Educational Articles / News Analysis

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Hot topics , relevant and useful for youngsters facing interview. Unbiased analysis based on facts.

27/09/2025

मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री के नाम एक पत्र

सेवा में,
मुख्यमंत्री जी,
हरियाणा सरकार।

एवं

शिक्षा मंत्री जी,
हरियाणा सरकार।

विषय - हरियाणा की टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (DIET) में जेबीटी कोर्स बंद होने के कारण सरप्लस हुए पीजीटी एवं टीजीटी अध्यापकों को विद्यालयों में एडजस्ट करने बारे।

श्रीमान् जी,
नमस्ते!
सर्वप्रथम मैं आपको बधाई देना चाहूंगा कि आप हरियाणा की प्रगति के लिए दिन रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं तथा हर वर्ग और तबके के विकास के लिए #प्रगतिशील योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में अग्रसर हैं। आप भेदभाव एवं जाति पाती से ऊपर उठकर सर्ववर्ग सम्भाव , सबका साथ और विकास की भावना से कार्य कर रहे हैं। आपका व्यक्तित्व एवं वाणी बेजोड़ है। आप एक युवा की तरह #ऊर्जावान एवं गतिशील हैं। आपने एवं आपसे पूर्ववर्ती मनोहरलाल खट्टर ने हरियाणा की शिक्षा के स्तर को उच्चतर बनाने में निरंतर प्रयास किया है। आपने प्रधानमंत्री की PM श्री विद्यालयों की अवधारणा को मजबूती दी है। आज हरियाणा के सरकारी विद्यालयों में डिजिटल बोर्ड्स, डिजिटल लैब्स, लाइब्रेरी, TABS आदि इन्फ्रास्ट्रक्चर विश्व स्तर की हैं । आपने हर ब्लॉक में मॉडल संस्कृत विद्यालयों को स्थापित किया है । कहने का अभिप्राय ये है कि आपने शिक्षा के स्तर को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आपने अध्यापकों की नियुक्ति करके खाली पोस्ट को भरने का सराहनीय कार्य किया है। टेंपरेरी VACANCY को HKRNL से रिक्रूट करके काफी हद तक वैकेंसी को नियंत्रित किया है लेकिन फिर भी अनेक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी रह जाती है क्योंकि समय समय पर सेवानिवृति और पदोन्नति होती रहती है।
आपने बहुत प्रयास किए फिर भी कुछ ऐसा रह जाता है जिसकी तरफ ध्यान नहीं जाता। मैं उसी तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं और आशा करता हूं कि आप शीघ्रातिशीघ्र इस समस्या का समाधान करेंगे। जैसा कि आपको पता है कि वर्ष 2021/22 में हरियाणा से जेबीटी कोर्स को बंद कर दिया गया था । हरियाणा की जेबीटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में पीजीटी और टीजीटी अध्यापक ट्रेनिंग देने का काम करते थे। अब चूंकि लगभग तीन चार साल से ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग का कार्य बंद है तो वहां जो अध्यापक कार्य कर रहे थे वे सरप्लस हो गए हैं। ऐसी स्थिति में वे या तो इंस्टीट्यूट में जाते ही नहीं और जाते हैं तो खाली बैठकर आ जाते हैं। दूसरी तरफ ऐसे बहुत से स्कूल हैं जहां सेवानिवृति होने या पदोन्नति होने के कारण पद खाली हो गए हैं। अतः आप से अनुरोध है कि जेबीटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट अर्थात् डाइट में निठल्ले बैठे इन अध्यापकों को जिले के स्कूलों में खाली पड़े पदों पर तुरंत एडजस्ट करें। इसके लिए जिले के जिला शिक्षा अधिकारी या डायरेक्टर सेकेंडरी एजुकेशन को निर्देशित करके तुरंत इसी सत्र में एडजस्ट कराएं ताकि विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जा सके। इसके अतिरिक्त ये अध्यापक अपने विषय में निपुण होने के कारण शिक्षार्थियों के लिए काफी लाभदायक सिद्ध होंगे। जेबीटी कोर्स शुरू हो जाएं तो इन्हें तथा अन्य अध्यापकों को फिर से ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में भेजा जा सकता है।

