13/01/2022
भारतीय संविधान की प्रस्तावना
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Political Science By Govt. College , Jodhpur ) भारतीय संविधान की प्रस्तावना
Political Science Is Master Science
13/01/2022
भारतीय संविधान की प्रस्तावना
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Political Science By Govt. College , Jodhpur ) भारतीय संविधान की प्रस्तावना
समस्त गुरुजनों एवं शिक्षक साथियों को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
!! *शिक्षक दिवस विशेष* !!
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हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को हम शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं। शिक्षा के महत्व को उन्होंने जिस तरह रेखांकित किया, वह अनुकरणीय है।
*एक आदर्श शिक्षक*
श्री राधाकृष्णन ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 40 वर्ष शिक्षक के रूप में व्यतीत किए। उनमें एक आदर्श शिक्षक के सारे गुण मौजूद थे। राधाकृष्णन का मानना था कि ‘एक अच्छे शिक्षक को पता होना चाहिए कि वह अध्ययन के क्षेत्र में छात्रों की रुचि कैसे पैदा कर सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल होते हुए, उसे इस क्षेत्र में आ रहे सारे परिवर्तनों की जानकारी होनी चाहिए।’
डॉ राधाकृष्णन अपनी बुद्धिमतापूर्ण व्याख्याओं, आनंददायी अभिव्यक्ति और हंसाने, गुदगुदाने वाली कहानियों से अपने छात्रों को मंत्रमुग्ध कर दिया करते थे। वे छात्रों को प्रेरित करते थे कि वे उच्च नैतिक मूल्यों को अपने आचरण में उतारें। वे जिस विषय को पढ़ाते थे, पढ़ाने के पहले स्वयं उसका अच्छा अध्ययन करते थे। दर्शन जैसे गंभीर विषय को भी वे अपनी शैली की नवीनता से सरल और रोचक बना देते थे।
1962 में जब वे भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने, तो उनके कुछ शिष्य और प्रशंसक उनके पास गए। उन्होंने उनसे निवेदन किया था वे उनके जन्मदिन को एक समारोह के रूप में मनाना चाहते हैं। यह सुनकर उन्होंने कहा, ‘सिर्फ मेरा जन्मदिन मनाने से अच्छा अगर तुम इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाओगे, तो मुझे ज्यादा खुशी होगी।’ तब से 5 सितम्बर सारे देश में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उनकी यह इच्छा अध्यापन के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती है। वे जीवनभर अपने आप को शिक्षक मानते रहे।
*मात्र ढाई हज़ार वेतन!!*
1952 से 1962 तक देश के उप-राष्ट्रपति रहने के बाद सन् 1962 में वे भारत के राष्ट्रपति चुने गए। उन दिनों राष्ट्रपति का वेतन 10 हजार रुपए मासिक था लेकिन डॉ राधाकृष्णन मात्र ढाई हजार रुपए ही लेते थे और शेष राशि प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष में जमा करा देते थे। देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचकर भी वे सादगी भरा जीवन बिताते रहे।
साक्षर हमें बनाते हैं,
जीवन क्या है समझाते हैं।
जब गिरते हैं हम हार कर तो साहस वही बढाते हैं,
ऐसे महान व्यक्ति ही तो शिक्षक व गुरु कहलाते हैं।।
*सभी शिक्षक साथियों को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं💐💐*
06/08/2020
राष्ट्रीय आंदोलन एवं असहयोग आंदोलन http://youtu.be/gxys8UwlZno
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30/07/2020
राष्ट्रवाद की उदारवादी विचारधारा
उदारवादी राष्ट्रवाद राजनीति विज्ञान विनोद कुमार सहायक आचार्य राजनीति विज्ञान
25/07/2020
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना By विनोद कुमार सहायक आचार्य राजनीति विज्ञान
सुप्रभात!
