Shri Bhagwat Dharm Sanskrit Ved Vidyalaya Jindoli- Alwar Raj.

  • Home
  • India
  • Jindoli
  • Shri Bhagwat Dharm Sanskrit Ved Vidyalaya Jindoli- Alwar Raj.

Shri Bhagwat Dharm Sanskrit Ved Vidyalaya Jindoli- Alwar Raj. Our Shishyas learn essential aspects of Hindu culture.We discipline their lives, teach them good habits,Sanskrit Language,Karamkand training,traditions etc

05/07/2020

गुरु पूर्णिमा महोत्सव २०२०
आप सभी गुरु भाइयों को सूचित किया जाता है की श्री भगवद धर्म संस्कृत वेद विद्यालय ज़िंदाेली घाटी में गुरू पूजा महोत्सव दिनांक ८ जुलाई २०२० को सुबह ११ बजे किया जाएगा
सभी भाइयों से विनम्र प्रार्थना है उस दिन समय पर पहुँच कर गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त करें

विशिष्ठ अतिथि :संस्थापक पूज्य गुरुदेव पंडित भगवत दयाल वेदपाठी

09/10/2019
अलवर सासंद बालक नाथ जी आश्रम मे पधारे आश्रम के संस्थापक जी अध्यापक एवं वैदिक बटुको ने वेद मंत्रो से स्वागत किया
13/09/2019

अलवर सासंद बालक नाथ जी आश्रम मे पधारे आश्रम के संस्थापक जी अध्यापक एवं वैदिक बटुको ने वेद मंत्रो से स्वागत किया

बारिश के लिए यज्ञ करते हुए आश्रम परिवार
17/07/2019

बारिश के लिए यज्ञ करते हुए आश्रम परिवार

सभी को योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाये
21/06/2019

सभी को योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुये
29/05/2019

मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुये

21/05/2019

, * श्री गुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

भावार्थ:-श्री गुरुजी के चरण कमलों की रज से अपने मन रूपी दर्पण को साफ करके मैं श्री रघुनाथजी के उस निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फलों को (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को) देने वाला है।

हनुमानजी महाराज की भक्ति के साथ आज के दिन की दूसरी प्रस्तुति का आरम्भ करते हुये कहता हूं कि, श्री हनुमानजी को गुरु बनाओं, हमें हर पल कुछ न कुछ सिखने को मिलता है, अक्सर बच्चे माँ से शिकायत करते हैं माँ पिताजी को समझाइये चार लोगों के बीच में फटकारते है, अकेले में कुछ कह दिजिये मगर चार लोगों में तो मत कहो, यानी कितना हमारा सम्मान, हमारी नाक पर रहता है, बाप ने अगर किसी के सामने बेटे को कुछ कह दिया तो इसी पर तूफान मच गया, रावण पूरी भरी सभा में कितनी अशिष्ट भाषा बोल रहा है और हनुमानजी क्या कह रहे हैं! !!

विनती करूऊँ जोरि करि रावण ।
सुनहु मान तजि मोर सिखावन ।।

हनुमानजी जब बोलते हैं हाथ जोडकर हे प्रभु! "खायऊँ फल प्रभु लागि भूखा" यह हनुमानजी की कायरता नहीं है आप इसे हनुमानजी की कायरता समझने की भूल मत करना, यह हनुमानजी की विनम्रता हैं, यह उनकी महानता है, दुष्ट को उसी भाषा में मत बोलो अन्यथा दुष्टता और बढेगी, दुष्ट के सामने भी शिष्टता का ही प्रयोग हो, हनुमानजी कभी उत्तेजित नहीं होते क्योंकि मान-सम्मान का कोई भाव ही हनुमानजी में नहीं है वह तो मान-अपमान से कभी भी प्रभावित नहीं होते।

हमारा जो भी बल है वह केवल हमारे अहम की तृप्ति के लिये है, कुछ भी बात हो जाए आप तुरन्त अकड जायेंगे, कैसे उत्तेजित हो जाते हो, समझता क्या है अपने को, छठी का दूध याद दिला दूँगा, व्यक्ति के पास पैसा आते ही कैसे शिष्टाचार भूल जाता है, सज्जनों! पैसा कमा रहे हो बहुत अच्छी बात है, यह मत सोचो कि पैसा किस काम आएगा, विचार करो पैसा किस काम आ रहा है?

पैसा किसी को रूला रहा है या हमारा पैसा किसी रोते हुए को हँसा रहा है, पैसा किसी को गिरा रहा है या गिरे हुए को सहारा देकर उठा रहा है, हमारा पैसा किसी के प्राणों का हरण करने जा रहा है या किसी के प्राणों की रक्षा करने जा रहा है, हमारा पैसा किसी की रोजी-रोटी छीनने में लगा है या किसी की रोजी-रोटी की व्यवस्था में लगा है, यह मत देखो कि पैसा किस काम आएगा यह देखो कि पैसा किस काम आ रहा है और किसकाम आना चाहिए यही विक्रम है।

हनुमानजी रावण की अशिष्ट भाषा में भी मौन यानि एक बार तो रावण ने यहां तक कह दिया कि अरे मूर्ख तेरी मृत्यु निकट आई देख तो सही तेरे बराबर में कौन खडा है, तो हनुमानजी ने मुडकर देखा, बोले तुझे इससे डर नहीं लग रहा है कि मौत तेरे पास खडी है, बोले डर तो नहीं लग रहा है बोले क्यो? तो फिर हनुमानजी ने कहा खडी तो मेरे पास है पर देख तुझे रही है, इसलिए मुझे डर नहीं लग रहा है, पूछा तेरे पास आकर क्यो खडी है, मेरे पास क्यों नहीं आयी?

