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PRINCIPLE OF MATHEMATICAL INDUCTION-XI 09/08/2020

for Math lover
class - XI
NCERT Chapter - 4

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PRINCIPLE OF MATHEMATICAL INDUCTION-XI In this video you can learn how to prove a mathematical function by induction method.

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✍️ राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020

हाल ही के केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020’ (National Education Policy- 2020) को मंज़ूरी दी है। नई शिक्षा नीति 34 वर्ष पुरानी ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986’ [National Policy on Education (NPE),1986] को प्रतिस्थापित करेगी।

प्रमुख बिंदु:

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षा की पहुँच, समानता, गुणवत्ता, वहनीय शिक्षा और उत्तरदायित्व जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

नई शिक्षा नीति के निर्माण के लिये जून 2017 में पूर्व इसरो (ISRO) प्रमुख डॉ. के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था, इस समिति ने मई 2019 में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा’ प्रस्तुत किया था।

'राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP), 2020' वर्ष 1968 और वर्ष 1986 के बाद स्वतंत्र भारत की तीसरी शिक्षा नीति होगी।

NEP-2020 के तहत केंद्र व राज्य सरकार के सहयोग से शिक्षा क्षेत्र पर देश की जीडीपी के 6% हिस्से के बराबर निवेश का लक्ष्य रखा गया है।

नई शिक्षा नीति में वर्तमान में सक्रिय 10+2 के शैक्षिक मॉडल के स्थान पर शैक्षिक पाठ्यक्रम को 5+3+3+4 प्रणाली के आधार पर विभाजित करने की बात कही गई है।

तकनीकी शिक्षा, भाषाई बाध्यताओं को दूर करने, दिव्यांग छात्रों के लिये शिक्षा को सुगम बनाने आदि के लिये तकनीकी के प्रयोग को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है।

इस शिक्षा नीति में छात्रों में रचनात्मक सोच, तार्किक निर्णय और नवाचार की भावना को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया है।



MHRD के नाम में परिवर्तन

कैबिनेट द्वारा ‘मानव संसाधन विकास मंत्रालय’ (Ministry of Human Resource Development- MHRD) का नाम बदल कर ‘शिक्षा मंत्रालय’ (Education Ministry) करने को भी मंज़ूरी दी गई है।

NEP-2020 के तहत MHRD का नाम बदलकर ‘शिक्षा मंत्रालय’ करने का उद्देश्य ‘शिक्षा और सीखने (Education and Learning)’ पुनः अधिक ध्यान आकर्षित करना है।

प्रारंभिक शिक्षा:

3 वर्ष से 8 वर्ष की आयु के बच्चों के लिये शैक्षिक पाठ्यक्रम का दो समूहों में विभाजन-

3 वर्ष से 6 वर्ष की आयु के बच्चों के लिये आँगनवाड़ी/बालवाटिका/प्री-स्कूल (Pre-School) के माध्यम से मुफ्त, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा’ (Early Childhood Care and Education- ECCE) की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

6 वर्ष से 8 वर्ष तक के बच्चों को प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-1 और 2 में शिक्षा प्रदान की जाएगी।

प्रारंभिक शिक्षा को बहुस्तरीय खेल और गतिविधि आधारित बनाने को प्राथमिकता दी जाएगी।

ECCE से जुड़ी योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय , महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय व जनजातीय कार्य मंत्रालय के साझा सहयोग से किया जाएगा।

‘बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन’

NEP में MHRD द्वारा ‘बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन’ (National Mission on Foundational Literacy and Numeracy) की स्थापना की मांग की गई है।

राज्य सरकारों द्वारा वर्ष 2025 तक प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-3 तक के सभी बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान प्राप्त करने हेतु इस मिशन के क्रियान्वयन की योजना तैयार की जाएगी।

भाषाई विविधता को बढ़ावा और संरक्षण:

