26/08/2018
M.R. Memorial Shikshan Shansthan Devipura
A place of decoding success
26/08/2018
यौवन का मूलः संयम-सदाचार
संसार में अधिकांशतः अधिक खाने वाले ही रोगों के शिकार पाये जाते हैं। हित-मित-नियमित आहार लेनेवाले संयमी व्यक्ति ही स्वस्थ व दीर्घजीवी होते हैं।
इंग्लैण्ड के टामस पास नियमित आहार के लिए बड़े प्रसिद्ध हुए। वे नित्य सदा, हलका, सुपाच्य आहार लेते थे। उन्होंने 40 वर्ष की उम्र के बाद मिठाई, शराब, मांस को छुआ तक नहीं। वे सदैव निरोग व प्रसन्न रहते थे। इंगलैण्ड के राजा चार्ल्स प्रथम ने उनकी कीर्ती सुनी तो उन्हें अत्यन्त आश्चर्य हुआ। उन्होंने ऐसे दीर्घजीवी व्यक्ति के दर्शन करना चाहा। टामस पार को बड़े आदर से राजमहल में बुलाया गया। भारी दावत का आयोजन भी किया गया। भोजन के समय स्वादिष्ट मिठाइयाँ, विभिन्न प्रकार के पकवान और सुस्वादु मांस इत्यादि उन्हें अत्यंत आग्रहपूर्वक परोसे गये। उनके पेट में दर्द होने लगा तब तक उन्हें खिलाया गया। बेचारे मिताहारी टामस पार पर इस शाही भोजन का भयंकर दुष्प्रभाव पड़ा। उसी रात्रि उनकी मृत्यु हो गई। उस समय उनकी आयु 152 वर्ष की थी। एकाएक मृत्यु का कारण ढूँढा गया। इतने भारी, अस्वाभिक, आहार के कारण उनके हृदय व पेट पर बल पड़ा, जिससे हृदयगति रुक गयी और वे मृत्यु के शिकार हो गये।
अतः शरीर के अंगों के साथ अति करके अपने स्वास्थ्य की इति न करें। संयम की आवश्यकता सभी को है। यह संयम बहारवटिया को प्रसिद्ध करता है। यह संयम सैनिकों को सुरक्षित रखता है। यह संयम साधकों की साधना में सुवास लाता है। यह संयम आयुष्यमान नंद को स्वर्ग की अप्सराओं से भी ऊँचा सुख मिलता है। जबकि फ्रायड के विकृत मनोविज्ञान से उन देशों में लाखों युवक-युवतियाँ विनाश के रास्ते जा रहे हैं जबकि भरतीय संस्कृति की सुंदर सीख से साधारण लोग भी तेजस्वी बन गये। कई भोगी योगी बन गये। कई दुराचारी सदाचारी बन गये। कई विलासी संयमी बन गये।
हे भारत के सपूतो ! संयम-सदाचार व सच्चे सुख को पाने के लिए ही धरती पर तुम्हारा आगमन हुआ है। हिम्मत करो.... संयमी-साहसी बनो। सफलता तुम्हारे चरण चूमेगी।
एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय करवाये मगर कुछ असर न हुआ और लोग मरते रहे। दुखी राजा ईश्वर से प्रार्थना करने लगा। तभी अचानक आकाशवाणी हुई। आसमान से आवाज़ आयी कि हे राजा तुम्हारी राजधानी के बीचो बीच जो पुराना सूखा कुंआ है अगर अमावस्या की रात को राज्य के प्रत्येक घर से एक – एक बाल्टी दूध उस कुएं में डाला जाये तो अगली ही सुबह ये महामारी समाप्त हो जायेगी और लोगों का मरना बन्द हो जायेगा। राजा ने तुरन्त ही पूरे राज्य में यह घोषणा करवा दी कि महामारी से बचने के लिए अमावस्या की रात को हर घर से कुएं में एक-एक बाल्टी दूध डाला जाना अनिवार्य है ।
अमावस्या की रात जब लोगों को कुएं में दूध डालना था उसी रात राज्य में रहने वाली एक चालाक एवं कंजूस बुढ़िया ने सोंचा कि सारे लोग तो कुंए में दूध डालेंगे अगर मै अकेली एक बाल्टी पानी डाल दूं तो किसी को क्या पता चलेगा। इसी विचार से उस कंजूस बुढ़िया ने रात में चुपचाप एक बाल्टी पानी कुंए में डाल दिया। अगले दिन जब सुबह हुई तो लोग वैसे ही मर रहे थे। कुछ भी नहीं बदला था क्योंकि महामारी समाप्त नहीं हुयी थी। राजा ने जब कुंए के पास जाकर इसका कारण जानना चाहा तो उसने देखा कि सारा कुंआ पानी से भरा हुआ है। दूध की एक बूंद भी वहां नहीं थी। राजा समझ गया कि इसी कारण से महामारी दूर नहीं हुई और लोग अभी भी मर रहे हैं।
