18/03/2022
Try...Try...and Try....to get Success 👍💪🏃♂️🥇🏆🤝
Welcome to "Health & PhyEdu Page" by i Azaad Life Fondation
स्वास्थ्य संब? Welcome to "Health & PhyEdu Page" by i Azaad Fondation by Er.
ImRan Ansari IkkA2.0 !
स्वास्थ्य संबंधित जानकारियाँ / Health, Phy Edu, योगा, पर्यावरण, Awareness - updates & post....
...
ई. इमरान इक्का
18/03/2022
Try...Try...and Try....to get Success 👍💪🏃♂️🥇🏆🤝
10/02/2022
08/02/2022
SPL'22 Cup🏆उद्धाटन समारोह D1 #SaraiDurgaDas #आज़ाद Sports Championship SPL'22 Cup 🏆👏 by आज़ाद HSE Foundation उद्घाटन समारोह, सराय दुर्गा दास, बदलापुर
31/01/2022
अच्छी नींद लें 🏆👍👏😊
19/01/2022
👏👏👍👍
12/01/2022
🤲👍🤝🏆🏃🏻♂️🌳🎯🎉🏏🏇🧘🏻♂️🌳
*"मेरे साहसी युवाओं, यह विश्वास रखो कि तुम ही सब कुछ हो – महान कार्य करने के लिए इस धरती पर आए हो। चाहे वज्र भी गिरे, तो भी निडर हो खड़े हो जाना और कार्य में लग जाना। साहसी बनो*।"
– *स्वामी विवेकानन्द*👏👏👏🏃🏻♂️🏃🏻♂️🥳🥳💐💐👍👍😊😊
💐💐💐🌅🌄🌅
*Good Morning Chaps* 🌻😊🤲🤝👏👍🏆
😊🏃🏻♂️🏇🏼🎯🚲🏆
Be Healthy, स्वास्थ रहें🤝💪😊
Eat Healthy, अच्छा खाएं🍎🍓🥦🥝🥗🧈🧄🥕🥥
Do Some Excercise 🏇🏼🏆⛹🏻♂️🎯🏃🏻♂️
Be Happly खुश रहें और दूसरों को भी ख़ुश रखें 😊😉♣️
Thanks for Reading 👍😊
जय हिन्द🏇🏼👍🤝💪🏆
*Er. Ïm₹an Å इमरान♣️इक्का™🦁*
Please Join Facebook and Wahatsaap group / page for Health and Fitness/ योगा updates daily।
🎉🎊🎉🎉🤝🤝👏
Regards 🤲🏼🎁😷😘
*इंजिनियर इमरान इक्का♣️*
*Senior Engineer & Project Director*
😊💪🏃🏻♂️🎯📚🏆🍎
*i आज़ाद Life Foundation*
*Director / Educator*
*Health & iPhy Education Coach Sir & Social Activitist*
11/01/2022
Healthy खाए एवं
Stay Healthy
08/01/2022
व्यायाम करें एवं स्वास्थ रहें
08/01/2022
जो राष्ट्र अपने पुरोधाओं का सम्मान नहीं कर सकता अंततः वो तबाह हो जाता है ••••
जनवरी का महीना चल रहा है एक दिन धूप नही निकलती तो हम रजाई मे दुबकते है या आग जला कर तापते है शरीर स्वेटर जैकेट जैसे गर्म कपड़ो से लैस होता है
और जरा इस तस्वीर को देखें लंदन की कड़कड़ाती ठंड मे भारत मे ब्रिटिश सरकार द्धारा संविधानात्मक सुधारो पर आहूत द्धितीय गोलमेज सम्मेलन मे भारत के हितात्मक उद्देश्य से अपनी बात को रखने के लिए अपने ही बनाए नियमो और सिद्धांतों से बंधा अपने ही चरखे के सूत से बने खादी के कपड़ो से लिपटा यह महात्मा लंम्बे कदमो से चला जा रहा है आखिर किसके लिए ...?
हमे गर्व है कि हम इस महात्मा जिसे दुनिया मोहनदास करमचंद गांधी के नाम से जानती है के देश मे पैदा हुए
महात्मा गांधी अमर रहे 🇮🇳
03/01/2022
शिक्षा की देवी प्रथम महिला शिक्षिका शिक्षा का हक अधिकार के लिए अपने जीवन की आहूति देने वालीं परम पूज्य सावित्री बाई फुले जी की जयंती की सभी देशवासियों को बहुत-बहुत बधाई हार्दिक शुभकामनाएं मंगलकामनाएं।
*राष्ट्रमाता सावित्री बाई फुले*
-03 जनवरी, 1831 (जयंती विशेष)
महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में माली जाति में 3 जनवरी 1831 को जन्मी सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थी। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले शिक्षक होने के साथ भारत के नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता, समाज सुधारक और मराठी कवयित्री भी थी। इन्हें बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए समाज का कड़ा विरोध झेलना पड़ा था। कई बार तो ऐसा भी हुआ जब इन्हें समाज के ठेकेदारों से पत्थर भी खाने पड़े।
आजादी के पहले तक भारत में शूद्र और स्त्री की गिनती दोयम दर्जे में होती थी। आज की तरह उन्हें शिक्षा का अधिकार नहीं था। वहीं अगर बात 18वीं सदी की करें तो उस समय शूद्र और स्त्री का स्कूल जाना भी पाप समझा जाता था। ऐसे समय में सावित्रीबाई फुले ने जो कर दिखाया वह कोई साधारण उपलब्धि नहीं है। वह जब स्कूल पढ़ने जाती थीं तो लोग उन पर पत्थर फेंकते थे। इस सब के बावजूद वह अपने लक्ष्य से कभी नहीं भटकीं और लड़कियों व महिलाओं को शिक्षा का हक दिलाया। उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत माना जाता है। भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई ने अपने पति समाजसेवी महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर 1848 में उन्होंने बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की थी।
