B.D. Singh Cancer Advice Center

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Our Awareness group of trained volunteers deliver cancer awareness talks at a wide variety of locations, ranging from schools and colleges, offices and fac

Photos 08/08/2015
21/11/2014

अब कैंसर से डरें नहीं, जानें और बचाव करें
अब कैंसर से डरें नहीं, जानें और बचाव करें कैंसर – एक ऐसी बीमारी, जिसका नाम सुनते ही आम आदमी के होश उड़ जाते हैं, रोगी को मौत सामने दिखाई देती है और वो ज़िंदा रहने की उम्मीद ही छोड़ देता है. इस बीमारी में रोगी के साथ उसका परिवार भी तकलीफ से गुजरता है और निराशा के गर्त में डूब जाता है. लेकिन क्या सचमुच कैंसर इतना ख़तरनाक है? क्या इसका इलाज मुमकिन है? क्या समय रहते बीमारी का पता लगने पर रोगी की ज़िंदगी बचाई जा सकती है? कैंसर के लक्षण क्या हैं? और सबसे ज़रूरी बात कि क्या कैंसर से बचा जा सकता है? ऐसे ही तमाम सवालों पर एमपी समाचार डॉट कॉम ने विस्तार से बात की भारत के प्रसिद्ध कैंसर चिकित्सक डॉ. टी.पी. साहू से... तो आप भी जानिये कैंसर के बारे में सब-कुछ.

कैंसर आखिर होता क्या है?

सामान्य भाषा में कैंसर दरअसल शरीर की कोशिकाओं की अचानक वृद्धि होना है... जब शरीर के किसी अंग की कोशिकाओं में आसामान्य रूप से बढ़त होने लगती है और इसके प्रभाव से अंग ख़राब होने लगते हैं, तो इसे कैंसर कहा जाता है. कैंसर शरीर में किसी भी स्थान पर हो सकता है. लेकिन कुछ प्रकार के कैंसर ज्यादा दर्ज किये जाते हैं, जैसे दुनिया भर में महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे ज्यादा आम है.

कैंसर का पता कैसे लगाया जा सकता है? क्या इसके लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं?

कैंसर के सही लक्षणों की पहचान तो किसी अच्छे डॉक्टर की मदद से ही की जा सकती है, लेकिन लगातार वजन घटना, बुखार का बना रहना, भूख में लगातार कमी, गले में खराश, थूक में खून आना, किसी घाव का लगातार बना रहना या सामान्य संक्रमण से बार-बार पीड़ित होना कुछ ऐसे लक्षण हैं, जिन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए. स्तन कैंसर की जाँच के लिए महिलाओं को घर पर ही अपने स्तन की बारीकी से जाँच करनी चाहिए और देखना चाहिए कि स्तन में कोई गाँठ तो नहीं है या किसी स्थान पर लगातार कड़ापन तो नहीं है. यदि ऐसे लक्षण लगातार बने रहते हैं तो डॉक्टर की सलाह लेने में देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कैंसर को जितनी जल्दी पहचाना जाता है, बेहतर इलाज की उतनी ही ज्यादा संभावना रहती है.

कैंसर कितने प्रकार का होता है और ये किन लोगों को हो सकता है?

सबसे पहले तो ये बात ध्यान रखनी चाहिए कि कैंसर किसी को भी हो सकता है. हालाँकि कुछ प्रकार के कैंसर विशेष आयुवर्ग में पाये जाते हैं. बच्चों में पाया जाने वाला ल्यूकेमिया इसका उदाहरण है. इसके अलावा महिलाओं में स्तन या ब्रेस्ट कैंसर, पुरुषों में मुख कैंसर ज्यादा देखने को मिलता है. साथ ही अनियमित खानपान, तनाव भरी दिनचर्या भी ऐसे कारक हैं, जो कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं.

कहते हैं कि ये बीमारी एक बार होने के बाद मरीज़ की ज़िंदगी के साथ ही खत्म होती है, यानि क्या इसका कोई इलाज नहीं है?

