The real test of your calmness is when you are being deprived of basic Interpersonal communication by your own and known people but you choose to maintain a good patience even after experiencing several ups and downs alone.
Sankalan - संकलन
For sharing Good content संकलन - I Am Raising
17/04/2021
Nodal Officers of Delhi Hospitals
03/07/2020
बिना कूलर, एसी के घर को ठंडा रखने के ये हैं 10 उपाय, गर्मी से मिलेगा छुटकारा गर्मियों में कूलर, पंखा, एयर कंडीशनर जैसे उपकरण आपके घरों को ठंडा रखने में मदद करते हैं लेकिन इनके अधिक प्रयोग के का...
25/04/2020
विशेष आग्रह
कोरोना बीमारी की रोकथाम में किए जा रहे प्रयासों में आपकी अपनी दिल्ली सरकार की मदद के लिए आगे आएं - दिल्ली मुख्यमंत्री-उपराज्यपाल राहत कोष में दान दें - हर छोटी मदद आपकी चुनी हुई सरकार को आर्थिक रूप से और मजबूत बनाएगी ।
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lgcmrelieffund.delhi.gov.in The Corona virus (COVID-19) outbreak has created great distress in the society. The Govt. of NCT Delhi is making all efforts to fight the pandemic. There is urgent need to reach out the effected citizens. It is requested to extend your support by donating to the Lt. Governor/Chief Minister Relief Fu...
19/02/2019
सेना और CRPF में फर्क क्या है, CRPF को पेंशन क्यों नहीं मिलती है? CRPF और बाकी पांच अर्धसैनिक बलों के बारे में जान लीजिए.
दिल्ली में दूर की जा सकती है ट्रांसपोर्टेशन की कमी !
हां, दिल्ली में ट्रांसपोर्ट की कमी दूर की जा सकती है, यदि दिल्ली के मुख्य मुख्य विभाग जैसे दिल्ली परिवहन निगम, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली मेट्रो, दिल्ली ट्रांजिट, दिल्ली विकास प्रधिकरण इत्यादि अगर संयुक्त रूप से कदम बढ़ाएं ।
दिल्ली परिवहन निगम यानी डीटीसी फिलहाल बसो का संचालन करता है जिनकी संख्या जरूरत के हिसाब से कम है , हालांकि दिल्ली ट्रांजिट यानी क्लस्टर स्कीम के जरिए दिल्ली में अतिरिक्त बसे भी चलती है जोकि संतरी रंग की होती है ।
कुछ रूट्स पर दिल्ली मेट्रो द्वारा भी बसें, चलाई जा रही है , एवम् ग्रामीण सेवा के तहत छोटी वैन टाइप गाड़ी भी दिल्ली में चलती है, और ऐसे ही प्राइवेट मिनी बस जोकि एस टी ए द्वारा रजिस्टर्ड है भी दिल्ली में विभिन्न रूट्स पर चलती हैं
दिल्ली में प्रवास व जन्म के कारण जनसंख्या बढ़ती जा रही है जिसके चलते बसो की भी मांग बढ़ रही है ।
अगर दिल्ली नगर निगम जोकि 3 भाग में विभाजित है , बसों का परिचालन करता है तो ऐसा करने से यात्रियों को भी सरकारी सुविधा मिलेगी तथा निगम को भी आय प्राप्त होगी । 3नो निगम क्षेत्र का सर्वे करवाकर रूट्स बना सकते है और वहां जरूरत के हिसाब से मिनी या स्टैंडर्ड बस चला सकते है ।
इसी प्रकार अगर दिल्ली विकास प्राधिकरण , अपने द्वारा निर्मित सेक्टर्स एरिया के लिए स्पेशल बस सर्विस या शटल सर्विस का संचालन करे तो यह भी फायदेमंद होगा, इससे सेक्टर्स में रहने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी और प्राधिकरण को भी आय का एक जरिया मिलेगा । दिल्ली में रोहिणी, नरेला, द्वारका, बवाना जैसे एरिया में सेक्टर्स की भरमार है किन्तु परिवहन व्यवस्था ना के समतुल्य है, ऐसे में ये सुविधा उनके लिए लाभकारी होगी ।
दिल्ली मेट्रो को भी अपनी बस सेवा में इजाफा करना चाहिए ताकि मेट्रो से लोगो की कनेक्टिविटी बढ़े हालांकि मेट्रो का बढ़ा हुआ किराया जनता की जेब से बाहर जा चुका है ।
अच्छी ट्रांस्पोट की सुविधा से सभी का फायदा होगा, अगर उपरोक्त विभाग पार्टी जंजाल में बिना फंसे संयुक्त रूप से काम करें तो दिल्ली की व्यवस्था एक मिसाल बन सकती है ।
लेखक दिल्ली की परिवहन सेवा का उपभोक्ता है ।
02/08/2018
Booklist for Prelims - Anudeep Durishetty These are the books I read for the Civil Services Prelims exam. I’ve written this post keeping in mind an absolute beginner aspirant who is starting from level zero. As you start your Prelims preparation and read these books, please keep the following points in mind: Along with these books, get a ...