आपका शुभचिंतक
एक जागरूक नागरिक एवं शिक्षक

#मुख्यमंत्री_हरियाणा
#नायबसैनी
#शिक्षामंत्री

#शिक्षा_ही_जीवन_का_आधार

21/06/2025

इजरायल V / ईरान युद्ध और भारतीय विदेश नीति की दुविधा

भारत ने विश्व मंचों पर अनेक बार जोर देकर कहा है कि भारत हर प्रकार के आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ है। जो देश आतंकवाद का पोषण करते हैं , या निजी हितों के लिए प्रयोग करते हैं भारत कदापि उनके साथ नहीं आ सकता। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अनेक बार कहा है कि यह समय युद्ध का नहीं अपितु बुद्ध का है अर्थात् भारत शांति का पक्षधर रहा है और रहेगा। भारत की संस्कृति ही विश्व बंधुत्व और वसुधैव कुटुम्बकम् का समर्थन करती है। भारत एक ऐसा देश है जहां हर धर्म संप्रदाय और जाति के लोग सहअस्तित्व के सिद्धांत और परस्पर सहयोग की भावना से रहते हैं। भारत हिन्दू बहुल होते हुए भी सभी धर्मों का सम्मान करते हुए उन्हें हिंदुओं से भी अधिक अधिकार देता है। संविधान में अन्य धर्मों को अल्पसंख्यक का दर्जा देकर अतिरिक्त अधिकार देता है।
अब बात करते हैं इजरायल की। इजरायल भी भारत की तरह ही आतंकवाद के खिलाफ है और पीड़ित भी। जिस प्रकार भारत अलकायदा, जैस ए मोहम्मद, हक्कानी, और पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित और पोषित अनेक आतंकवादी संगठनों से पीड़ित है, उसी प्रकार #इजरायल भी हमास, हिजबुल्ला, हुईती आदि अनेक आतंकवादी संगठनों से पीड़ित है जिनका पोषक प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से लेबनान, यमन और ईरान हैं। जिस प्रकार 7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकवादियों ने इजरायल के नागरिकों को बंधक बनाया और महिलाओं और बच्चों यौन शोषण किया और बलात्कार किया, उसी प्रकार से 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान पोषक आतंकवादियों ने #पहलगाम में सैलानियों का नरसंहार किया और धर्म पूछ पूछ कर केवल #हिन्दू सैलानियों को मारा। पूरे विश्व ने इन आतंकवादी घटनाओं की निंदा की। लेकिन क्या ईरान ने निंदा की? नहीं। क्या ईरान ने आतंकवादियों को नष्ट करने के भारत के संकल्प का साथ दिया? नहीं। क्या ईरान ने #ऑपरेशन_सिंदूर का समर्थन किया? नहीं।
क्या 1999 में #कारगिल युद्ध में भारत का समर्थन किया?
फिर उत्तर है नहीं।
क्या पाकिस्तान के साथ हुए 1971 के युद्ध में भारत का साथ दिया? नहीं।
क्या ईरान ने किसी भी मंच पर चीन या पाकिस्तान के विरुद्ध भारत का समर्थन किया? उत्तर वही है _ नहीं नहीं नहीं।
उपरोक्त सभी घटनाओं में इजरायल का भारत के प्रति दृष्टिकोण क्या रहा?
इजरायल ने सबसे पहले ऑपरेशन सिंदूर में भारत के साथ होने का बयान दिया और आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करने में अपने विशेषज्ञ भी भेजे। इजरायल ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत का साथ निभाया। इजरायल ने एक सच्चे दोस्त की तरह भारत का साथ निभाया है।
अतः हम स्पष्ट रूप से कह सकते है कि भारत के हित इजरायल के साथ हैं ईरान के साथ नहीं। अब चूंकि ईरान और इजरायल के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया है तो ऐसे अवसर पर भारत को अपने मित्र के समर्थन में खुलकर आना चाहिए।
ईरान इजरायल के बेकसूर नागरिकों और आबादी वाले शहरों जैसे तेलअवीव, हाइफा आदि पर सुपरसोनिक मिसाइल से हमला करके युद्ध अपराध कर रहा है। जहां इजरायल सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहा है वहीं ईरान कायराना हरकत करके बेकसूर नागरिकों और अस्पतालों को निशाना बना रहा है। ईरान कट्टरपंथ का पोषण करता है। वहां 1979 से लगातार एक ही व्यक्ति अयातुल्ला अल खुमैनी ने सत्ता पर कब्जा किया हुआ है। इतिहास जानने वालों को पता होगा कि किस प्रकार #1979 में ईरान के शासक #रजा_पहलवी का तख्ता पलटकर खुमैनी ने सत्ता को कब्जाया था और ईरान के शाह को विदेश में शरण लेनी पड़ी थी। 1979 से पहले ईरान एक खूबसूरत देश था जहां सब नागरिकों विशेषकर महिलाओं को समान अधिकार थे। लेकिन खुमैनी के कट्टर शासन में महिलाओं का शोषण होता है उन पर अत्याचार होता है और कोई सुनने वाला नहीं है। ईरानी महिला राबिया की कहानी तो अपने सुनी होगी कि किस प्रकार एक धनी पचास वर्षीय बूढ़े ने उसका शोषण किया और फिर जब उसने कोर्ट में केस किया तो कट्टरपंथी जज ने जिसे काजी कहते हैं, राबिया को ही फांसी की सजा सुना दी क्योंकि शरिया कानून में यदि महिला के साथ यौन शोषण होता है तो महिला को सिद्ध करना पड़ता है वरना उसी महिला को फांसी दे दी जाती है।
आज राजा पहलवी का परिवार विदेश में शरण लिए हुए है और अत्याचारी शासक के अंत का इंतजार कर रहा है।
जब भारत के दो दुश्मन ईरान के समर्थन आ गए है तो भारत को भी खुलकर अपने मित्र इजरायल के पक्ष में आ जाना चाहिए। यहां दुविधा है तो केवल यह कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के परिप्रेक्ष्य में भारत का चिरपरिचित और भरोसेमंद मित्र रूस ईरान के पक्ष में है।
Disclaimer _
(उपरोक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं, इनसे सहमत या असहमत होना व्यक्तिगत विवेक पर निर्भर करता है।)