कैंसर को लेकर भारतीय समाज में काफी पुरानी धारणाएँ फैली हुई हैं. लेकिन यह भी उतना ही सच है कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कैंसर की सही स्टेज में पहचान हो जाने पर इलाज की पूरी संभावना होती है. इतना ही नहीं सही वक्त पर यदि बीमारी का पता लगाकर नियमित इलाज जारी रखा जाये, तो कैंसर पर पूरी तरह काबू पाया जा सकता है. आज दुनियाभर में हज़ारों की संख्या में ऐसे लोग हैं, जो कैंसर से जंग जीत चुके हैं और सामान्य ज़िंदगी गुजार रहे हैं. इसलिए कैंसर से डरने या बीमारी को छुपाने के बजाय डॉक्टर के पास जाने में देर नहीं की जानी चाहिए. नई तकनीक और बेहतर दवाओं के ज़रिये कैंसर लाइलाज नहीं रहा है.

तो क्या कैंसर का इलाज संभव है?

भारतीय समाज में कैंसर को लाइलाज मानने के पीछे एक बड़ा कारण ये है कि हमारे देश में कैंसर के मरीज लगभग आखिरी स्टेज में कैंसर के डॉक्टर के पास पहुँचते हैं. तब तक संक्रमण पूरे शरीर में फैल चुका होता है और मरीज की प्रतिरोधक शक्ति भी कमज़ोर पड़ जाती है. दूसरे शब्दों में कहें तो मरीज इलाज की अवस्था पार करने के बाद ही अस्पताल पहुँचता है. यही कारण है कि कैंसर से होने वाली मौतों की दर बहुत अधिक होती है और लोग इसे लाइलाज मानने लगते हैं. यदि सही वक्त पर डॉक्टर के पास पहुँचकर बीमारी की पहचान और इलाज शुरु कर दिया जाये, तो कैंसर न सिर्फ काबू में आ सकता है, बल्कि कई मामलों में ये पूरी तरह ठीक भी हो सकता है.

कैंसर का इलाज किस तरह किया जाता है?

आधुनिक चिकित्सा पद्धति में कैंसर का इलाज मुख्य रूप से तीन तरीके से किया जाता है. इन्हें कीमोथैरेपी, रेडियोथैरेपी और सर्जरी कहा जाता है. इलाज का तरीका कैंसर के प्रकार पर निर्भर करता है. इनके साथ ही रोगी की प्रतिरोधक शक्ति को बनाये रखने के लिए दवाइयाँ भी दी जाती हैं.

यदि कोई कैंसर पीड़ित है तो क्या सिर्फ बड़े शहरों में ही इसका इलाज हो सकता है?

भारत में कुछ वर्ष पहले तक कैंसर की जाँच और इलाज की सुविधा कुछ बड़े शहरों में ही उपलब्ध थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. छोटे शहरों में भी कैंसर अस्पताल खुले हैं और वहाँ भी बड़े शहरों जैसा ही इलाज उपलब्ध है. इसलिये अब कैंसर के इलाज के लिए न बड़े शहरों तक भागने की ज़रुरत है और न ही इलाज के लिए लंबी प्रतीक्षा सूची ही बची है. लगभग हर शहर में कैंसर के बारे में सलाह उपलब्ध है और कई जगह तो इसके इलाज की सारी सुविधाएँ मौजूद हैं.

कैंसर का इलाज काफी मँहगा माना जाता है, तो क्या इलाज के लिए कोई सरकारी मदद मिल सकती है?

ये बात सही है कि दूसरी कई बीमारियों की तुलना में कैंसर का इलाज कुछ खर्चीला है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इस बीमारी का इलाज करने की तकनीक काफी मँहगी पड़ती है, लेकिन कैंसर के मरीजों को सरकारी अनुदान उपलब्ध है, जिससे मान्यता प्राप्त अस्पतालों में इलाज कराया जा सकता है. इसके अलावा गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को शासन के नियमों के मुताबिक मुफ्त इलाज की भी पात्रता है.

मध्यप्रदेश में किस तरह का कैंसर ज्यादा पाया जाता है?

मध्यप्रदेश के पुरुषों में मुख का कैंसर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि यहाँ पुरुषों में तंबाकू खाने की आदत काफी ज्यादा है. इसके अलावा महिलाओं में जहाँ स्तन कैंसर के मामले देखने को मिलते हैं, वहीं बच्चों में कुछ विशेष प्रकार के ब्लड कैंसर भी देखे जाते हैं.

किस तरह के लोगों में कैंसर होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है?

तंबाकू खाने वाले, धूम्रपान करने वाले, जंक फूड का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले और शारीरिक व्यायाम से दूर रहने वाले लोगों में कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा होता है. इसके अलावा अनियमित दिनचर्या, असंतुलित खानपान और लगातार तनाव भी कैंसर का कारण बन सकते हैं. साथ ही जिनके परिवार में किसी को कैंसर हुआ हो, उन्हें खासतौर पर सावधान रहना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण के नज़र आने पर फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ताकि यदि बीमारी हो जाये, तो वक्त रहते उसका पता लगाकर उचित इलाज किया जा सके.

