18/10/2021
महर्षि विद्या मन्दिर जींद में महर्षि महेश योगी जी द्वारा संचालित विश्व शांति आंदोलन की शाखा सहस्त्र शीर्षा देवी मंडल के स्थापना दिवस मनाया गया।इसमें एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र का बिम्ब नवदुर्गा के नौ स्वरूपो में दर्शाया गया है।इन स्वरूपो में जन्म ग्रहण करती हुई 'शैलपुत्री',कौमार्य अवस्था तक 'ब्रह्मचारिणी' का रूप है।विवाह से पूर्व तक चन्द्रमा के समान निर्मल होने से 'चंद्रघंटा',गर्भ धारण करने पर 'कुष्मांडा',संतान को जन्म देने के बाद 'स्कंदमाता', संयम व साधना को धारण करने वाली'कात्यायनी',अपने पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने वाली 'कालरात्रि', संसार का उपकार करने से 'महागौरी'और अपनी संतान को सिद्धि का आशीर्वाद देने वाली "सिद्धिदात्री" है।इस अवसर पर छोटी-छोटी कन्याओं का पूजन कर व उन्हें उपहार से सम्मानित किया गया तथा आठवीं कक्षा की छात्रा कीर्ति और हर्षिता ने रामचरितमानस की चौपाई सुना कर सबको मोह लिया।इसके अलावा स्कूल अध्यापिकाओं के लिए नवरात्रि पर डांडिया नृत्य का आयोजन भी किया गया जिसमें स्कूल प्राचार्या व सभी अध्यापिकाओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया तथा इस अवसर का भरपूर आनन्द भी लिया।अंत में स्कूल प्राचार्या श्रीमती अनीता शर्मा जी ने सभी उपस्थित जनो को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमें महर्षि जी के पद चिन्हों पर चलना चाहिए।नित्य भावातीत ध्यान का सामूहिक अभ्यास करके समाज में शांति की स्थापना की जा सकती है और उन्होंने कहा कि हमे कन्या का सम्मान केवल नवरात्रो पर ही नही बल्कि हमेशा करना चाहिए।उन्होंने कहा कि हालांकि यह उत्सव साल में दो बार मनाया जाता है, लेकिन हर साल यह हमें हमारी मूलभूत शिक्षाएं जैसे सत्य,धर्म और निष्ठा को सुदृढ़ बनाने हेतु हमें प्रेरित करता है। हम कितना भी पश्चिम संस्कृति से प्रभावित हो जाएं, लेकिन हमारी पौराणिक शिक्षाएं जीवन का अंग रही हैं और हमेशा रहेंगी।