28/08/2020
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Founded in April, 2011, Shripati International Public School is a Senior Secondary, affiliated to CB
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आज #विश्व_संस्कृत_दिवस है, परंतु शायद बहुतों को इसके बारे में पता भी ना हो, जहां एक ओर सारी दुनिया भारतीय संस्कृति की ओर खींची चली आ रही है वहीं दूसरी ओर हमारी युवा पीढ़ी अपनी बहुमूल्य और अतुलनीय संस्कृति को भुलाती जा रही है, जहां एक और विदेशी विश्वविद्यालयों में संस्कृत का क्रेज बढ़ता जा रहा है वही अपने ही देश में संस्कृत विश्वविद्यालय बनाने का विरोध होता है, खैर आज कुछ संस्कृत के बारे में रोचक तथ्य जान लेते हैं..👇
आज नासा के सुपर कम्प्यूटर में सॉफ्टवेर प्रोग्रामिंग की भाषा अंग्रेजी मे नही देव भाषा (ऋषियों की भाषा) संस्कृत में लिखी जाती है । संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा होने के साथ सबसे ज्यादा शब्दो लगभग 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है उसके मुकाबले में अंग्रेजी में मात्र 13000 शब्द मूल है शेष लेटिन , फ्रेंच व मिश्र के सभ्यता के पुराने शब्द से बने ।
UNO के अनुसार दुनिया की 97% भाषाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में संस्कृत से प्रभावित है । दुनिया की यह एक ऐसी भाषा है जिसको लिखने के लिए कोई भी क्रम में लिखे उसके अर्थ नही बदलते , और इसके वाक्य कम शब्दों में ही पूरे हो जाते अन्य भाषाओ के मुकाबले । फोर्ब्स मैगजीन ने जुलाई 1987 मे संस्कृत को विज्ञान और कम्प्यूटर सॉफ्टवेअर की भाषा कहा है , अमेरिकी एजेंसी नासा ने संस्कृत को दुनिया भर में बोली जाने समस्त भाषाओं में सबसे स्प्ष्ट भाषा कहा है । नासा के पास संस्कृत में लिखी 60000 पांडुलिपियां भी है । नासा के द्वारा बनने वाले 6 व 7 थ जनरेशन के कम्प्यूटर संस्कृत पर ही आधारित है ।
महर्षि पाणिनि के बारे में बताने पूर्व में आज की कंप्यूटर प्रोग्रामिंग किस प्रकार कार्य करती है इसके बारे में कुछ बताना चाहूँगा
आज की कंप्यूटर प्रोग्रामिंग भाषाएँ जैसे C, C++, Java, Ruby आदि में प्रोग्रामिंग हाई लेवल लैंग्वेज (high level language) में लिखे जाते है जो अंग्रेजी के सामान ही होती है | इसे कंप्यूटर की गणना सम्बन्धी व्याख्या (theory of computation) जिसमे प्रोग्रामिंग के syntex आदि का वर्णन होता है, के द्वारा लो लेवल लैंग्वेज (low level language) जो विशेष प्रकार का कोड होता है जिसे mnemonic कहा जाता है जैसे जोड़ के लिए ADD, गुना के लिए MUL आदि में परिवर्तित किये जाते है | तथा इस प्रकार प्राप्त कोड को प्रोसेसर द्वारा द्विआधारी भाषा (binary language: 0101) में परिवर्तित कर क्रियान्वित किया जाता है |
इस प्रकार पूरा कंप्यूटर जगत Theory of Computation पर निर्भर करता है |
इसी Computation पर महर्षि पाणिनि (लगभग 500 ई पू) ने एक पूरा ग्रन्थ लिखा था
महर्षि पाणिनि संस्कृत भाषा के सबसे बड़े व्याकरण विज्ञानी थे | इनका जन्म उत्तर पश्चिम भारत के गांधार में हुआ था। कई इतिहासकार इन्हें महर्षि पिंगल का बड़ा भाई मानते है | इनके व्याकरण का नाम अष्टाध्यायी है जिसमें आठ अध्याय और लगभग चार सहस्र सूत्र हैं। संस्कृत भाषा को व्याकरण सम्मत रूप देने में पाणिनि का योगदान अतुलनीय माना जाता है। अष्टाध्यायी मात्र व्याकरण ग्रंथ नहीं है। इसमें प्रकारांतर से तत्कालीन भारतीय समाज का पूरा चित्र मिलता है।
इनके द्वारा भाषा के सन्दर्भ में किये गये महत्त्व पूर्ण कार्य 19वी सदी में प्रकाश में आने लगे |
19वी सदी में यूरोप के एक भाषा विज्ञानी Franz Bopp (14 सितम्बर 1791 – 23 अक्टूबर 1867) ने श्री पाणिनि के कार्यो पर गौर फ़रमाया । उन्हें पाणिनि के लिखे हुए ग्रंथों में तथा संस्कृत व्याकरण में आधुनिक भाषा प्रणाली को और परिपक्व करने के नए मार्ग मिले |
इसके बाद कई संस्कृत के विदेशी चहेतों ने उनके कार्यो में रूचि दिखाई और गहन अध्ययन किया जैसे: Ferdinand de Saussure (1857-1913), Leonard Bloomfield (1887 – 1949) तथा एक हाल ही के भाषा विज्ञानी Frits Staal (1930 – 2012).