कैंसर से बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए? क्या सावधानी रखने से इस बीमारी बचा जा सकता है?

सबसे पहले तो एक हैल्दी लाइफस्टाइल की तरफ ध्यान देना चाहिए. तीस मिनट का लगातार व्यायाम चाहे टहलना हो, या साइकिलिंग या स्विमिंग जैसी गतिविधियाँ, ये सभी कैंसर को दूर रखने में मददगार हैं. इसके अलावा हरी सब्जियाँ, फल भी शरीर को स्वस्थ रखकर कैंसर का खतरा घटा सकते हैं. धूम्रपान और तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि कैंसर के सबसे बड़े कारणों में तंबाकू प्रमुख है. साथ ही डिब्बाबंद और जंक फूड से बचाव करना चाहिए, क्योंकि इनमें पाये जाने वाले कई रसायन शरीर में कैंसर उत्पन्न कर सकते हैं. एक एक्टिव और हैल्दी लाइफस्टाइल इस बीमारी को दूर रखने में काफी हद तक कारगर साबित हो सकती है.

21/11/2014

कैंसर क्या है, कारण, लक्षण व प्रकार
कैंसर क्या है?:-
कैंसर मानवीय सेलों की असामान्य बढ़त का परिणाम है। कैंसर के सेल सतत प्रक्रिया के अनुसार बढ़त करते रहते है। इन सेलों का आकार सामान्य सेलों से भिन्न होता है। ये ठीक से कार्य भी नहीं करते है। ये शरीर के विभिन्न अंगों में फैलने की प्रवृत रखते है। आन्कोलाॅजी में कैंसर व ट्यूमर का ही अध्ययन किया जाता है।

कैंसर सेलों की कार्यप्रणाली:-
हर मानव शरीर में सेलों की बढ़त नियंत्रित रूप से होती है। नवीन सेल शरीर में उतने ही पैदा होते है जितने की शरीर को आवश्यकता होती है या सेल मर जाते है उनके स्थान को भरने के लिये इनकी बढ़त होती है किंतु ट्यूमर सेलों का एक समूह होता है जो कि अनियंत्रित रूप से बढ़ता है और विकसित होता है। उनकी बढ़त नियंत्रित नहीं होती है। ये ट्यूमर दो प्रकार के होते है जिसमें पहला बीनायन (Benign) जिसे कैंसर रहित कहा जाता है और दूसरा मेलिगनेन्ट(Malignant) जिसे कैंसर वाला कहा जाता है। बीनायन ट्यूमर की बढ़त बहुत धीमी होती है ये फैलते नहीं है। जबकि मेलिगनेंट ट्यूमर तेजी के साथ बढ़ते है और अपने पड़ोसी सामान्य टिश्युओं को नष्ट करते है। ये संपूर्ण शरीर में फैल जाते है। कैंसर शब्द का उपयोग उस समय किया जाता है जब मेलिगनेन्ट ट्यूमर होता है जो अपनी असीमित बढ़त से मानवीय शरीर को प्रभावित करने लगता है। यह कैंसर सेलों को मानवीय टिशुओं मंे प्रविष्ट करता है व ट्यूमर अन्य टिशुओं में कैंसर के सेलों को भेजने लगता है।
वास्तविक ट्यूमर को ‘‘प्राथमिक ट्यूमर’’ नाम दिया गया है। सेल्स इस ट्यूमर से संपूर्ण शरीर की यात्रा कर सकते है और शरीर के विभिन्न अंगों में नवीन ट्यूमरों का निर्माण कार्य प्रारंभ कर सकते है। दूसरे सेकेन्डरी ट्यूमर होते है जो कैंसर से युक्त सेल रक्त के माध्यम से या लिम्फेटिक प्रणाली के माध्यम से शरीर की यात्रा कर सकते है। लिम्फेटिक सिस्टम छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं की नालियाँ होती है जो सेलों से उत्सर्जित पदार्थ एकत्रित करती है और इसे बड़ी वेसल में ले जाती है और अंत में उसे लेम्फनोड मंे डाल देती है। यह तरल पदार्थ जो लिम्फ फ्लूड के नाम से जाना जाता है, रक्त वाहिकाओं में डाल दिया जाता है।