तो बोले हनुमानजी की पूछ्ने आयी है, रावण का अभी काम करना है या कुछ दिन बाद करना है, थोडी बहुत हनुमानजी मजाक करते थे अन्यथा हनुमानजी तो मौन ही रहते हैं, हमारे संतों का कहना है कि अगर सामने वाला अशिष्ट है तो आप मौन हो जाइये, अगर एक गाली देगा तो सैकड़ों की संख्या में वापस आयेगी और अगर मौन हो गए तो एक ही एक रहती है,

मूरख कामुक बाँबिया,निकसत बचन भुजंग।
ताकी औषधि मौन हैं,विष नहीं व्यापत अंग।

हनुमानजी शांत मौन खडे हैं, उत्तेजित नहीं होते हैं, मैने सुना है बडी उपहास की कथा है, सही या गलत मुझे नहीं पता लेकिन मैंने सुनी है, एक बार अकबर ने बिरबल से कहा कि बीरबल हम तुम्हारे पिताजी से मिलना चाहते हैं, हम देखना चाहते हैं कि जिन्होंने इतने योग्य पुरूष को जन्म दिया हैं वह पिता कैसे होंगे, हम उनकी भी योग्यता देखना चाहते हैं, बीरबल ने कहा वह गांव के बूढे व्यक्ति: वह कहां राजदरबार में आएंगे? रहने दीजिये।

अकबर बोले, नहीं, हम तुम्हारे पिताजी से मिलना चाहते हैं और देखना चाहते हैं कि जिससे तुम्हारी प्रखर बुद्धि है हम उनकी भी परीक्षा लेना चाहते हैं, अब यह बडा मुश्किल हो गया बीरबल को, मालूम है कि पिताजी बिल्कुल गांव के हैं उनको कुछ आता जाता नहीं और राजा जिद कर रहा है, अगर पिताजी उनका उत्तर दे न पाए तो बादशाह पिताजी का अपमान करेंगे जो मै सह नहीं सकता, न ही राजा से बिगाड सकता हूँ, तो क्या करूँ?

बीरबल घर आए और पिताजी से कहा कि पिताजी एक धर्म संकट आ गया है, बोले कल आपको राजदरबार चलना है और सम्राट आपकी योग्यता की परीक्षा लेंगे, वह कितने भी प्रश्न आपसे पूछे बस इतना करना कि आप मौन रहना, बाकी मैं सम्भाल लूंगा, पिताजी को समझा-बुझाकर दरबार में ले आये, दरबार लगा और बादशाह का आगमन हुआ, पिताजी को बादशाह ने प्रणाम किया और कहा कि आपने जैसे योग्य पुत्र को जन्म दिया हैं, हमारी इच्छा थी कि आपका दर्शन करे, आपकी योग्यता का भी दर्शन करे।

अकबर ने बीरबल के पिताजी से प्रश्न पूछना प्रारम्भ किया, बीरबल ने पिताजी को देखकर इशारा कर दिया मौन, तो बीरबल के पिताजी कुछ बोले नहीं, दूसरा प्रश्न किया फिर मौन, तीसरा प्रश्न किया फिर मौन, अब भरी सभा में बादशाह का उत्तर न दे, न सिर हिलाये, बिल्कुल जडवत से बैठे हैं तो बादशाह का अहंकार जाग गया कि मैं बोल रहा हूँ, मगर यह बूढा मेरे प्रश्नो का उत्तर नहीं दे रहा है,

अकबर बोला, बीरबल एक बात बताओ, अगर किसी मूर्ख से पाला पड जाए तो क्या करना चाहिए? यह अकबर ने बीरबल से प्रश्न किया उनके पिताजी के लिये, बीरबल ने कहा सरकार उस समय मौन ही रहना चाहिए और कुछ नहीं, बीरबल के पिता को मूर्ख बोल रहा है, मौन ही होना चाहिए तो, जो किसी प्रकार से उत्तेजीत न हो वही विक्रम है, वही बजरंगी है।

जय श्री रामजी
जय श्री हनुमानजी

महन्त बालक नाथ जी विधायक मंजीत चौधरी जी का स्वागत करते हुये वेद विधालय परिवार
03/04/2019

महन्त बालक नाथ जी विधायक मंजीत चौधरी जी का स्वागत करते हुये वेद विधालय परिवार

20/03/2019

सभी को होली महोत्सव की बहुत बहुत बधाई व शुभकामनाये

02/12/2018

आज आश्रम में भव्य समारोह का आयोजन सम्पन हुआ जिसमे लगभग 600 आदमी योने भाग लिया आश्रम परिवार की तरफ से सभी को बहुत बहुत शुभकामनाये

Address

Jindoli Ghati
Jindoli
321402

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm
Sunday 9am - 5pm

Telephone

919928518335

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shri Bhagwat Dharm Sanskrit Ved Vidyalaya Jindoli- Alwar Raj. posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to Shri Bhagwat Dharm Sanskrit Ved Vidyalaya Jindoli- Alwar Raj.:

Shortcuts

Share

Category