Department Of History, Culture .& Archaeology CRSU Jind

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06/03/2019
Two days workshop on sources of Indian history CRSU
05/03/2019

Two days workshop on sources of Indian history CRSU

08/01/2019

All students are hereby informed that 2nd University Youth Festival- "Anubhuti 2019" shall be held from 16th to 18th January 2019. Kindly register your names to DYCA office for participation in the Youth Festival in various events like Music, Dance and Theatre, Literary Events and Fine Arts by 9th January, 2019.
For more information Contact-
Ms. Pallavi-
7494863638

05/01/2019

मानवीय मूल्य पर पाठ्यक्रम न केवल कक्षा पाठ बल्कि शिक्षा एवं वैश्विक माननीय मूल्यों को विचारों एवं कार्यों में प्रस्तुत करेगा । आज समाज में अनेकों प्रकार की अवन्दनीय स्थितियां एवं मुद्दे हैं, हम केवल आंखों से देख कर, ख्वाबबनकर, स्थितयों को नहीं बदल सकते अपितु हमें स्थितियों में भाग लेकर एवं अपने योगदान से सुधार करना होगा । समाज में यदि प्रत्येक व्यक्ति बुरा करेगा तो समाज अच्छा होने की कल्पना असंभव है । यह सात दिवसीय कार्यशाला एवंवैश्विक मानवीय मूल्यों पर पाठ्यक्रम विद्यार्थियों में मानवीय मूल्य विकसित करने का अच्छा प्रयास है व्यक्ति को अर्थ और काम की कोशिश धर्म की परिधि में रहकर करेंगे तो कोई कठिनाइयां नहीं आएंगी, धर्म की परिधि से बाहर होते हीअर्थ और काम आप को नष्ट कर देगा । उक्त वक्तव्य सीआरएसयू में चल रही कार्यशाला स्वास्थ्य, प्रसन्ता और समरसता के लिए वैश्विक माननीय मूल्य और समग्र शिक्षा विषय पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय,वर्धा, महाराष्ट्र के कुलपति प्रों. गिरिशवर मिश्रा ने अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहे । उन्होंने कहा कि हमारी चेष्टा कैसी है व हो इसके लिए ही मूल्य है ।प्रत्येक संस्कृति कुछ मूल्यों का सृजन करती है इन मूल्यों से जीवन निर्वहन होताहै । मनुष्य मूल्यों का सृजन और पालन करता है, मनुष्य समाज में रहता है। अकेले इंसान को किसी प्रकार के मूल्यों की आवश्यकता नहीं है किंतु जब हम आपस में मिलकर रहते हैं तो आपसी सद्भावना तथा भाईचारा बनाए रखने के लिएमूल्यों की आवश्यकता होती है। सभी ग्रंथों ने बताया है कि मानव का अन्य से रिश्ता कैसा हो एवं औरों का सुख कैसे बढ़ा सकते हैं और समाज निर्माण में क्या योगदान दे सकते हैं । पाश्चात्य संस्कृति में स्वयं और अन्य भिन्न-भिन्न है किंतु भारतीय संस्कृति में नाममात्र अंतर है दोनों लगभग समान ही है ।साधारण शब्दों में कहा जाए तो जैसे खुद को मनुष्य मानते हैं अन्य को भी मनुष्य समझें ।
कार्यशाला के दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक विभाग से डॉ. नवीन कुमार ने बताया कि आज के तकनीकी युग ने सूचना प्राप्ति सभी के लिए बहुत आसान कर दी है ऐसे में अध्यापक केवल ओहदे मात्र से अध्यापक नहीं समझाजाएगा अपितु उसे कक्षा में विद्यार्थियों को संपूर्ण ज्ञान देना होगा ।जिससे विद्यार्थी उसे अध्यापक समझें ।

भारतीय चरित्र निर्माण संस्थान, नई दिल्ली के प्रेसिडेंट श्री रामकृष्ण गोस्वामी ने कहा कि ज्ञान रूपी उज्जवल प्रकाश से मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर सकता है और ज्ञान हीनता से सब कुछ नष्ट कर सकता है । श्री रविंद्र भारतीय चरित्र निर्माण संस्थान, नई दिल्ली ने कहा कि हम प्रतिदिन समाचारों में देखते हैं कि अनेकों युवा जघन्य अपराध कर रहे हैं ऐसे में श्रीमद भगवद गीता एक मात्र ऐसी पारसमणि है जो समाज में मानवीय मूल्यों का स्थापित कर शांति एवं सद्भावना ला सकती है । भारतीय चरित्र निर्माण संस्थान, नई दिल्ली से ही श्री रविंद्र जी ने कहा कि आज के समय नित: प्रतिदिन अपराध संख्या बढ़ती जा रही है मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है कि अपराधों पर रोकथाम की जाए।

सांयकालीन स्तर में प्रो. कृष्ण राम बिश्नोई, डीन, गुरु जंभेश्वर जी महाराज इंस्टीट्यूट ऑफ रिलिजियस स्टडीज जीजेयू, हिसार ने कहा कि अध्यापक का धर्म विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देना है वर्तमान समय में विद्यार्थियों को बेहतर संस्कारनैतिक शिक्षा शिक्षक से बेहतर कोई नहीं दे सकता। इस दौरान सीआरएसयू के कुलगुरु प्रो. आरबी सोलंकी ने कहा कि इस सात दिवसीय कार्यशाला में सभी अध्यापक उन सभी विषयों का गठन अध्ययन कर रहे हैं जो आगामी स्तर में विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य है विद्यार्थियों को संपूर्ण शिक्षा देना जिससे विद्यार्थी शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य का निर्वहन करें ।उन्होंने कहा कि अपराध को रोकने के लिए हर व्यक्ति के साथ एक पुलिसकर्मी नहींलगाया जा सकता परंतु मानवीय मूल्यों से समृद्ध चरित्र निर्माण से नागरिकों को स्वयं सजग एवं समाज के प्रति जिम्मेदार बनाया जा सकता है ।

