11/02/2025
प्रस्तुत फोटो नाम परिवर्तन का एक वर्गीकृत विज्ञापन मात्र नहीं है।
यह चेतावनी है अपने आरोप को भूल जाने की कि विधर्मियों ने हमें छल और बल से धर्मांतरित कर अपनी संख्या बढ़ाई है।
इस खबर में यदि छल है तो हिंदुओं का अपने आप से और अपनी संतान से किया जा रहा छल है।
हिंदुओं के धर्म-झंडा-बरदार बहुत डींगें मारते हैं। पौराणिक पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों को वैज्ञानिकता, धार्मिकता और ऋषियों के नाम का आवरण ओढ़ कर परोसते हैं ताकि लोग समझदार नहीं बन सके।
यदि धर्म के नाम पर आप में पाखंड, कुरीतियों और अंधविश्वास नहीं है तो आपके परिवार की कन्या या विवाहिता को कोई भी विधर्मी बरगला नहीं सकता।
विगत 6000 वर्षों में हिंदुओं के सर्वाधिक हित के साथ ही विश्व भर के हित का जिसने चिंतन कर यह निष्कर्ष निकला की हिंदुओं को सुधार कर आर्य बनाए बिना संसार का उधर नहीं हो सकता। और हिंदू यदि आर्य नहीं बने तो हिंदुओं का उधर भी नहीं हो सकता। महर्षि दयानंद सरस्वती जी द्वारा स्थापित आर्यसमाज के अतिरिक्त पाखंड कुरीतियों और अंधविश्वासों को दूर करने का मार्ग और कोई बात नहीं सकता।
इसीलिए
हिंदुओं को को आर्यसमाज में आना चाहिए।
आर्यसमाज का पोषण करना चाहिए और
अपने घरों में में सत्यार्थ प्रकाश ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका, संस्कार विधि और महर्षि दयानंद प्रणित अन्य ग्रंथ रखने और पढ़ने चाहिए।
वेदों के महर्षि दयानंद प्रणीत भाषण और महर्षि की प्रणाली पर किए गए वेद भाष्य अपने घरों में रखना चाहिए।
अपनी संतानों को ऋषि प्रणीत ग्रंथ पढ़ने को प्रेरित करना चाहिए ताकि उनमें विवेक जागृत हो और वह स्वयं का परिवार का समाज का और राष्ट्र का नाम कर सके।
एक कड़वी बात और।
जो लोग आर्य समाज में है और आर्ट ग का स्वाध्याय नहीं करते वे अभागे है।
अमृत मधु और स्वच्छ जल उनके चारों ओर पसरा है किंतु वे इनमे स्नान और इनका पान करने की बजाय क्या गिण्डोले के सामान अनध्याय और विवेकहीनता रूपी गोबर और गंदगी से लिपटे ही रहना चाहते हैं?
-उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत-कठोपनिषद।
10/12/2024
आर्य राष्ट्र बनाएंगे भ्रष्टाचार मिटाएंगे।
20/03/2024
बालिकाओं में ब्रह्मचर्य और पाखंड के विरुद्ध जागरूकता सिर्फ आर्य समाज ही भर सकता है।
अन्यत्र सब जगह धर्म के नाम पर ढंग और पाखंड चलता है । इसके संचालक स्वयं नारी जाति को कलंकित करने के लिए तैयार रहते हैं।
इसलिए अपने परिवार और स्वजनों का कल्याण चाहे तो आर्य समाज की शरण आए।
15/03/2024
इतना ह्रास नैतिकता का आम लोगों में हो गया है कि गलती से खाते में आए करोड़ों रुपए तुरंत निकलवा के मालिक बन गए।
इतना भी नहीं की बैंक में जाकर कहते कि यह कहां से आए हैं।
यह सब लोग अच्छी तरह जानते थे कि यह धन उनके खातों में कोई परमात्मा ने नहीं डाला है बैंक के सिस्टम में गलती से आया है।
कभी ना कभी वसूली होगी ही।
चोर बैंक पैसे देने की वजह साहूकार बैंक दे दिए होते तो यह लोग और परलोक नहीं बिगड़ता।
किंतु ऐसे संस्कार सिर्फ आर्यसमाज में ही मिल सकते हैं।
23/09/2023
समस्त मानवता का तो है ही, किंतु आर्यसमाज हिंदुओं का विशेष हितकारी है, रक्षक है!