NEP-2020 में कक्षा-5 तक की शिक्षा में मातृभाषा/ स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा को अध्यापन के माध्यम के रूप में अपनाने पर बल दिया गया है, साथ ही इस नीति में मातृभाषा को कक्षा-8 और आगे की शिक्षा के लिये प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।

स्कूली और उच्च शिक्षा में छात्रों के लिये संस्कृत और अन्य प्राचीन भारतीय भाषाओं का विकल्प उपलब्ध होगा परंतु किसी भी छात्र पर भाषा के चुनाव की कोई बाध्यता नहीं होगी।

बधिर छात्रों के लिये राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पाठ्यक्रम सामग्री विकसित की जाएगी तथा भारतीय संकेत भाषा (Indian Sign Language- ISL) को पूरे देश में मानकीकृत किया जाएगा।

NEP-2020 के तहत भारतीय भाषाओं के संरक्षण और विकास के लिये एक ‘भारतीय अनुवाद और व्याख्या संस्थान’ (Indian Institute of Translation and Interpretation- IITI), ‘फारसी, पाली और प्राकृत के लिये राष्ट्रीय संस्थान (या संस्थान)’ [National Institute (or Institutes) for Pali, Persian and Prakrit] स्थापित करने के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में भाषा विभाग को मज़बूत बनाने एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यापन के माध्यम से रूप में मातृभाषा/ स्थानीय भाषा को बढ़ावा दिये जाने का सुझाव दिया है।

पाठ्यक्रम और मूल्यांकन से जुड़े सुझाव:

NEP-2020 में एक ऐसे पाठ्यक्रम और अध्यापन प्रणाली/विधि के विकास पर बल दिया गया है जिसके तहत पाठ्यक्रम के बोझ को कम करते हुए छात्रों में 21वीं सदी के कौशल के विकास, अनुभव आधारित शिक्षण और तार्किक चिंतन को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

इस नीति में प्रस्तावित सुधारों के अनुसार, कला और विज्ञान, व्यावसायिक तथा शैक्षणिक विषयों एवं पाठ्यक्रम व पाठ्येतर गतिविधियों के बीच बहुत अधिक अंतर नहीं होगा।

कक्षा-6 से ही शैक्षिक पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा को शामिल कर दिया जाएगा और इसमें इंटर्नशिप (Internship) की व्यवस्था भी दी जाएगी।

‘राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद’ (National Council of Educational Research and Training- NCERT) द्वारा ‘स्कूली शिक्षा के लिये राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा’ [National Curricular Framework for School Education, (NCFSE, 2020-21) तैयार की जाएगी।

NEP-2020 में छात्रों के सीखने की प्रगति की बेहतर जानकारी हेतु नियमित और रचनात्मक आकलन प्रणाली को अपनाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही इसमें विश्लेषण तथा तार्किक क्षमता एवं सैद्धांतिक स्पष्टता के आकलन को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।

छात्र कक्षा-3, 5 और 8 के स्तर पर स्कूली परीक्षाओं में भाग लेंगे जिन्हें उपयुक्त प्राधिकरण द्वारा संचालित किया जाएगा।

छात्रों के समग्र विकास के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए कक्षा-10 और कक्षा-12 की परीक्षाओं में बदलाव किये जाएंगे। इसमें भविष्य में समेस्टर या बहुविकल्पीय प्रश्न आदि जैसे सुधारों को शामिल किया जा सकता है।

छात्रों की प्रगति के मूल्यांकन के लिये मानक-निर्धारक निकाय के रूप में ‘परख’ (PARAKH) नामक एक नए ‘राष्ट्रीय आकलन केंद्र’ (National Assessment Centre) की स्थापना की जाएगी।

छात्रों की प्रगति के मूल्यांकन तथा छात्रों को अपने भविष्य से जुड़े निर्णय लेने में सहायता प्रदान करने के लिये ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ (Artificial Intelligence- AI) आधारित सॉफ्टवेयर का प्रयोग।

शिक्षण प्रणाली से जुड़े सुधार:

शिक्षकों की नियुक्ति में प्रभावी और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन तथा समय-समय पर लिये गए कार्य-प्रदर्शन आकलन के आधार पर पदोन्नति।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद वर्ष 2022 तक ‘शिक्षकों के लिये राष्ट्रीय व्यावसायिक मानक’ (National Professional Standards for Teachers- NPST) का विकास किया जाएगा।

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा NCERT के परामर्श के आधार पर ‘अध्यापक शिक्षा हेतु राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा’ [National Curriculum Framework for Teacher Education (NCFTE), 2021] का विकास किया जाएगा।

वर्ष 2030 तक अध्यापन के लिये न्यूनतम डिग्री योग्यता 4-वर्षीय एकीकृत बी.एड. डिग्री का होना अनिवार्य किया जाएगा।

उच्च शिक्षा:

NEP-2020 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘सकल नामांकन अनुपात’ (Gross Enrolment Ratio) को 26.3% (वर्ष 2018) से बढ़ाकर 50% तक करने का लक्ष्य रखा गया है, इसके साथ ही देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में 3.5 करोड़ नई सीटों को जोड़ा जाएगा।

NEP-2020 के तहत स्नातक पाठ्यक्रम में महत्त्वपूर्ण सुधार किया गया है, इसके तहत 3 या 4 वर्ष के स्नातक कार्यक्रम में छात्र कई स्तरों पर पाठ्यक्रम को छोड़ सकेंगे और उन्हें उसी के अनुरूप डिग्री या प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा (जैसे- 1 वर्ष के बाद सर्टिफिकेट, 2 वर्षों के बाद एडवांस डिप्लोमा, 3 वर्षों के बाद स्नातक की डिग्री तथा 4 वर्षों के बाद शोध के साथ स्नातक)।

विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों से प्राप्त अंकों या क्रेडिट को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने के लिये एक ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (Academic Bank of Credit) दिया जाएगा, जिससे अलग-अलग संस्थानों में छात्रों के प्रदर्शन के आधार पर उन्हें डिग्री प्रदान की जा सके।

नई शिक्षा नीति के तहत एम.फिल. (M.Phil) कार्यक्रम को समाप्त कर दिया गया है।

भारत उच्च शिक्षा आयोग

चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिये एक एकल निकाय के रूप में भारत उच्च शिक्षा आयोग (Higher Education Commission of India -HECI) का गठन किया जाएगा।

HECI के कार्यों के प्रभावी और प्रदर्शितापूर्ण निष्पादन के लिये चार संस्थानों/निकायों का निर्धारण किया गया है-

विनियमन हेतु- राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामकीय परिषद (National Higher Education Regulatory Council- NHERC)

मानक निर्धारण- सामान्य शिक्षा परिषद (General Education Council- GEC)

वित पोषण- उच्चतर शिक्षा अनुदान परिषद (Higher Education Grants Council-HEGC)

प्रत्यायन- राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (National Accreditation Council- NAC)

महाविद्यालयों की संबद्धता 15 वर्षों में समाप्त हो जाएगी और उन्हें क्रमिक स्वायत्तता प्रदान करने के लिये एक चरणबद्ध प्रणाली की स्थापना की जाएगी।

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#क्या_खून_का_रंग_लाल_ही_होता_है

सबके खून का रंग लाल होता है, अब तक हममें से ज्यादातर यही जानते आए हैं. लेकिन हर खून का रंग लाल नहीं होता. कई जीव-जंतु ऐसे भी हैं, जिनके खून का रंग अलग होता है. ये खून इन पशु-पक्षियों के लिए वही काम करता है, जो हमारे भीतर हीमोग्लोबिन करता है. ऐसा इन खास जीवों में पाए जाने वाले plasma protein की वजह से होता है, ये वही प्रोटीन है जो इंसानों के शरीर में हीमोग्लोबिन के नाम से जाना जाता है. इसी प्रोटीन की वजह से हमारा खून लाल है.