14/02/2025

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस और अमेरिका की यात्रा और विश्व राजनीति पर इसका प्रभाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस और अमेरिका की यात्रा को विश्व राजनीति के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। फ्रांस और अमेरिका के राष्ट्रपतियों द्वारा नरेंद्र मोदी का भव्य स्वागत इस बात का प्रतीक है कि भारत एक आर्थिक और राजनीतिक ताकत के रूप में उभर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करते हुए मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत विश्व की राजनीति में न्यूट्रल नहीं है बल्कि शांति का पक्षधर है। नरेंद्र मोदी जी ने रसियन प्रधानमंत्री पुतिन के साथ हुई वार्ता को पुनः दोहराते हुए कहा कि यह समय युद्व का नहीं है। युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है। समस्या का समाधान आमने सामने बैठकर, आंखों में आंखे डालकर और एक दूसरे की भावनाओं की कद्र करते हुए निकaला जा सकता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि विश्व नेताओं को अहंकार त्यागकर विश्व कल्याण के लिए कदम उठाने चाहिएं। उन्हें गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और आतंकवाद के उन्मूलन के लिए कार्य करना चाहिए।

मोदी ने कहा कि विश्व नेताओं को किसी भी प्रकार के आतंकवाद को खत्म करने के लिए कदम उठाने चाहिएं। एक सभ्य समाज में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है।
इसके अतिरिक्त भारत में पूंजी निवेश, विज्ञान और तकनीकि, सामरिक साझेदारी आदि अनेक विषयों पर चर्चा हुई।

Farmers Protest: मोदी से आया आदेश! आंदोलनकारियों की उड़ गई नींद? Kisan Andolan | Shambhu Border 25/02/2024