कैंसर का नाम कैसे?:-
जब कैंसर फैलता है तो उसे शरीर के उस भाग का नाम दिया जाता है जहां से वह प्रारंभ होता है उदाहरणार्थ यदि किडनी का कैंसर लंग्ज से फैलता है तो उसे किडनी कैंसर ही कहा जावेगा लंग्स कैंसर नहीं। सभी प्रकार के कैंसर शरीर में सेलों के द्वारा ही फैलाये जाते है। हर कैंसर में कैंसर सेलों की बढ़त की गति अनियंत्रित व तेज रफ्तार वाली होती है।

कैंसर के कारण:-
वैज्ञानिकों का मानना है कि कैंसर के लिये मात्र कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं होता है। यह कई तत्वों के मिश्रण का परिणाम है जो कैंसर के रूप में उभरकर सामने आता है। इसके लिये जेनेटिक तत्व, वातावरणीय तत्व या संविधानात्मक विशेषताएँ या व्यक्तिगत कारण भी जिम्मेदार हो सकते है। यह रोग कई बीमारियों के समूह के रूप में होता है जिसके कई संभावित कारण हो सकते है जैसे लाईफ स्टाईल फेक्टर जैसे तम्बाकू का उपयोग, डाईट एवं फिजीकल क्रियाएँ कुछ प्रकार के इन्फेक्शन, विभिन्न प्रकार के रसायन और रेडिएशन भी इस रोग के महत्वपूर्ण कारणों में हो सकते है।

1. जेनेटिक्स एवं कैंसर:-
कुछ प्रकार के कैंसर कुछ विशेष परिवारों में ही होते है किंतु कई कैंसर विरासत में माता-पिता या परिवार से नहीं मिलते है।

2. तम्बाकू और कैंसर:-
सिगरेट, सिगार या धुंआ रहित तम्बाकू का उपयोग जो विभिन्न समूहों के लोगों को प्रभावित करता है।

3. डाईट एवं शारीरिक क्रियाएँ:-
ये भी आपके शरीर में कैंसर को प्रश्रय प्रदान करती है।

4. सूर्य की रोशनी:-
अति सूर्य धूप का व उसकी किरणों का प्रभाव भी कैंसर का कारक हो सकता है।

5. रेडिएशन के कारण कैंसर:-
विभिन्न प्रकार के रेडिएशनों के कारण भी कैंसर का प्रार्दुभाव हमारे शरीर में हो सकता है जैसे बार-बार एक्सरे करवाना।

6. पर्यावरणीय कारण:-
जैसे प्रदूषण, मेडिकल टेस्ट व उपचार कई प्रकार के इन्फेक्शन व दुर्घटनाएँ भी कैंसर का कारण हो सकती है।

7. भोजनगत कारण:-
कैंसर के कारणों में हाॅट डाॅग्स, प्रोसेस्ड मीट, डाग हन्ट, फ्रेंच फ्राईज, चिप्स क्रेकर व कुकीज का अति सेवन भी कैंसर का कारण हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि 70ः कैंसर से बचाव का तरीका है अपने खानपान में परिवर्तन और जीवन शैली में परिवर्तन।

8. रसायन, कास्मेटिक, दवाईयाँ आदि:-
समय तो अच्छे लगते है किंतु दीर्घावधि तक उपयोग किये जाने के पश्चात ये कैंसर के रूप में अपना प्रभाव हम पर छोड़ जाते है। ये भी कैंसर के कारण हो सकते है।

कैंसर के लक्षण एवं चिन्ह:-
आवश्यक है कि हम अपने आप में आने वाले अवांछित बदलावों के प्रति जागरूक रहे। जैसे शरीर पर एकाएक किसी गठान का या फोड़े का होना, आपकी पेशाब में रक्त आना या आपकी आंतों की आदतों में परिवर्तन आदि। ये लक्षण बगैर कैंसर वाली बीमारियों के भी हो सकते है किंतु आवश्यक है कि आप अपने पारिवारिक डाॅक्टर को इन परिवर्तनों के बारे में बतलाएँ वे आपको सही जाँच के पश्चात सही राय व अपने विचार प्रदान कर सकेंगे।
कैंसर के अन्य लक्षण व चिन्ह नीचे दिये गये अनुसार हो सकते है:-