दरअसल ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि जो विचार उस बुढ़िया के मन में आया था वही विचार पूरे राज्य के लोगों के मन में आ गया और किसी ने भी कुंए में दूध नहीं डाला।
मित्रों , जैसा इस कहानी में हुआ वैसा ही हमारे जीवन में भी होता है। जब भी कोई ऐसा काम आता है जिसे बहुत सारे लोगों को मिल कर करना होता है तो अक्सर हम अपनी जिम्मेदारियों से यह सोच कर पीछे हट जाते हैं कि कोई न कोई तो कर ही देगा और हमारी इसी सोच की वजह से स्थितियां वैसी की वैसी बनी रहती हैं। अगर हम दूसरों की परवाह किये बिना अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने लग जायें तो पूरे देश मेंबर ऐसा बदलाव ला सकते हैं जिसकी आज हमें ज़रूरत है।पंसद आये तो पेज लायक व शेयर करे।
सोच और समझ में अंतर = डॉ.चाहता है क़ि हर आदमी बीमार हो, वकील चाहता है कि हर आदमी झगड़ालू हो, अमीर चाहता है कि हर आदमी गरीब हो, पुलिस चाहती है कि हर आदमी जुल्मी हो, ठेकेदार चाहता है कि हर आदमी मजदूर हो, दारू का ठेकेदार चाहता है कि हर आदमी दारूबाज हो, बैंक चाहता है कि हर आदमी कर्जदार हो, नेता चाहता है कि हर आदमी अनपढ़ और भोले-भाले हो, पुजारी चाहता है कि हर आदमी अन्धविश्वास में डूबा रहे, तांत्रिक चाहता है कि हर आदमी भूत-प्रेतों से डरता रहे, लेकिन एक अध्यापक ही ऐसा प्राणी है जो चाहता है कि हर स्त्री-पुरुष पढ़ा लिखा हो और जीवन में सफलता प्राप्त कर आगे बढ़कर खुद का, परिवार का, मानव समाज का और देश का विकास करे।अच्छा लगा है तो जरूर आगे अपने साथियो को भेजना ।
बुरे व्यक्ति को उपदेश के जरिये सुधारने की कोशिश करना ठीक वैसा हीं है, जैसे पानी को कपड़े में बांधने की कोशिश करना.
कई बार वक्त यह तय करता है, कि कौन सही था और कौन गलत.
100 बड़ी बातें बोलने से अच्छा है, 1 बड़ा काम कर देना.
अपने विरोधियों को जवाब बोलकर नहीं, बल्कि करके देना चाहिए.
चरित्रहीन लोग भी तरक्की करते हैं, लेकिन उनकी तरक्की खोखली होती है.
खुद को इतने कमजोर मत बनाइए कि आपको छोटे-छोटे कामों के लिए किसी का मोहताज बनना पड़े.
अगर आप अच्छे व्यक्ति हैं, तो उन लोगों के घर कभी मत जाइए… जहाँ बुरे लोगों को सम्मान मिलता हो.
जो लोग आपसे इर्ष्या करते हैं, न तो उनसे Gossip करनी चाहिए. न हीं उनके सामने Gossip करनी चाहिए.
जो सच में आपसे प्यार करता है, वह आपके वर्तमान की भी चिंता करेगा और आपके भविष्य की भी.
जिन लोगों का आत्मसम्मान मर जाता है, वे लोग मरने से पहले हीं मर जाते हैं.
प्यार जिस व्यक्ति की बुद्धि का नाश कर देता है, उस व्यक्ति का भी जल्दी हीं नाश हो जाता है.
बहुत ज्यादा बोलना अक्सर मुश्किलें पैदा करता है, इसलिए नाप तौल कर बोलना चाहिए.
आत्मविश्वास के बिना व्यक्ति उस चीज को भी नहीं पा सकता है, जो उसके सामने पड़ी हुई हो.