महत्वपूर्ण प्रश्नों की श्रंखला में आज हम मौलिक अधिकारों में संशोधन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा विभिन्न मामलों में दिए गए निर्णय के संबंध में चर्चा करेंगे |
1. मूल अधिकारों में संशोधन करने की शक्ति किसे प्राप्त
है - संसद
2. शंकरी प्रसाद बनाम भारत सरकार वाद- 1951
#इस वाद के द्वारा सर्वप्रथम सर्वोच्च न्यायालय के
समक्ष मौलिक अधिकारों में संशोधन करने का प्रश्न
उठाया गया |
#इस वाद द्वारा प्रथम संविधान संशोधन को चुनौती
दी गई कि संसद मौलिक अधिकारों में कोई
संशोधन नहीं कर सकती क्योंकि यह अनुच्छेद
13(2) का उल्लंघन होगा |
#किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका अस्वीकार
करते हुए कहा कि अनुच्छेद 13(2) में परिभाषित
विधि के दायरे में संविधान संशोधन नहीं आता है |
#सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि संसद को
संविधान के भाग 3 में भी संशोधन करने का
अधिकार है |
3. सज्जन सिंह तथा अन्य बनाम राजस्थान राज्य,1964
#इस वाद के द्वारा मौलिक अधिकारों में संशोधन का
प्रश्न सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दूसरी बार आया |
#इस वाद में 17 वें संविधान संशोधन अधिनियम को
चुनौती देते हुए तर्क दिया कि संसद को मूल
अधिकारों में संशोधन का अधिकार प्राप्त नहीं है,
अतः यह संशोधन असंवैधानिक है|
#किंतु सर्वोच्च न्यायालय ने पुन: यह निर्णय दिया
कि मौलिक अधिकारों में संशोधन का अधिकार
संसद को प्राप्त है|
4. सर्वप्रथम किस वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व
में दिए गए निर्णय को बदलते हुए कहा कि संसद
मौलिक अधिकारों में संशोधन नहीं कर सकती है
गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य 1967
5. गोलकनाथ बनाम पंजाब राज्य 1967
#इस वाद में प्रथम चतुर्थ और सत्तरहवा संविधान
संशोधन को चुनौती दी गई
#इस वाद में निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के 11
न्यायाधीशों की न्याय पीठ द्वारा दिया गया
#इस वाद के निर्णय के समय सर्वोच्च न्यायालय का
मुख्य न्यायाधीश डी सुब्बाराव थे
#इस वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दीया की
संविधान का प्रथम , चतुर्थ और 70 वा संविधान
संशोधन मौलिक अधिकारों के क्षेत्र का अतिक्रमण
करते हैं किंतु शंकरी प्रसाद तथा सज्जन सिंह मामले
में दिए गए निर्णय के अनुसार वैध है
#संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति
अनुच्छेद 245, 246 तथा 248 से प्राप्त होती है
#अनुच्छेद 368 केवल संविधान में संशोधन की
प्रक्रिया का वर्णन करता है
#अनुच्छेद 368 के तहत किया गया संवैधानिक
संशोधन भी अनुच्छेद 13(2) के तहत परिभाषित
विधि के अंतर्गत आता है
#संविधान स्वयं मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध
लगाता है तथा मौलिक अधिकारों के स्थगन की
परिस्थितियों का उल्लेख करता है
#मूल अधिकारों में संशोधन की आवश्यकता होने
पर संविधान निर्मात्री सभा बुलाना या जनमत
संग्रह करवाना आवश्यक है |
6. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गोलकनाथ मामले में अपनाएं
के दृष्टिकोण का खंडन करने के लिए संसद ने कौन
सा संविधान संशोधन किया - 24 वां संशोधन
7. सर्वोच्च न्यायालय ने गोलकनाथ वाद में दिए अपने
निर्णय को किस मामले के निर्णय में बदल दिया-
केसवानंद भारती वाद1973
8. केशवानंद भारती वाद 1973
#इस वाद में संविधान के 24वे 25वें और 29 वे
संशोधनों की संवैधानिकता को चुनौती दी गई
क्योंकि यह संशोधन मौलिक अधिकारों का
अतिक्रमण करते हैं
#इस वाद में सर्वोच्च न्यायालय के 13 न्यायाधीशों
की खंडपीठ ने सुनवाई की
#इस वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने गोलकनाथ वाद के
निर्णय के विरुद्ध फैसला दिया कि संसद मूल
अधिकारों में संशोधन का अधिकार रखती है किंतु
वह संविधान के मूलभूत ढांचे में संशोधन नहीं कर
सकती
#इस वाद के समय भारत का मुख्य न्यायाधीश
न्यायमूर्ति सीकरी था
#इस वाद के निर्णय में संसद की संशोधन शक्ति पर
अंतर्निहित सीमा की अवधारणा का प्रतिपादन किया
गया|
मौलिक अधिकारों से संबंधित अन्य वादों में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के बारे में चर्चा आगामी पोस्ट में की जाएगी |
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सभी को मेरा नमस्कार!
