ईद-ए मिलाद उन नबी जौनपुरे भाग 2
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ईद-ए मिलाद उन नबी जौनपुए भाग 1
वह एक जिस्मफरोश औरत (वेश्या) थी,
उसे एक मर्द मिला जो बहुत ही अमीर आदमी था
वह नेकी करना चाहता था
बहुत बड़ी नेकी
उस मर्द ने जिस्मफरोश औरत का हाथ पकड़ा और उसे इस गंदगी से बाहर निकाल कर बड़ी मोहब्बत से उसके साथ शादी कर ली...
इज्जत दी
घर दिया
हर वह खुशी दी जो हर औरत की ख्वाहिश होती है
फिर कुछ अरसे बाद उसका मर्द एक रिश्वत कांड में पकड़ा गया तो वह उसे जेल में मिलने के लिए गई
और आहिस्ता से बोली
अगर हराम ही खिलाना था तो मेरी कमाई में क्या बुराई थी ???
"मेरे जिस्म को बेचने पर तूने गुनाह कहा,
ख़ुद रिश्वत से कमाया, मगर उसे 'कमाई' कहा
मैंने मजबूरी में बाज़ार को अपना बनाया था,
तूने तो अपने लालच में ईमान तक गंवाया था..
तेरी इज्ज़त नक़ाब में थी, मेरा चेहरा बेनक़ाब था,
पर गुनाह तो दोनों का था, बस तरीक़ा अलग था।
तालिबे दुआ 🤲
आप तमाम को ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद!
साथ ही अदबन अपील है कि कुर्बानी की वीडियो-फोटो सोशल मीडिया पर ना डालें! कुर्बानी आम राह पर न करें! कुर्बानी के मलबे को दफनाएं!साफ सफाई का ख्याल रखें!
शुक्रिया
24/12/2024
16/06/2024
हाय अफसोस साल के 12 महीने में सिर्फ 1 महीना ख़ालिस अल्लाह की इबादत के लिए मिलता है (यू तो 12 महीने ही खालिस अल्लाह की इबादत करना चाहिए) लेकिन इस 1 महीने में भी हमे अल्लाह की रज़ा की फिक्र की बजाए दुनिया की फिक्र लगी रहती है और इसी वजह से 2,3,7,10 दिन की तरावीह का एहतेमाम किया जाने लगा और इसमें भी एक होड़ सी लगी रहती है।
गर दुनिया की फिक्र नही है तो आखिर क्या वजह है जो 29 या 30 दिन की इबादत को अपनी सुविधानुसार एडजस्ट कर लिया और 2,3,7,10 दिन में तरावीह कम्प्लीट करके बाकी दिन आखिर क्या करते है दुनियायवी कामो के अलावा कोई बताये...
अल्लाह हमारे हालो पर रहम फरमाये...😢😢😢
14/01/2024
Maa Baap
takbeer tashreeq kya hai
Allah
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