तथा इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए 19वि सदी के एक जर्मन विज्ञानी Friedrich Ludwig Gottlob Frege (8 नवम्बर 1848 – 26 जुलाई 1925 ) ने इस क्षेत्र में कई कार्य किये और इन्हें आधुनिक जगत का प्रथम तर्क विज्ञानी कहा जाने लगा |
जबकि इनके जन्म से लगभग 2400 वर्ष पूर्व ही श्री पाणिनि इन सब पर एक पूरा ग्रन्थ लिख चुके थे
अपनी ग्रामर की रचना के दोरान पाणिनि ने Auxiliary Symbols (सहायक प्रतीक) प्रयोग में लिए जिसकी सहायता से कई प्रत्ययों का निर्माण किया और फलस्वरूप ये ग्रामर को और सुद्रढ़ बनाने में सहायक हुए।
इसी तकनीक का प्रयोग आधुनिक विज्ञानी Emil Post (फरवरी 11, 1897 – अप्रैल 21, 1954) ने किया और आज की समस्त computer programming languages की नीव रखी |
Iowa State University, अमेरिका ने पाणिनि के नाम पर एक प्रोग्रामिंग भाषा का निर्माण भी किया है जिसका नाम ही पाणिनि प्रोग्रामिंग लैंग्वेज रखा है।
एक शताब्दी से भी पहले प्रिसद्ध जर्मन भारतिवद मैक्स मूलर (१८२३-१९००) ने अपने साइंस आफ थाट में कहा –
“मैं निर्भीकतापूर्वक कह सकता हूँ कि अंग्रेज़ी या लैटिन या ग्रीक में ऐसी संकल्पनाएँ नगण्य हैं जिन्हें संस्कृत धातुओं से व्युत्पन्न शब्दों से अभिव्यक्त न किया जा सके । इसके विपरीत मेरा विश्वास है कि 2,50,000 शब्द सम्मिलित माने जाने वाले अंग्रेज़ी शब्दकोश की सम्पूर्ण सम्पदा के स्पष्टीकरण हेतु वांछित धातुओं की संख्या, उचित सीमाओं में न्यूनीकृत पाणिनीय धातुओं से भी कम है ।
अंग्रेज़ी में ऐसा कोई वाक्य नहीं जिसके प्रत्येक शब्द का 800 धातुओं से एवं प्रत्येक विचार का पाणिनि द्वारा प्रदत्त सामग्री के सावधानीपूर्वक वेश्लेषण के बाद अविशष्ट 121 मौलिक संकल्पनाओं से सम्बन्ध निकाला न जा सके ।”
The M L B D News letter ( A monthly of indological bibliography) in April 1993, में महर्षि पाणिनि को first softwear man without hardwear घोषित किया है। जिसका मुख्य शीर्षक था ” Sanskrit software for future hardware “
जिसमे बताया गया ” प्राकृतिक भाषाओं (प्राकृतिक भाषा केवल संस्कृत ही है बाकि सब की सब मानव रचित है ) को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए अनुकूल बनाने के तीन दशक की कोशिश करने के बाद, वैज्ञानिकों को एहसास हुआ कि कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में भी हम 2600 साल पहले ही पराजित हो चुके है। हालाँकि उस समय इस तथ्य किस प्रकार और कहाँ उपयोग करते थे यह तो नहीं कह सकते, पर आज भी दुनिया भर में कंप्यूटर वैज्ञानिक मानते है कि आधुनिक समय में संस्कृत व्याकरण सभी कंप्यूटर की समस्याओं को हल करने में सक्षम है।
व्याकरण के इस महनीय ग्रन्थ मे पाणिनि ने विभक्ति-प्रधान संस्कृत भाषा के 4000 सूत्र बहुत ही वैज्ञानिक और तर्कसिद्ध ढंग से संगृहीत हैं।
NASA के वैज्ञानिक Mr.Rick Briggs.ने अमेरिका में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (artificial intelligence) और पाणिनी व्याकरण के बीच की शृंखला खोज की। प्राकृतिक भाषाओं को कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए अनुकूल बनाना बहुत मुस्किल कार्य था जब तक कि Mr.Rick Briggs. द्वारा संस्कृत के उपयोग की खोज न गयी।
उसके बाद एक प्रोजेक्ट पर कई देशों के साथ करोड़ों डॉलर खर्च किये गए ।
पाणिनीय व्याकरण की महत्ता पर विद्वानों के विचार:
“पाणिनीय व्याकरण मानवीय मष्तिष्क की सबसे बड़ी रचनाओं में से एक है” (लेनिन ग्राड के प्रोफेसर टी. शेरवात्सकी)।
“पाणिनीय व्याकरण की शैली अतिशय-प्रतिभापूर्ण है और इसके नियम अत्यन्त सतर्कता से बनाये गये हैं” (कोल ब्रुक)।
“संसार के व्याकरणों में पाणिनीय व्याकरण सर्वशिरोमणि है… यह मानवीय मष्तिष्क का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण अविष्कार है” (सर डब्ल्यू. डब्ल्यू. हण्डर)।
“पाणिनीय व्याकरण उस मानव-मष्तिष्क की प्रतिभा का आश्चर्यतम नमूना है जिसे किसी दूसरे देश ने आज तक सामने नहीं रखा”। (प्रो. मोनियर विलियम्स)
ये है भारतीय सनातन संस्कृति की महानता एवं वैज्ञानिक...