1. आपकी छाती या स्तन भाग में आकृतिहीन पिण्ड का होना:-
यदि आपने अपने वक्षस्थल पर ऐसी कोई आकृति देखी है या महसूस की है तो त्वरित रूप से बगैर शर्माये अपने पारिवारिक डाॅक्टर को दिखाएँ या आप अपने शरीर के किसी भाग में इस प्रकार की आकृति को शीघ्रता के साथ बढ़ते हुए महसूस कर रहे है तो अपने पारिवारिक डाॅक्टर को दिखाकर आवश्यक जाँचें करायें। यदि आवश्यक होगा या वे आप में कैंसर की संभावनाएँ देखते है तो विशेषज्ञों को दिखाने की राय देंगे।

2. कफ होना, सीने में दर्द होना और सांस लेने में कठिनाई होना:-
यदि आप कफ जैसा लगभग तीन सप्ताह से महसूस कर रहे है या आपको ऐसे लक्षण प्रतीत हो रहे है जिससे आपको सांस लेने में कमी आ रही है या कठिनाई हो रही है या आपको सीने (छाती) में दर्द हो रहा है तो ये आपके लिये गंभीर स्थितियाँ पैदा कर सकती है। ऐसा होने पर सीधे अपने पारिवारिक डाॅक्टर के पास जाएँ, देर न करें।

4. यदि कुछ दिनों या सप्ताहांे से आपकी आंतों की आदतों में परिवर्तन नजर आ रहा है जैसे:-
1. आपके शौच के साथ रक्त का आना।
2. डायरिया या कब्जियत जैसा अनुभव होना जो कि बिना किसी कारण के।
3. या टायलेट जाने के बाद भी ऐसा महसूस होना कि आपको दस्त साफ नहीं हुआ है या पेट भरा-भरा सा है।
4. आपके पेट में दर्द होना। गुदा में दर्द होना।

तो आप तत्काल अपने पारिवारिक डाॅक्टर से संपर्क करें जो जाँच के पश्चात कैंसर होने की संभावना नजर आने पर विशेषज्ञों से जाँच की सलाह दे सकते है।

5. रक्त का स्त्रावित होना:-

यदि आपके शरीर से अचानक रक्त प्रवाह होना प्रारंभ हो जाए जैसे:-

1. आपकी पेशाब में रक्त आने लगे।
2. मासिक धर्म के दो पीरियड्स के मध्य में रक्त स्त्राव होेने लगे।
3. आपके पिछले गुदा द्वार से रक्त स्त्रावित होने लगे।
4. जब आप खांसते है तो कफ के साथ रक्त का आना।
5. यदि आपको उल्टियाँ हो रही है व उसमंे रक्त का आना आदि पर अपने निजी चिकित्सक को दिखाएँ व सलाह लें कि कहीं कैंसर तो नहीं यदि संभावना नजर आए तो विशेषज्ञ से जाँच कराएँ व उपचार लें।

6. मस्से (Moles) :-
1. यदि आपके शरीर पर अनियमित रूप से मस्से हो रहे है।
2. एक ही रंग के मस्सों का होना जैसे भूरे, काले, लाल, गुलाबी या सफेद हो सकते है।
3. जो 7 mmसे बड़े हो (परिधि में)।
4. उनमें खुजली चल रही हो या उनसे रक्त स्त्रावित हो रहा हो।
इनमें से यदि आप कोई भी परिवर्तन महसूस करते है तो निश्चय समझिये कि आपको मेलिगनेंट मेलानोमा या त्वचा कैंसर होने के आसार नजर आ रहे है। ऐसी दशा में तुरंत त्वचा संबंधी चिकित्सक से संपर्क कर मशविरा व उपचार लें।

7. असंभावित रूप से वजन घटना:-
यदि आप सप्ताह भर में अपना वजन कम होना महसूस करे या आपको कमजोरी जैसा अनुभव हो। यह वजन आपकी डाईट से कमी या तनाव के कारण कम नहीं होना चाहिये। ऐसी दशा में अपने चिकित्सक से तत्काल सलाह व उपचार लें। यह भी कैंसर का संकेत हो सकता है।
कैंसर क्युअर फाउन्डेशन के अनुसार यदि आप निम्नलिखित लक्षण महसूस करते है तो आपको विशेष प्रकार का कैंसर हो सकता है जैसे:-