किसान आंदोलन और उसकी प्रासंगिकता

नंबर 2021 में तीन कृषि कानूनों को वापिस लेते समय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कृषि कानून किसानों के हित में लाए गए थे और देश हित में वापिस लिए जा रहे हैं। यह घोषणा तब की गई थी जब एक साल से अधिक दिन तक किसान आंदोलन चला था और लगभग समाप्त हो गया था। उस समय भी किसानों से अनेक वार्ताएं हुई लेकिन सरकार और किसानों की हठधर्मिता के कारण कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका। किसान तीन कृषि कानूनों को काले कानून बताकर विरोध कर रहे थे जबकि सरकार कह रही थी कि ये कृषि कानून किसान की स्थिति को सुधारने का काम करेंगे । किसान स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी पर अड़े हुए थे। खैर, सरकार ने नए कृषि कानून वापिस ले लिए थे और गतिरोध खत्म हो गया था। उस वर्ष आश्चर्यजनक ढंग से सरसों के भाव बाजार में सरकारी भाव से लगभग दोगुना हो गए थे क्योंकि सरकार ने पामोलिव तेल के आयात पर रोक लगा दी थी जिस के कारण सरसों के तेल की मांग बढ़ी तथा खुले बाजार में सरसों के भाव तीव्र गति से बढ़ने लगे और किसानों को बहुत लाभ हुआ। करीब दो वर्ष तक सरसों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से लगभग दोगुना रहे। इसके अतिरिक्त सरकार ने किसानों को छः हजार रूपए की डीबीटी के द्वारा मदद करने का काम भी किया।
अब वर्तमान में किसान फिर से msp की गारंटी तथा स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने पर अड़े हुए हैं। स्वामीनाथन रिपोर्ट 2006 में आई तब से ही किसान इसे लागू करने के लिए प्रयासरत तथा आंदोलनरत हैं लेकिन कोई भी सरकार इस स्थिति में नहीं कि वह एमएसपी की गारंटी दे दे क्योंकि सरकारों को WTO (विश्व व्यापार संगठन) की शर्तों को मानना पड़ता है। विश्व व्यापार संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में अब भी धान, गेहूं ,दलहन और तिलहन के भाव विश्व के सब देशों से ज्यादा हैं जिस पर विश्व व्यापार संगठन कई बार आपत्ति दर्ज करा चुका है। फिर भी मान लें कि सरकार एमएसपी के लिए तैयार हो भी जाए तो छोटे किसान को इसका अधिक लाभ नहीं मिलेगा, उल्टे इससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होगा जिसका प्रतिकूल असर किसान और मजदूर पर ही होगा। एमएसपी का लाभ बड़े बड़े जमीदारों या व्यापारियों को ही मिलेगा। छोटा किसान तो केवल इतना ही उगा पाता है कि साल भर उसके परिवार और पशुओं को भरपेट भोजन मिल सके और थोड़ा बहुत अनाज व्यापारी को बेचकर घर के अन्य खर्च निकाल सके।
भारत में लगभग 15 करोड़ किसान हैं जिनमे से अधिकतर दो तीन एकड़ की कृषि करने वाले हैं। केवल दो या तीन प्रतिशत किसान ही बड़े जमींदार हैं जो सैंकड़ों या हजारों एकड़ जमीन पर कृषि करते हैं। एमएसपी लागू होने का मतलब है केवल दो या तीन प्रतिशत किसानों को लाभ पहुंचाना। इसके अतिरिक्त एमएसपी तो केवल चोबीस फसलों पर ही लागू है। तो फिर बाकी की फसल करने वाले अधिकतर किसान तो एमएसपी की बात ही नहीं करते क्योंकि वे अपनी उपज पर एमएसपी से अधिक कीमत लेते हैं।
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फिर एक और बात संदेह पैदा करती है कि किसान आंदोलन हर बार पंजाब से ही क्यों जन्म लेता है? क्या इसके पीछे राजनीतिक दलों या विदेशी संगठनों का हाथ है? क्या देश को अस्थिर करने का षड्यंत्र है? या कनाडा ब्रिटेन और अमेरिका में बैठे भारत विरोधी संगठनों के कुकृत्य? प्रश्न बहुत हैं, पर उत्तर कहीं नहीं।
पंजाब के इन आंदोलन कारी किसानों को देखकर नहीं लगता कि ये वास्तव में किसान हैं। इनका पहनावा, महंगी गाडियां, पोकलेन मशीन, जेसीबी मशीनें, ड्रोन को गिराने के तरीके, आंसू गैस से निपटने की तैयारी और ट्रैक्टर ट्रॉली में एसी कमरे की तरह आधुनिक फिटिंग आदि से लगता है कि इनका आंदोलन प्रायोजित है। एक किसान नेता ने तो यहां तक कह दिया कि ये आंदोलन मोदी के ग्राफ को नीचे गिराने के लिए है।
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अब प्रश्न उठता है कि जब आम चुनाव नजदीक हैं और लोकसभा कार्यवाही भी नहीं चल रही तो इस आंदोलन का क्या औचित्य है। यदि किसान वास्तव में कुछ चाहते थे तो संसद सत्र के समय यह आंदोलन करना चाहिए था, या उससे पहले ।लेकिन मकसद पवित्र नहीं, केवल राजनैतिक है। सरकार के लिए मुसीबतें पैदा करना है, सरकार के ग्राफ को नीचे गिराना है। लेकिन शायद किसान अपने लक्ष्य में कामयाब नही होंगे क्योंकि लोग सब जानते हैं। सरकार भी इस बात को जानती है। हो सकता है कुछ फीसदी वोट कम हो जाएं परंतु सरकार तो बीजेपी की ही बनने की संभावनाएं हैं। प्रधान मंत्री जी भी बहुत अप्रत्यासित फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं। हो सकता है मार्च में आचार संहिता लागू होने से पहले मोदी किसानों के पक्ष में कुछ घोषणाएं कर जाएं।

