04/01/2019
डॉक्टर युद्धवीर सिंह, पूर्व कमिश्नर अंबाला डिविजन सेवानिवृत्त आईएएस
अध्यापक समाज में मलाई की तरह है जिस प्रकार से क्रीम को पसंद किया जाता है उसी प्रकार समाज में अध्यापक को पसंद किया जाता है । अध्यापक जहां है, जैसे है, जिस भी पद पर है, उसे अपना बेहतर कार्य करना चाहिए । अध्यापक को शारीरिक रूप से सक्षम, सामाजिक रूप से जिम्मेदार, नैतिक, बौद्धिक,आनन्दमय एवं सामंजस्य वाला होना चाहिए, जिससे विद्यार्थी शिक्षक को देखकर ऊर्जावान बने एवं ज्यादा से ज्यादा सीखने की प्रवृत्ति उसमें बढ़ी । यह संवाद सीआरएसयू जींद में चल रही सात दिवसीय कार्यशाला स्वास्थ्य, प्रसन्नता और समरसता के लिए वैश्विक मानवीय मूल्य और समग्र शिक्षा विषय पर तीसरे दिन के प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुए पूर्व कमिश्नर अंबाला डिवीजन, सेवानिवृत्त आईएएस डॉ. यदुवीर सिंह ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहे। इस मौके पर कार्यशाला के निदेशक प्रोफेसर संजय कुमार सिन्हा ने डॉ. युद्धवीर सिंह के सामाजिक योगदान के बारे में उपस्थित सभी को रूबरू करवाया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. आरबी सोलंकी ने इस दौरान शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों के चेहरे देखने से इस बात का अंदाजा हो गया है कि शिक्षकों को कार्यशाला में काफी सीखने को मिल रहा है एवं डॉ. युद्धवीर सिंह के वक्तव्य से सभी को लाभ होने वाला है । प्रो. सोलंकी ने कहा कि इस कार्यशाला से हम सभी में सकारात्मक बदलाव होंगे जो कि हमारे शिक्षा, शिक्षण में काफी लाभप्रद होंगे। मुख्य वक्ता डॉ. युद्धवीर सिंह ने अपना वक्तव्य जारी रखते हुए शिक्षकों को कहा कि कितने शिक्षक ऐसे हैं जो यह ध्यान रखते हैं कि वह शारीरिक तौर से सक्षम है, आपको आपकी लाइफ का बेस्ट पर्सन बनने से कोई नहीं रोक सकता । हमें अपनी एनर्जी का एटीएम दूसरों की जेब में डाला हुआ है खुद को जाने एवं स्वयं, समाज, देश के लिए बेहतर कार्य करें । डॉ. युद्धवीर ने कहा कि एक शिक्षक में हंसमुख, ऊर्जावान, प्रेरणादायक, उत्साही, चिंतनशील की गुणवत्ता होनी चाहिए। इसके अलावा शिक्षक को सामग्री ज्ञान, शैक्षणिक कौशल, संचार कौशल, प्रबंध कौशल, सकारात्मक रवैया, खुले विचारों वाला एवं हार्दिक होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ग्रुप बनाकर सभी शिक्षकों से प्रैक्टिस करवाई जिससे वह शिक्षक की भूमिका निभा सके।