आज हम महत्वपूर्ण प्रश्नों की श्रृंखला में मौलिक अधिकारों के तहत संवैधानिक उपचारों के अधिकार पर चर्चा करेंगे |
*********संवैधानिक उपचारों का अधिकार*********
1. संवैधानिक उपचारों के अधिकार से संबंधित प्रावधान
संविधान के किस अनुच्छेद में है - अनुच्छेद 32
2. किसने "संवैधानिक उपचारों के अधिकार" को
संविधान की आत्मा कहा है-
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर
3. भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद सर्वोच्च
न्यायालय को मौलिक अधिकारों का संरक्षक घोषित
करता करता है - अनुच्छेद 32
4. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय कितने प्रकार
की रिट जारी कर सकता है - पांच प्रकार
(1) बंदी प्रत्यक्षीकरण
(2) परमादेश
(3) प्रतिषेध
(4) उत्प्रेषण
(5) अधिकार पृच्छा
5. न्यायालय द्वारा रिट जारी करने का प्रावधान कहां से
ग्रहण किया गया - ब्रिटेन
6.बंदी प्रत्यक्षीकरण का लैटिन नाम क्या है-
हैबीयस कार्पस
7. हैबीयस कार्पस का शाब्दिक अर्थ क्या है
सशरीर प्रस्तुत करना
8. बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट कब जारी की जाती है -
गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की गिरफ्तारी के कारणों की
जांच करने के लिए
9. परमादेश का लैटिन नाम क्या है- मेंडमस
10. मेंडमस का शाब्दिक अर्थ क्या है-
हम आदेश देते हैं
11. परमादेश रिट कब जारी की जाती है-
जब किसी सार्वजनिक पदाधिकारी द्वारा अपने
कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया जाता है
12. परमादेश किसके विरुद्ध जारी की जा सकती है-
अधीनस्थ न्यायालय एवं सार्वजनिक प्राधिकारयों के
विरुद्ध
13. प्रतिषेध रिट का लैटिन नाम क्या है - प्रोहिबिशन
14. प्रोहिबिशन का शाब्दिक अर्थ क्या है - मना करना 15. प्रतिषेध रिट किस क्षेत्र में जारी की जाती है -
केवल न्यायिक क्षेत्र में
16. प्रतिषेध रिट कब जारी की जाती है -
जब कोई अधीनस्थ न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र
से बाहर जाकर कार्य कर रहा हो |
17. उत्प्रेषण रिट का लैटिन नाम क्या है - सरटीयोरेरी
18. सरटीयोरेरी का शाब्दिक अर्थ क्या है -
ऊपर मंगवा लेना या सूचित करना
19. उत्प्रेषण रिट कब जारी की जाती है-
जब किसी अधीनस्थ अदालत में विचाराधीन मामले
को ऊपरी अदालत द्वारा अपने पास मंगवाना हो 20. अधिकार पृच्छा का लैटिन नाम क्या है - को वारंटो 21. को वारंटो का शाब्दिक अर्थ क्या है-
किस अधिकार से अधिकार
22. अधिकार पृच्छा रिट किस क्षेत्र में जारी की जाती है
लोक सेवकों के विरुद्ध
23. अधिकार पृच्छा रिट कब जारी की जाती है-
जब कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक पद पर अवैध
रूप से काबीज हो
24. मौलिक अधिकारों के लिए रिट जारी करने का
अधिकार किसे प्राप्त है -
सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों दोनों को
25. उच्च न्यायालय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत
रिट जारी कर सकते हैं - अनुच्छेद 226
26. रिट जारी करने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय एवं
उच्च न्यायालय में से किसकी अधिकारिता का
विस्तार अधिक है - उच्च न्यायालय
महत्वपूर्ण प्रश्नों की श्रंखला में अगली पोस्ट में मौलिक अधिकारों से जुड़े सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के संबंध में चर्चा होगी |
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धन्यवाद!