अगर आपसे यह सवाल किया जाए कि क्या आपने कभी इंसानी खून का रंग लाल के अलावा कुछ और देखा है? इस पर आपका स्वाभाविक जवाब होगा, नहीं. लेकिन हम आपसे कहें कि हां, आपने देखा है, तो? जरा अपने हाथ या पांव के पंजों की नसों पर गौर कीजिए, किस रंग का खून दिखता है? नीला या हरा न! अब अगला सवाल. क्या कभी आपने खुद को या किसी और को चोट लगने पर नीले रंग का खून बहते देखा है? इस सवाल का जवाब आप निश्चित रूप से नहीं में देंगे क्योंकि सब जानते हैं कि खून का रंग तो हमेशा लाल होता है. अब सवाल उठता है कि हमारी नीली दिखने वाली रक्त वाहिकाओं में बहने वाली यह चीज क्या है. इसे कुछ इस तरह भी पूछा जा सकता है कि जब हमारी कुछ नसों में नीला खून दिखाई देता है तो बाहर बहने वाला खून हमेशा लाल क्यों होता है?

चलिए, सबसे पहले यह जान लेते हैं कि मनुष्य के खून का रंग एक प्रोटीन - हीमोग्लोबिन के कारण लाल होता है. हीमोग्लोबिन में लाल-रंग के घटक होते हैं जिन्हें हीम कहा जाता है. हीम का काम रक्त प्रवाह के साथ ऑक्सीजन को लाना- ले जाना होता है. जरा गहराई से समझें तो हीम में मौजूद आयरन ऑक्सीजन से क्रिया करता है और इनके मेल से बनने वाला अणु (मॉलेक्यूल) ही फेफड़ों से शरीर के अन्य अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाता है.

अपने सवाल का जवाब अच्छे से समझने के लिए हमें यह पता होना भी जरूरी है कि कोई चीज किसी खास रंग की क्यों नजर आती है. किसी वस्तु का रंग इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस रंग के प्रकाश को सोखती है और किसे परावर्तित करती है. उदाहरण के लिए - अगर कोई वस्तु बैंगनी रंग की दिखती है तो इसका मतलब है कि वह सफेद प्रकाश, जिसमें सात रंग की प्रकाश किरणें मौजूद होती हैं, में से बैंगनी रंग को परावर्तित कर देती है और बाकी रंगों को सोख लेती है. यह बात रासायनिक पदार्थों पर भी लागू होती है. ऑक्सीजन के साथ जुड़ने वाला हीमोग्लोबिन नीले और हरे रंग के प्रकाश को सोख लेता है और लाल-नारंगी रंग के प्रकाश को परावर्तित कर देता है. इसीलिए हमें खून का रंग लाल दिखाई देता है.

अब नीले रंग की नसों की बात करते हैं. अक्सर आपने सुना होगा की शिराओं में बहने वाला वह रक्त जो शरीर के बाकी अंगों से हृदय तक पहुंचता है, नीले रंग का होता है क्योंकि उसमें ऑक्सीजन नहीं होती या वह अशुद्ध होता है. यह एक मिथ है. इस प्रचलित मिथ को गलत ठहराने के साथ-साथ विज्ञान यह भी कहता है मनुष्य का खून कभी नीले रंग का नहीं होता. नीली नजर आने वाली रक्त वाहिकाओं में बहने वाला खून भी लाल रंग का होता है. इसका नीला दिखाई देना एक तरह का ऑप्टिकल इल्यूजन है. दरअसल लाल रंग की तुलना में नीले रंग की प्रकाश किरणें टिश्यू को उतनी गहराई तक नहीं भेद पाती हैं, इसलिए पहले से और ज्यादा परावर्तित हो जाती हैं. जबकि लाल रंग की किरणें अंदर तक जाती हैं और इनका कुछ ही हिस्सा परावर्तित होकर बाहर दिखाई पड़ता है. यही कारण है कि इन वाहिकाओं का रंग हमें लाल के बजाय नीला दिखाई पड़ता है.