जितनी मार्मिक और तथ्यात्मक बात आर्यसमाज की इस परोपकारी पत्रिका में श्रद्धेय प्रोफेसर धर्मवीरजी ने लिखी है उतनी शायद किसी हिंदू ने नहीं लिखी होगी।
26/05/2022
ये ईसाई लोग जहां गरीबी है, अशिक्षा है, वहीं पर अपना कार्य करते हैं।
शिक्षित, विज्ञानविद और विद्वान लोगों के सामने कभी नहीं आते।
सभी ईसाई पादरियों को मालूम है कि आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती ने अपने अमर ग्रंथ सत्यार्थप्रकाश के १४वें समुल्लास में बाइबल की धज्जियां उड़ाई है, ईसाई मत की धज्जियां उड़ाई है।
और
भारत में अंग्रेजी राज्य में ईसाई अंग्रेज अधिकारियों की उपस्थिति में भी बाइबल की धज्जियां उड़ाई है।
लेकिन
फिर भी यदि अपने मत को सच्चा मानते हैं तो ये धूर्त लोग कभी भी आकर के आर्यसमाज में चर्चा नहीं करते आओ मिल बैठकर विचार करते हैं। बाइबिल में गलतियां है तो दूर करते हैं और नहीं है तो समझ लीजिए और ईसाई बन जाइए।
24/05/2022
जो वानप्रस्थ और सन्यास की आयु आने पर भी घर में पड़े रहते हैं और बालक बालिकाओं को गुरुकुल ओं में नहीं भेजते हैं खुलापन मनोवैज्ञानिकों के सिर चढ़कर बोलता है और समाज में प्रगति सूचक माना जाता है जहां बेटे माताओं को मम्मी यार कहते हैं। अर्थात हम इतने अचेत हो गए हैं की शब्दों के उचित अनुचित प्रयोग और अर्थ तक को भूल गए हैं।
ऐसी स्थिति में जो अनिष्ट ना हो वही उत्तम है।
मात्र आर्य समाज ही है जो प्रत्येक वर्ण और आश्रम में स्थित व्यक्ति को अपने अपने गुण कर्म स्वभाव कर्तव्य और अधिकार का भान करा सकता है।
आप आर्य समाज ही नहीं है तो यह आपका दुर्भाग्य है।
आप आर्य समाज का प्रचार नहीं करते हैं तो भी आप का दुर्भाग्य है क्योंकि आपको और आपके परिवार को आपके बनाए समाज में ही रहना है।
इसलिए आर्य समाज में आए
आर्य समाज को सहयोग करें
आर्य समाज के सदस्य बने
आर्य समाज के सदस्य बनाएं
सत्यार्थ प्रकाश अवश्य पढ़ें
वेद और ऋषि यों के ग्रंथों का भी स्वाध्याय अवश्य करें और अपने पूरे परिवार को कराएं ताकि सब में दृढ़ संस्कार हो
23/04/2022
संघ, विश्व हिंदू परिषद, पुजारी मंदिर मठ चाहे जितने हो जाए किंतु मानव मानव में समानता आर्य समाज के बिना संभव नहीं है। इसीलिए संघ वीएचपी आदि संगठन आर्य समाज में घुसपैठ करके इसे निष्क्रिय और कबजाने में लगे हैं और पंडे पुजारी, मत संप्रदाय सुनियोजित रूप से अपनी ठगी भरी पेट पूजा को सुरक्षित करने के लिए आर्य समाज के विरुद्ध लोगों को भ्रमित करते हैं ।
जबकि
आर्य समाज तो ब्रह्मा से लेकर जैमिनी मुनि पर्यन्त प्रचलित परंपरा का संवाहक मात्र है, कोई नया संप्रदाय नहीं।
जो लोग आर्य समाज को ईसाई या मुस्लिम संप्रदाय का एक अंग मानते हैं या ऐसा कहने वालों की बातों पर ध्यान देते हैं, उन्हें सत्यार्थ प्रकाश का 13 वां और 14 वां समुल्लास बार बार पढ़ना चाहिए।
सत्य का पता लग जाएगा।