नमस्कार साथियों !
मुझे आशा है कि आप स्वस्थ होंगे,
तैयारी को अनवरत जारी रखे हुए हैं |
महत्वपूर्ण प्रश्नों की श्रृंखला में हम आज 'शोषण के विरुद्ध अधिकार', 'धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार एवं' अल्पसंख्यकों के शिक्षा एवं संस्कृति संबंधी अधिकार'के संबंध में चर्चा करेंगे:-
1. शोषण के विरुद्ध अधिकार का विस्तार किन किन
अनुच्छेदों में है- अनुच्छेद 23 व 24
2. मानव दुर्व्यापार एवं बलात श्रम का निषेध का
प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है
अनुच्छेद 23
3. सार्वजनिक हित में 'अनिवार्यसेवा' का प्रावधान
संविधान के किस अनुच्छेद में किया गया है -
अनुच्छेद 23(2)
4.14 वर्ष से कम आयु के बालकों को जोखिम भरे कार्यों
में नियोजित नहीं किया जा सकता यह प्रावधान
संविधान के किस अनुच्छेद में है - अनुच्छेद 24
5. अंतःकरण की स्वतंत्रता का प्रावधान संविधान के
किस अनुच्छेद में है - अनुच्छेद - 25
6. स्वतंत्रता का अधिकार किन प्रतिबंधों के अधीन है-
1.लोक व्यवस्था 2. सदाचार और स्वास्थ्य
7. धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता का अधिकार
संविधान के किस अनुच्छेद में है - अनुच्छेद 26
8. धार्मिक कर का निषेध संविधान के किस अनुच्छेद में
है- अनुच्छेद 27
9. राज्य निधि से पोषित संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा प्रदान
नहीं की जा सकेगी, यह प्रावधान संविधान के किस
अनुच्छेद में है - अनुच्छेद 28
10.भारत के प्रत्येक नागरिक को अपने विशिष्ट भाषा,
लिपि और संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार है,
यह प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में है-
अनुच्छेद 29
11. धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का विस्तार संविधान
के किन किन अनुच्छेदों में है - अनुच्छेद 25 से 28 12. भारत में अल्पसंख्यक का निर्धारण किन आधारों पर
किया जाता है - धर्म एवं भाषा के आधार पर 13.अल्पसंख्यक वर्ग अपनी रुचि के अनुसार शिक्षण
संस्थाओं की स्थापना का प्रावधान कर सकता है यह
किस अनुच्छेद में वर्णित है - अनुच्छेद 30
महत्वपूर्ण प्रश्नों की श्रृंखला में अगला भाग #संवैधानिक उपचारों का अधिकार होगा|
>>>>>>>>>महत्वपूर्ण प्रश्नों की यह श्रृंखला
नमस्कार साथियों!