फोटो कैप्शन : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र के कुलपति प्रों. गिरिशवर मिश्रा को शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित करते सीआरएसयू के कुलगुरु प्रो. आरबी सोलंकी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति।

04/01/2019

डॉक्टर युद्धवीर सिंह, पूर्व कमिश्नर अंबाला डिविजन सेवानिवृत्त आईएएस
अध्यापक समाज में मलाई की तरह है जिस प्रकार से क्रीम को पसंद किया जाता है उसी प्रकार समाज में अध्यापक को पसंद किया जाता है । अध्यापक जहां है, जैसे है, जिस भी पद पर है, उसे अपना बेहतर कार्य करना चाहिए । अध्यापक को शारीरिक रूप से सक्षम, सामाजिक रूप से जिम्मेदार, नैतिक, बौद्धिक,आनन्दमय एवं सामंजस्य वाला होना चाहिए, जिससे विद्यार्थी शिक्षक को देखकर ऊर्जावान बने एवं ज्यादा से ज्यादा सीखने की प्रवृत्ति उसमें बढ़ी । यह संवाद सीआरएसयू जींद में चल रही सात दिवसीय कार्यशाला स्वास्थ्य, प्रसन्नता और समरसता के लिए वैश्विक मानवीय मूल्य और समग्र शिक्षा विषय पर तीसरे दिन के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुए पूर्व कमिश्नर अंबाला डिवीजन, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. यदुवीर सिंह ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहे। इस मौके पर कार्यशाला के निदेशक प्रोफेसर संजय कुमार सिन्हा ने डॉ. युद्धवीर सिंह के सामाजिक योगदान के बारे में उपस्थित सभी को रूबरू करवाया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आरबी सोलंकी ने इस दौरान शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों के चेहरे देखने से इस बात का अंदाजा हो गया है कि शिक्षकों को कार्यशाला में काफी सीखने को मिल रहा है एवं डॉ. युद्धवीर सिंह के वक्तव्य से सभी को लाभ होने वाला है । प्रो. सोलंकी ने कहा कि इस कार्यशाला से हम सभी में सकारात्मक बदलाव होंगे जो कि हमारे शिक्षा, शिक्षण में काफी लाभप्रद होंगे। मुख्य वक्ता डॉ. युद्धवीर सिंह ने अपना वक्तव्य जारी रखते हुए शिक्षकों को कहा कि कितने शिक्षक ऐसे हैं जो यह ध्यान रखते हैं कि वह शारीरिक तौर से सक्षम है, आपको आपकी लाइफ का बेस्ट पर्सन बनने से कोई नहीं रोक सकता । हमें अपनी एनर्जी का एटीएम दूसरों की जेब में डाला हुआ है खुद को जाने एवं स्वयं, समाज, देश के लिए बेहतर कार्य करें । डॉ. युद्धवीर ने कहा कि एक शिक्षक में हंसमुख, ऊर्जावान, प्रेरणादायक, उत्साही, चिंतनशील की गुणवत्ता होनी चाहिए। इसके अलावा शिक्षक को सामग्री ज्ञान, शैक्षणिक कौशल, संचार कौशल, प्रबंध कौशल, सकारात्मक रवैया, खुले विचारों वाला एवं हार्दिक होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ग्रुप बनाकर सभी शिक्षकों से प्रैक्टिस करवाई जिससे वह शिक्षक की भूमिका निभा सके।

04/01/2019

प्रोफेसर बीएस डागर, सेवानिवृत हेड, एजुकेशन विभाग महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक
कार्यशाला के दूसरे स्तर में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक के शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त हेड प्रोफेसर बीएस डागर ने शिक्षकों को शिक्षण की बारीकियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रोफेसर डागर ने कहा कि शिक्षा का अभिप्राय सिर्फ शिक्षा नहीं है यह एक सार्वभौमिक शब्द है, जिससे बच्चे का समस्त विकास होता है। यह विकास सिर्फ शैक्षणिक या मानसिक रूप से नहीं समस्त तरह का विकास है । उन्होंने कहा कि शिक्षक को शारीरिक विकास, मानसिक विकास, महत्वपूर्ण विकास, बौद्धिक विकास, एवं आनंदमय विकास स्वयं का एवं विद्यार्थियों का करना चाहिए। विद्यार्थियों के कार्यों की सराहना करनी चाहिए, उसकी अच्छाइयों को ढूंढे इससे उनका विकास होगा । उन्होंने कहा कि बच्चा कितना सिख गया यह महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण यह है कि बच्चा यह जाने, समझे की सीखना कैसे हैं जिसने यह कला सीख ली उसने सब सीख लिया ।कार्यशाला के दौरान विश्वविद्यालय के कुलसचिव राजबीर मोर, प्रों. दया सिंह, प्रोफेसर संदीप बेरवाल एवं विश्वविद्यालय के के सभी शिक्षक उपस्थित रहे।

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