इस धरती पर अधिकतर जानवरों का खून लाल रंग का ही होता है, इंसानों से लेकर के स्तनधारी जीव और पक्षी सभी में लाल रंग का ही खून पाया जाता है। पर यह कहना गलत होगा कि धरती पर रहने वाले हर जीव के खून का रंग लाल ही होगा। देखिए अलग अलग रंग के रक्त वाले जीव।

आपने गिरगिटों को तो देखा ही होगा जो कि छिपकली की तरह लगते हैं पर ये खास तरह का गिरगिट है जिसका नाम न्यू गिनिया है और इस गिरगिट का खून हरा होता है. हरे खून की वजह से इसकी मांसपेशियां और जीभ भी हरी होती है।प्रेसिनोहीमा (Prasinohaema) नाम की छिपकली की एक प्रजाति का खून चमकीले हरे रंग का होता है. New Guinea में पाई जाने वाली ये छिपकली एक तरह के ग्रीन बाइल पिगमेंट (biliverdin) के कारण हरे रंग की दिखाई भी देती है. ये बाइल पिंगमेंट वही है, जिसके होने पर इंसानों में पीलिया बीमारी हो जाती है लेकिन इस छिपकली में इसका प्रतिशत 40 गुना तक ज्यादा होने के बाद भी ये काफी स्वस्थ होती है, हालांकि इनका काटना इंसानों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है.

ऑक्टोपस (Octopus) का खून का नीले रंग का होता है। ऑक्टोपस के रक्त में तांबे की मात्रा बहुत ज्यादा होती है जिसके चलते इसका खून नीला हो जाता है।ऑक्टोपस एक ऐसा जानवर है जिसका खून नीला होता है और साथ ही साथ इसके पास तीन दिल भी होते है। ऑक्टोपस के खून में इंसानो की तरह हीमोग्लोबिन नहीं होता बल्कि hemocyanin होता है,जो की एक कॉपर से भरपूर प्रोटीन है जब hemocyanin से ऑक्सीजन की क्रिया होती है तो नीला पदार्थ निकलता है जिसकी बजह से ऑक्टोपस के खून का रंग नीला होता है।आपने कभी न कभी कॉपर के एक तार को आग में डाला होगा या आग के नज़दीक ले गए होंगे ,तो आपने देखा होगा की कुछ नीला रंग की आग निकलती है यह आग का नीला रंग भी कॉपर की ही बजह से है।

क्रोकोडाइल आइसफिश का रक्त रंगहीन और पारदर्शी होता है. रीढ़ की हड्डी वाले सारे जीव-जंतुओं से अलग क्रोकोडाइल आइसफिश (Crocodile Icefish) का खून लाल रंग का नहीं होता और न ही इसमें हीमोग्लोबिन होता है. Antarctica के आसपास गहरे ठंडे समुद्र में पाई जाने वाली इस मछली के खून का रंग पारदर्शी होता है. बेहद ठंडे पानी में रहने वाली इन मछलियों में अगर रेड ब्लड सेल्स हों तो खून तुरंत जम जाएगा. ऐसे में मछलियों के शरीर में लगभग नहीं के बराबर रेड ब्लड सेल्स होती हैं, जिनकी वजह से इनका खून पारदर्शी दिखता है.

सी क्यूकम्बर कहा जाने वाला यह जीव देखने में भले ही हरा लगे लेकिन इसका खून पीले रंग का होता है।इनमें यह रंग वैनेडियम (एक धातु) में स्थित वैनेबीन (प्रोटीन का समूह) की उच्च सांद्रता के कारण होता है।वैनेबीन ऑक्सीजन परिवहन में शामिल नहीं होता है। इस विशिष्ट रंग का कारण यह है कि इन जीवों में अधिकांशतः इंसानों और बड़े जानवरों की तुलना में बिल्कुल अलग तरीके से ऑक्सीजन वहन की प्रक्रिया करते हैं। ये आयरन और ऑक्सीजन को जोड़ने के लिए एक बाध्यकारी एजेंट के रूप में हीमोग्लोबिन के बजाय, हेमोलिम्फ (hemolymph) का उपयोग करते हैं। इनमें यह पदार्थ पूरी तरह से रक्त नहीं है बल्कि एक प्रकार का प्लाज्मा है तथा इंसानों की तरह यह पंप (Blood pumping) भी नहीं हो सकता पर यह जीवित रहने के लिए आवश्यक रसायनों को प्रदान करता है। यह शरीर के हर हिस्से में पाया जाता है तथा स्वतंत्र रूप से बहता है।

