार से भाई विनोद भाटी पुत्र स्व.स्वरूपाराम का हाल ही में RPSC द्वारा आयोजित हिंदी से स्कूल व्याख्याता भर्ती में चयन हुआ है एवं यह जेलू गांव से एकमात्र पहले व्यक्ति है जिसका फर्स्ट ग्रेड से चयन हुआ है | ग्राविस बाल विकास उच्च प्राथमिक विद्यालय गगाड़ी की तरफ से बधाई एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देता हूं ! आपने ग्राविस के साथ काफी समय तक अलग अलग विद्यालयो में सेवा दी और फिर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी के लिए चले गए। विनोद भाटी के संघर्ष को तो दिल से सलाम करता हूं क्योंकि इस बच्चे के ऊपर घर की पूरी जिम्मेदारियों का बोझ आ पड़ा क्योंकि छोटी उम्र में इनके पिता का निधन हो गया था परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया घर के सदस्यों का पालन पोषण वह खुद की पढ़ाई करना।
08/04/2026
आज दिनांक 8/04/2026 को ममता/दमा राम को ग्राविस बाल विकास उच्च प्राथमिक विद्यालय गगाड़ी में विदाई समारोह आयोजित हुआ ।
18/03/2026
Gravis Bal Vikas ups.Gagari ki session 2025-26 ki kuch activities
08/03/2026
Holi celebration in Gravis Bal Vikas ups.Gagari
08/03/2026
सरकारी विद्यालय में पढ़ाते हुए अक्सर शिक्षकों को लगता है कि कक्षा में बैठे बच्चे केवल विद्यार्थी नहीं हैं, वे अपने-अपने घरों की छोटी-छोटी दुनिया के जिम्मेदार पात्र भी हैं। उनके हाथों में किताबें जरूर होती हैं, पर उन हाथों की लकीरों में खेत, पशु, छोटे भाई-बहन, चूल्हा और कभी-कभी पूरे परिवार की उम्मीदें भी लिखी होती हैं।
सुबह जब हम विद्यालय पहुंचते हैं, तो कुछ चेहरे ऐसे मिलते हैं जिनकी थकान उम्र से बड़ी दिखाई देती है। किसी के पैरों में कीचड़ इसलिए नहीं होता कि वह खेलकर आया है, बल्कि इसलिए कि वह पहले पशुओं को चारा डालकर आया है। कोई बच्चा देर से आता है तो कारण यह नहीं कि वह सोता रह गया था, बल्कि इसलिए कि उसे घर में पानी भरना पड़ा या मजदूरी पर गए माता-पिता की अनुपस्थिति में छोटे भाई-बहनों को संभालना पड़ा।
कभी-कभी हम सोचते हैं कि हम समय, अनुशासन और प्रदर्शन की जो कसौटियाँ बनाते हैं, वे इन बच्चों के जीवन की सच्चाइयों से कितनी दूर हैं। हमारे लिए शिक्षा एक नियमित प्रक्रिया है, पर इनके लिए यह रोज़ का संघर्ष है—जैसे दो किनारों के बीच संतुलन बनाकर चलना। एक ओर परिवार की जरूरतें, दूसरी ओर अपने भविष्य की एक धुंधली लेकिन जिद्दी उम्मीद।
उनकी आँखों में एक अजीब-सा द्वंद्व दिखाई देता है। वे पढ़ना चाहते हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन हर दिन परिस्थितियाँ उनसे पूछती हैं—“पहले घर या पहले सपना?” और वे बिना शिकायत दोनों को साथ लेकर चलने की कोशिश करते हैं। कभी गृहकार्य अधूरा रह जाता है, पर जीवन का काम पूरा करके आते हैं। कभी किताब देर से खुलती है, पर जिम्मेदारी बहुत पहले से खुल चुकी होती है।
शिक्षक के रूप में हम सबके सामने सबसे बड़ी चुनौती पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि इन अनकही कहानियों को समझना है। क्योंकि जब तक हम उनके जीवन की पृष्ठभूमि को नहीं पढ़ेंगे, तब तक उनकी कॉपी में लिखी गलतियाँ ही हमें दिखाई देंगी, उनका साहस नहीं।
इन बच्चों के भीतर एक अद्भुत धैर्य होता है। वे शिकायत नहीं करते, बहाने नहीं बनाते, केवल कोशिश करते हैं। थकान के बावजूद कक्षा में बैठना, सीमित संसाधनों में सीखने की जिद रखना और हर दिन लौटकर फिर आना—यह साधारण नहीं है। कई बार मुझे लगता है कि वे पढ़ाई से ज्यादा जीवन का कठिन पाठ पहले ही सीख चुके हैं।
ऐसे बच्चों को देखकर हमारे भीतर भी एक प्रश्न उठता है—क्या शिक्षा केवल विषय ज्ञान देने का माध्यम है, या यह वह सहारा भी है जो उनके संघर्ष को थोड़ा हल्का कर सके? क्या हम उनसे केवल परिणाम की अपेक्षा करें, या उनकी परिस्थितियों के साथ संवेदनशीलता भी जोड़ें?
ग्रामीण परिवेश के इन बच्चों के लिए विद्यालय केवल पढ़ने की जगह नहीं, बल्कि एक संभावना है—उस जीवन से थोड़ा आगे बढ़ने की संभावना, जो उन्हें बहुत जल्दी बड़ा बना देता है। वे हर दिन अपनी परिस्थितियों से समझौता नहीं करते, बल्कि उनके बीच रास्ता बनाते हैं।
और सच कहूँ तो, जब हम उन्हें देखते हैं, तो महसूस करते हैं कि वे हमसे सीखने जरूर आते हैं, लेकिन हमें भी बहुत कुछ सिखा जाते हैं—समय का मूल्य, जिम्मेदारी का अर्थ और बिना शोर किए संघर्ष करने की शक्ति।
शिक्षक होने का सबसे गहरा अनुभव शायद यही है कि कभी-कभी पाठ हम पढ़ाते हैं, और जीवन का अर्थ वे हमें समझा जाते हैं। क्योंकि शिक्षा तब सबसे सच्ची लगती है, जब वह कठिन परिस्थितियों के बीच भी उम्मीद को जीवित रखे।
08/03/2026
With Dharmveer Jakhar – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
01/02/2026
With Singer Ghamanda Ram Yadav – I just got recognised as one of their top fans! 🎉
01/02/2026
With देशी भजन गायक पेपाराम केतू – I just got recognised as one of their top fans! 🎉