1. ब्लड़ कैंसर –

पेशाब में खून आना, पेशाब के बाद दर्द या जलन होना, बार-बार पेशाब आना या क्लाउज यूरिन होना आदि लक्षण यदि आप में है तो समझिये आपको ब्लड़र कैंसर की संभावना हो सकती है। विशेषज्ञ कुछ विशेष जाँचों के बाद आपको बता सकता है कि आपको उक्त कैंसर है या नहीं।

2. बोन कैंसर:-
हड्डी में दर्द होना या प्रभावित साईड के आसपास सूजन होना, हड्डी में फ्रेक्चर या टूट-फूट, कमजोरी महसूस होना, मोटापा होना, वजन कम होना, बार-बार संक्रमणों का होना, कमजोरी उल्टी, कब्जियत, पेशाब की समस्या होना, कमजोरी या पैरों में दर्द या ऐंठन आदि लक्षण महसूस होने पर व्यक्ति को हड्डियों का (बोन कैंसर) होने की संभावना होती है।

3. ब्रेन कैंसर:-
सुस्ती, आलस्य, असामान्य आँखों की गतिविधियाँ, दिखने में अंतर, कमजोरी महसूस होना, पैरों व हाथों के संचालन में कठिनाई, फिट्स आना, व्यक्तित्व में परिवर्तन, याददाश्त में परिवर्तन, सिरदर्द, नोसिया व उल्टी जैसा महसूस होना आदि लक्षण यदि मरीज महसूस करता है तो ये ब्रेन कैंसर के लक्षण हो सकते है।

4. ब्रेस्ट कैंसर:-
छाती पर एक आकारहीन उभार, निप्पल के आकार में परिवर्तन, निप्पल से द्रव का रिसना, बे्रस्ट या स्तन की त्वचा में परिवर्तन गर्मी महसूस होना, बड़े हुए लिम्पथ नोड, भुजा के नीचे होना आदि लक्षणों के आधार पर कहा जा सकता है कि मरीज को ब्रेस्ट कैंसर की संभावना है।

5. कोलेरेक्टल कैंसर:-
रेक्टल ब्लीडिंग दस्त में लाल खून आना या काले रंग के दस्त होना, पेट में दर्द होना, कब्जियत, अपच, डायरिया की दशाएँ बनना, वजन कम होना, भूख में कमी होना, काम्प्लेक्शन का होना आदि लक्षण आंत के कैंसर के हो सकते है जो विशेषज्ञों की जाँच के बाद स्पष्ट कर देगा कि कैंसर है अथवा नहीं।

6. किडनी कैंसर:-
पेशाब में रक्त आना, साईड या पीछे की ओर दर्द या किडनी के क्षेत्र में गठान या फोड़ा या आकारहीन आकृतिहीन आकृति का बढ़ना, कभी-कभी उच्च रक्तचाप का होना या रेड ब्लड़ कार्पोसिल में असामान्यता आना है। इन लक्षणों के आधार पर जाँच के बाद कहा जा सकता है कि मरीज को किडनी कैंसर की संभावना हो सकती है।

7. ल्यूकेमिया:-
कमजोरी, पीलापन, बुखार व फ्लू के समान लक्षण, रक्तस्त्राव, बड़े हुए लेम्प्थ नोड्स, लीवर व हड्डियों में दर्द, जोड़ों में दर्द, बार-बार संक्रमण का होना वेटलाॅस नाईट स्वेट्स आदि लक्षणों के आधार पर चिकित्सक ल्यूकेमिया होने की संभावना से इंकार नहीं कर सकता है।

8. लंग कैंसर:-
महीनों से कफ रोग से पीडि़त होना, रक्त के रेशे वाला कफ निकलना, छाती या सीने में दर्द, लंग्स में काग्नेशन होना। गले में लिम्प्थ नोड्स का इलाज होना आदि लक्षण लंग कैंसर की संभावनाओं को दर्शाते है।

9. ओरल कैंसर:-
मुँह में आकारहीन मांसल आकृति का उभरना, होंठ, जीभ या मुँह के अंदर के भाग में घाव का होना जो कई दिनों तक भरता नहीं, मुँह में दर्द, रक्तस्त्राव, सांस का गतिरोध, दाँतों का ढ़ीला होना या गिरना और बोलने में अंतर आना आदि लक्षण मुँह के या ओरल कैंसर के है। इनके होने पर ओरल कैंसर की संभावना हो सकती है।

10. आवेरियन कैंसर:-
एव्डोमीनल स्वेलिग अर्थात पेट पर सूजन असामान्य रूप से योनि से स्त्राव, हाजमें में तकलीफ होना आदि लक्षणों से ओवेरियन कैंसर की संभावना हो सकती है।