पीनट वॉर्म कहे जाने वाले इस कीड़े का रक्त बैंगनी रंग का होता है. ऐसा इनके खून में पाए जाने वाले प्रोटीन hemerythrin की उपस्थिति की वजह से है. इस प्रोटीन का जब ऑक्सीजन से मेल होता है तो उसका रंग बैंगनी हो जाता है, वरना रंग पारदर्शी ही बना रहता है.

01/08/2020

#स्लीपिंग_पैरालिसिस या मन का भ्रम....

क्या आपने कभी महसूस किया है कि आधी रात को अचानक आपकी नींद खुलती है. ऐसा लगता है कि आपके आसपास कोई मौजूद है. आप हिलने की कोशिश करते हैं, लेकिन शरीर का कोई अंग हिला नहीं पाते हैं. डर लगता है, चीखना चाहते हैं, लेकिन आवाज ही नहीं निकलती. ऐसा लगता है, जैसे किसी ने आपको कसकर बांध रखा है, आप जकड़े या जमे हुए हैं.ऐसा कभी आपके साथ भी हुआ है। मुझे आज भी याद है जब भी कभी मुझे बुरा सपना आता था तो अचानक मेरा शरीर जाग उठता है। लेकिन मुझे पता लगता की मेरी आंखे नही खुल पा रहीं। मै आवाज लगाने की कोशिश करता कि कोई आकर मुझे उठा दे। हाथ पैर पर शरीर एक लाश की तरह चुप सुन्न पडा होता था। बुरे सपने की वजह से ऐसा लगता की शायद किसी ने मुझे काबू कर रखा है। मै रो जाता था की अब क्या होगा लेकिन मेरी आंखो से आंसू नही निकलते थे। धड़कन तेज हो जाती थी घबराहट होने लगती थी लेकिन मैं 4-5 मिनट बाद उठ जाता था जो महसूस करता है वो अपनी जिन्दगी मे जीने के लिये लड़ रहा होता है खुद से की मै उठूँगा। उसे पता होता है की कोई भी उसे नही उठा सकता। लेकिन मुझे धीरे धीरे इस चीज़ की आदत हो गयी। कभी कभी ऐसा होता की जैसे मेरी आंख लगी मै फिर से इसी अवस्था में दुबारा आ जाता। डर कभी कम नहीं हुआ। मै मन में हनुमान चालीसा बोलता लेकिन कुछ असर नही होता उस वक्त मै खुद को सबसे हारा हुआ समझता की अब मेरी मदद कोई नही कर सकता। कभी कभी मुझे ऐसा हो जाता है तो मै अपने मुहँ को खोलने की कोशिश करता हूँ। हर कीमत अपनी ताकत लगा देता हूँ की मै उठ जाऊंगा। या कभी कभी इसे अनदेखा कर सो जाता हूँ या कभी कभी बहुत डर जाता हूँ की शायद मैं कभी उठ ही ना सकूं।