. SHRIPATI INTERNATIONAL PUBLIC SCHOOL.
सतर्क ही रहिए कोरोना से, 4 लाख से अधिक केस और 13000 से अधिक मारे गए हैं।
आपके भीतर अब गिनती समाप्त हो चुकी है। आख़िर कोई कब तक गिनेगा। संख्या के प्रति संवेदनशीलता अब वैसी नहीं है जैसी शुरू के दिनों में थी। 100 केस आने पर रग़ों में सिहरन दौड़ जाती थी। अब सिहरन नहीं दौड़ती है लेकिन 100 क्या, 1000 से अभी अधिक एक दिन में 15000 से अधिक केस आने लगे हैं। भारत में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या 13, 425 हो गई है। दिल्ली में ही दो हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महामारी विशेषज्ञ रेयान का कहना है कि टेस्टिंग की क्षमता बेहतर हो गई है, इसलिए हालात की बेहतर समझ अस्पतालों में भीड़ और मरने वालों की संख्या से बन पाएगी। ब्राज़ील में मरने वालों की संख्या 50,000 हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह भी कहा है कि कोविड-19 का दौर पहले से ख़तरनाक हो चुका है। दुनिया में 4 लाख 65 हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। 88 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। भारत में 4 लाख 10 हज़ार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं।
इस महामारी को देखना घड़ी को देखने जैसा है। हम देखे या न देखें, वक्त गुज़रता ही है। ठहरता नहीं है। । संख्या हमारे लिए शून्य में बदल चुकी है। जिनके यहां यह महामारी दस्तक देती है और जिनके यहां मौत होती है वहां इस शून्य का अलग मतलब होता है। इस महामारी ने मरने वालों की त्रासदी को गुप्त रखा है। सामने नहीं आने दिया। वे गिनती से बाहर कर दिए गए हैं। यह इसका भयावह पक्ष है।
किसी के पास कोई मुकम्मल दवा नहीं है। मगर ऐसी ख़बरें आग की तरह फैलती हैं। उम्मीद वहीं पर है। सबको पता है कि ट्रायल वगैरह की प्रक्रिया पूरी होते होते कम से कम 12-18 महीने लग जाएंगे लेकिन सबको लगता है कि वेक्सिन कल की बात है। आ जाएगी।
बेहतर है आप सतर्क रहिए। मास्क लगाते रहिए। उसके ऊपर फेस शील्ड लगा लें बेहतर है। किसी के करीब ज़्यादा देर तक रूक कर बात न करें। कमरे को हवादार रखें। अधिक क्षमता वाला एग्ज़ोस्ट फैन लगा कर रखें ताकि हवा का आवागमन जारी रहे। हाथ को साफ रखें। समय के साथ शिथिलता आ जाती है। कोई कब तक यह सब कर सकता है। लेकिन तभी याद दिलाइये कि कुछ दिन कुछ महीने और करना है। करेंगे।.
Precaution is
BETTER
Than CURE
In ; safe
During this Covid 19
SIPS request you to
STAY SAFE ;STAY HEALTHY
27/03/2020
Admission open
Dear students, As you know that the school is completely locked down due to Govmnt order. But I am sure that you shall be studying at your home. Today our country are facing a big challenge of COVID-19which has no remedies . But don't worry about such kinds of calamities keep social distance yourself aswell as inform your beloved to do so to fight against such a endemic viruses. I would like to recall you that such kind of calamities we have had recent past years and have to face in future also. In Bengal famines there are 3 millions of people had been died. In Gujrat.,maharastra,M.P plague, approximately 800 people had been died. Now I am point out that why I recalled above problems? Let me explain from Bengal famines to COVID-19, we are at same position. Bcoz we couldn't introduce ourselves to face the problem that emerged timely, why? Who is responsible? Either teachers are not being able to produce genius products or students are not able to adopt innovative techniques to resolution of future challenges or Government are failed to create such a platform whereby intelligent fruits can be bears. Therefore Dear, come with me take pledge from today we people will try our best to innovate such a techniques which will help to resolve coming problems of India and will contribute to make India as a 'Vishva Guru.'JAI HIND.
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23/02/2020
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Is ready to Welcome the new students who have just planned to take admission in this beautiful temple of learning