*नौ साल की उम्र में हो गया था विवाह-*
सावित्रीबाई का विवाह बहुत ही छोटी उम्र में हो गया था। उनका विवाह महज नौ साल की उम्र में वर्ष 1940 में ज्योतिराव फुले से हो गया। शादी के बाद वह जल्द ही अपने पति के साथ पुणे आ गईं। विवाह के समय वह पढ़ी-लिखी नहीं थीं। लेकिन पढ़ाई में उनका मन बहुत लगता था। उनके पढ़ने और सीखने की लगन से प्रभावित होकर उनके पति ने उन्हें आगे पढ़ना और लिखना सिखाया। सावित्रीबाई ने अहमदनगर और पुणे में शिक्षक बनने का प्रशिक्षण लिया और एक योग्य शिक्षिका बनीं।
*9 छात्राओं के लिए पहले स्कूल की स्थापना की-*
सावित्रीबाई ने 3 जनवरी 1848 में पुणे में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों की नौ छात्राओं के साथ महिलाओं के लिए पहले स्कूल की स्थापना की। एक वर्ष में सावित्रीबाई और महात्मा फुले पांच नये विद्यालय खोलने में सफल हुए। तत्कालीन सरकार ने इन्हे सम्मानित भी किया। एक महिला प्रिंसिपल के लिये सन् 1848 में बालिका विद्यालय चलाना कितना मुश्किल रहा होगा, इसकी कल्पना शायद आज भी नहीं की जा सकती। लड़कियों की शिक्षा पर उस समय सामाजिक पाबंदी थी। सावित्रीबाई फुले उस दौर में न सिर्फ खुद पढ़ीं, बल्कि दूसरी लड़कियों के पढ़ने का भी बंदोबस्त किया।
*लोग पत्थर मारते, गंदगी फेंकते-*
भारत में आजादी से पहले समाज के अंदर छुआ-छूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह और विधवा-विवाह जैसी कुरीतियां व्याप्त थी। सावित्रीबाई फुले का जीवन बेहद ही मुश्किलों भरा रहा। महिलाओं के उत्थान के लिए काम करने, छुआछूत के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें एक बड़े वर्ग द्वारा विरोध भी झेलना पड़ा। वह स्कूल जाती थीं, तो उनके विरोधी उन्हें पत्थर मारते और उनपर गंदगी फेंकते थे। सावित्रीबाई एक साड़ी अपने थैले में लेकर चलती थीं और स्कूल पहुंच कर गंदी हुई साड़ी बदल लेती थीं। आज से एक सदी पहले जब शूद्र और स्त्री का शिक्षा ग्रहण करना महापाप माना जाता था उस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे में पहला बालिका विद्यालय खोल पूरे देश में एक नई पहल की शुरुआत की।
*समाज में महिलाओं को हक दिलाना था उनका लक्ष्य-*
देश में विधवाओं की दुर्दशा भी सावित्रीबाई फुले को बहुत दुख पहुंचाती थी। इसलिए 1854 में उन्होंने विधवाओं के लिए एक आश्रय खोला। वर्षों के निरंतर सुधार के बाद 1864 में इसे एक बड़े आश्रय में बदलने में सफल रहीं। उनके इस आश्रय गृह में निराश्रित महिलाओं, विधवाओं और उन बाल बहुओं को जगह मिलने लगी जिनको उनके परिवार वालों ने छोड़ दिया था। सावित्रीबाई उन सभी को पढ़ाती लिखाती थीं। उन्होंने इस संस्था में आश्रित एक विधवा के बेटे यशवंतराव को भी गोद लिया था। उस समय आम गांवों में कुंए पर पानी लेने के लिए अतिशूद्र या नीच जाति के लोगों का जाना वर्जित था। यह बात उन्हें और उनके पति को बहुत परेशान करती थी। इसलिए उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर एक कुआं खोदा ताकि वह लोग भी आसानी से पानी ले सकें। उनके इस कदम का उस समय खूब विरोध भी हुआ।
*अपने पति का किया अंतिम संस्कार, खुद का प्लेग से निधन-*
सावित्रीबाई के पति ज्योतिराव का निधन 1890 में हो गया। उस समय उन्होंने सभी सामाजिक मानदंडों को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने अपने पति का अंतिम संस्कार किया और उनकी चिता को अग्नि दी। इसके करीब सात साल बाद जब 1897 में पूरे महाराष्ट्र में प्लेग की बीमारी फैला तो वे प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मदद करने निकल पड़ी, इस दौरान प्लेग की बीमारी से पीड़ित एक अछूत जाति के बच्चे को पीठ पर लादकर लाने की वजह से वे खुद भी प्लेग की शिकार हो गई, इस तरह शिक्षा ममता समता की देवी जैसे विशेषणों को चरितार्थ करते हुए उन्होंने 10 मार्च 1897 को अंतिम सांस ली।
---------------
17/12/2021
11/11/2021
ज्ञान 📖 वो सबसे शक्तिशाली हथियार है जिससे आप पूरी दुनिया बदल सकते है।
तो इस राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 📖 पर आइए ज्ञान के महत्त्व के प्रति जागरूक बने और लोगो 👨👩👧👦 में जागरूकता फैलाए..
i AzaadLife Foundation की ओर से आप सभी को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस और मोलाना अबुल कलाम आजाद जी की जयंती पर उन्हें शत् शत् नमन..