18/07/2018
नेल्सन मंडेला के वो 10 कोट्स, जो समझ आ जाएं तो ज़िंदगी बन जाएगी 'अफ्रीका के गांधी' कहे जाते हैं नेल्सन मंडेला (18 जुलाई, 1918 – 5 दिसंबर, 2013)!
महिलाओं के प्रति आजादी क्या होती है, महिलावादी और सम्मानित महिला में फर्क क्या होता है, देखिए सलमान सिद्दीकी की कलम से।
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जी हां आपने हेडिंग सही पढ़ा समाज में आजादी के नाम पर जो भी दोहरी नीति निभाई जा रही है या यह कह लीजिए उच्च किस्म के सुरक्षा वाले लोग जब आजादी की बात करते हैं खासकर से महिलाओं की आजादी के बारे में तो फिर उस आजादी पर क्यों सवाल उठाते हैं कि जब समाज में उस महिला की आजादी पर देखकर एक आजाद इंसान टिप्पणी करता है तो फिर वह अपराधी कैसे हो जाता है।
ठीक उसी तरह एक सम्मानित स्त्री के ऊपर एक सम्मानित व्यक्ति टिप्पणी नहीं करता सोचेंगे सोचते रह जाएंगे,चलिए आपको ले चलते हैं आज के युवा लेख लिखने वाले सलमान सिद्दीकी की कलम से कि उन्होंने सम्मानित महिला और महिलावादी में क्या फर्क बताया है और इसका कैसे दुर्व्यवहार किया जा रहा है।
मेरी फ़्रेंडलिस्ट में एक मात्र महिलावादी सम्मानित महिला हैं।
उन्होंने सार्वजनिक तौर पर जवाब चाहा था , इसलिये मै मेरा जवाब को सार्वजनिक कर रहा हूँ।
बात ड्रेस चयन की अगर है तो क्या आप उस लड़की के बचाव में उतरीं जिसे यूपी में हिजाब पहनने के कारण टर्मिनेट कर दिया गया,
क्या सिर्फ एक तरह की महिलाओं को ही ड्रेस सिलेक्शन का हक़ है ? क्या उन्ही महिलाओं को नारी वादियों का सपोर्ट है जो अपनी सुंदरता एक्सप्रेस करना चाहती हैं।
लेकिन जो महिलाएं स्वेच्छा से अपनी संसकीर्ति को एक्सप्रेस करना चाहती हैं उन्हें जबरन कहा जाता है यह न पहनो , और तब कोई महिलावादी नही बोलता , जब जबरन थोपा जाता है कि इस कड़कड़ाती ठंड में लड़की स्कूल में स्कर्ट पहन कर और लड़का फुल पेंट में आएगा , तब ठिठुरती लड़की को बाध्य करने , ड्रेस सिलेक्शन का छीनने और स्कर्ट थोपने के विरुद्ध न आप कभी बोली और न कोई और महिला वादी ,
क्यू कि आपकी सोंच न पूरी तरह महिला वादी ही है और न यथार्थ वादी है, आप सुंदर हैं , इस लिए सुंदर दिख रही हैं , और सुंदरता रूप में नही सोंच में है , जिस दिन मै आपकी सुंदरता की काया के आधार पर तारीफ़ करने लग जाऊंगा उस दिन रूप और कुरूप की तुलना करना शुरू कर दूंगा , और ऐसा कर के भी मै रूपभेदी और महिला विरोधी हो जाऊंगा ।
आप सुंदर हैं क्यू कि मै आपकी सोंच आधारित आपको जनता हूँ!
बाकी न मुझे आपकी ब्लैक ड्रेस से मतलब , न बड़ी आँखों से , न बड़े गले से , न भरपूर नारीत्व से, कुल मिलाकर सभ्य समाज की परिभाषा यह है कि ,
मै लड़कियों को मोटिवेट करूँ कि वह अपने नारीत्व को जग ज़ाहिर करें , वह अपना क्लीवेज दिखाएँ और मै देख कर सराहना करूँ ।
वह अपने अंडर आर्म्स दिखाएँ और मै कहूँ कि डियोड्रेन्ट शानदार है ।
कुल मिलाकर मुझे अपने अंदर यह हुनर पैदा करना है कि मै महिलाओं को असहज किये बिना उनका अंतरंग अंगों को देखूं और महिलाएं असहज हुए बिना अपने अंतरंग मुझे दिखा सकें ,
और फिर मै रेस्पेक्टेड और चयनित शब्दों से उनकी तारीफ करूँ , और वह अपने अंतरंग अंगों पर फ़ख्र करे।
हालांकि आज तक मुझ पर रूढ़िवादी , रूढ़ , बदमिजाज , कठोर , असामाजिक प्राणी का ठप्पा लगा है , जिसे मै आज सार्वजनिक तौर पर खत्म करना चाहता हूँ ।
यकीन मानिए मै रूढ़िवादी नही हूँ , आपको यकीन नही।
तो फिर कोई भी सभ्य समाजी महिला चाहे तो उपरोक्त मापदंडों के हिसाब से मेरी सभ्यता को टेस्ट कर सकती है , मुझसे बेहतर तारीफी कलमात कोई सोच नही सकता , शब्दों का अपार भंडार लिए मै हर एक सभ्य महिला और महिलावादी सभ्य पुरुष को चुनौती देता हूँ , और उन्हें यथार्थ के धरातल पर बुलाता हूँ।
लड़कियो के नग्न घूमने पर जो लोग या स्त्रीयां ये कहते है की कपडे नहीं सोच बदलो🤔
उन लोगो से मेरे कुछ प्रश्न है।
(1)👉हम सोच क्यों बदले? सोच बदलने की नौबत आखिर आ ही क्यों रही है!
