✨️ Masha-Allha Hajrat ji Molana Saad saheb ||
Islamic Knowledge
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Life Is too Short try to spent in the Way of Allah................. "BehTareen INsaan apni meethi ju
Abu Huraira (RA) ne riwayat kiya:
Rasoolullah ﷺ ne farmaya —
"Agar tum me se kisi ke paani ya drink mein makhi gir jaye, to usse poora dobo kar nikaal lo, kyunki uske ek par mein bimaari hoti hai aur doosre par mein uska ilaaj (shifa) hota hai."
Sahih al-Bukhari 3320
DUA FOR WHEN YOU ARE IN NEED
Rabbi innee lima anzalta ilayya min khayrin faqeer
My Lord! Truly, I am in need of whatever good that You bestow on me
Surah Al-Qasas - 28:24
27/10/2025
Allah hu Akbar ☝🏻 😌
Nabi Kareem ﷺ ne farmaya ''Allah qiyamat ke din zameen ko apni muththii mein ley lega aur aasman ko apne daaein hath mein lapet lega phir farmaeyga mein badshah hun, kahan hain zameen ke baadshaah.?''
Sahih Al - Bukhari 7382 :
Touba ke darwaje abhi bhi khule hai 🤲🏻...
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Abu Hurayrah (RA) ne riwayat kiya:
RasulAllah ﷺ ne farmaya —
" مَا مِنْ أَحَدٍ يُسَلِّمُ عَلَىَّ إِلاَّ رَدَّ اللَّهُ عَلَىَّ رُوحِي حَتَّى أَرُدَّ عَلَيْهِ السَّلاَمَ " .
“Jab tum me se koi mujhe salaam karta hai, to Allah Ta’ala meri rooh mujhe wapas kar dete hain, aur main uske salaam ka jawab deta hoon.”
(📚Sunan Abi Dawud 2041)
As-salāmu ‘alayka yā RasūlAllāh🤍
बेशक, अल्लाह तआला ने मुसलमानों पर अपने सबसे बेहतरीन रसूल को भेजा और उन पर सबसे उम्दा दीन, सबसे मुकम्मल शरीअत और सबसे पूरा पैग़ाम नाज़िल किया। जैसा कि अल्लाह तआला के इस क़ौल से साबित होता है:
{आज मैंने तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन पूरा कर दिया, और तुम पर अपनी नेमत तमाम कर दी, और तुम्हारे लिए इस्लाम को दीन पसंद किया।} (कुरआन 5:3)
इस उम्मत के कुछ कमजोर दिमाग वाले लोग इन हक़ीक़तों को भूल जाते हैं और कभी यहूदियत के पहलुओं की तरफ झुक जाते हैं, तो कभी ईसाईयत के पहलुओं की तरफ। वे पूरब और पश्चिम की तरफ देखते हैं और उनकी मज़हबी बातों, कानूनों, क़द्रों, रस्मों और रहन-सहन के तौर-तरीकों को अपनाने लगते हैं। अब यह अजीब नहीं रहा कि बहुत से वालिदैन अपने बच्चों को पश्चिमी कपड़े पहनने, पश्चिमी ज़बान बोलने और पश्चिमी त्योहार मनाने की हौसला-अफ़ज़ाई करते हैं।
ग़ैर-मुस्लिमों के त्योहारों में शरीक होना मुसलमान की पहचान के मिट जाने की निशानी है। रसूल अल्लाह ﷺ चाहते थे कि मुसलमानों की शख्सियत आज़ाद और मुनफ़रिद हो, जो दूसरों से अलग दिखाई दे। ग़ैर-मुस्लिमों से इन मामलों में रज़ामंदी जाहिर करना दीन में बिदअत है। रसूल अल्लाह ﷺ ने दीन में हर छोटी-बड़ी बिदअत से मना किया। उन्होंने फ़रमाया:
“जिसने इस्लाम में कोई अच्छा काम ज़िंदा किया जिस पर लोग अमल करें तो उसे उसका सवाब मिलेगा और उन सबका सवाब भी मिलेगा जो उस पर अमल करेंगे, और जिसने कोई बुरा काम ईजाद किया जिस पर लोग अमल करें तो उसे उसका गुनाह मिलेगा और उन सबका गुनाह भी मिलेगा जो उस पर अमल करेंगे।” (मुस्लिम)
यहाँ “अमल” का लफ़्ज़ किसी भी ऐसे काम पर लागू होता है जो इस्लाम से बाहर का हो।
रसूल अल्लाह ﷺ ने इस बात की खबर दी थी कि “तुम ज़रूर अपने से पहले वालों के तरीक़ों की पैरवी करोगे, बालिश्त-बालिश्त, हाथ-हाथ, यहाँ तक कि अगर वे गोह के बिल में दाखिल होंगे तो तुम भी उनमें दाखिल हो जाओगे।” सहाबा ने पूछा, “या रसूल अल्लाह, क्या यहूद और नसारा की बात कर रहे हैं?” रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “फिर कौन?” (बुख़ारी व मुस्लिम)
रसूल अल्लाह ﷺ ने यह भी फ़रमाया: “क़यामत उस वक़्त तक क़ायम नहीं होगी जब तक मेरी उम्मत पिछले उम्मतों के तरीक़ों की पूरी तरह पैरवी न कर ले, बालिश्त-बालिश्त, हाथ-हाथ।” लोगों ने पूछा, “या रसूल अल्लाह, क्या आप फ़ारसी और रूमियों की बात कर रहे हैं?” आप ﷺ ने फ़रमाया: “उनके अलावा और कौन?” (बुख़ारी)
उनकी नकल करने से अल्लाह तआला का ग़ज़ब आ सकता है, जैसा कि कुरआन में है:
{कहो, क्या मैं तुम्हें बताऊं कि अल्लाह के सज़ा के लिहाज़ से इससे भी बदतर कौन हैं? वो लोग जिन पर अल्लाह ने लानत की, जिन पर वह नाराज़ हुआ, जिनको उसने बन्दर और सूअर बना दिया और जो ताग़ूत के बन्दे बन गए। यही लोग दर्जे में बदतर और सीधी राह से ज़्यादा भटके हुए हैं।} (कुरआन 5:60)
रसूल अल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “जो जिस क़ौम की नकल करेगा, वह उन्हीं में से होगा।” (अबू दाऊद)
इसलिए मुसलमान को सोचना चाहिए कि वह किसकी नकल कर रहा है, सहाबा और सालेहीन की या कुफ़्फ़ार, मुनाफ़िक़ीन और बदकार लोगों की?
ग़ैर-मुस्लिमों के त्योहारों में उनकी नकल करना हराम है। इस पर कुरआन, सुन्नत और उलमा का इत्तेफ़ाक़ है। कुरआन की एक आयत इसका बयान करती है:
{और वही लोग हैं जो झूठी बात की गवाही नहीं देते, और जब किसी बेकार बात के पास से गुज़रते हैं तो इज़्ज़त से गुज़र जाते हैं।} (कुरआन 25:72)
मूजाहिद, रबी इब्न अनस, मुहम्मद इब्न सीरीन और इक्रिमा ने कहा कि “झूठ” से मुराद मुशरिकों के त्योहार हैं।
अल्लाह तआला ने काफ़िरों के त्योहारों को “झूठ” कहा क्योंकि वे उनमें धोखा और दिखावा पैदा करते हैं ताकि वो असली रूप से अलग नज़र आएँ। अल्लाह तआला ने उनकी मजलिस में शरीक न होने की तारीफ़ की, यानी कि उन्हें देखना या सुनना भी नहीं चाहिए। तो फिर उन में शरीक होना, जो कि “झूठ” कहा गया है, और भी बड़ा गुनाह होगा।
20/10/2025
Hazrat Abu Bakr Siddiqui رضي الله عنه Ne Farmaya:-
“Gunahon Mein Se Sabse Bura Gunah Yeh Hai Ke Aadmi Apne Gunah Ko Haqeer (Chhota) Samjhe.”
📚[Abu Bakr Al-Daynuri – Al-Mujalasah Wa Jawahir Al-'Ilm, Artikel 2318]📚
Imaan Ka Bahtareen Darza👇
Nabi ﷺ Ne Farmaya:-
”أَفْضَلُ الْإِيمَانِ: اَلصَّبْرُ وَالسَّمَاحَةُ“
“Emaan Ka Sabse Aala Darja Sabr Aur Narmi Hai.”
📚[Musnad Ahmad: 23923 | Sahih Al-Ma’na]📚
Hidayat k liye Dua 🤲✨
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