जलील होकर जीने से अच्छा है, आप नये सिरे से संघर्ष करें.
अपने सबसे अच्छे दोस्त को भी अपने राज मत बताइए, क्योंकि न जाने कब वह बदल जाए.
अपनी बुराईयों को निर्ममता से खत्म कर देना चाहिए क्योंकि बुराइयाँ हीं पतन का कारण बनती है.
समय के साथ नहीं बदलने वाले लोग हमेशा दुखी रहते हैं, क्योंकि वे भूल जाते हैं कि परिवर्तन हीं संसार का नियम है.
जहांतक सम्भव हो दूसरों को उपदेश नहीं देना चाहिए, क्योंकि ज्यादातर बार ऐसे उपदेश निरर्थक साबित होते हैं.
कभी भी अपनी क्षमता पर शक मत कीजिए.
21 वीं सदी में वे लोग खूब धन कमा सकते हैं, जो हर दिन खुद को Update करते रहेंगे. और 21 वीं सदी उन लोगों की होगी जो लोग नये कार्यों के सूत्रधार होंगे.
lease page like करें ।
पेज को लायक करने के लिए नीचे विधालय के नाम पर किलिक करे जिससे आपके मोबायल पर सुविचार व प्ररेणा दायी कहानियाँ ओर जोब आदि कि पोस्ट सिदे आपके मोबायल पर आ जायेगी धन्यवाद ।please page like & shareकरें ।
26/04/2016
प्लीज़ पेज को लायक एव शेयर करो
स्वभावो नोपदेशेन शक्यते कर्तुमन्यथा ।
सुतप्तमपि पानीयं पुनर्गच्छति शीतताम् ॥
अर्थ- किसी भी व्यक्ति का मूल स्वभाव कभी नहीं बदलता है. चाहे आप उसे कितनी भी सलाह दे दो. ठीक उसी तरह जैसे पानी तभी गर्म होता है, जब उसे उबाला जाता है. लेकिन कुछ देर के बाद वह फिर ठंडा हो जाता है.
अनाहूतः प्रविशति अपृष्टो बहु भाषते ।
अविश्वस्ते विश्वसिति मूढचेता नराधमः ॥
अर्थ- बिना बुलाए स्थानों पर जाना, बिना पूछे बहुत बोलना, विश्वास नहीं करने लायक व्यक्ति/चीजों पर विश्वास करना…. ये सभी मूर्ख और बुरे लोगों के लक्षण हैं.
यथा चित्तं तथा वाचो यथा वाचस्तथा क्रियाः ।
चित्ते वाचि क्रियायांच साधुनामेक्रूपता ॥
अर्थ- अच्छे लोगों के मन में जो बात होती है, वे वही वो बोलते हैं और ऐसे लोग जो बोलते हैं, वही करते हैं. सज्जन पुरुषों के मन, वचन और कर्म में एकरूपता होती है.
षड् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता ।
निद्रा तद्रा भयं क्रोधः आलस्यं दीर्घसूत्रता ॥
अर्थ- छः अवगुण व्यक्ति के पतन का कारण बनते हैं : नींद, तन्द्रा, डर, गुस्सा, आलस्य और काम को टालने की आदत.
द्वौ अम्भसि निवेष्टव्यौ गले बद्ध्वा दृढां शिलाम् ।
धनवन्तम् अदातारम् दरिद्रं च अतपस्विनम् ॥
अर्थ- दो प्रकार के लोग होते हैं, जिनके गले में पत्थर बांधकर उन्हें समुद्र में फेंक देना चाहिए. पहला, वह व्यक्ति जो अमीर होते हुए दान न करता हो. दूसरा, वह व्यक्ति जो गरीब होते हुए कठिन परिश्रम नहीं करता हो.
त्यजन्ति मित्राणि धनैर्विहीनं पुत्राश्च दाराश्च सहृज्जनाश्च ।
तमर्थवन्तं पुनराश्रयन्ति अर्थो हि लोके मनुष्यस्य बन्धुः ॥
अर्थ- मित्र, बच्चे, पत्नी और सभी सगे-सम्बन्धी उस व्यक्ति को छोड़ देते हैं जिस व्यक्ति के पास धन नहीं होता है. फिर वही सभी लोग उसी व्यक्ति के पास वापस आ जाते हैं, जब वह व्यक्ति धनवान हो जाता है. धन हीं इस संसार में व्यक्ति का मित्र होता है.