11. पेनक्रिएटिक कैंसर:-
एव्डोमिनल के ऊपरी भाग में दर्द, बेतहाशा भार में कमी, पीठ के मध्य में दर्द, फेटी फूड्स का मोह न छोड़ना, त्वचा का पीला होना, पेट में दर्द होना, लीवर का बढ़ना और तिल्ली का बढ़ना आदि लक्षण पेनक्रिएटिक कैंसर के है जिनके परिलक्षित होने पर इस कैंसर के होने की संभावना बढ़ जाती है।

12. प्रोस्टेट कैंसर:-
पेशाब में तकलीफ जो कि यूरेथ्रा के छिद्र बन्द होने से होती है। ब्लड़र में पेशाब जमा होना, बार-बार पेशाब आने की अनुभूति होना, विशेषकर रात्रि में, ब्लड़र का पूर्णतः खाली न होना, पेशाब के समय जलन या दर्द। यूरिन के साथ रक्त आना, ब्लड़र पर सूजन होना पोल्वेस व पिछले भाग में धीमा-धीमा दर्द होना आदि लक्षणों के अवगत होने पर प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है।

स्टमक कैंसर या पेट का कैंसर:-
अपच, हृदय में जलन, पेट में दर्द, आरामहीन अवस्था या बैचेनी, घबराहट व उल्टी होना डायरिया या कब्जियत की शिकायत होना भोजन के पश्चात पेट में दर्द होना, भूख में कमी, कमजोरी, मोटापा, उल्टी जो खून के साथ होना, दस्त के साथ खून आना आदि लक्षणों के परिलक्षित होने पर पेट के कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।

यूट्रायीन कैंसर:-
असामान्य रूप से वेजायनल से रक्त स्त्राव होना, पानी मिले रक्त का बहना, यह लक्षण पोस्ट मेनोपाजुअल महिला में देखने को मिलता है, दर्द के साथ पेशाब का होना, संभोग के समय दर्द होना और पोल्वेक क्षेत्र में दर्द होना आदि लक्षण होने पर यूट्रायीन कैंसर की संभावना बढ़ जाती है।
हर प्रकार का कैंसर अपने आप में अलग विशेषता लिये होता है जिसके कारण, लक्षण और उपचार के तरीके भी भिन्न होते है।

कैंसर के प्रकार:-
वैसे तो कैंसर 100 से भी अधिक प्रकार का पाया जाता है किंतु कुछ प्रमुख प्रकार के कैंसर निम्नानुसार है:-
1. 4 काॅमन कैंसर है:-
1. ब्रेस्ट कैंसर
2. कोलोन कैंसर
3. लंग कैंसर
4. प्रोस्टेट कैंसर

2. वे सर्वाइकल कैंसर जो रक्त एवं लिम्फेटिक सिस्टम में होते है:-
*होजकिन्स डिसीज
*ल्यूकेमिया
*लिम्फोमास
*मल्टीपल मायोलोमा
*वाल्डेन्सट्राम्स डिसीज

3. त्वचा के कैंसर:-
*मेलिग मेलानोमा
*त्वचा कैंसर

4.हेड एण्ड नेक कैंसर्स

5. डायजेस्टिव सिस्टम के कैंसर:-

*इसोफेक्युअल कैंसर
*स्टमक कैंसर
*पेनक्रियाज कैंसर
*लीवर कैंसर
*कोलोन एण्ड रेक्टल कैंसर
*एनाल कैंसर

6. यूरेनरी सिस्टम के कैंसर:-
*किडनी कैंसर
*ब्लड़र कैंसर
*टेस्टीज कैंसर
*प्रास्टेट कैंसर

7. महिलाओं में कैंसर:-
*ब्रेस्ट कैंसर
*गायनेकोलाॅजीकल कैंसर
*कोरिओ कार्सीनोमा कैंसर

8. मिसलेनियस (Miscellaneous Cancers)
*ब्रेन ट्यूमर्स
*बोन ट्यूमर्स
*कार्सीनोईड ट्यूमर
*Nasopharynqual Cancer
*रेट्रोप्रिटोनेल सार्कोमास
*साॅफ्ट टिश्यू ट्यूमर्स
*थायराईड कैंसर
*कैंसर आॅॅफ अननोन प्रायमरी साईट