कल हमने समानता के अधिकार की बात की थी | आज हम महत्वपूर्ण प्रश्नों की श्रंखला में स्वतंत्रता के अधिकार पर बात करते है |
÷÷÷÷÷÷÷÷÷{ स्वतंत्रता का अधिकार} ÷÷÷÷÷÷÷÷÷
1. स्वतंत्रता के अधिकार का विस्तार किन अनुच्छेदों में है
अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22 तक
2. अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को कौन-कौन सी
स्वतंत्रता प्रदान की गई है -
1.विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
2.शांतिपूर्ण और निरायुद्ध सम्मेलन की स्वतंत्रता
3. संघ और सहकारी समिति समिति के गठन की
स्वतंत्रता
4.निर्बाध रूप से संचरण की स्वतंत्रता
5. निवास की स्वतंत्रता जीविका की स्वतंत्रता
6. आजीविका की स्वतंत्रता
3. सर्वोच्च न्यायालय ने किस वाद में प्रेस की स्वतंत्रता
मौलिक अधिकार का अंग माना -
सकल पेपर्स लिमिटेड भारत संघ, 1962
4. "प्रेस की स्वतंत्रता" को किस स्वतंत्रता के अधीन
माना गया है- विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 5. सर्वोच्च न्यायालय ने किस वाद में राष्ट्रीय ध्वज
फहराने के अधिकार को मौलिक अधिकार माना
भारत संघ बनाम नवीन जिंदल वाद- 2004
6. सूचना का अधिकार किस मौलिक अधिकार के
अंतर्गत शामिल किया गया-
विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत
7. सर्वोच्च न्यायालय ने किस वाद में विदेश जाने के
अधिकार को मौलिक अधिकार माना-
मेनका गांधी बनाम भारत संघ वाद 1978
8. संविधान के किस अनुच्छेद के तहत मौलिक
अधिकारों पर युक्ति युक्ति प्रतिबंध लगाया जा सकता
है- अनुच्छेद 19 (2)
9. किस संविधान संशोधन द्वारा सहकारी समितियों के
गठन की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार का दर्जा
प्रदान किया गया -
97 संविधान संशोधन
10. संविधान के किस अनुच्छेद के तहत दोष सिद्धि के
विरुद्ध संरक्षण का अधिकार प्रदान किया गया
अनुच्छेद 20
11. भूतलक्षी विधान का निषेध का प्रावधान संविधान के
किस अनुच्छेद में है अनुच्छेद 20 (1)
12. दोहरे दंड का निषेध से क्या आशय है -
किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए दो बार
दंड नहीं दिया जा सकता
13. संविधान के किस अनुच्छेद में प्रावधान है कि किसी
भी व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध गवाही देने के लिए
बाध्य नहीं किया जा सकता - अनुच्छेद 20(3) 14. प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार का प्रावधान
किस अनुच्छेद में- अनुच्छेद 21
15. संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त मौलिक अधिकार
व्यक्ति को सरकार के किस अंग के विरुद्ध प्राप्त है
कार्यपालिका
16. सर्वोच्च न्यायालय ने किस वाद में शिक्षा केअधिकार
को मौलिक अधिकार माना-
मोहिनी जैन बनाम कर्नाटक राज्य वाद 1992
17. किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा शिक्षा के
अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया गया-
86 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002
18. संविधान के किस अनुच्छेद में "निशुल्क एवं
अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा का अधिकार" का प्रावधान
किया गया है - अनुच्छेद 21 क
19. सर्वोच्च न्यायालय ने किस मामले में यह निर्णय दिया
कि अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'जीवन के अधिकार' में
'मरने का अधिकार' शामिल नहीं है-
ज्ञान कौर बनाम पंजाब- 1996
20. निवारक निरोध से क्या आशय है -
अपराध घटित होने की आशंका के आधार पर
अपराध घटित होने से पूर्व है की गई गिरफ्तारी
21. निवारक निरोध से संबंधित प्रावधान संविधान के
किस अनुच्छेद में है- अनुच्छेद 22
22. संविधान के किस अनुच्छेद को "संविधान के
मस्तिष्क पर लगा कलंक"कहा जाता है -
अनुच्छेद 22
23. निवारक नजरबंदी के तहत किसी व्यक्ति को
अधिकतम कितने माह तक विरुद्ध रखा जा सकता है
3 माह तक
24. किस संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा निवारक
निरोध के तहत गिरफ्तार व्यक्ति की अवधी को 3
माह से घटाकर 2 माह कर दिया -
44 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978
25. राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम कब लागू हुआ - 1980 26. आतंकवाद एवं विध्वंसक गतिविधि निरोध
अधिनियम कब बनाया गया- 1985
26. आतंकवाद विरोधी अधिनियम कानून कब लागू
हुआ - 2002
---------------------प्रश्नों की यह श्रंखला------------------
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अगर पसंद ना आए तो मुझे जरूर बताएं"