01/04/2022
मैट्रिक परीक्षा (बिहार बोर्ड) में सफलता पूर्वक उत्तीर्ण सभी बालक-बालिकाओं को बहुत-बहुत बधाई और आशीर्वाद।मैं वाणी की देवी माँ सरस्वती से आपसबों के सर्वोत्तम शैक्षणिक जीवन की कामना करता हूँ।04 अप्रैल,2022(सोमवार) से 11th का नया बैच शुरु हो रहा है।आपसभी बच्चे अंग्रेजी में अच्छी जानकारी के लिए जरूर अपना एडमिशन करवाएं। Sir Teacher,jamui #
26/03/2022
12th(बिहार बोर्ड)के वैसे विद्यार्थी जो सेंट-अप एग्जाम तो पास हैं। लेकिन किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे और वैसे विद्यार्थी जो मुख्य परीक्षा में 02 विषय में फेल हैं।वे कंपार्टमेंटल की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।जिसका फ़ॉर्म 26 मार्च से 30 मार्च तक ऑनलाईन माध्यम से भरा जाएगा Sir teacher Education,Jamui #
22/03/2022
आपसभी बिहारी बहनों-भाइयों को ''बिहार दिवस''की अनेकानेक शुभकामनाएं।आईये हमलोग जातिगत व धार्मिक भेदभाव को मिटाकर एक नया बिहार और शिक्षित बिहार बनाते हैं Sir teacher
18/03/2022
आपसभी भारतवासी सनातन धर्मावलंवी बहनों-भइयों को अपनापन व भाईचारे के पावन पर्व होली की अनेकानेक शुभकामनाएं।मैं आपसभी के उत्तम स्वास्थ्य और सफल जीवन की कामना करता हूँ। # Laddu Sir
18/03/2022
बिहार बोर्ड 12th की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए सभी बच्चों को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं और आशीर्वाद।मैं आपसबों के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ।आप निरंतर प्रगतिपथ पर अग्रसर रहें।यही मंगलकामना है by Laddu Sir #
05/01/2022
आपसभी शिक्षाप्रेमी बहनों-भाइयों एवं विद्यार्थियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
17/06/2021
11th और 12th के लिए नामांकन जारी ।
12वीं बोर्ड में इस वर्ष रिकॉर्ड 800 छात्र प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण...
तो देर ना करें जल्द से जल्द नामांकन कराइए...
16/02/2021
"धियो विश्व विराजती।"
"She is shining as the embodiment of Universal Wisdom"
Happy Vasant Panchami....
06/02/2021
क्या आप एक चाय प्रेमी हैं? यदि हां, तो यह लेख आप के लिए है। भारत के हर घर में सुबह का स्वागत, गाढ़े, मीठे और सौंधी सी खुशबू वाले चाय से की जाती है, और दिन की विदाई भी चाय से होती है। लेकिन भारत में चाय कोई साधारण पेय नहीं है। हर नुक्कड़ चौराहे पर देश-विदेश की राजनीति के साथ-साथ पड़ोस के गॉसिप्स पर गहन चर्चा भी चाय की चुस्की के साथ ही चलती है। शायद यही वजह है कि हमारा देश प्रतिवर्ष सर्वाधिक 837000 टन चाय की खपत करता है।
क्या आप जानते हैं? भारत में चाय बौद्ध धर्म की देन हैं। एक बौद्ध कथा के अनुसार जब एक भारतीय भिक्षुक चीन की यात्रा पर निकले तो यात्रा के क्रम में वो म्यांमार में रुके, उन्होंने देखा कि वहां के लोग एक रिचुअल के दौरान एक प्रकार की पत्ती को चबाते हैं, उन्होंने भी सांस्कृतिक अनुभव के लिए उन पत्तियों को चबाया जिससे उन्हें काफी ताज़गी का अनुभव हुआ, अतः वे उस पौधे को भारत ले आये। वह पौधा चायपत्ती का था और माना जाता है कि वह भारतीय भिक्षुक मर्शियल आर्ट के जन्म दाता बोधिधर्मन थे।
कुछ कथाओं के अनुसार सम्राट हर्षवर्धन भी आलस्य को दूर करने के लिए अपने दरबारियों को चाय वितरित किया करते थे।
#चाय
18/01/2021
Impartial Education 5 साल शानदार...
10/01/2021
आज हम एक सवतंत्र, संप्रभु और सशक्त भारत में रह रहे हैं, यह भारत हमें बड़ी कठिनाईयों से प्राप्त हुआ है। सैकड़ों वर्षों के संघर्ष और बलिदान का नतीजा है ये स्वतंत्र भारत, कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया मातृ भूमि के स्वाभिमान के लिए। उनमे से ही एक थे बिहार के जमुई जिला स्थित लछुआर में जन्मे महाकवि शचिश।
मानवीय करुणा और संवेदनाओ में जीने वाले महाकवि शचीश को राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा अपने पिता स्व0 शिवनंदन मिश्र से मिली थी जो स्वयं भी एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा 1 वर्ष के लिए कठोर कारावास में डाल दिए गए थे। गांधी जी के असहयोग आंदोलन में इन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। उस समय तरुण शचीश मात्र 16 वर्ष के थे। देश की विषम परिस्थिति का गहरा असर हुआ तरुण शचीश के मन मे । कूद पड़े स्वतंत्रता आंदोलन में। देश प्रेम से ओतप्रोत और राष्ट्रीय भावना से प्रशक्त इनकी कविताओं से युवा वर्ग आंदोलित होते थे और राष्ट्र के स्वाभिमान के लिए मर मिटने की प्रेरणा मिलती थी। इनकी एक कविता के लिए अंग्रेजी हुकूमत ने इन्हें भी 8 महीने कठौर कारावास की सजा दी आजादी के बाद के वर्षों में महाकवि शचीश में मानवीय मूल्यों और इसकी मर्यादाओ को रेखांकित करती हुई अनेक काव्यों की रचना की।
जब जब राष्ट्र पर संकट आया कवि शचीश ने अपने दायित्व का निर्वहन किया। 1962 में भारत चीन युद्ध के समय इन्होंने अपनी काव्य रचनाओ से लोगो को राष्ट्रीय दायित्व का बोध कराया। वीर सपूतों की हौसला अफजाई की और शहीदों को मार्मिक श्रद्धांजलि दी।सरस्वती के साधना शिखर पुरुष महाकवि शचीश वेद पुराण कर्मकांड ज्योतिष और आयुर्वेद के मर्मज्ञ विद्वान थे। किसी भी वेद की ऋचाएं हों श्री मद्भागवत और गीता आदि के कोई श्लोक हो इन्हें कंठस्थ थी। आप कही से भी प्रारंभ करें वे उसका अंत कर देते थे। साहित्य के अतिरिक्त संगीत और कला के भी अच्छे जानकार थे। इन सारी विशेषताओं के बाद भी सादगी और विनम्रता और सहजता की साक्षात प्रतिमूर्ति थे महाकवि शचीश।
यह दुःखद है की आज हम ऐसे महापुरुष को भूलते जा रहे हैं, मानों हमारी संवेदनाये मर चुकी हैं और हमारा समाज एहसान फरामोश हो चूका हैं।