Babu singh Inda

Babu singh Inda सार्वजनिक हस्ती देश हित की भावना

20/10/2024
12/12/2022

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06/10/2021

देसूरी में समारोहपूर्वक मनाई राणा पूंजाजी सोलंकी की जयंती

जालोर संभाग में पाली प्रान्त के देसूरी में मेवी कलां स्थित महादेव मंदिर के प्रांगण में राणा पूंजाजी सोलंकी की जयंती माननीय संघप्रमुख श्री लक्ष्मण सिंह बैण्यांकाबास के सान्निध्य में आज 5 अक्टूबर को समारोह पूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघप्रमुख श्री ने कहा कि पूंजा जी जैसे वीर हमारे समाज की धरोहर है। वे केवल हमारे लिए ही नहीं सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। आदिवासियों को साथ में लेकर उन्होंने अपनी मातृभूमि के सम्मान के लिए जो संघर्ष किया वह उनके क्षत्रियत्व का प्रमाण है। हम भी वह क्षत्रियत्व अपने में जगाएं तभी उनके वंशज के रूप में हम अपनी कौम के गौरव को बढ़ाएंगे। इसके लिए संघ ही एकमात्र मार्ग है। कार्यक्रम को नारायणसिंह माणकलाव (पूर्व सांसद), पूंजा जी के वंशज परीक्षित सिंह सोलंकी पानरवा, संभाग प्रमुख अर्जुन सिंह देलदरी, श्रवणसिंह, जितेन्द्र सिंह मगरतालाब, ईश्वरसिंह ने भी संबोधित किया। गणपत सिंह भँवरानी ने कार्यक्रम का संचालन किया।

05/10/2021
Jai sangh shakti sa
16/02/2021

Jai sangh shakti sa

15/02/2021

रेगीस्तान का अभाव भरा इलाक़ा जीवन में कोई सहूलीयत नहीं पैदा होते ही पिता का साया सर से उठ जाना ।हालात से लड़ने के लिए इस बेरहम संसार में वह बालक निपट अकेला ।मां में ममता समझ व कठोरता का अद्भुत सम्मिश्रण था उसी ने बालक तणैराज का निर्माण किया जो बाद में तनसिंह व लाखों दिलों के लिए पूजनीय तनसिंह हो गए।अपनी धुन व लगन को जिद्द की हद तक पूरा करने की अकूत हिम्मत व हौसला,जीवन में एक प्रतिशत भी कृत्रिम व्यवहार का स्थान नहीं जिसका हाथ एक दफे पकड़ा पूरा पकड़ा लाखों विरोधों की परवाह किये बिना ओर जिसके विरोधी थे उसके भी सच्चे विरोधी बिना समझौते के साफ़ साफ़ दो टूक।जो कुछ लिखा मन की व्यथा थी कोई लेखकीय विद्वता भरा प्रलाप नहीं ।राजनीति में रहे अपने ही तरीक़े से अपने उसूलों पर अडिग व हिमालय से निकलने वाले बर्फ़ीले पानी जितने पारदर्शी।भारी कृतज्ञतापूर्ण कहते रहे जिसने एक दफे भी मुझे पानी का गिलास भी पिलाया है में उसके अहसान को कैसे भूल सकता हूँ ?जब आत्मविज्ञापन व आत्मप्रचार की आंधी चल रही है तब उन्होने आत्मबलिदान का रास्ता दिया पीड़ित मानवता के लिए देश के लिए साथियों के लिए ।कहते रहे करते भी रहे ख़ुद को मिटा कर ओरों के लिए रास्ता बनाते रहे।बहुत गंभीर पर अपने साथियों की ख़ुशी के लिए विनोद करते थे घंटो मौन रहते पर घंटो बोलते।एकदम मौलिक व्यवहार में कोई मिलावट नही ।तथाकथित बड़े लोगों का भारी विरोध सियासी व सामाजिक जीवन में पर रत्ती भर भी अपने हौसले से इधर उधर नहीं हुवे।उनकी विचार दर्शन सत्यम शिवम सुन्दरम का था जिसको गहराई से समझने की ज़रूरत दिनों दिन बढ़ेगी ।कुल जमा 56 साल जिये दर्जनों किताबें सैकड़ों गीत हज़ारों पत्र सैकड़ों लोगों की आजीविका का प्रबंध साथ ही 6 चुनाव लड़ लिये।गुर्दे का रोग रहा लक़वे के शिकार हो गए हाथ टूट गए पर वो कभी नहीं टूटे ।जीवन भर लोगों को दिया ही दिया बदले प्रेम नफरत जो मिली वो पीते रहे ।आध्यात्म की ऊंचाई तक गए भी व अंगुली पकड़ कई लोगों को उस राह चलाया भी।यह उनका परिचय हो भी नहीं सकता कि वो दो दफे सांसद विधायक नेता विरोधी दल या नगरपालिका चैयरमेन रहे वे सही अर्थों में महापुरूष थे उनको सच में पहचानने की ज़रूरत है उन सब को भी जो मानते है हम उनके Follower है ओर उन सब को भी जो इस पीड़ित मानवता के आंसू वास्तवं में पौंछना चाहते है।
मेरी कुटिया जाग तेरा इतिहास लिखाने आया हूं
राम भी इतिहास लिख गए, कृष्ण भी इतिहास लिख गए। भरत, हरिश्चंद्र से लेकर प्रताप और दुर्गाबाबा तक सभी इतिहास लिख गए ।jai sangh shakti

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