कोई भी किसानों के विरुद्ध नहीं। किसान अन्नदाता है और दुनिया का पेट भरता है। इसीलिए सभी को किसानों से सहानुभूति है और लोग चाहते हैं कि वह खुशहाल हो, समृद्ध जो। परंतु मात्र एमएसपी की गारंटी किसान के लिए खुशहाली नहीं ला सकती। इसके लिए उसे गैर परंपरागत खेती करनी होगी, उन फसलों को उगाना होगा जो अधिक मूल्य दें। उत्पादन की गुणवत्ता को भी बढ़ाना होगा। रासायनिक उर्वरक के स्थान पर जैविक खाद के प्रयोग को प्रोत्साहित करना होगा।कृषि में आधुनिकीकरण को अपनाना होगा। मात्र सब्सिडी या एमएसपी की रट लगाने से कुछ भला नहीं होने वाला। फूड प्रोसेसिंग कारखानों को बढ़ावा देना होगा। ऐसे स्टोरेज बनाने होंगे जिनमें खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखा जा सके। किसान आज भी इतनी अधिक मात्रा में फल और सब्जियां उगाता है कि उन्हें बेचना मुश्किल हो जाता है। अतः सरकार को स्टोरेज अर्थात् भंडारण के आधुनिक तरीके अपनाकर किसान की फसल को खरीदने का प्रबंध करना होगा। किसान को भी यह मांग सरकार से करनी चाहिए कि उनकी फसल को खरीदने का प्रबंध हो। कुछ हद तक किसान को बाजार की आवश्यकता को खुद समझना होगा। मांग और आपूर्ति के सिद्धांत के अनुसार भाव तभी मिलेगा जब वस्तु की मांग होगी। यदि किसान बाजार की नब्ज पकड़ ले तो वह खुश हाल हो सकता है। उसे सरकार पर परजीवी न होकर आत्म निर्भर बनना होगा, अपने रास्ते खुद तलाशने होंगे। आवश्यकता आविष्कार की जननी है। यदि किसान चाहता है कि वह कुछ भी पैदा करे और सरकार उच्च मूल्य पर उसे खरीद ले तो यह संभव नहीं।

क्या उद्योगपति के सम्पूर्ण उत्पाद को सरकार खरीदती है? यदि कपड़ा मिल का मालिक आवश्यकता से अधिक कपड़ा उत्पादन करे और सरकार द्वारा खरीदने की गारंटी मांगे तो क्या संभव है? शायद नहीं। किसी भी उत्पाद पर सरकार का नियंत्रण होता है, इसी प्रकार अनाज उत्पादन पर भी। जरूरत के हिसाब से किए गए उत्पादन पर ही कीमत मिलती है।
सरकार को चाहिए की किसान आंदोलन को शीघ्र खत्म करे। किसानों को भी हठधर्मिता त्यागकर मध्य मार्ग अपनाना चाहिए। यदि किसान अपने हठ को त्यागकर मध्यमार्ग अपनाने को तैयार हो जाता है तो यह देश और समाज हित में होगा। कोई नही चाहता की हमारे देश के जवानों की ऊर्जा सड़कों पर बर्बाद हो। किसानों को शांति से सरकार के साथ समझोता करके आंदोलन को तुरंत वापस लेना चाहिए। ऐसा न हो कि पिछले आंदोलन की तरह सैंकड़ों किसानों की जान जाए। सरकार को आश्वासन देना चाहिए कि वह उनकी एमएसपी की मांग पर विचार करेगी और किसानों की खुशहाली के लिए नई पारी में काम करेगी। किसान खुशहाल होगा तो देश भी खुशहाल होगा। जयहिंद!

( ये लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं, यदि आप सहमत हैं तो लाइक करें)

Farmers Protest: मोदी से आया आदेश! आंदोलनकारियों की उड़ गई नींद? Kisan Andolan | Shambhu Border Farmers Protest: मोदी से आया आदेश! आंदोलनकारियों की उड़ गई नींद? Kisan Andolan | Shambhu Border ...