मानव शरीर के अंगों के आधार पर कैंसर को इस प्रकार विभाजित किया जा सकता है:-
ब्लड़ कैंसर, बोन कैंसर, ब्रेन कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, गेस्ट्रोइन स्टेटीनाॅल कैंसर, एण्डोक्राइन कैंसर, किडनी कैंसर, आई कैंसर, जेनिटो यूरेनरी कैंसर, गायनेकोलाॅजिक कैंसर, हेड एण्ड नेक कैंसर, स्किन कैंसर, लीवर कैंसर, कोलोन कैंसर, स्टमक कैंसर, लंग कैंसर, थायराईड कैंसर आदि। इन सभी कैंसरों पर विस्तृत चर्चा अलग से की जा सकेगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कैंसर के बारे में 10 प्रमुख तथ्य:-
कैंसर एक ऐसा रोग है जो जवान बूढ़े व बच्चे सभी को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। वह ना तो अमीरी देखता है न गरीबी, न आदमी देखता है न औरत। यह रोग मरीज पर और उसके परिवार पर मौत का साया लेकर आता है। यह दुनियाभर में मौत का एक प्रमुख कारण है, विशेष रूप से विकासशील देशों में।
30% तक कैंसर की मृत्यु से स्वस्थ जीवनशैली या कैंसर के कारण होने वाले इन्फेक्शनों को कम करके सुरक्षा की जा सकती है। साथ ही शीघ्र रोग को पहचानकर रोग की शैशवावस्था में ही उपचार प्रारंभ करके भी इससे बचा जा सकता है।

आईये देखते है कैंसर से संबंधित 10 तथ्य:-
*100 से भी अधिक प्रकार की कैंसर की प्रजातियाँ है जो हमारे शरीर के किसी भी भाग को प्रभावित कर सकती है।

*सन् 2008 में 7.6 मीलियन लोग कैंसर से मरे। विश्वभर में 13ः मृत्यु कैंसर के कारण हुई।

*70% के लगभग कैंसर से हुई सभी मौतें कम व मध्यम आय वाले देशों में हुई।

*विश्व स्तर पर 5 मुख्य काॅमन प्रकार के कैंसर पाये जाते है जो पुरूष की जान ले सकते है उनमें लंग, स्टमक, लीवर, कोलेरिक्टल और व्मेचींहने कैंसर शामिल है।

*विश्व स्तर पर 5 मुख्य काॅमन प्रकार के कैंसर पाये जाते है जो महिलाओं की जान कभी भी ले सकते है उनमें ब्रेस्ट, लंग, स्टमक, कोरोलेक्टल और सर्वाइकल कैंसर शामिल है कई विकासशील देशों में सर्वाइकल कैंसर एक आम कैंसर का रूप ले चुका है।

*तम्बाकू का उपयोग विश्व स्तर पर कैंसर का एक बहुत बड़ा कारक है जिसके कारण विश्वभर में होने वाली मौतों में से 22% मौतें कैंसर से होती है।

*सभी कैंसरों का 1/5 भाग विश्वस्तर पर एक क्राॅनिक इन्फेक्शन के कारण होता है। उदाहरणार्थ पापीलोमार्वियस (एचपीव्ही) जो कि सर्वाईकल कैंसर का कारण है और हेपेटाईटिस बी का वायरस लीवर कैंसर का कारक है।
*यदि ब्रेस्ट, सर्वीकल और कोलेरेक्टल कैंसरों को शीघ्र पहचान लिया जावे और यथाशीघ्र उनका उपचार प्रारंभ कर दिया जावे तो ये कैंसर ठीक हो सकते है या उपचारित किये जा सकते है।
*सभी कैंसर के मरीज दर्द के समय पेन रिलीफ की आवश्यकता महसूस करते है यदि उन्हें वर्तमान ज्ञान के अनुसार मदद की जावे पेन कंट्रोल करने के लिये और पालिएटिव केअर के लिये यदि उन्होने उसके लिये आवेदन किया है तो।
*30% से अधिक कैंसरों को उपचारित किया जा सकता है। विशेष तौर पर तम्बाकू का सेवन न करके, स्वस्थ भोजन करके, शारीरिक रूप से क्रियाशील रहकर और अल्कोहल के उपयोग को आधुनिक या आवश्यकतानुरूप बनाकर विकासशील देशों में 20% से ऊपर मौतों से टीकाकरण अभियान को अपनाकर HBV इन्फेक्शनों और HPV से निजात प्राप्त की जा सकती है।

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