06/02/2021
क्या आप एक चाय प्रेमी हैं? यदि हां, तो यह लेख आप के लिए है। भारत के हर घर में सुबह का स्वागत, गाढ़े, मीठे और सौंधी सी खुशबू वाले चाय से की जाती है, और दिन की विदाई भी चाय से होती है। लेकिन भारत में चाय कोई साधारण पेय नहीं है। हर नुक्कड़ चौराहे पर देश-विदेश की राजनीति के साथ-साथ पड़ोस के गॉसिप्स पर गहन चर्चा भी चाय की चुस्की के साथ ही चलती है। शायद यही वजह है कि हमारा देश प्रतिवर्ष सर्वाधिक 837000 टन चाय की खपत करता है।
क्या आप जानते हैं? भारत में चाय बौद्ध धर्म की देन हैं। एक बौद्ध कथा के अनुसार जब एक भारतीय भिक्षुक चीन की यात्रा पर निकले तो यात्रा के क्रम में वो म्यांमार में रुके, उन्होंने देखा कि वहां के लोग एक रिचुअल के दौरान एक प्रकार की पत्ती को चबाते हैं, उन्होंने भी सांस्कृतिक अनुभव के लिए उन पत्तियों को चबाया जिससे उन्हें काफी ताज़गी का अनुभव हुआ, अतः वे उस पौधे को भारत ले आये। वह पौधा चायपत्ती का था और माना जाता है कि वह भारतीय भिक्षुक मर्शियल आर्ट के जन्म दाता बोधिधर्मन थे।
कुछ कथाओं के अनुसार सम्राट हर्षवर्धन भी आलस्य को दूर करने के लिए अपने दरबारियों को चाय वितरित किया करते थे।
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