मैं नही जानता कि ये क्यों होता है और कैसे होता है और इसे कैसे रोक सकता है पिछले 20 साल से हर महीने एक या दो बार इस चीज से गुजरता हूँ। विज्ञान इसे स्लीप पैरालिसिस कहता हैं। स्लीप पैरालिसिस जो नींद और जागने के बीच वो अवस्था है, जिसमें आपको लकवा मारने जैसा एहसास होता है. ऐसा कुछ सेकेंड से लेकर कुछ मिनटों तक हो सकता है.सभी स्लीप साइकिल के दो हिस्से होते हैं: रैपिड-आई मूवमेंट (REM) और नॉन-रैपिड-आई मूवमेंट स्लीप.पहले भाग नॉन-REM में आप धीरे-धीरे नींद के तीन चरणों से गुजरते हैं. हर स्टेज के साथ आपकी सांसें एक लय में होती जाती हैं और आप नींद में जाने लगते हैं, यहां तक कि शोर में भी.इसके बाद REM स्लीप आती है, जब आप सपने देखते हैं. इस दौरान, ग्लाइसिन नाम का एक न्यूरोट्रांसमीटर आपके शरीर को लकवे के अस्थाई स्टेज में डालने में मदद करता है.REM स्लीप में आपका शरीर अनैच्छिक मांसपेशियों को मूव कर सकता है, जैसे कि सांस लेने के लिए डायाफ्राम, लेकिन आपके हाथ, पैर और दूसरी स्वैच्छिक मांसपेशियों को नहीं. इस वजह से आप सिर्फ सपने देखते हैं, सपने में जो दिख रहा है, उसके मुताबिक कुछ कर नहीं पाते.नींद के REM फेज में हम खुद से किसी भी तरह की कोई मसल एक्टिविटी नहीं कर पाते क्योंकि हमारा दिमाग उस दौरान हमें अस्थाई तौर पर पैरलाइज्ड कर देता है.अगर आप अचानक REM नींद से जागते हैं, तो ग्लाइसिन की मदद से होने वाले पैरालिसिस का प्रभाव जारी रह सकता है, भले ही आप होश में हों. इस दौरान ऐसा हो सकता है कि आप कुछ सेकेंड से कुछ मिनटों तक हिल न पाएं.

कुछ लोगों को स्लीप पैरालिसिस के दौरान कई तरह का भ्रम भी हो सकता है. जैसे किसी की मौजूदगी का एहसास होना.REM स्लीप के दौरान सांस लेने में शामिल मांसपेशियों की गतिविधि में कमी आ जाती है, जो मोटर न्यूरॉन्स में रुकावट की वजह से होता है. स्लीप पैरालिसिस का अनुभव काफी डरावना और कन्फ्यूजिंग हो सकता है, खासकर तब, जब आप आपने कोई बुरी सपना देखा हो.अगर आप बहुत ज्यादा स्ट्रेस में हैं या जिंदगी के बुरे अनुभवों से गुजर रहे हैं, तो आपके स्लीप पैरालिसिस से गुजरने की ज्यादा आशंका होती है. जैसे, पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) वाले लोगों में स्लीप पैरालिसिस ज्यादा देखा जा सकता है.स्लीप पैरालिसिस अपने आप में आपके लिए उतना नुकसानदायक नहीं है. ऐसा बेहद कम होता है कि स्लीप पैरालिसिस का संबंध किसी गहरी मानसिक समस्या से हो. लेकिन बार-बार ऐसा होना नींद की किसी दिक्कत से जुड़ा हो सकता है जैसे नार्कोलेप्सी.दरअसल कोई भी व्यक्ति जब सोता है तब दिमाग शरीर और मन को शक्तिहीन कर देता है ताकि वह आराम कर सकें। ऐसे में कभी-कभी ऐसी स्थिति भी आ जाती है जब आपका दिमाग तो जाग जाता है लेकिन शरीर सोया हुआ रह जाता है। जब आपका दिमाग आपके शरीर से पहले जाग जाए तभी स्लीप पैरालिसिस की स्थिति उत्पन्न होती है। ज्यादातर लोगों में यह कुछ ही देर में अपने आप ठीक भी हो जाता है।

अंततः यही कहना है जो इस चीज से गुजरता है उसे ये किसी बुरे दुःस्वप्न से कम नही लगता जिसका अहसास आसानी से नही जाता।

26/07/2020

क्लास XII का SUNDAY TEST की कॉपी
ANSWER शाम में COMMENT BOX में मिलेंगे

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26/07/2020

क्लास XI के SUNDAY TEST कॉपी
जबाब शाम में COMMENT BOX में मिलेंगे

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