यस्तु सञ्चरते देशान् सेवते यस्तु पण्डितान् ।
तस्य विस्तारिता बुद्धिस्तैलबिन्दुरिवाम्भसि ॥
अर्थ- वह व्यक्ति जो विभिन्न देशों में घूमता है और विद्वानों की सेवा करता है. उस व्यक्ति की बुद्धि का विस्तार उसी तरह होता है, जैसे तेल का बून्द पानी में गिरने के बाद फैल जाता है.
परो अपि हितवान् बन्धुः बन्धुः अपि अहितः परः ।
अहितः देहजः व्याधिः हितम् आरण्यं औषधम् ॥
अर्थ- कोई अपरिचित व्यक्ति भी अगर आपकी मदद करे, तो उसे परिवार के सदस्य की तरह महत्व देना चाहिए. और अगर परिवार का कोई अपना सदस्य भी आपको नुकसान पहुंचाए, तो उसे महत्व देना बंद कर देना चाहिए. ठीक उसी तरह जैसे शरीर के किसी अंग में कोई बीमारी हो जाए, तो वह हमें तकलीफ पहुँचाने लगती है. जबकि जंगल में उगी हुई औषधी हमारे लिए लाभकारी होती है.
येषां न विद्या न तपो न दानं ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः ।
ते मर्त्यलोके भुविभारभूता मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥
अर्थ- जिन लोगों के पास न तो विद्या है, न तप, न दान, न शील, न गुण और न धर्म. वे लोग इस पृथ्वी पर भार हैं और मनुष्य के रूप में जानवर की तरह से घूमते रहते हैं.
अधमाः धनमिच्छन्ति धनं मानं च मध्यमाः ।
उत्तमाः मानमिच्छन्ति मानो हि महताम् धनम् ॥
अर्थ- निम्न कोटि के लोग केवल धन की इच्छा रखते हैं, उन्हें सम्मान से कोई मतलब नहीं होता है. जबकि एक मध्यम कोटि का व्यक्ति धन और मान दोनों की इच्छा रखता है. और उत्तम कोटि के लोगों के लिए सम्मान हीं सर्वोपरी होता है. सम्मान, धन से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है.
कार्यार्थी भजते लोकं यावत्कार्य न सिद्धति ।
उत्तीर्णे च परे पारे नौकायां किं प्रयोजनम् ॥
अर्थ- जबतक काम पूरे नहीं होते हैं, तबतक लोग दूसरों की प्रशंसा करते हैं. काम पूरा होने के बाद लोग दूसरे व्यक्ति को भूल जाते हैं. ठीक उसी तरह जैसे, नदी पार करने के बाद नाव का कोई उपयोग नहीं रह जाता है.
मूर्खा यत्र न पूज्यते धान्यं यत्र सुसंचितम् ।
दंपत्यो कलहं नास्ति तत्र श्रीः स्वयमागतः ॥
अर्थ- जहाँ मूर्ख को सम्मान नहीं मिलता हो, जहाँ अनाज अच्छे तरीके से रखा जाता हो और जहाँ पति-पत्नी के बीच में लड़ाई नहीं होती हो. वहाँ लक्ष्मी खुद आ जाती है.
न चोरहार्य न राजहार्य न भ्रतृभाज्यं न च भारकारि ।
व्यये कृते वर्धति एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम् ॥
अर्थ- न चोर चुरा सकता है, न राजा छीन सकता है, न इसका भाइयों के बीच बंटवारा होता है, और न हीं सम्भालना कोई भार है. इसलिए खर्च करने से बढ़ने वाला विद्या रूपी धन, सभी धनों से श्रेष्ठ है.
शतेषु जायते शूरः सहस्रेषु च पण्डितः ।
वक्ता दशसहस्रेषु दाता भवति वा न वा ॥
अर्थ- सैकड़ों में कोई एक शूर-वीर होता है, हजारों में कोई एक विद्वान होता है, दस हजार में कोई एक वक्ता होता है और दानी लाखों में कोई विरला हीं होता है.
विद्वत्वं च नृपत्वं च नैव तुल्यं कदाचन ।
स्वदेशे पूज्यते राजा वि
Click here to claim your Sponsored Listing.
Location
Category
Telephone
Website
Address
Nihal Ji Ki Dhani, Devipura. TEH. Nawalgarh
Jhunjhunun
333303