Surendra Singh bhati

Surendra Singh bhati

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You can't change how people feel about you, so don't try. Just live your life and be happy

17/02/2021

Teachers need for private school . School location is rural area .

02/02/2021

Teachers need for private school

04/02/2016

लकीरे है तो रहने दो ...
किसी ने रूठ कर गुस्से में शायद खीच दी थी,इन्ही को अब पाला बनाओ और आओ कबड़ी खेलते है....

04/02/2016

झूठ, लालच और फरेब से परे है, खुदा का शुक्र है आईने आज भी खरे है.”

17/12/2015

विभिन्न प्रकार के नशों ने, संस्कारों की कमी ने, भौतिक सुखों की लालसा ने और बिना खून पसीना बहाए धनार्जन के दिवा-स्वप्नों ने हम राजपूत वीरों की युवा पीढ़ीको पथ-भ्रष्ट और बर्बाद कर दिया है...नशे के व्यसन के साथ साथ सबसे बड़ा दुर्गुण कुसंस्कारी होना है... मेरे मित्र राजपूतों में 80 % लोग अश्लील होते हैं या फिर उनके मित्र अश्लील होते हैं या फिर उन्होंने ऐसी कम्युनिटी ज्वाइन कर रखी होती है जिसे देखते ही शर्म आ जाये... कुछ ऐसे भी रहे हैं जो बाद में अश्लील सामग्री के साथ पकडे गए.. मेरे दोस्तों में राजपूत युवा भी नहीं हैं जो राष्ट्रवादी हों.??यही हाल फेस बुक पर है... किसी राजपूत युवा ने अंग्रेजी शराब या बीयर की फोटो लगा दी तो "CHEERS बन्ना हुकुम" के प्रत्युत्तर इकट्ठे हो जाते हैं..जैसे उनके हाथ में ही जाम आ गया हो..मैं जब भी ये सब देखता हूँ और सोचता हूँ तो मुझे इस शूर-वीर जाति का पतन ही नहीं काल समक्ष दिखता है.?राजपूत युवा हाथ में शराब की बोतल और तलवार लेकर जीप या बाईक पर बैठकर तस्वीर खिंचवाना शान समझता है.. जबकि वास्तव में वो फोटो उनके चारित्रिक ह्रास का प्रमाण होती है..इन युवाओं को अपने जीवन और समाज की सच्चाई भी नहीं दिखती कि राजपूतों के लिए नाकोई आरक्षण है, ना कहीं सरकारी रोज़गार है, ना गरीब राजपूतों को किसी सरकारी योजना से मदद मिलती है...और सबसे कडवा सत्य ये है कि... ना ही हम संगठित हैं...और ऊपर से युवा-शक्ति 'करेला नीम चढ़ा'...???इस देश में किसी एक जाति विशेष का इतना बड़ा सामाजिक, आर्थिक और चारित्रिक पतन कभी नहीं हुआ... जितना राजपूत समाज ने पिछले सभी लोकत्रांत्रिक वर्षों में अपनासर्वस्व खोया है... और वो कहते हैं ना 'रस्सी जल गई पर मरोड़ नहीं गई' वो अब भी राजपूतों के साथ है... झूठी शान ने कभी आगे बढ़ने नहीं दिया.. विभिन्न तरह के सामाजिक व्यसनों ने उठने ना दिया... और अब ये हाल है... भूमिहीन राजपूतों की संख्या बढती ही जा रही है...अब भी समय है.. उठो.. जागो.. टटोलो अपने स्वाभिमान को.. कि हम क्या हुआ करते थे.. और आज हमारे हालात क्या हैं.??हम आज भी संगठित हो जाये और सबके ह्रदय में राष्ट्रवाद की भावनावपजागृत हो जाए तो अपना भारत आज भी, अब भी 'राजपूताना' बन सकता है...आवश्यकता है एक बड़े और अटूट संगठन की और प्रबल इच्छा-शक्ति की...इन्कलाब जिंदाबाद...वन्दे मातरम...जय हिंद... जय भारत...

14/12/2014

सुप्रभात्

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