आपने लोगो की सोच का ठेका लिया है क्या!!
(2)👉आप उन लड़कियो की सोच का आकलन क्यों नहीं करते!
उसने क्या सोचकर ऐसे कपडे पहने की उसके स्तन पीठ जांघे इत्यादि सब दिखाई दे रहा है,इन कपड़ो के पीछे उसकी सोच क्या थी!
एक निर्लज्ज लड़की चाहती है की पूरा पुरुष समाज उसे देखे,वही एक सभ्य लड़की बिलकुल पसंद नहीं करेगी की कोई उस देखे!
(3)👉अगर सोच बदलना ही है तो क्यों न हर बात को लेकर बदली जाए।
आपको कोई अपनी बीच वाली ऊँगली का इशारा करे तो आप उसे गलत मत मानिए,सोच बदलिये वैसे भी ऊँगली में तो कोई बुराई नहीं होती आपको कोई गाली बके तो उसे गाली मत मानिए उसे प्रेम सूचक शब्द समझिये.
हत्या ,डकैती, चोरी, बलात्कार, आतंकवाद इत्यादि सबको लेकर सोच बदली जाये सिर्फ नग्नता को लेकर ही क्यों!
(4)👉कुछ लड़किया कहती है कि हम क्या पहनेगे ये हम तय करेंगे पुरुष नहीं
जी बहुत अच्छी बात है आप ही तय करे लेकिन हम पुरुष भी किस लड़की का सम्मान/मदद करेंगे ये भी हम तय करेंगे, स्त्रीया नहीं और हम किसी का सम्मान नहीं करेंगे इसका अर्थ ये नहीं कि हम उसका अपमान करेंगे!
(5)👉फिर कुछ विवेकहीन लड़किया कहती है कि हमें आज़ादी है अपनी ज़िन्दगी जीने की…..
जी बिल्कुल आज़ादी है,ऐसी आज़ादी सबको मिले, व्यक्ति को चरस गंजा ड्रग्स ब्राउन शुगर लेने की आज़ादी हो,
वैश्यालय खोलने की आज़ादी हो,पोर्न फ़िल्म बनाने की आज़ादी हो, हर तरफ से व्यक्ति को आज़ादी हो!!
(6)👉लड़को को संस्कारो का पाठ पढ़ाने वाला कुंठित स्त्री समुदाय क्या इस बात का उत्तर देगा की क्या भारतीय परम्परा में ये बात शोभा देती है की एक लड़की अपने भाई या पिता के आगे अपने निजी अंगो का प्रदर्शन बेशर्मी से करे!
क्या ये लड़किया पुरुषो को भाई/पिता की नज़र से देखती है!
जब ये खुद पुरुषो को भाई/पिता की नज़र से नहीं देखती तो फिर खुद किस अधिकार से ये कहती है की “हमें माँ/बहन की नज़र से देखो”
कौन सी माँ बहन अपने भाई बेटे के आगे नंगी होती है!!
भारत में तो ऐसा कभी नहीं होता था….
सत्य ये है की अश्लीलता को किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं ठहराया जा सकता। ये कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधो की तरफ ले जाने वाली एक नशे की दूकान है।।
और इसका उत्पादन स्त्री समुदाय करता है।
मष्तिष्क विज्ञान के अनुसार 4 तरह के नशो में एक नशा अश्लीलता(सेक्स) भी है।
चाणक्य ने चाणक्य सूत्र में सेक्स को सबसे बड़ा नशा और बीमारी बताया है।।
अगर ये नग्नता आधुनिकता का प्रतीक है तो फिर पूरा नग्न होकर स्त्रीया अत्याधुनिकता का परिचय क्यों नहीं देती!!
गली गली और हर मोहल्ले में जिस तरह शराब की दुकान खोल देने पर बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है उसी तरह अश्लीलता समाज में यौन अपराधो को जन्म देती है।
सलमान सिद्दीकी की कलम से✍
14/07/2018
महिलाओं के प्रति आजादी क्या होती है, महिलावादी और सम्मानित महिला में फर्क क्या होता है, देखिए सल जी हां आपने हेडिंग सही पढ़ा समाज में आजादी के नाम पर जो भी दोहरी नीति निभाई जा रही है या यह कह लीजिए उच्च किस्म के सुर...
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