Photos from Ministry of Information & Broadcasting, Government of India's post 14/02/2024
14/02/2024

आबू धाबी में सनातन का सूर्योदय

Photos from Educational Articles / News Analysis's post 22/01/2024

राम के आदर्श " विश्व शांति और सौहार्द के लिए आवश्यक" विवेचना

आज पूरा विश्व युद्ध की ज्वाला में जल रहा है। कहीं भी शांति नहीं है। और न ही विश्वास है। रूस यूक्रेन युद्ध, चीन ताइवान युद्ध, पाकिस्तान ईरान संघर्ष, इजराइल हमास युद्ध, उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया युद्ध, जापान और चीन. यमन लेबनान और अमेरिका के बीच लाल सागर में युद्ध, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध , अन्य देश भी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से युद्धरत हैं। ऐसे अवसर पर किसी ऐसी विचारधारा की आवश्यकता जो विश्व को सहनशीलता, शांति और संतोष का पाठ पढ़ा सके। ऐसी परमार्थी, विकास वादी और सहस्तित्व का संदेश देने वाली एक ही विचारधारा है, केवल एक ही, और वह है चिर पुरातन सनातन संस्कृति जो विश्वबंधुत्व की भावना से ओतप्रोत है "वसुधैव कुटुम्बकम्" के विचार को बढ़ावा देती है। सनातन संस्कृति इतनी संयमी और सहनशील है कि असंवैधानिक ढंग से या यूं कहें कि बलपूर्वक ढंग से राम मंदिर को एक आक्रमणकारी द्वारा ढहाये जाने के पश्चात पांच सौ साल का इंतजार करती है और संवैधानिक तरीके से कोर्ट से आदेश मिलने के उपरांत उसका पुन निर्माण करती है।

रामलला की प्राणप्रतिष्ठा उपरांत आज सभी भारतवासी एक दूसरे को विश्व की प्रथम महादीपालवी की शुभकामनाएं दे रहे हैं। 1528 से 2024 तक की यात्रा में जिन रामभक्तो ने संघर्ष किया, बलिदान दिया या योगदान किया , राष्ट्र उन सबका कृतज्ञ है और उनको नमन करता है। हर साल 22 जनवरी को एक महान उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

राम एक युगपुरुष हैं।वह एक आदर्श पुत्र, आदर्श भाई, एक आदर्श पति, एक आदर्श नागरिक ,एक आदर्श मित्र और आदर्श राजा हैं। वह अपनी हर भूमिका को आदर्श रूप में निभाते हैं। उनके आदर्श मार्ग पर चलकर विश्व में शांति, सौहार्द और सहनशीलता का रामराज्य स्थापित किया जा सकता है जो विश्व को युद्ध और संघर्षों से बचाकर प्रगति के मार्ग पर अग्रसर करेगा और एक ऐसे विश्व का निर्माण करेगा जहां प्रेम हो, भाईचारा हो, एक दूसरे के लिए सम्मान हो और शांति हो। एक ऐसा विश्व जहां कोई भूखा न हो, किसी के साथ अन्याय न हो, सबके साथ समानता का व्यवहार हो, सब सुखी हों। राम का मार्ग ही दुनिया को विश्व युद्ध से बचा सकता है।

04/01/2024

What is POCSO ACT?

POCSO means (prevention of children from sexual offences )
This act came into existence in 2012 on 14 November (32 of 2012) with an objective to protecting children (boys or girls) from sexual offences against them.

This act has 46 sections and is implemented in all over India including J&K

It is a well known fact that children are easy targets of pedophiles. The children are tempted and then terrified by the wrong doer and even threatened to harm or kill the child or his or her parents or sister or brother if he or she reveals the secret .or the act committed to them.

Where to report of the crime?
The crime is reported to CWC.
CWC (child welfare committee) has a
Welfare office and two members of police. (one lady) CWC ensure to take action within 24 hours ,
Special courts are also to speed up the process of investigation and within one year case is decided. Identity of the child is not disclosed.
Five kinds of assaults are considered in pocso act.
Section 7 sexual assault ( to touch sensitive parts of the child , three years punishment and fine)
1 Penetrative assault -seven years punishment
2. Sexual Assault

Duties of a teacher regarding posco crime.

1. If he doesn't report of the crime despite he knows. (six months punishment).
2. Display complaint box
3. Display 1098 helpline no
4. Don't disclose child identity.
5. If any child is found guilty of the offence, his name should not be struck off. He may be allowed non attending student.

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