30/01/2020
सरस्वती वन्दना :
कुन्देन्दु देवी सरस्वती को समर्पित बहुत ही प्रसिद्ध स्तुति है जो सरस्वती स्तोत्रम का एक अंश है। इस सरस्वती स्तुति का पाठ बसंत पंचमी के पावन दिन पर सरस्वती पूजा के दौरान किया जाता है।
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
07/05/2019
#दोस्ती👬 कभी ख़ास लोगों से नहीं होती, #जिनसे हो जाती है वही लोग #ज़िन्दगी में #ख़ास 👲बन जाते है ! Love u My Friend...
31/03/2016
's Sis receptation @ sanatan samajh
09/10/2015
कुछ रास्ते हम चलते नही थकते, कुच पल रुकाये नही रुकते,
याद बन गया हर वो लम्हा, स्कूल के दिन वापस नही मिलते....
वो स्कूल का ग्राउंड, वो सी-सो हमारा,
आज भी याद है, वो क्लास रूम हमारा...
वो पेन्सील के लिये लढना झगडना, दोस्तो का वो रूठना मनाना,
बर्थडे के दिन नयी ड्रेस पेहेंना, हर पल में बस खुशिया मनाना...
होमेवोर्क पुरा हो तो फस्ट बेंच के लिये झगडना,
वर्ना बुक भूलने के बहाने बनाना...
प्ले अवर का वो सबसे बडा इंतजार, और उसका चुटकियो में निकल जाना,
ऑटो में बैठ कर फिर, बोर्नविटा के खयालो में खो जाना....
वो जितना हारना, वो बालों को खिचना, याद है मुझे, हर पल वो सुहाना...
वो छुट्टी में हमारा, ड्रोइंग् क्लास लगाना, वो बटरफ्लाय वो गुलदस्ता बनाना, वो विडीओ गेम हमारा, वो ताश का घर बनाना...
वो घर टूट गया, वो बचपन बीत गया, बोहोत सारी प्यारी प्यारी यादे दे गया,
वो बचपन मेरा चुपके से चला गया..... -
09/10/2015
खामोशी के पन्नो पर बचपन की याद लिख दे ,
इन अनसुनी राहों पर आज कोई फ़रियाद लिख दे .
वो कोमल सी निष्पाप हँसी , वो खिलखिलाता सा मन ,
ना जाने इन यादों में , कैसे खो गया बचपन !
पलट कर देख, वही महका समां है ,
यादों की करवटों में झूमता जहां हैं .
बचपन की डोर ने जाने कितने रिश्ते हैं बांधे ,
प्यार से , मासूम गांठें हैं बाँधीं .
आज़ाद था मन , आज़ाद थे हम ,
दुःख , पीड़ा , ईर्ष्या , द्वेष , कहाँ जाने थे हम .
दोस्तों की बातें दिल की नजदीकियां बन जाती थीं ,
आपसी तकरार जीवन की नवनिधि बन जाती थी .
क्या थे वो दिन बस यूँ ही गुज़र गए ,
गुमनाम इन राहों में , जाने हम कब बदल गए !
यादों का संचार है,
जिन पर हमें अभिमान है .
इन यादों को आज मेरा सलाम है ,
जिन यादों में डूबता ये जहां हैं.