07/09/2020
"साला" शब्द की रोचक एवं महत्वपूर्ण जानकारी 😌🙏
हम प्रचलन की बोलचाल में साला शब्द को एक "गाली" के रूप में देखते हैं, साथ ही "धर्मपत्नी" के भाई/भाइयों को भी "साला"/"सालेसाहब" के नाम से इंगित करते हैं।
"पौराणिक कथाओं" में से एक "समुद्र_मंथन" में हमें एक जिक्र मिलता है, मंथन से जो 14 दिव्य रत्न प्राप्त हुये थे वो थे:-
कालकूट (हलाहल), ऐरावत, कामधेनु, उच्चैःश्रवा, कौस्तुभमणि, कल्पवृक्ष, रंभा (अप्सरा), लक्ष्मी, शंख (जिसका नाम साला था) वारुणी मदिरा, चन्द्रमा, शारंग धनुष, गंधर्व, और अन्त में अमृत...
"लक्ष्मीजी" मंथन से "स्वर्ण" के रूप में निकली थीं, इसके बाद जब "साला शंख" निकला, तो उसे लक्ष्मी जी का भाई कहा गया। दैत्य और दानवों ने कहा कि अब देखो लक्ष्मी जी का भाई साला (🐚शंख) आया है। तभी से ये प्रचलन में आया कि नवविवाहिता "बहू" या धर्मपत्नी जिसे हम "गृहलक्ष्मी" भी कहते हैं, उसके भाई को बहुत ही पवित्र नाम "साला" कहकर पुकारा जाता है।
समुद्र मंथन के दौरान "पांचजन्य साला शंख" प्रकट हुआ। इसे भगवान विष्णु ने अपने पास रख लिया। इस शंख को "विजय का प्रतीक" माना गया है, साथ ही इसकी ध्वनि को भी बहुत ही शुभ माना गया है। विष्णु पुराण के अनुसार माता लक्ष्मी समुद्रराज की पुत्री हैं तथा शंख उनका सहोदर भाई है। अतः यह भी मान्यता है कि जहाँ शंख है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है। इन्हीं कारणों से हिन्दुओं द्वारा पूजा के दौरान शंख को बजाया जाता है। जब भी धन-प्राप्ति के उपाय करो "🐚शंख" को कभी नज़र अंदाज़ ना करें, लक्ष्मी जी की फ़ोटो/प्रतिमा के नजदीक रखें। जब भी किसी जातक का साला या जातिका का भाई प्रसन्न होता है तो ये उनके यहाँ "धन आगमन" का शुभ सूचक होता है और इसके विपरीत साले से सम्बन्ध बिगाड़ने पर जातक घोर दरिद्रता का जीवन जीने लगता है। अतः साले को सदैव प्रसन्न रखें। लक्ष्मी जी स्वंय चलकर आपके घर आयेंगी...!
😍😍😍🚩🚩🚩😮😮😮😌😌😌
धर्मो रक्षति रक्षित: 🙏